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14 जुलाई को होगा राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामे से अधिक से अधिक मामलों का करवाएं निस्तारण - श्री ज्ञान प्रकाश गुप्ता हनुमानगढ़ 11 जुलाई। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 14 जुलाई को जिला न्यायालय परिसर स्थित वैकल्पिक विवाद निस्तारण केन्द्र पर व संबंधित तालुका विधिक समिति नोहर, भादरा, संगरिया, पीलीबंगा, रावतसर और टिब्बी स्थित न्यायालय परिसर में सुबह 10 से सांय 5 बजे तक किया जाएगा। जिला एंव सत्रा न्यायाधीश श्री ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का निस्तारण राजीनामे से किया जाएगा ताकि आमजन को राहत मिल सके। इससे समय और धन की भी बचत होगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव सुश्री आशा चौधरी ने बताया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 4 हजार 48 केस पर सुनवाई होगी और जिले के सभी न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में कुल 22 बैंच बनाई गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार हेतु 113 पैरालिगल वॉलिंयटरस के द्वारा कैम्प आयोजित किए जा रहे है। इससे अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण किया जा सकेगा। वर्ष 2018 में 2 राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा चुका हैै। गत 22 अप्रेल 2018 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में जिले की कुल 454 मामलों का निस्तारण किया गया था। प्रत्येक माह के अंतिम सोमवार को लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पूर्णकालिक सचिव सुश्री आशा चौधरी ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हनुमानगढ़ द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालत के अलावा प्रत्येक माह के अंतिम सोमवार को बैंच का गठन कर लोक अदालत का आयोजन भी किया जाता है। निःशुल्क कानूनी सेवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला स्तर पर तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यरत है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के अंतर्गत लोक अदालत को संवैधानिक दर्जा दिया गया है। जिसके अनुसार लोक अदालत द्वारा लिये गये फैसले अंतिम होते हैं और पारित किया अवार्ड दिवानी अदालत की डिक्री जैसा माना जाता है। लोक अदालत मंे लिये जाने वाले मामले सुश्री आशा चौधरी ने बताया कि लोक अदालत में वैवाहिक और पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना, दिवानी, राजीनामा योग्य फौजदारी मामले, भूमि अधिग्रहण मामले (केवल जिला एवं उच्च न्यायालय में लंबित), श्रम विभाग, बैंक वसूली, धारा 138 एनआई एक्ट, मजदूरी, भत्ते और पेंशन भत्तों से संबधित सेवा, बिजली और पानी के बिल के मामले, राजस्व व उपरोक्त से संबंधित प्रीलिटिगेशन मामले लिये जाते है। लोक अदालत से समय व धन की बचत तो होती है साथ ही राजीनामा होने से रिश्ते भी पूर्ववत बने रहते हैं और कोर्ट फीस भी वापिस दी जाती है। लोक अदालत का फैसला सिविल न्यायालय की डिक्री के समान होता है जिसकी अपील नहीं होती है।

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