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घर आने के लिए बेचैन थे विजय, नई नौकरी की कर रहे थे तैयारी', कश्मीर में आतंकियों का निशाना बने बैंककर्मी के घर कोहराम

हनुमानगढ़ : कश्मीर में आतंकियों की टारगेट किलिंग (Jammu Kashmir Target Killing) का शिकार बने राजस्थान के विजय कुमार बेनीवाल (Rajasthan Vijay Kumar Beniwal News) के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शुक्रवार को विजय की बॉडी जब हनुमानगढ़ में उनके गृह जिले भगवान पहुंचीं तो अपने लाल को अंतिम विदाई के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे। उनकी अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा, बेहद गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान विजय के माता-पिता और महज तीन महीने पहले शादी कर घर आईं उनकी पत्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। परिजनों ने बताया कि विजय कुमार अपने घर के पास नौकरी के लिए लगातार तैयारी में जुटे हुए थे। हालांकि, भगवान को शायद कुछ और ही मंजूर था। कुलगाम के बैंक में आतंकी ने की विजय की हत्या दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में बैंक के अंदर आतंकवादी की फायरिंग में गुरुवार को विजय कुमार की मौत हो गई। विजय कुमार बेनीवाल 28 साल के थे, उनकी शादी को अभी तीन महीने ही हुए थे। वो कुलगाम में इलाकी देहाती बैंक के शाखा प्रबंधक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बताया जा रहा कि विजय के परिजन लगातार उन्हें वापस आने की अपील कर रहे थे। वो खुद भी राजस्थान में या फिर घर के पास नौकरी पाने की उम्मीद में अलग-अलग बैंकों की परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे। इसी के मद्देनजर वो छुट्टी पर भी जाने वाले थे। पिता बोले- किस्मत देखिए क्या से क्या हो गया विजय ने आखिरी बार बुधवार को अपने पिता ओम प्रकाश से बात की थी। अपने बेटे से फोन पर हुई बात को याद करते हुए उनके पिता ने कहा कि उसने अपने भविष्य की बात का जिक्र मुझसे किया था। आंखों में आंसू लिए उनके पिता ने कहा कि उनका बेटा किसी भी परीक्षा को पास कर सकता था, लेकिन किस्मत देखिए क्या से क्या हो गया। जैसे ही टीवी पर हमने ये खबर सुनी, उस पर हमें विश्वास नहीं हुआ। हम पास के नोहर पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां अधिकारियों ने कुछ पूछताछ की और खबर की पुष्टि की। विजय के भाईयों के नहीं थम रहे आंसू विजय कुमार बेनीवाल के चचेरे भाई सरजीत ने कहा कि करीब साढ़े तीन साल से इलाकी देहाती बैंक में काम कर रहे थे। एक क्लर्क के रूप में उन्होंने शुरुआत की और फिर धीरे-धीरे अधिकारी बन गए। विजय नियमित रूप से अपने छोटे भाई अनिल को सलाह देते थे, उसे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करने को लेकर प्रोत्साहित करते थे। अनिल ने कहा कि मेरे भाई की इसी साल 10 फरवरी को शादी हुई थी और अभी एक महीना ही हुआ है कि मेरी भाभी उनके साथ कश्मीर में रहकर वापस लौटी थीं।

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