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भारतीय संविधान में देश के सभी नागरिकों के लिए समानता का अधिकार है,विदेशी मुसलमानों के लिए नहीं ,जो स्वेच्छा से पाकिस्तान गए वे विदेशी की श्रेणी में हैं आते

caa, एनपीआर एनआरसी को लेकर देश में बवाल मचा है।क्या वास्तव में ये भारतीय मुसलमानों के समानता के अधिकार का हनन करते हैं तो इसका सीधा जवाब है नहीं और यही वजह है कि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों और अपने आपको भारतीय मुसलमानों का नुमाइंदा माननेवाले स्वयंभू मुस्लिम नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल करने के बावजूद निर्णय का इंतजार करने के बजाय देश को आग में झोंकने का काम किया ।ये जानते हैं कि उन्हें राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की तरह caa के मामले में भी छाती पीटने के अलावा कुछ हासिल होने वाला नहीं इसलिए मुस्लिम वोटों को अपने पाले में डालने और उनका मसीहा बनने की होड़ में सब पूरी ताकत के साथ भ्रम फैला और उन्हें सड़कों पर लाने में जुटे हैं।याद करें किस तरह से सांसद में कांग्रेस और विपक्षी दलों के वकील नेता caa को संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लघंन और मुसलमानों के अधिकारों का हनन बता रहे थे।टीवी चैनल की डिबेट में caa की खिलाफत कर रहे हैं पर आपको सिब्बल,सिंघवी जैसे सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील टीवी पर इसे समानता के अधिकार के हनन बताते हुए नहीं दिख रहे जबकि कांग्रेस मरते दम तक इसके विरोध की बात कर रही है।साफ है कि इन बड़े वकीलों को पता है कि एक राजनीतिक दल के नेता के रूप में भले ही इसके समानता के अधिकार के हनन का स्यापा कर लें लेकिन हकीकत में यह कहीं भी संविधान के वर्णित अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता।भारतीय संविधान देश के अधिकारों की रक्षा की बात करता है विदेशी मुसलमानों की नहीं और इसीलिए एकीकृत भारत में बंटवारे के बाद जब कई हिन्दू और सिख परिवार किन्हीं कारणों से भारत नहीं आ पाए और बंटवारे के बाद बने पाकिस्तान में रह गए उनके अधिकारों की रक्षा की बात तो की गई ,उनके कभी भी भारत आने पर उन्हें भारत की नागरिकता की बात तो की गई लेकिन जो मुसलमान एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने और उसका नागरिक बनने के लिए पाकिस्तान गए उनके अधिकारों की बात कहीं नहीं की गई।भारतीय संविधान ऐसे मुस्लिमों को किसी तरह के अधिकार की बात नहीं करता जो अलग राष्ट्र की मांग के साथ पाकिस्तान चले गए थे इसलिए ये मुसलमानों के समानता के अधिकारों का किसी तरह से उल्लंघन नहीं वरन उन भारतीयों के अधिकारों की रक्षा करता है जो पाकिस्तान को मुस्लिम राष्ट्र बनाने नहीं किसी मज़बूरी में वहां रह गए और अल्पसंख्यक बन गए।याद करें नेहरू लियाकत समझौते को ।इस समझोते में दोनों देशों के अल्पसंख्यकों के संरक्षण की बात की गई थी कहीं भी पाकिस्तानी मुसलमानों के संरक्षण की बात नहीं है।दोनों देशों में अपने यहां अल्पसंख्यकों को समान अधिकार देने ,उनके साथ समानता का व्यवहार करने और उनके हर अधिकारों की रक्षा करने,धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करने का समझौता किया गया था।उस समय के एकीकृत पाक में अल्पसंख्यक कौन थे हिन्दू, सिख, बुद्ध,पारसी ,जैन और ईसाई कहीं भी भारत से आए मुसलमानों को अल्पसंख्यक नहीं माना गया था और न ही उनके हितों की रक्षा की बात की गई थी और भारत में अल्पसंख्यक के रूप में मुसलमानों के साथ समान व्यवहार और उनके हितों की संरक्षण की बात की गई थी।इसके अलावा बंटवारे के समय पाकिस्तान रह गए हिन्दू, सिख,जैन बुद्ध की बात समय समय पर की जाती रही लेकिन खलीफा राज की स्थापना के लिए पाकिस्तान चले गए मुसलमानों के हितों की बात नहीं की गई और न ही ऐसे मुसलमानों को नेहरू लियाकत समझौते में अल्पसंख्यक मान उनके हितों की रक्षा की बात शामिल की गई।क्योंकि पाकिस्तान गए मुसलमानों को भले ही मुजाहिद्दीन माना गया हो उन्हें अंगीकार मुसलमानों के रूप में किया गया था ,अल्पसंख्यक के रूप में नहीं।इसलिए caa न तो भारतीय कहे जाने वाले किसी मुसलमान के साथ भेदभाव करता है और न ही समानता के अधिकार का किसी तरह से हनन करता है ।यही वजह है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने कोर्ट के निर्णय का इंतजार करने बजाय अधिक से अधिक मुसलमानों को अपने अपने पाले में डालने की होड़ में caa को मुसलमानों के साथ भेदभाव और समानता के अधिकारों का भ्रम फैला धर्म के नाम पर मुसलमानों को सड़कों पर उतार दिया जबकि ये अच्छी तरह से जानते हैं कि कोर्ट का निर्णय आते ही उनकी सारी पोल खुल जाएगी पर तब तक हिन्दू मुसलमानों के बीच की खाई लंबी हो चुकी होगी।देश के सभी लोगों को सड़कों पर उतरने के बजाय कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।हालांकि मैं जानता हूं कि जो लोग राम मंदिर पर आए निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण और पक्षपाती बता रहे थे,caa पर आने वाले निर्णय को भी ऐसा ही बताएंगे क्योंकि यह किसी भारतीय मुसलमान के साथ न तो भेदभाव करता है और न ही समानता के अधिकार का हनन ।यह केवल तीन इस्लामिक देशों के अल्पसंख्यकों जो मूल रूप से भारतीय ही हैं और लंबे समय से देश में रह रहे हैं को संरक्षण का काम कर रहा है।मदन अरोड़ा

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