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किसानों का कर्ज होगा माफ पर गुणा भाग के साथ
कांग्रेस के भगत कर्ज माफी को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत पोस्ट डाल रहे हैं कि देखो एक दिन में कर्ज माफ कर दिया।लेकिन ये नहीं बता रहे कि इसमें असली लोच्चा क्या आने वाला है।मेरा एक दावा है कि ये कर्ज माफी जब होंगी तो तीनों राज्यों के किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस करेंगे और फिर सड़कों पर उतर कांग्रेस का जीना हराम कर देंगे।अभी सिर्फ घोषणाएं कर कर्ज माफी पर वाहवाही लूटी जाएगी फिर फरवरी मार्च तक प्रिक्रिया चालू है का खेल होगा और उसके बाद आचार संहिता का बहाना।जब पूरा मामला सिरे चढ़ेगा तो किसानों के हाथों में झुनझुना होगा।अब बात असल मुद्दे पर ।बात राजस्थान की, राज्य में 58,85,961 किसानों का कुल सम्पूर्ण कर्ज है,99,995 करोड़ रुपये।इसमें से अल्पकालीन कर्ज जिसकी अब बात की जाना शुरू हो चुका है के दायरे में कुल किसान 47,02123 आते हैं जिन पर अल्पकालीन कर्ज है,77,668 करोड़ रुपये। 58,85,961 किसानों में से 33 लाख किसानों ने व्यवसायिक बैंकों से लोन ले रखा है, जो सरकारों से अग्रिम बजट राशि जमा करवाये बिना माफ होना संभव नहीं है और राज्य सरकारें इसके लिए बैंकों से 4से5 साल का समय बैंकों से मांग रही है।इन 33 लाख किसानों में से 21 लाख से अधिक किसानों ने अल्पकालीन लोन ले रखा है इसके मायने ये हुए कि अगर अपने वायदे के विपरीत जाकर भी यदि केवल अल्पकालीन कर्ज ही इसमें भी सभी तरह के कर्ज माफ करती है तो 47 लाख ऐसे किसानों में से 21 लाख से अधिक किसानों के कर्ज माफ करना सरकार के लिए मुमकिन होता नहीं लगता बशर्ते बैंकों में अग्रिम बजट जमा करवा दिया जाए तो ही यह सम्भव होगा जो सरकार के खजाने की स्थिति को देखते हुए मुमकिन नहीं है।कर्ज माफी से पहले सरकार पुनः कर्ज की राशि और उससे प्रभावित किसानों का आकलन करेगी।इसके बाद सहकारी और व्यवसायिक बैंकों के लिए बजट प्रावधान किए जाएंगे।सहकारी बैंकों का लोन माफ करने में सरकार को ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी पर उनकी माली हालत ऐसी नहीं रह जायेगी क़ि वे दुबारा लोन किसानों को दे पाएं।व्यवसायिक बैंक केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, बजट के अभाव में ये बैंक लोन माफ होना मुश्किल है।पंजाब और कर्नाटक में यही समस्या सामने आ रही है।सहकारी बैंक दबाव में बिना बजट कर्ज माफ कर सकते हैं।नए लोन माफ करने से पूर्व वर्तमान सरकार को बैंकों के बकाया करीब 6 हजार करोड़ रुपये भी चुकाने होंगे।सरकार ने करीब 8 हजार करोड़ रुपये के लोन माफ किया है।जबकि मात्र 2 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।22 सौ करोड़ रुपये अपैक्स बैंक ने ncdc से लोन लिया है तथा अन्य राशि सरकार की तरफ बकाया है।ऐसे में नए बजट के साथ पुराने बकाया बजट की भी व्यवस्था करना नई सरकार के जिम्मे है।यह बजट नहीं मिलने पर बैंकों पर संकट आ सकता है।सरकारें चुनावी फायदे के लिए बिना सोचे समझे वायदे कर लेती हैं और जब उसे जमीन पर उतरना पड़ता है तो आधी अधूरी माफी किये जाने के बाद भी राज्य की आर्थिक स्थिति डावांडोल हो जाती है और यदि वायदे का पूरी तरह से पालना हो तो लुटिया डूबना तय है।राजस्थान का कुल बजट करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये है जबकि किसानों का कर्ज 99 हजार करोड़ यानी कुल बजट का करीब 47फीसदी।ऐसे में सभी किसानों का कर्ज माफ करना सम्भव नहीं हो पाता और फिर सरकार पतली गालियां निकालने लगती है जैसा कि पंजाब, कर्नाटक, mp और छत्तीसगढ़ की सरकारें निकाल रही है। ये संभावित शर्ते हो सकती है,,,छोटे किसानों के लघु अवधि के कर्जे माफ हो सकते हैं।फसल उत्पादन पर लिया कर्ज माफ हो सकता है उपकरणों पर लिया नहीं।2 या 3 एकड़ जमीन वाले किसान का ही कर्ज माफ किया जा सकता है।केवल सहकारी बैंक से लिये कर्ज से मुक्ति मिल सकती है।सरकारी योजनाओं में कर्ज ले चुके किसानों को लाभ नहीं दिया जाए।सरकारी, निजी कर्मचारी जिन्होंने कृषि लोन ले रखा है, वे दायरे से बाहर रखे जा सकते हैं।कृषि लोन के अलावा किसान का निजी लोन माफ नहीं होगा।जिन किसानों ने लोन की किश्त चुका रहे हैं उस राशि को कर्ज माफी की राशि में से कम कर शेष राशि की माफी की जा सकती है।पंजाब और कर्नाटक के गणित से समझिए कर्ज माफी,,,,पंजाब में जिन किसानों का कर्ज 2 लाख से अधिक था उनको दायरे से बाहर कर दिया गया।10 लाख को फायदा मिलना था मिला करीब 5 लाख को। यहां अभी तक सहकारी बैंकों के ही लोन माफ हुए हैं।व्यवसायिक बैंक बिना बजट लिए माफ करने को तैयार नहीं और सरकार के पास पैसा नहीं।कर्नाटक में 2 लाख तक के अल्पकालीन कर्ज माफ करने की घोषणा की है।वहां भी अभी सहकारी बैंकों का लोन चुकाया गया है।व्यवसायिक बैंकों को बजट के लिए पैसा नहीं है।कर्नाटक ने कर्ज माफी के लिए कई शर्ते लगा दी है।एक लाख रुपये की सीमा रखी।उससे ऊपर का कर्ज चुकाने पर ही एक लाख का फायदा मिलेगा, चारा खरीद पर कर्ज माफी नहीं,20 हजार रुपये की नौकरी करने वाले किसान दायरे से बाहर, साहूकारों से लिया कर्ज माफ नहीं,पहले से चुकाई किश्तें कर्ज माफी में समायोजित, जमीन सीमा भी पंजाब की तरह 5 एकड़ निर्धारित।कुल मिलाकर ये किसानों के लिए दिखाया गया दिव्य सपना है जिसे पूरा होने पर किसानों का म्यान से तलवारें निकालना तय है।और यह भी कि किसानों की कर्ज माफी और बेरोजगारों को भत्ता देने के बाद सरकारों का कल्याण कारी योजनाएं बनाना और विकास कर पाना टेढ़ी खीर साबित होगा।पंजाब की तरह कर्मचारियों को वेतन के भी लाले पड़ना तय है।ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ये तीनों राज्य किसानों की कर्जमाफी और बेरोजगारों को भत्ता का अपना वायदा कैसे पूरा करते हैं।मदन अरोड़ा

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