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मोदी साबित होंगे गेमचेंजर,राहुल गांधी की रैली का नहीं हुआ कोई असर
7 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में अब मात्र कुछ दिन बचे हैं और हनुमानगढ़ जिले में चुनावी गहमागहमी चरम पर है। राज्य में उप चुनावों में मिली जीत के बाद आने वाले चुनावों में भी हवा पर सवार कांग्रेस अपनी जीत पक्की मान कर चल रही हैऔर इसलिए प्रदेश मेंसरकार बनानेको लेकर निश्चिंत है। भाजपा जहां अपनेकाम और करवायेगयेविकास कार्योंके भरोसे है, तो कांग्रेस इनकमबेंसी के सहारे सरकार बनाने को लेकर सपनेपाले बैठी है। जिले में सबसे दिलचस्प और कांटेका मुकाबला हनुमानगढ़ विधानसभा सीट पर है। यहां14 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं पर मुख्य मुकाबला सरकार मेंजल संसाधन मंत्री भाजपा केडा.रामप्रताप और कांग्रेस के पूर्व कृषि राज्य मंत्री चौ. विनोद कुमार केबीच है। हनुमानगढ़ की राजनीति इन्हीं दोनों परिवारों केईर्दगिर्द घूमती है। दोनों ही तीन-तीन बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा प्रत्याशी डा. रामप्रताप पूरे कार्यकाल के दौरान जनता के बीच रहने, इलाके में करवाये गये विकास कार्यों और सहज उपलब्धता केलिये जाने जाते हैं। जिले मेंउनकी छवि विकास दूत की है। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी चौ. विनोद कुमार अपनी सज्जनता केलिये पहचाने जाते हैं। भाजपा और कांग्रेस ने प्रचार मेंअपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। दोनों दलों केलिए यह सीट कितनी प्रतिष्ठापूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात सेलगाया जा सकता है कि भाजपा केप्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 4 दिसंबर को आ रहे हैंजबकि कांग्रेस के प्रचार के लिए राहुल गांधी 1 को हनुमानगढ़और सचिन पायलट रैली कर जा चुके हैं। कांटे की टक्कर केबीच भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी जीत को लेकर आशान्वित हैं। यहांकभी चौ. विनोद कुमार की निष्क्रियता सेरूष्ट हो डा. रामप्रताप को उनकेविकासोन्मुखी कामों केलिए सेहरा बांध देते हैं, तो कभी डा. रामप्रताप की उनकी कथित बोली को लेकर रडक़ निकालनेकेलिए विनोद कुमार को विधायकी सौंप दी जाती है। इस बार भी हनुमानगढ़ मेंचुनावी लड़ाईडॉक्टर केबेटेकेसाथ रड़क और विकास के बीच है। ऐसे- ऐसेलोग रड़क की बात कर रहेहैं, जोकभी डॉक्टर रामप्रताप से रूबरू ही नहीं हुए। इस बीच सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें सेएक मेंडा.रामप्रताप पांव में फ्रेक्चर केबावजूद जन सुनवाई कर रहे हैंऔर दूसरेमेंचौ. विनोद कुमार विधान सभा मेंसो रहे हैं। जनता केबीच सवाल यह हैकि वोट और समर्थन क्या ऐसेव्यक्ति को दिया जाए, जो चुनाव हारनेकेबाद 5 साल तक अपनी शक्ल ही न दिखाए या उसेजो पूरे5 साल न केवल जनता केबीच रह लोगों के संपर्क में रहे, वरन रिकॉर्ड विकास कार्यभी करवाये। कांग्रेस पूरी तरह से रडक़ को हवा दे उस पर सवार हो चुनावी वैतरणी पार करने में लगी है, तोभाजपा क्षेत्र मेंकरवाये गये विकास कार्यों केनाम पर वोट मांग रही है।1 दिसंबर को राहुल गांधी और सचिन पायलट पग फेरा कर जा चुके हैं। यहां से अगर रड़क जीती तो भाजपा केसाथ विकास हारेगा लेकिन उससे जो सन्देश जायेगा, विकास हमेशा- हमेशा के लिए दफन हो जाएगा फिर कोईजन प्रतिनिधि विकास करवानेकी सोचेगा नहीं और अगर विकास जीत गया तो कांग्रेस और निष्क्रियता हारेगी और हर जन प्रतिनिधि को इलाकेके विकास केलिए काम करना ही पड़ेगा । चुनाव में डॉक्टर रामप्रताप और चौ. विनोद कुमार की हारजीत रडक़ और विकास केमुद्देपर मतदान में छिपी है। भाजपा के डा. रामप्रताप ने 2013 के चुनाव में कांग्रेस के चौ. विनोद कुमार को 30487 मतों केबड़ेअंतर से हराया था। आम चर्चा है कि राहुल गांधी के पग फेरेका कांग्रेस कोकोई फायदा नहीं मिला हैजबकि मोदी की 4 दिसंबर को होने वाली रैली गेमचेंजर साबित होगी । इसका फायदा न केवल हनुमानगढ़ में मिलेगा, बल्कि जिले के साथ साथ गंगानगर जिले की कई सीटों पर इसका असर दिखेगा। सट्टा बाजार मेंभी मोदी की रैली के बाद उलटफेर की पूरी संभावना जताई जा रही है। भाजपा केसामनेजहांअपनी सीट बचानेकी चुनौती है, वहीं कांग्रेस अपना खोया जनाधार वापस हासिल कर जीत की हर मुमकिन कोशिश में है। ऊंठ किस करवट बैठेगा, इसका पता 11 दिसंबर को ईवीएम से चलेगा। वसुंधरा का दौरा भी नहीं बदल पाया संगरिया की फिजा,पर मोदी से भाजपा को मिल सकता है सहारा हरियाणा सीमा सेसटे संगरिया विधान सभा क्षेत्र में एक निर्दलीय को पार्टी में शामिल कर उम्मीदवार बनाने का दांव भाजपा को उलटा पड़ता दिख रहा है। भाजपा उच्च कमान ने मौजूदा विधायक कृष्ण कड़वा की टिकट काट निर्दलीय गुरदीपसिंह को एक दिन पूर्व पार्टी में शामिल कर प्रत्याशी बना मैदान में उतार दिया। पार्टी के इस निर्णय से कार्यकर्ताओं में रोष है। कई कार्यकर्ता खुलकर कर कांग्रेस प्रत्याशी शबनम गोदारा के साथ आ गये हैं तो कुछ पार्टी केउम्मीदवार के साथ आने के बजाये घर बैठ गये हैं। गुरदीप सिंह 2013 के चुनाव मेंकरीब 41 हजार वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे,जबकि कांग्रेस प्रत्याशी शबनम गोदारा को 44 हजार वोट मिले थे। यहां भाजपा के कृष्ण कड़वा चुनाव जीते थे। चुनाव हारनेकेबावजूद गुरदीप सिंह और शबनम गोदारा क्षेत्र में लगातार सक्रीय रहेऔर गुरदीप सिंह अपने पक्ष में हवा बनाने में सफल रहे। संभावना जतायी जाने लगी थी कि इस बार वे चुनाव निकाल ले जायेंगे और इसी को देखते हुए भाजपा ने गुरदीप सिंह पर दांव खेल दिया। मौजूदा विधायक की टिकट काटे जाने से उपजी नाराजगी से गुरदीप सिंह की हवा भी कमजोर पड़ गई। इसने कांग्रेस को खाद देने का काम किया। पार्टी को लग रहा था कि मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे की संगरिया की सभा से पार्टी को मजबूती मिलेगी, पर राजे भी फिजा बदलने में विफल रही। राहुल गांधी की हनुमानगढ़ में हुई रैली से तो कांग्रेंस कोकोई फायदा होता नहीं दिख रहा , पर माना जा रहा है कि 4 दिसंबर को हनुमानगढ़ में होने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली से भाजपा के गुरदीप सिंह को संजीवनी मिल सकती है। भादरा की सीट पर कांटे के मुकाबले में क्या इस बार आयेगा माकपा का नंबर ? हनुमानगढ़ जिले की भादरा विधान सभा क्षेत्र में शुरू से ही माकपा के बलवान पूनिया की हवा के चलते इस बार पार्टी अपनी जीत को लेकर आशान्वित है, हालांकि कस्बे के लोगों का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस की विलंब सेजारी टिकटोंकी वजह से हवा बनी थी जो अब कमजोर पडऱही है। पूनिया का मुकाबला कांग्रेस के डा. सुरेश चौधरी और भाजपा केमौजूदा विधायक संजीव बेनीवाल से है। पिछले चुनाव में वे 38552 मत ले दूसरे स्थान पर रहे थे। चुनाव हारने के बाद बलवान पूनिया लगातार जन समस्याओं को लेकर संघर्ष करते रहे और अपने पक्ष में माहौल बनाने मेंसफल रहे। इसी के चलते सट्टा बाजार में भी वे पहले नंबर पर चल रहे हैं। उनका मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस के डा. सुरेश चौधरी केसाथ माना जा रहा है। डा. सुरेश चौधरी पूर्व विधायक हैंऔर जमीन से जुड़े नेता हैं। वे भी पिछलेचार साल से लगातार जनता के बीच रह उनकी समस्याओं के लिए आवाज उठाते आ रहे हैं। चौधरी को कांग्रेस की टिकट मिलनेकेबाद माकपा की हवा भी अब कमजोर पडऩे लगी है। कस्बे मेंमाना जा रहा हैकि माकपा की हवा जरूर है, पर उसके मुताबिक वोट नहीं है। माकपा केसाथ ऐसे युवाओं का जमावड़ा है जो खुद वोट देसकते हैं, पर वोट जोड़ नहीं सकते। भाजपा केमौजूदा विधायक संजीव बेनीवाल को पार्टीनेरिपीट किया है। उनके परिवार की वजह सेलोगोंमेंनाराजगी है। बेनीवाल वोटों की बहुतायत से वे मुकाबले में हैं और धीर-धीरे लोगों को अपने साथ जोडऩे में लगे हैं। उनकी मजबूती से माकपा कमजोर जबकि कांग्रेस को और ताकत मिलेगी। क ुछ लोगों का मानना है कि मोदी की जिले में रैली के बाद हवा बदल सकती हैऔर अंत में मुकाबला दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के बीच रह सकता है। पर हवा के सही रूख का पता 6 की रात तक चल जायेगा। जो भी हो कांटे के इस मुकाबले में सेहरा किसी के सर बंध सकता है। पर राज्य में कांग्रेस के पक्ष में बह रही हवा का फायदा कांग्रेस के डा. सुरेश चौधरी को मिल सकता है। मदन अरोड़ा, स्वतंत्र पत्रकार

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