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लोकतंत्र के महापर्व में मतदाताओं ने दिखाया उत्साह, प्रदेश में कम मतदान से बढ़ा संशय
हनुमानगढ़ जिले में 7 दिसंबर को लोकतंत्र के चुनावी महापर्व में मतदाताओं ने पूरे उत्साह सें भाग ले ईवीएम में उम्मीदवारों की किस्मत को बंद कर दिया। इस महा समर के खेवनहारों में नव युवा मतदाताओं से लेकर शतक पार सभी ने बढ-चढक़र हिस्सा लिया। इसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही । महिलाओं ने कई क्षेत्रों विशेषकर शहरी क्षेत्रों में मतदान करने में पुरूषों को पीछे छोड़ दिया। मुस्लिम बाहूल्य बूथों पर भी मुस्लिम महिलाओं का प्रतिशत पुरूषों के मुकाबले अधिक रहा। हनुमानगढ़ जिले का कुल मतदान 82.83 प्रतिशत रहा। इसमें सर्वाधिक मतदान संगरिया में 86.54 प्रतिशत और सबसे कम मतदान भादरा में 80.13 हुआ। संगरिया के बाद पीलीबंगा में 84.17 प्रतिशत, हनुमानगढ़ में 82.60 प्रतिशत और नोहर में 80.91 प्रतिशत मतदान हुआ। खास बात ये रही कि नोहर और भादरा में महिलाओं ने पुरूषों से ज्यादा मतदान किया। भादरा में पुरूषों का मतदान जहां 79.20 प्रतिशत रहा, वहीं 81.17 प्रतिशत महिलाओं ने वोटिंग की। इसी प्रकार नोहर में पुरूषों के मतदान प्रतिशत 80.87 के मुकाबले महिलाओं ने 80.95 प्रतिशत वोटिंग की। शहरी क्षेत्र में पीलीबंगा को छोडक़र बाकि चारों विधानसभा क्षेत्र नोहर, भादरा, संगरिया और हनुमानगढ़ में महिलाओं ने पुरूषों से ज्यादा मतदान किया। भादरा में पुरूषों का मतदान प्रतिशत 72.39 के मुकाबले महिलाओं का मतदान करीब 5 फीसदी ज्यादा 77.10 प्रतिशत रहा। नोहर में पुरूषों के 74.71 प्रतिशत मतदान के मुकाबले महिलाओं ने करीब 2 फीसदी ज्यादा 76.31 प्रतिशत मतदान किया। इसी प्रकार हनुमानगढ़ में पुरूषों के 75.75 प्रतिशत मतदान के मुकाबले महिलाओं ने करीब 1 फीसदी ज्यादा 76.45 प्रतिशत मतदान किया। ग्रामीण क्षेत्र में भादरा की महिलाएं पुरूषों से मतदान में आगे रहीं। भादरा में पुरूष मतदान प्रतिशत 80.10 के मुकाबले महिलाओं का मतदान 81.71 प्रतिशत रहा। शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हो जाने के बाद अब कौन जीत रहा है का आंकलन किया जा रहा है। एग्जिट पोल और सट्टे की धूम है। चुनावी समर के नतीजे11 दिसंबर को आएंगे पर जिन उम्मीदवारों की मतदान पूर्व हवा थी, उनके समर्थक एग्जिट पोल और सट्टे के अनुमान को सही मान अभी से सेहरा बांधे घूम रहे हैं। इस बार पिछले चुनावों के मुकाबले करीब 2 फीसदी मतदान कम हुआ है,जबकि महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। मतदाताओं का हवा इसकी है, वोट फलां को दिया है ने अपनी जीत माने बैठी पार्टियों को बेचैन कर दिया है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछले चुनाव से कम मतदान, हवा इसकी है, वोट फलां को और महिलाओं का शहरी और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में पुरूषों के मुकाबले अधिक मतदान से चुनावी गणित में उलटफेर की पूरी संभावना है और जिन उम्मीदवारों ने जीत का सेहरा बांध रखा है,अगर वे चुनाव हार जाएं तो आश्चार्य नहीं होगा। पिछले पांच चुनावों में से 4 में मतदान प्रतिशत बढऩे पर सत्ता परिवर्तन हुआ । इस बार हुए कम मतदान से दोनों दल संशय में हैं और यह कांटे की टक्कर की ओर ईशारा कर रहा है। हनुमानगढ़ में11को किसका होगा मंगल,किसका अमंगल हनुमानगढ़ जिले में सबसे रोचक मुकाबला हनुमानगढ़ विधान सभा क्षेत्र में रहा, जहां भाजपा केसरकार में जल संसाधन मंत्री डा. रामप्रताप और कांग्रेस के पूर्वमंत्री चौ.विनोद कुमार के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। हालांकि हवा पर सवार कांग्रेस अपनी जीत को लेकर निश्चिंत है। सट्टा बाजार मतदान पूर्व से ही कांग्रेस की जीत दिखा रहा है। पर मतदान के बाद जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। पिछले चुनाव की तुलना में कम मतदान, महिलाओं का अधिक जोश और चुनाव में पुरूषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया जाना, कुछ अलग तस्वीर दिखा रहा है। इन सबसे चौंकाने और समीकरण में बदलाव लाते दिख रहा है, हवा कांग्रेस की है पर वोट फूल को डाला है का दावा करते मतदाता। जंक् शन के एक मतदाता के अनुसार उसने पहली मर्तबा अपनी पत्नी के कहने पर कांग्रेस के बजाये फूल का बटन दबाया है। उसकेअनुसार हवा कांग्रेस की है पर वोट फूल को जा रहा है, इस सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता। फूल के प्रति यह केवल एक महिला का झुकाव मात्र नहीं है, यह अधिकांश महिलाओं के दिलों में मोदी के प्रति विश्वास को दर्शाता है। महिलाओं का पुरूषों के मुकाबले अधिक मतदान इसका संकेत है। एक अन्य मतदाता मतदान पूर्व तक भाजपा प्रत्याशी के साथ नाराजगी के चलते कांग्रेस को वोट देने की बात करता रहा,पर मतदान करने के बाद उसने कहा, ईवीएम पर फूल देखते ही वह बटन दबा दिया। यहां चुनाव में एकमात्र मुद्दा भाजपा उम्मीदवार डा.रामप्रताप के खिलाफ रडक़ और उनके द्वारा करवाये गये विकास कार्य का रहा है। हवा रडक़ की पर वोट विकास को गया दिख रहा है। शहरी क्षेत्र में 83621 मतदाताओं ने मतदान किया है जबकि 138437 ग्रामीण मतदाताओं ने उम्मीदवारों की किस्मत को ईवीएम में बंद कर चुनावी समर को कांटे के मुकाबले में बदलने का काम किया है। चुनाव में करीब 41 हजार नये मतदाता इस बार जुड़े हैं। इनमें से लगभग 98 सौ 18 से 19 आयु वर्ग के जबकि करीब 31 हजार 250 मतदाता 20 से 30 आयु वर्ग के हैं। युवा सोच ने रडक़ पर मतदान किया है या विकास को तरजीह दी है, देखना दिलचस्प होगा और असली गेम चेंजर भी इनके मत साबित होंगे। जीत के गणित के लिए पिछले समीकरण को देखें तो इस चुनाव में डा.रामप्रताप को कुल मतदान का 46 फीसदी जबकि विनोदे कुमार को 30 फीसदी मत मिले थे। इस बार माना जा रहा है कि जो 44 फीसदी वोट ले जाएगा, वही सरताज बनेगा। मंगलवार को हनुमान भक्त डा. राम प्रताप का मंगल होगा या अमंगल , ईवीएम खुलने पर ही इसका पता चलेगा। संगरिया में कांग्रेस की इक तरफा होती दिख रही हैजीत जिले की संगरिया विधान सभा सीट पर मिल रहे रूझान कांग्रेस की ओर जाते दिख रहे हैं। इस बार जिले में सर्वाधिक मतदान संगरिया में 86.54 प्रतिशत हुआ है। यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस की शबनम गोदारा और भाजपा के गुरदीप सिंह शाहपीनी के बीच रहा। महिलाओं का अधिक मतदान,उनमें अधिक स्वीकार्यता और भाजपा के नाराज कार्यकर्ताओं का शबनम गोदारा को मिला साथ उनकी जीत को पुख्ता करता दिख रहा है। सट्टा बाजार भी उनकी इक तरफा जीत दिखा रहा है। ऊंठ किस करवट बैठेगा इसका पता 11 दिसंबर को ईवीएम खुलने पर ही चलेगा। भादरा में सट्टा बाजार की विश्वसनीयता दांव पर हरियाणा और चुरू जिले से सटे भादरा विधान सभा क्षेत्र में इस बार जिले में सबसे कम 80.13 फीसदी मतदान हुआ है। ग्रामीण बाहुल्य इस विधान सभा चुनाव क्षेत्र में महिलाओं ने पुरूषों सेज्यादा मतदान किया। भादरा में पुरूषों का मतदान जहां 79.20 प्रतिशत रहा, वहीं 81.17 प्रतिशत महिलाओं ने वोटिंग की। क्षेत्र और सट्टा बाजार में शुरू से ही माकपा के बलवान पूनिया की हवा के चलते इस बार पार्टी अपनी जीत को लेकर आशान्वित है। पर मतदान के बाद इस पर पानी फिरता दिख रहा है। महिलाओं का अधिक मतदान और हवा इसकी और वोट किसी दूसरे को, की चर्चाऐं सामने आने के बाद ऊंठ किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल है। त्रिकोणिय संघर्ष में हवा का रूख और सट्टा बाजार का आंकलन सही बैठेगा या फिर कांग्रेस के डा. सुरेश चौधरी के सिर सेहरा बंधेगा अथवा भाजपा के संजीव बेनीवाल वापसी करेंगे इसका पता 11 दिसंबर को ही चलेगा। मदन अरोड़ा, स्वतंत्र पत्रकार

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