taaja khabar....पाकिस्तान को अमेरिका की चेतावनी- अब भारत पर हमला हुआ तो 'बहुत मुश्किल' हो जाएगी ...नहीं रहे 1971 युद्ध के हीरो, रखी थी बांग्लादेश नौसेना की बुनियाद......मध्य प्रदेश: सट्टा बाजार में फिर से 'मोदी सरकार...J&K: होली पर पाकिस्तान ने फिर तोड़ा सीजफायर, एक जवान शहीद, सोपोर में पुलिस टीम पर आतंकी हमला...लोकसभा चुनाव: बीजेपी की पहली लिस्ट के 250 नाम फाइनल, आडवाणी, जोशी का कटेगा टिकट?....प्लास्टिक सर्जरी से वैनुआटु की नागरिकता तक, नीरव ने यूं की बचने की कोशिश...हिंद-प्रशांत क्षेत्र: चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की काट, इंडोनेशिया में बंदरगाह बना रहा भारत...समझौता ब्लास्ट में सभी आरोपी बरी होने पर भड़का पाकिस्तान, भारत ने दिया जवाब ...राहुल गांधी बोले- हम नहीं पारित होने देंगे नागरिकता संशोधन विधेयक ...
कांग्रेस ने AAP से नहीं किया गठबंधन, विधानसभा चुनावों पर है नजर
नई दिल्ली लोकसभा चुनावों में दिल्ली की 7 सीटों पर आम आदमी पार्टी से गठबंधन की संभावना को कांग्रेस ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। लोकसभा चुनावों के साथ 2020 में होनेवाले दिल्ली विधानसभा और आगे अन्य राज्य चुनावों के लिहाज से यह संकेत अहम है। दिल्ली कांग्रेस चीफ शीला दीक्षित की आप और दिल्ली के सीएम केजरीवाल से नाराजगी कोई छुपी बात नहीं है। शीला दीक्षित को विधानसभा चुनावों में (2013) हराकर ही केजरीवाल दिल्ली की सत्ता पर पहली बार काबिज हुए थे। हालांकि, आम आदमी पार्टी के लिए भी ये 7 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के साथ गठबंधन एक बहुत रिस्क वाला समझौता था। दिल्ली के साथ पंजाब में भी आम आदमी पार्टी को इस गठबंधन की कीमत चुकानी पड़ सकती थी। 1984 सिख दंगों से सर्वाधिक प्रभावित रहे इन दो राज्यों में आम आदमी पार्टी का राजनीतिक बेस मजबूत है। हालांकि, दिल्ली लोकसभा और विधानसभा में कांग्रेस की सीटों की संख्या 0 है, फिर भी कांग्रेस ने आप से गठबंधन में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कांग्रेस के इस कदम के पीछे बड़े राजनीतिक संकेत हैं। कांग्रेस की राजनीतिक महत्वाकांक्षा में आप से गठबंधन बाधा आप के साथ गठबंधन में जाने का मतलब कांग्रेस के लिए था कि सीट शेयरिंग फॉर्म्युले पर काम किया जाए। दिल्ली में विधानसभा की 7 सीटें हैं और इस आधार पर 50:50 फॉर्म्युला काम नहीं कर सकता था। ऐसी परिस्थिति में किसी एक पार्टी को सीनियर पार्टनर के तौर पर अधिक सीटें मिलतीं। कांग्रेस किसी भी हाल में गठबंधन में जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार नहीं थी। दूसरी तरफ कांग्रेस के पास खोने के लिए भी कुछ खास नहीं है क्योंकि लोकसभा और विधानसभा दोनों में ही उसकी शून्य सीटें हैं। आप के साथ गठबंधन का अर्थ कांग्रेस के लिए आनेवाले विधानसभा चुनावों में अपने अस्तित्व की भी लड़ाई है। कांग्रेस ने 20 साल में 15 साल यहां राज किया है और सत्ता में वापसी के लिए बेकरार है। उत्तर प्रदेश की तरह दिल्ली में भी विधानसभा चुनावों पर फोकस कांग्रेस की आतंरिक राजनीति भी इसी ओर संकेत कर रही है कि 2019 के लोकसभा चुनावों से आगे बढ़कर पार्टी विधानसभा चुनावों पर फोकस कर रही है। प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भले ही माना गया हो, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी की नजर 2022 में होनेवाले विधानसभा चुनावों पर ही है। हालांकि, प्रियंका ने इससे पहले प्रदेश में 2012 और 2017 में भी चुनाव प्रचार किया था, लेकिन उनके प्रचार का कोई सकारात्मक असर वोटों में नजर नहीं आया। कुछ अतिउत्साही लोग तो यह भी कह रहे हैं कि प्रियंका 2022 में पार्टी का सीएम फेस हो सकती हैं। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस को एसपी-बीएसपी महागठबंधन में जगह नहीं मिल सकी। उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाशने में जुटी है कांग्रेस महागठबंधन में भाव नहीं मिलने के कारण कांग्रेस की मजबूरी है कि वह कभी पार्टी का मजबूत गढ़ रहे उत्तर प्रदेश में अपने दम पर पैर जमाए। इस प्रदेश में दशकों तक (1984 तक) कांग्रेस का एकछत्र राज्य था। 1984 में तो पार्टी ने तत्कालीन संयुक्त उत्तर प्रदेश में 85 से 83 सीटें जीती थीं। हालांकि, 1998 में स्थिति इतनी खराब हो गई कि पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। 2014 में भी नजारा ऐसा ही रहा और पार्टी सिर्फ 2 सीटों तक सिमट गई। पैकेज डील पर फोकस कर रही हैं पार्टियां राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि कांग्रेस इस वक्त सिर्फ लोकसभा चुनावों को ही ध्यान में नहीं रख रही है। 2019 आम चुनावों से आगे पार्टी विधानसभा चुनावों पर भी पैकेज डील की तरह ही फोकस कर रही है। हालांकि, अगर बीजेपी के गठबंधन फॉर्म्युले को देखें तो भी यह पैटर्न नजर आता है कि लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनावों के लिए भी समझौता साथ ही हो रहा है। महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना के साथ लोकसभा ही नहीं आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी सीट शेयरिंग पर समझौता कर लिया है। इसी तरह तमिलनाडु में भी बीजेपी ने एआईडीएमके के साथ 21 विधानसभा सीटों का समझौता किया है। अन्य सहयोगी पार्टी पीएमके ने भी अपने लिए एक राज्यसभा सीट सुरक्षित कर ली है। कहने का सीधा अर्थ यह है कि कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों की सोच चुनाव तैयारियों को लेकर फिलहाल तो एक जैसी ही दिख रही है।

Top News

http://www.hitwebcounter.com/