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दिल्ली में बाहर के मरीजों को इलाज मिले या नहीं, HC करेगा फैसला
नई दिल्‍ली, जीटीबी अस्पताल में सिर्फ दिल्लीवासियों को इलाज देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी किए गए सर्कुलर को सीधे- सीधे जीने के अधिकार (आर्टिकल 21) और समानता के अधिकार (आर्टिकल 14) का उल्लंघन बताया है. क्‍या कहा हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप मेडिकल सेवाओं के लिए मरीजों में पक्षपात नहीं कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि ये गरीब लोग हैं. इनको इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों से ही मिल पाती है. अगर सरकार उन्हें सुविधा देने से इंकार कर देगी तो वैसे लोग कहां जाएंगे. एक आंकड़े के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब लोगों की तादाद 70 फ़ीसदी के आसपास है. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज गरीब तबके से ही हैं. दिल्ली सरकार ने रखा अपना पक्ष हालांकि सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके पास फंड की कमी है. इसीलिए वह दिल्ली के लोगों को ही इलाज में वरीयता देना चाहते हैं. सरकार का मानना था कि उनके सर्कुलर की वजह से दिल्ली के अस्पतालों में बड़ी भीड़ को भी कम करने में आसानी होगी. अपने पक्ष में दिल्ली सरकार ने कहा कि बंगाल सरकार भी ऐसा कर रही है. वहीं इस दलील पर याचिकाकर्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही बंगाल सरकार पर ऐसा करने के लिए जुर्माना लगा चुका है और फिलहाल इस तरह का नियम बंगाल में नहीं है. सर्कुलर का नुकसान मरीजों को याचिका दायर करने वाले वकील अशोक अग्रवाल का कहना था कि यह सर्कुलर राजनीति से प्रेरित है. इसका सीधा नुकसान मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. देश में कोई भी सरकार, किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए मरीज को मना नहीं कर सकती है. यह संविधान के खिलाफ है. हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है. दिल्ली हाईकोर्ट से आने वाले फैसले से ये तय होगा कि राज्य सरकार का यह सर्कुलर अब आगे मान्य रहेगा या फिर हाईकोर्ट इसे रद्द करेगी.

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