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हवा है,पर काम बोलता है
गुड़गांव से आने के बाद आज दिन भर अलग अलग वर्ग के लोगों से मिल हनुमानगढ़ में चुनावी माहौल जानने की कोशिश की।कोर्ट भी गया।एक व्यक्ति को छोड़ सभी का एक ही मत था कि कांग्रेस की हवा जरूर है लेकिन काम बोल रहा है।उनका कहना था कि लोग इस बात को मान रहे हैं कि पिछले 5 साल में हर क्षेत्र में जितना काम हुआ है ,कभी नहीं हुया। इस बात का कट्टर कांग्रेसी भी मान रहे हैं कि डॉक्टर रामप्रताप ने इलाके में खूब काम करवाया है।लोगों ने कहा कि अगर कांग्रेस आती है तो इलाका फिर विकास में पिछड़ जाएगा।चौधरी विनोद कुमार के बस में काम करवा पाना सम्भव नहीं है।लोगों ने कहा कि इलाके के हित में वे भाजपा को ही वोट देंगे।राहुल गांधी की रैली मैंने नहीं देखी, पर लोगों का कहना था कि इस रैली के बाद रडक वाली हवा कमजोर पड़ रही है और कल मोदी की रैली के बाद डॉक्टर को और मजबूती मिलेगी।एक बात और सामने आई कि 2008 और 2013 में भाजपा के पुराने नेता जो डॉक्टर का खुल कर विरोध कर रहे थे, धीरे धीरे फिर डॉक्टर के साथ आ रहे हैं और काफी हद तक साथ आ भी चुके हैं। बात चुनावी गणित की।2008 में इसीतरह कांग्रेस की हवा चल रही थी और इसी तरह से कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी थी।इसके बावजूद डॉक्टर राम प्रताप मात्र 386 वोटों से चुनाव हारे थे और हाउसिंग बोर्ड में मतदान केंद्र पर झगड़ा न हुआ होता तो शायद यह हर भी नहीं होती। इस बार फिर नाराजगी की हवा है कई लोग साथ छोड़ गए, पर इन साथ छोड़ने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो भाजपा सरकार आने के बाद भाजपा में आये थे और कांग्रेस की हवा को देख वापस कांग्रेस में चले गए।पर जितने छोड़ गए उससे ज्यादा पुराने नाराज भाजपाई घर वापसी कर चुके हैं।एक और गोर करने योग्य तथ्य यह है कि विनोद कुमार 2008 में मात्र 376 मतों से चुनाव जीते थे पर 2013 में अब तक की सबसे करारी हार हारे थे।उन्हें डॉक्टर ने 30 हजार से अधिक मतों से हराया था।जिसका मतलब यह हुआ कि डॉक्टर को हराने के लिए विनोद कुमार को कम से कम 15 हजार से अधिक अतिरिक्त मत हासिल करने होंगे पिछले चुनाव की तुलना में। ऐसे में जब 15 उम्मीदवार मैदान में हैं और करीब 20 से 25 हजार वोट भाजपा, कांग्रेस से बाहर रहेंगे कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले 15 हजार अतिरिक्त वोट मिलते नहीं दिख रहे।जबकि अब हवा के विपरीत काम बोलता है के वोट मुखर हो बोल रहे हैं और कल की मोदी की रैली के बाद इनमें और इजाफा होता दिख रहा है। मदन अरोड़ा, स्वतंत्र पत्रकार

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