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राजस्थान सरकार देगी 3500 रुपया बेरोजगारी भत्ता, कहां से आएगा इतना पैसा
जयपुर, 01 फरवरी 2019,लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है. जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ उद्घाटन के कार्यक्रम में अशोक गहलोत ने कहा कि घोषणापत्र में बेरोजगारों से किया हुआ वादा कांग्रेस पूरा करेगी और राज्य के सभी बेरोजगारों को 2 साल तक 3500 रुपए बेरोजगारी भत्ते के रूप में दिया जाएगा. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर सभी बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है तो इसके लिए इतना पैसा कहां से आएगा . 2011 के जनगणना के अनुसार राजस्थान में 6.85 करोड़ की आबादी है जिसमें से 33 लाख लोग बेरोजगार हैं. इनमें से 55 परसेंट 25 साल के कम के आयु के हैं. ऐसे में अगर जनगणना के आधार पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है तो हर महीने राज्य सरकार को करीब 150 करोड़ रुपए की जरूरत होगी. हालांकि कहा जा रहा है कि फिलहाल राजस्थान सरकार उन बेरोजगारों को ही बेरोजगारी भत्ता देगी जिन्होंने रोजगार दफ्तर में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. राजस्थान के रोजगार विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो फिलहाल राज्य में 10.64 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं. अगर इनको बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है तो राजस्थान सरकार को हर महीने 372 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी. फिलहाल रोजगार विभाग के पास बेरोजगारी भत्ता बांटने के लिए केवल 25 करोड़ रुपए का बजट है. ऐसे में सरकार हर महीने 372 करोड़ रुपए कहां से लेकर आएगी. यह बड़ा सवाल बना हुआ है. रोजगार विभाग के आंकड़ों पर ध्यान दें तो 2016 तक राज्य में 5 लाख 66 हजार 644 बेरोजगार थे. साल 2017 में इनकी संख्या में 4 लाख 88 हजार 530 का इजाफा हो गया और उसके बाद इनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. अब इनकी संख्या 10 लाख 64 हजार 744 हो गई है. इसकी एक बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि राजनीतिक पार्टियों ने बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान किया था. बीजेपी ने तो कांग्रेस से पहले ही सभी बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद लोगों ने रोजगार दफ्तर में रजिस्ट्रेशन करा लिए. 1064 744 बेरोजगारों को हर महीने 3 अरब 72 करोड़ 66 लाख 4 हजार की जरूरत पड़ेगी. इतने ज्यादा पैसे का इंतजाम करना आसान नहीं है. राज्य में फिलहाल 600 रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है जिसमें से भत्ता स्नातक बेरोजगारों को 2 साल तक दिया जाता है. पिछले सालों में केवल 89 हजार 978 बेरोजगारों ने ही इसका लाभ उठाया था. राजस्थान सरकार के पिछले बजट पर ध्यान दें तो 2016 -17 में 28.75 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था जिसमें से 18. 6 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए. 2017-18 में 24.6 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था लेकिन 24.9 करोड़ रुपए खर्च हुए. 2018-19 में 25 करोड़ रुपए का बजट मांगा था जिसका हिसाब अभी तक नहीं आ पाया है. कहा जाता है कि बेरोजगारी को कम करने के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद जरूरी है लेकिन अगर राजस्थान सरकार के आंकड़ों को देखें तो 2014 से 17 तक 189.81 करोड़ खर्च करके 3 लाख 56 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन केवल 1 लाख 74 हजार 200 लोगों को ही प्रशिक्षण मिला. इनमें भी 93 हजार 533 लोगों के रोजगार का लक्ष्य रखा गया था लेकिन 5 महीने पहले पेश हुई कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राजस्थान सरकार ने 62 हजार 544 हजार लोगों को रोजगार देना बताया है मगर जमीनी हकीकत यह है कि 26000 लोग ही रोजगार पाए सामने आए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि कि राजस्थान सरकार अगर बेरोजगारी भत्ता देना शुरू करती है तो इस तरह के प्रावधान रखे जा सकते हैं जिसमें 18 से 35 साल के परिवार के एक सदस्य को 2 साल तक 3500 रुपए दिए जाएं. लेकिन ऐसे परिवार की आय ढाई लाख रुपए सलाना से कम हो. नेहरू युवा केंद्र या एनएसएस में स्वैच्छिक सेवा करे. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन शुल्क माफ हो, यात्रा शुल्क माफ हो और इनके बदले बेरोजगारी भत्ता के पैसों का समायोजन हो.

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