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भारत और गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत: शिक्षा मंत्री की बात से सहमत इतिहासकार
जयपुर राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने मंगलवार को कहा था कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत अइजक न्यूटन ने नहीं बल्कि भारतीय गणितज्ञ और खगोल विज्ञानी ब्रह्मगुप्त ने दिया था। भले ही बहुत से लोग उनकी बात से सहमत न हो, कई इतिहासकारों का भी मानना है कि उस समय के सिक्कों, हस्तलिपियों और किताबों से मालूम पड़ता है कि देवनानी का दावा खोखला नहीं है। राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट केजी शर्मा ने ब्रह्मगुप्त की किताब ब्रह्मस्फुटसिद्धांत एक श्लोक का जिक्र करते हुए बताया है- 'कोई चीज धरती की ओर गिरती है क्योंकि यह धरती की प्रकृति है कि वह चीजों को आकर्षित करती है, जैसे पानी की प्रकृति है बहना।' इससे पता चलता है ब्रह्मगुप्त की गुरुत्वाकर्षण की समझ के बारे में पता चलता है। बाद में इसे विस्तार से भास्कर (2) ने अपनी किताब सूर्य सिद्धांत में बताया है। शर्मा ने बताया कि अरब में खगोलशास्त्र काफी हद तक ब्रह्मगुप्त की किताबों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक खलीफ-अल-मंसूर ने ब्रह्मगुप्त की किताबों का अनुवाद किया था। विश्वविद्यालय के ही संग्रहालय और पुरात्तव विभाग के सुपरिंटेंडेंट जफरुल्लाह खान ने कहा है कि कई हस्तलिपियों से भी यह पता चलता है कि ब्रह्मगुप्त ने इस क्षेत्र में शोध किया था। उधर, देवनानी ने भी उनके दावे पर प्रतिक्रिया देने से पहले लोगों से ब्रह्मगुप्त की किताबें पढ़ने की अपील की है। उन्होंने कहा, '(लोगों को) ऐसा लग रहा है कि मैंने मनगढ़ंत बयान दिया है। मैं अपने बयान के बारे में कुछ नहीं कहूंगा बल्कि उस पर हैरान होने वाले और अविश्वास जताने वाले लोगों से अपील करूंगा कि पहले ब्रह्मगुप्त की किताबें पढ़ें या उन पर आज के वैज्ञानिकों द्वारा उन पर किए गए शोध पढ़ें।'

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