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हैदराबाद भारतीय टीम ने वेस्ट इंडीज को हैदराबाद टेस्ट में 10 विकेट से हरा दिया। मेहमान टीम ने जीत के लिए 72 रनों का आसान लक्ष्य दिया था, जिसे टीम इंडिया (16.1 ओवर में 75/0) ने पृथ्वी साव (नाबाद 33) और लोकेश राहुल (नाबाद 33) की पारियों की बदौलत बिना कोई विकेट गंवाए पा लिया। पृथ्वी ने विजयी चौका लगाया। इस तरह भारतीय टीम ने दो मैचों की सीरीज में 2-0 की एकतरफ जीत दर्ज की। उसने राजकोट टेस्ट में विंडीज टीम को पारी और 272 रनों से हराया था। बता दें कि मेहमान टीम ने पहली पारी में 101.4 ओवरों में 311 रन बनाए थे, जवाब में टीम इंडिया ने पहली पारी में 106.4 ओवरों में सभी विकेट खोकर 367 रन बनाए थे। भारत ने पहली पारी के आधार पर मेहमान टीम पर 56 रन की बढ़त हासिल की थी। विंडीज की दूसरी पारी महज 127 रनों पर सिमट गई थी। वर्ल्ड रेकॉर्ड लगातार 10वीं सीरीज जीत यह भारत की घरेलू मैदान पर लगातार 10वीं टेस्ट सीरीज जीत है। इसके साथ ही अपने घर में लगातार सबसे अधिक टेस्ट सीरीज जीतने का वर्ल्ड रेकॉर्ड संयुक्त रूप से भारतीय टीम के नाम हो गया है। उसने ऑस्ट्रेलिया के 10 सीरीज जीत के रेकॉर्ड की बराबरी की। दूसरी ओर, यह 8वां मौका है, जब भारतीय टीम ने टेस्ट क्रिकेट में 10 विकेट से जीत दर्ज की, जबकि पहली बार वेस्ट इंडीज को इतने बड़े अंतर से हराया है। वेस्ट इंडीज की दूसरी पारी: 127 रन पर सिमटी इससे पहले तेज गेंदबाज उमेश यादव (45/4) और रविंद्र जडेजा (12/3) की घातक गेंदबाजी के बदौलत भारतीय टीम ने वेस्ट इंडीज की दूसरी पारी 127 रनों पर समेट दी। इस तरह मेजबान टीम को दूसरा और आखिरी टेस्ट जीतने के लिए 72 रनों का आसान लक्ष्य मिला। उमेश यादव और जडेजा के अलावा आर. अश्विन ने दो विकेट झटके, जबकि एक विकेट कुलदीप यादव के नाम रहा। यू लौटे ओपनर इससे पहले वेस्ट इंडीज की दूसरी पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही। उसके दोनों ओपनर्स 6 रन जुड़ने तक पविलियन लौट चुके थे। कैरिबियाई टीम की दूसरी पारी के पहले ही ओवर में उमेश यादव ने क्रेग ब्रैथवेट (0) को ऋषभ पंत के हाथों कैच कराया। इसके बाद रविचंद्रन अश्विन ने पारी के चौथे ही ओवर में दूसरे ओपनर कायरन पोवल (0) को पहली स्लिप में खड़े अजिंक्य रहाणे के हाथों कैच आउट करा दिया। इसके बाद शाइ होप (28) और शिमरोन हेटमेयर (17) ने क्रीज पर अपने पांव जमाने की कोशिश जरूर की। लेकिन टीम का स्कोर 45 ही हुआ था कि कुलदीप यादव ने हेटमेयर को पुजारा के हाथों कैच करा दिया। इसी स्कोर पर रविंद्र जडेजा ने शाइ होप को रहाणे के हाथों कैच कराकर मेहमान टीम को दूसरा झटका दे दिया। अभी भी वेस्ट इंडीज की टीम भारत के पहली पारी के स्कोर के आधार पर अभी भी 11 रन पीछे थी। कैरिबियाई टीम की पिछली पारी के हीरो रहे रोस्टन चेज (6) को उमेश यादव ने इस बार क्रीज पर टिकने का मौका नहीं दिया। उमेश ने चेज को बोल्ड कर इस पारी का अपना दूसरा शिकार बनाया। अपने अगले ही ओवर उमेश ने शेन डोवरिच (0) को बोल्ड कर अपने खाते में तीसरा विकेट डालते हुए वेस्ट इंडीज के छठे बल्लेबाज को पविलियन की राह दिखा दी। जेसन होल्डर (19) ने कुछ अच्छे शॉट जरूर लगाए, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। उन्हें जडेजा ने पंत के हाथों कैच कराया। इसके बाद सुनील एम्ब्रिस (38) को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज अधिक देर तक नहीं टिका। जोमेल वारिकन 7 और गैब्रियल 1 रन बनाकर आउट हुए। गैब्रियल के रूप में उमेश यादव का पारी का चौथा और मैच का 10वां विकेट रहा। भारतीय पारी का रोमांच इससे पहले तीसरे दिन भारत अपनी पहली पारी में 367 ऑलआउट हो गया। इस तरह उसने वेस्ट इंडीज (311) से पहली पारी के आधार पर 56 रनों की बढ़त हासिल की थी। भारत ने दिन की शुरुआत चार विकेट पर 308 रनों से की थी, लेकिन उसने 16.1 ओवर और 25 रन के अंदर पांच विकेट गंवा दिये जिससे स्कोर 9 विकेट पर 339 रन हो गया। इसके बाद रविचंद्रन अश्विन (83 गेंदों पर 35 रन) ने उपयोगी योगदान दिया। उन्होंने चोटिल शार्दुल ठाकुर (नाबाद चार) के साथ अंतिम विकेट के लिए 28 रन जोड़े। वेस्टइंडीज के कप्तान होल्डर (23 ओवर में 56 रन देकर पांच विकेट) ने दूसरी नयी गेंद का अच्छा इस्तेमाल किया और अपने टेस्ट करियर में 5वीं बार पारी में 5 विकेट लिए। 80 रन बनाकर आउट हुए रहाणे पिछले दो साल से खराब फॉर्म से जूझ रहे रहाणे दिन के आउट होने वाले पहले खिलाड़ी रहे। होल्डर की एक उछाल लेती गेंद रहाणे के बल्ले से लगती हुई गली में खड़े शाई होप्स के हाथों में गई। रहाणे गेंद को नीचे नहीं रख पाए और होप्स ने कैच लपकने में कोई गलती नहीं की। रहाणे ने सात चौकों की मदद से 80 रन बनाए। होल्डर ने इसी ओवर में रविंद्र जडेजा को LBW कर दिया। ऋषभ पंत शतक चूके दूसरे छोर पर ऋषभ पंत धीरे-धीरे शतक की ओर बढ़ते नजर आ रहे थे लेकिन शेनन ग्रैबियल की एक गेंद पर वह संयम खो बैठे और कवर्स में कैच दे बैठे। वह 92 रन ही बना पाए। राजकोट टेस्ट में भी वह 92 रन पर ही आउट हुए थे। इस तरह वह लगातार दो पारियों में 90s में आउट होने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए। इससे पहले राहुल द्रविड़ 1997 में श्री लंका के खिलाफ 92 और 93 रनों पर आउट हुए थे। कुलदीप यादव और अश्विन ने मिलकर 8वें विकेट के लिए 12 रन जोड़े। होल्डर ने उनका ऑफ स्टंप उखाड़कर अपना पांचवां विकेट लिया। उन्होंने छह रन बनाए। उमेश यादव 2 रन बनाकर वेरिकन का शिकार बने। अश्विन आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज रहे। वह 35 रन बनाकर ग्रैबियल की गेंद पर बोल्ड हो गए।
सूझोऊ (चीन),भारतीय फुटबॉल टीम ने शनिवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक दोस्ताना मुकाबले में चीन को गोल रहित बराबरी पर रोक दिया. भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने चीन को उसी के घर में ड्रॉ पर रोकने में अहम भूमिका निभाई. संधू ने कई मौकों पर शानदार बचाव किए. संधू को टीम के डिफेंस लाइन का बखूबी साथ मिला. इन दोनों की जुगलबंदी के कारण आखिरी समय तक लगातार अटैक करने वाली चीनी टीम मायूस हो गई. सूझोऊ ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर स्टेडियम में खेला गया यह मैच भारत के लिए अगले वर्ष जनवरी में होने वाले एशियन कप की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम था. इस मुकाबले में चीन ने शुरुआत से ही 'हाईप्रेस' खेल दिखाकर मेहमान टीम के डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश की. चीन को तीसरे मिनट में ही कॉर्नर मिला और भारत की कप्तानी कर रहे डिफेंडर संदेश झिंगन ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को बढ़त नहीं बनाने दी. मैच के सातवें मिनट चीन ने अपने बाएं छोर से अटैक किया. मेजबान टीम ने बॉक्स के अंदर हेडर के जरिए गोल करने का प्रयास किया, लेकिन इस बार भी झिंगन गेंद को मैदान से बाहर भेजने में कामयाब रहे. लगातार आक्रामक फुटबॉल खेल रही चीनी टीम को 13वें मिनट में काउंटर अटैक का सामना करना पड़ा. युवा मिडफील्डर अनिरुद्ध थापा ने चीन के 18 गज के बॉक्स में अपनी दाईं ओर मौजूद प्रीतम कोटाल को पास दिया. कोटाल ने शॉट लगाया, जिस पर चीन के गोलकीपर यान जुनलिंग ने शानदार बचाव किया. यहां भारत के पास बढ़त बनाने का बेहतरीन मौका था. मैच के 24वें मिनट में चीन ने अपने बाएं फ्लेंक से गोल करने का प्रयास किया, जिस पर संधू ने बेहतरीन बचाव किया. अपना 100वां मैच खेल रहे 32 वर्षीय गाओ लिन ने बॉक्स के अंदर से गोल की ओर शॉट मारा, लेकिन संधू ने अपने बाएं पैर का इस्तेमाल करते हुए भारतीय टीम को मैच में बनाए रखा. इसके बाद मेजबान टीम ने मैच पर अपनी पकड़ फिर से बना ली और लगातार अटैक किए. भारतीय डिफेंडर नारायण दास को चीन के फॉरवर्ड खिलाड़ियों की तेजी से बहुत परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने अपनी टीम को पहले हाफ में पिछड़ने नहीं दिया. मैच में बढ़त न बना पाने के कारण चीन के मुख्य कोच मार्सेलो लिप्पी ने टीम में बदलाव किए और दूसरे हाफ की भी दमदार शुरुआत की. गाओ लिन को 50वें मिनट में छह गज के बॉक्स के बाहर से गोल करने का शानदार मौका मिला, लेकिन वह गेंद को गोलपोस्ट पर मार बैठे. भारतीय टीम ने छह मिनट बाद अटैक किया. इस बार बॉक्स के अंदर फॉरवर्ड खिलाड़ी उदांता सिंह को गेंद मिली, लेकिन वह भी अपनी टीम को बढ़त नहीं दिला पाए. मैच के अंतिम 10 मिनट में चीन ने गेंद पर नियंत्रण रखते हुए मेहमान टीम के डिफेंस को भेदने की कोशिश की.संधू ने अंतिम क्षणों में भी अपना संयम नहीं खोया और शानदार बचाव करते हुए चीन को जीत से महरूम रखा.
राजकोट टीम इंडिया ने राजकोट टेस्ट में वेस्ट इंडीज को पारी और 272 रनों से हरा दिया है। भारत ने अपनी पहली पारी 9 विकेट के नुकसान पर 649 रन बनाकर घोषित की थी। जवाब में वेस्ट इंडीज की पहली पारी 48 ओवर में 181 रन पर सिमट गई। उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। जब वह दूसरी पारी में बैटिंग के लिए उतरे तो लगा कि पहली पारी से कुछ सीख लेकर इस बार टिकने की कोशिश करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहली पारी की तरह ही मेहमान टीम के खिलाड़ी 'तू चल मैं आया' की तर्ज पर लगातार अपना विकेट फेंकते गए और 50.5 ओवर में सभी विकेट खोकर 196 रन बना सकी। यह भारत की टेस्ट में पारी और रन के मामले में सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले उसने इसी साल जून में अफगानिस्तान को बेंगलुरु में पारी और 262 रनों से हराया था। अश्विन ने बिगाड़ी वेस्ट इंडीज की शुरुआत अपनी दूसरी पारी खेलने उतरी मेहमान टीम को उम्मीद थी कि उसे एक अच्छी शुरुआत मिलेगी, लेकिन पहली पारी में चार विकेट लेने वाले रविचंद्रन अश्विन ने क्रैग ब्रैथवेट (10) को शॉर्ट लेग पर खड़े पृथ्वी शॉ के हाथों कैच कर विंडीज को अच्छी शुरुआत से महरूम रख दिया। वह 32 के कुल स्कोर पर आउट हुए। एक ओवर बाद भोजनकाल की घोषणा कर दी गई। लंच के बाद नए बल्लेबाज शाइ होप (17) ने खाता खोला और कुच्छे शॉट भी लगाए, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। उन्हें कुलदीप यादव ने LBW आउट किया। कुलदीप यादव की घातक बोलिंग विंडीज टीम संभल पाती इससे पहले ही कुलदीप यादव ने दो विकेट झटकते हुए स्कोर 4 विकेट पर 97 रन कर दिया। उन्होंने शिमरॉन हेटमायर को 11 रनों के निजी स्कोर पर केएल राहुल के हाथों कैच कराया, जबकि सुनील एम्ब्रिस आगे निकलकर शॉट लगाने के चक्कर में स्टंप आउट हुए। सुनील ने 3 गेंदें खेली, लेकिन खाता नहीं खोल सके। इसके बाद रोस्टन चेज ने पॉवेल के साथ मिलकर 5वें विकेट के लिए 41 रन जोड़े। हालांकि, चेज सिर्फ 20 रन बनाकर कुलदीप की गेंद पर आर. अश्विन के हाथों लपक लिए गए। पॉवेल 83 रन बनाकर आउट विंडीज की उम्मीदों ने उस वक्त दम तोड़ दिया, जब शानदार बैटिंग कर रहे कायरन पॉवेल (83) को कुलदीप यादव ने पृथ्वी शॉ के हाथों कैच आउट करा दिया। यह कुलदीप का इस पारी में 5वां विकेट रहा। पॉवेल ने 93 गेंदों में 8 चौके और 4 छक्के लगाए। जडेजा ने कीमो पॉल (15) को आउट करते हुए मेहमान टीम को 7वां झटका दिया। चायकाल से ठीक पहले उसे 8वां झटका लगा। देवेंद्र बिशू 9 रन के निजी स्कोर पर अश्विन की गेंद पर विकेट के पीछे पंत के हाथों लपके गए। उनके आउट होते ही चायकाल की घोषणा हो गई। बाकी के बचे दो बल्लेबाजों को रविंद्र जडेजा ने आउट किया। उन्होंने लुइस (4) को LBW आउट किया, जबकि गैब्रियल (4) को कुलदीप के हाथों कैच कराया। इस पारी में भारत की ओर से सबसे अधिक 5 विकेट कुलदीप यादव के नाम रहे, जबकि रविंद्र जडेजा ने 3 और आर. अश्विन ने दो विकेट झटके। पृथ्वी शॉ को मैन ऑफ द मैच चुना गया। दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट मैच 12 अक्टूबर से हैदराबाद में खेला जाएगा। दूसरे दिन का खेल उल्लेखनीय है कि पहले दिन पृथ्वी शॉ के टेस्ट डेब्यू में शतक के बाद दूसरे दिन कोहली (139) और जडेजा (100*) के नाम रहा। भारत ने 9 विकेट पर 649 रन पर अपनी पहली पारी घोषित की। जवाब में वेस्ट इंडीज की टीम अच्छी शुरुआत नहीं कर सकी और उसके विकेट नियमित अंतराल पर गिरते रहे। पेसर मोहम्मद शमी और फिर स्पिनरों ने कैरेबियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। वेस्ट इंडीज ने पारी के दूसरे ही ओवर में मोहम्मद शमी की गेंद पर कप्तान ब्रैथवेट (2) का विकेट गंवा दिया। शमी की सीधी गेंद को ब्रैथवेट पढ़ नहीं पाए और गेंद जाकर ऑफ स्टंप पर लगी। इसके बाद दूसरे ओपनर कायरन पॉवेल भी ज्यादा देर संघर्ष नहीं कर सके और शमी की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए। उन्होंने सिर्फ 1 रन बनाया था। विंडीज की टीम संभल पाती, इससे पहले ही आर. अश्विन ने शाई होप (10) को बोल्ड करते हुए भारत को तीसरी सफलता दिला दी। कुछ ही देर बाद शिमरन हेटमायर (10) रन आउट हो गए। इसके बाद सुनील एम्ब्रिस (12) को जडेजा ने शिकार बनाया। उन्हें रहाणे ने लपका जिसके साथ ही विंडीज की आधी टीम पविलियन लौट गई। फिर शेन डॉरिच (10) को कुलदीप यादव ने बोल्ड कर दिया। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 6 विकेट पर 94 रन थे। यूं हुई तीसरे दिन की शुरुआत इससे पहले दूसरे दिन के नाबाद बल्लेबाज रोस्टन चेज (53) और कीमो पॉल (47) ने वेस्ट इंडीज के स्कोरबोर्ड को चलाने का काम तीसरे दिन भी जारी रखा। दोनों खिलाड़ियों ने थोड़ी तेजी से रन बटोरे, लेकिन ज्यादा आगे नहीं जा पाए। अर्धशतक की ओर बढ़ रहे पॉल को उमेश यादव ने चेतेश्वर पुजार के हाथों कैच करा इस साझेदारी को तोड़ा। पॉल ने अपनी पारी में 49 गेंदें खेलीं जिन पर सात पर चौके और दो पर छक्के जड़े। उनका विकेट 147 के कुल स्कोर पर गिरा। चेज अर्धशतक पूरा करने के कुछ देर बाद अश्विन की बेहतरीन गेंद पर बोल्ड हो गए। उन्होंने अपनी पारी में 79 गेंदों का सामना करते हुए आठ गेंदों को सीमा रेखा के पार पहुंचाया। चेज का विकेट 159 के कुल स्कोर पर गिरा। इसी स्कोर पर अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे शेमरन लुइस को अश्विन ने ही बोल्ड किया। अश्विन ने शेनन ग्रैबिएल (1) को आउट कर वेस्ट इंडीज की पारी का अंत किया। आर. अश्विन ने 4 विकेट झटके, जबकि मोहम्मद शमी के खाते में 2 विकेट गया। उमेश यादव, कुलदीप यादव और रविंद्र जडेजा को 1-1 विकेट मिला। भारतीय पारी का रोमांच अपने घरेलू मैदान पर खेल रहे जडेजा ने 132 गेंद पर नाबाद 100 रन बनाए जो उनका पहला टेस्ट शतक रहा। वहीं कप्तान कोहली ने अपना 24वां टेस्ट शतक लगाते हुए 230 गेंद में 139 रन की पारी खेली। जडेजा को तिहरे अंक तक पहुंचने के लिए 38 टेस्ट का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने दिसंबर 2012 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। 11वें नंबर के बल्लेबाज मोहम्मद शमी के साथ खेलते हुए जडेजा ने चाय से ठीक पहले के ओवर में शतक पूरा किया। अपनी पारी में उन्होंने 5 चौके और 5 छक्के लगाए। इंग्लैंड में आखिरी टेस्ट में 86 रन बनाने वाले जडेजा ने दुबई में एशिया कप के जरिए वनडे क्रिकेट में शानदार वापसी की।
एशिया कप में बुधवार को सुपर 4 राउंड के अंतिम मुकाबले बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 37 रन से शिकस्त देकर फाइनल में एंट्री कर ली। एशिया कप के वनडे फॉर्मेट में बांग्लादेश की पाकिस्तान पर यह पहली जीत है। अब वह खिताबी मुकाबले में भारत से भिड़ेगा। आगे की स्लाइड्स में देखें इस मैच के रोमांचक पल... बांग्लादेश के कप्तान मशर्फे मोर्तजा ने टॉस जीता, पहले बैटिंग करने का निर्णय लिया। टॉस के टाइम उन्होंने बताया कि यह पिच बैटिंग के लिए शानदार दिख रहा है और उनकी टीम पाकिस्तान के सामने बड़ा लक्ष्य रखना चाहती है। दोनों टीमों के लिए सेमीफाइनल सरीखे इस मैच में बांग्लादेश की टीम शुरुआत से ही पिछड़ गई और टीम ने मात्र 12 रन के स्कोर पर अपने 3 विकेट गंवा दिए। जल्दी-जल्दी 3 विकेट गिरने के बाद विकेटकीपर बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम ने मोहम्मद मिथुन के साथ मिलकर संकट में फंसी टीम को बाहर निकालने का काम किया। इन दोनों ने यहां चौथे विकेट के लिए 114 रन की साझेदारी कर बांग्लादेश की पारी को ट्रैक पर लाने का काम किया। 34वें ओवर में 156 के कुल स्कोर पर मिथुन (60) आउट हो गए। मुश्किलों में फंसी टीम को कैसे बाहर निकाला जाता है बांग्ला टीम के लिए यह काम इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने बखूबी कर के दिखाया। वह अपना 7वां वनडे शतक पूरा करने से भले चूक गए, लेकिन उनकी 99 रन की यह पारी बांग्लादेश को इस सेमीफाइनल सरीखे मुकाबले में बैकफुट पर आने से निकाल दिया। अपनी इस पारी में उन्होंने 9 चौके बरसाए और इसी की बदौलत बांग्लादेश का स्कोर 239 रन तक पहुंच पाया। पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम के सामने 240 रन की चुनौती शायद बहुत बड़ी नहीं थी। लेकिन बांग्लादेशी टीम के पास अभी मैच बचाने का फील्डिंग में मौका था और उसने शुरुआत से पाक टीम को दबाव में लाने का प्लान सफल कर लिया। बांग्लादेश ने स्पिन बोलिंग से पारी की शुरुआत की और मेहदी हसन ने पहले ही ओवर में फकर जमां (1) को आउट कर दिया। इसके बाद चौथे ओवर तक पाकिस्तान ने 18 रन जोड़कर अपने 2 विकेट (बाबर आजम (1) और सरफराज अहमद (10)) और गंवा दिए। इस तरह 18 के स्कोर पर पाकिस्तान 3 विकेट खो चुका था। शोएब मलिक ने इस टूर्नमेंट में पाकिस्तान की फंसती नैया को कई बार पार लगाया। इस बार भी उन्होंने कोशिश तो जरूर की, लेकिन 30 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर उन्हें रुबल हुसैन ने फंसा लिया और 85 के स्कोर पर वह चौथे विकेट के रूप में आउट हो गए। शोएब के बाद पाक टीम ने जल्दी ही अपना 5वां विकेट शादाब खान (4) के रूप में गंवा दिया। पाकिस्तान टीम के लिए राहत की बात यह थी कि एक छोर पर उसके ओपनर इमाम-उल-हक खूंटा जमाकर खड़े थे। भले ही पाकिस्तान की आधी टीम 100 रन से पहले (94/5) पविलियन लौट चुकी थी। लेकिन वह अभी भी बाजी अपने पक्ष में कर सकता था और इस काम के लिए इमाम को आसिफ अली (31) का साथ मिल गया। दोनों छठे विकेट के लिए 71 रन की साझेदारी कर लक्ष्य के पास पहुंचने का प्रयास किया। लेकिन 165 के स्कोर पर मेहदी हमन ने आसिफ को अपने जाल में फंसाकर इस साझेदारी को तोड़ दिया। पाकिस्तान के इस बल्लेबाज ने अभी भी टीम का हौसला बनाए रखा था। वह 83 रन पर खेल रहे थे और पाकिस्तान के पास 4 विकेट बाकी थे। पाकिस्तान जीत से 77 रन ही दूर था, लेकिन उसके पास 55 गेंदें ही शेष बची थीं। ऐसे में दबाव हटाने के लिए महमदुल्लाह की बॉल पर इमाम क्रीज से बाहर निकले, तो मुस्तफिजुर की जगह कीपिंग संभाल रहे लिट्टन दास ने उनकी गिल्लियां बिखेरने में देर नहीं लगाईं। इस तरह 7वें विकेट के रूप में इमाम पविलियन लौट गए और पाकिस्तान की यहां रही-सही उम्मीदें भी टूट गईं। इमाम के बाद बांग्लादेशी बोलरों ने अंतिम 3 विकेट भी जल्दी ही झटक कर टूर्नमेंट के खिताबी मुकाबले में एंट्री कर ली। अब शुक्रवार को खिताबी मुकाबले में बांग्लादेश की भिड़ंत भारत से होगी।
नई दिल्ली भारत ने रविवार को दुबई में खेले गए एशिया कप सुपर 4 के मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की। इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को 9 विकेट से हराया। इस तरह विकेट के हिसाब से यह भारत की पाकिस्तान पर वनडे क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत है। भारत की इस जीत में रोहित शर्मा (111*) और शिखर धवन (114) का अहम योगदान रहा। ऐसे में कई दिग्गज क्रिकेटर भी इन दोनों के प्रदर्शन की तारीफ करते नजर आए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर ने रोहित और शिखर दोनों को उनकी शतकीय पारियों के लिए बधाई दी। इसके अलावा सचिन ने कहा कि आप दोनों (रोहित और शिखर) को पूरी लय में खेलते देखना हमेशा आनंददायक होता है। इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर वीरेंदर सहवाग ने भारतीय टीम को जीत की बधाई देते हुए रोहित और शिखर की पारियों को शानदार बताया। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ इस जीत को रोहित और शिखर की शतकीय पारियों ने काफी आसान बना दिया। बता दें कि ओपनिंग में रोहित शर्मा और शिखर धवन ने 82वीं पारी में 13वीं बार शतकीय साझेदारी की। उन्होंने सचिन तेंडुलकर और वीरेंदर सहवाग की 12 शतकीय साझेदारियों के रेकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। सचिन सहवाग ने 93 पारियों में ओपनिंग की थी।
जकार्ता 18वें एशियाई खेलों में भारत ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 2 -1 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमा लिया है। एशियाई खेलों में अब भारत के कुल 69 पदक (15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 30 ब्रॉन्ज) हो गए हैं। इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखा और उसे गोल करने का मौका नहीं दिया। मैच के चौथे क्वॉर्टर में पाकिस्तान की टीम ने 1 गोल जरूर दागा, लेकिन वह मैच में भारत से बराबरी नहीं कर पाई। भारत के लिए आकाशदीप (तीसरे मिनट) और हरमनप्रीत (50वें मिनट) ने किया। पाकिस्तान की टीम को मैच में 4 पेनल्टी कॉर्नर मिले थे। लेकिन भारतीय रक्षा पंक्ति ने उसे गोल करने का मौका नहीं दिया। पाकिस्तान का एकमात्र गोल फील्ड गोल था। यह गोल मैच के 51वें मिनट में मोहम्मद अतीक ने किया। मैच की शुरुआत में ही भारत ने अपने इरादे साफ कर दिए और अभी खेल का तीसरा ही मिनट था और आकाशदीप ने पाकिस्तान के गोल पोस्ट पर हमला बोलते हुए मैच का पहला गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद पाकिस्तान ने मैच में बराबरी की कुछ कोशिशें जरूर कीं, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। दूसरे क्वॉर्टर की शुरुआत में पाकिस्तान ने अपने हमले तेज कर दिए। भारत एक गोल की बढ़त लेकिन थोड़ा सहज दिख रहा था। इस बीच पाकिस्तानी टीम ने बॉल पर नियंत्रण बनाए रखा और भारतीय गोल पोस्ट पर हमले बनाए रखे। लेकिन भारत की रक्षापंक्ति लगातार इन हमलों को विफल कर रही थी। इस बीच मैच के 21वें मिनट में पाकिस्तान को मौका मिल गया और उसने पेनल्टी कॉर्नर अर्जित कर लिया। यहां पाक टीम को लगातार 2 पेनल्टी कॉर्नर मिले। लेकिन भारतीय टीम ने दोनों बार अपने प्रतिद्वंद्वी को कामयाब नहीं होने दिया और मैच के हाफ टाइम तक 1-0 की बढ़त बनाए रखी। तीसरे क्वॉर्टर में पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के डिफेंस को भेदने का भरपूर प्रयास किया। लेकिन मैच में पाकिस्तान को गोल करने में कामयाबी नहीं मिल पाई। हालांकि भारतीय टीम एक गोल की बढ़त बनाने के बाद अपनी चिरपरिचित शैली से शांत ही दिख रही थी। बीच-बीच में टीम ने गोल करने की कोशिश जरूर की, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल पाई। इस क्वॉर्टर में पाकिस्तान को 2 और पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे कामयाब नहीं होने दिया। इस तरह मैच के ये दो क्वॉर्टर बिना किसी गोल के ही खत्म हुए और भारत ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर 1-0 की बढ़त बनाकर रखी।
जकार्ता, ब्रिज के मेंस पेयर में भारत ने गोल्ड मेडल जीता है. 60 साल के प्रणब बर्धन और 56 साल के शिवनाथ सरकार ने भारत को रिकॉर्ड 15वां गोल्ड दिलाया. अब एशियाड में स्वर्ण जीतने के मामले में भारत ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी कर ली है. भारत ने 1951 में दिल्ली में खेले गए एशियाई खेलों में 15 स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे. इससे पहले 18वें एशियाई खेलों के14वें दिन भारत को बॉक्सर अमित पंघल ने 14वां गोल्ड मेडल दिलाया. अमित ने 49 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा के फाइनल में उज्बेकिस्तान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय दुसामातोव को 3-2 मात दी. इसके साथ ही शनिवार को रोहतक के 22 साल के मुक्केबाज अमित ने भारत को ऐतिहासिक पदक दिलाया. भारत के खाते में अब तक 67 पदक आ चुके हैं, जो किसी एशियाड में भारत की सर्वाधिक पदक संख्या है. इससे पहले भारत ने 2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स में 65 मेडल जीते थे. 18वें एशियाई खेलों में अब तक भारत के कुल पदकों की संख्या 67 है. 15 गोल्ड, 23 सिल्वर और 29 ब्रॉन्ज मेडल के साथ वह पदक तालिका में 8वें स्थान पर है. जूडोः क्वार्टर फाइनल में हारी भारतीय मिश्रित टीम जूडो की मिश्रित टीम अच्छी शुरुआत को कायम नहीं रख सकी और क्वार्टर फाइनल में हार कर बाहर हो गई. भारतीय टीम को क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान ने एकतरफा मुकाबले में 4-0 से मात दी. इससे पहले भारत ने दिन की शुरुआत अच्छी की थी और अंतिम-16 के मैच में पड़ोसी देश नेपाल को 4-1 से हराया था. कनोए: भारत के प्रकांत-जेम्सबॉय फाइनल में 8वें स्थान पर भारत के प्रकांत शर्मा और जेम्सबॉय सिंह ने कनोए स्पर्धा के फाइनल में निराशाजनक प्रदर्शन किया. भारतीय जोड़ी 41.152 अंकों के साथ नौवें स्थान पर रही.
जकार्ता भारत की महिला हॉकी टीम को यहां जारी एशियाई खेलों में रजत पदक से संतोष करना पड़ा है। इस खिताबी मुकाबले में भारत जापान से कड़े मुकाबले में 1-2 से हार गया। 1998 के बाद एशियाई खेलों में महिला हॉकी स्पर्धा में भारतीय टीम ने यहां रजत पदक अपने नाम किया। इस मैच में भारतीय टीम एकमात्र गोल ही कर पाई यह नेहा गोयल (25वें मिनट) ने किया, जबकि जापान की टीम ने 2 गोल दागे। जापान ने ये दोनों गोल पेनल्टी कॉर्नर पर किए। इस मैच में तीन ही पेनल्टी कॉर्नर मिले, भारत को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिस पर वह गोल करने से चूक गया। इससे पहले 1998 एशियाड में भारतीय टीम ने रजत पदक अपने नाम किया था। भारत के नाम एशियाड खेलों की महिला हॉकी स्पर्धा में सिर्फ एक गोल्ड मेडल है, जो उसने 1982 में अपने नाम किया था। शुक्रवार को टीम इंडिया के पास यहां मौका था कि वह गोल्ड अपने नाम कर ओलिंपिक 2020 के लिए भी क्वॉलिफाइ करे। लेकिन उसे मायूसी हाथ लगी और टीम को एक बार फिर रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। मैच के पहले ही क्वॉर्टर में दोनों टीमों ने आक्रामक हॉकी की शुरुआत की और दोनों टीमों ने गोल करने के मौके तलाशे। हालांकि पहले 10 मिनट तक कोई भी टीम गोल नहीं कर पाई। मैच के 10वें मिनट में भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन गुरुजीत ने ड्रैग फ्लिक कर गोल की कोशिश की, जिसे जापानी गोलकीपर ने नाकाम कर दिया। अगले ही मिनट में जापान ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया और इस बार उसने भारत पर बढ़त बनाने का मौका नहीं गंवायाा। मैच के 11वें मिनट पर भारत पर 1 गोल की बढ़त ले ली। सविता ने अपनी बाजू खोलकर गेंद को रोकना चाहा, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाईं और इस तरह खेल के पहले क्वॉर्टर का अंत 0-1 के स्कोर पर खत्म हुआ। मैच के दूसरे क्वॉर्टर में दोनों टीमों ने एक बार फिर संभल कर शुरुआत की। जापानी टीम 1 गोल की बढ़त ले चुकी थी और वह और गोल दागकर भारत पर दबाव बढ़ाना चाह रही थी। लेकिन इस बार भारतीय डिफेंस ने मजबूती दिखाई और विरोधी टीम को कोई मौका नहीं दिया। इस बीच मैच के 25वें मिनट में भारतीय टीम ने मौका बनाया और यहां बराबरी का गोल दागकर राहत की सांस ली। यह फील्ड गोल था, जिस पर नवनीत ने रिवर्स हिट कर गेंद को गोल की ओर दिशा दी। यहां नेहा गोयल ने मुस्तैदी दिखाते हुए बॉल को गोल पोस्ट में भेजने में गलती नहीं की और इसी के साथ भारत मैच में बराबरी पर आ गया। हाफ टाइम तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं। मैच के तीसरे क्वॉर्टर में स्कोर में बराबरी करने के बाद भारतीय टीम ने जापान पर अपने हमले बढ़ा दिए। टीम जापान पर बढ़त बनाने का लगातार प्रयास करती दिख रही थी। लेकिन खेल के 44वें मिनट में भारत ने यहां जापान को पेनल्टी कॉर्नर दे दिया। जापान ने यहां कोई गलती नहीं करते हुए सफल शॉट खेला और बॉल को गोल पोस्ट में दाग कर भारत पर 1-2 से बढ़त ले ली। मैच के चौथे क्वॉर्टर टीम इंडिया ने फिर से बराबरी करने की कोशिश जरूर की, लेकिन इस जापानी रक्षापंक्ति ने उसे मौका नहीं दिया। अंतिम क्षणों में भारतीय टीम ने कुछ अच्छे मौके जरूर बनाए लेकिन वह लक्ष्य को भेद नहीं पाई। मैच अंतिम पलों में जा रहा था और दबाव आ चुकी भारतीय टीम यहां बराबरी का गोल नहीं दाग पाई।
कोलकाता तमाम दिक्कतें, अभाव के बाद भी जब कोई तपकर सामने आता है तो उसे 'कुंदन' कहते हैं। कुंदन यानी तपा हुआ सोना। गुदड़ी के लाल शायद इसे ही कहते हैं। रिक्शाचालक की बेटी स्वप्ना बर्मन ने बुधवार को 18वें एशियाई खेलों की हेप्टाथलन स्पर्धा में जब सोना जीता तो पूरे देश का सिर अपनी इस बेटी के प्रदर्शन से गर्व से ऊंचा हो गया। जिंदगी में हर बाधा को लांघने वाली स्वप्ना ने एशियन गेम्स में सात बाधाओं को लांघकर सोना अपने नाम किया। वह इस स्पर्धा में सोना जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। पश्चिम बंगाल की जलपाईगुड़ी की रहने वाली एक रिक्शाचालक की बेटी स्वप्ना ने जैसे ही जीत दर्ज की पश्चिम बंगाल के घोषपाड़ा में स्वप्ना के घर के बाहर लोगों को जमावड़ा लग गया और चारों तरफ मिठाइयां बांटी जाने लगीं। जानिए क्या होता है हेप्टाथलन हेप्टाथलन में ऐथलीट को कुल 7 स्टेज में हिस्सा लेना होता है। पहले स्टेज में 100 मीटर फर्राटा रेस होती है। दूसरा हाई जंप, तीसरा शॉट पुट, चौथा 200 मीटर रेस, 5वां लॉन्ग जंप और छठा जेवलिन थ्रो होता है। इस इवेंट के सबसे आखिरी चरण में 800 मीटर रेस होती है। इन सभी खेलों में ऐथलीट को प्रदर्शन के आधार पर पॉइंट मिलते हैं, जिसके बाद पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के ऐथलीट का फैसला किया जाता है। यूं जीता सोना स्वप्ना ने सात स्पर्धाओं में कुल 6026 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। स्वप्ना ने 100 मीटर में हीट-2 में 981 अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया था। ऊंची कूद में 1003 अंकों के साथ पहले स्थान पर कब्जा जमाया। गोला फेंक में वह 707 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। 200 मीटर रेस में उन्होंने हीट-2 में 790 अंक लिए। पिछले साल एशियाई ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी वह स्वर्ण जीत कर लौटी थीं। बेटी की सफलता पर मां हुईं भावुक अपनी बेटी की सफलता से खुश स्वप्ना की मां बाशोना इतनी भावुक हो गई थीं कि उनके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे। बेटी के लिए वह पूरे दिन भगवान के घर में अर्जी लगा रही थीं। स्वप्ना की मां ने अपने आप को काली माता के मंदिर में बंद कर लिया था। इस मां ने अपनी बेटी को इतिहास रचते नहीं देखा क्योंकि वह अपनी बेटी की सफलता की दुआ करने में व्यस्त थीं। स्वप्ना के घरवालों ने अपनी बेटी के जीत का जश्न मनाते हुए उसे आगे बढ़ने में हुई परेशानियों का भी जिक्र किया। स्वप्ना की मां ने कहा, 'मुझे बेहद खुशी है। मैंने और स्वप्ना के पिता ने उसे यहां तक लाने में काफी कठिनाइयों का सामना किया है। आज हमारा सपना पूरा हो गया।' पिता चलाते हैं रिक्शा बेटी के पदक जीतने के बाद बशोना ने कहा, ‘मैंने उसका प्रदर्शन नहीं देखा। मैं दिन के दो बजे से प्रार्थना कर रही थी। यह मंदिर उसने बनाया है। मैं काली मां को बहुत मानती हूं। मुझे जब उसके जीतने की खबर मिली तो मैं अपने आंसू रोक नहीं पाई।’ स्वप्ना के पिता पंचन बर्मन रिक्शा चलाते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से उम्र के साथ लगी बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं। इसलिए जूतों के लिए संघर्ष बशोना ने बेहद भावुक आवाज में कहा, ‘यह उसके लिए आसान नहीं था। हम हमेशा उसकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते थे, लेकिन उसने कभी भी शिकायत नहीं की।’ एक समय ऐसा भी था कि स्वप्ना को अपने लिए सही जूतों के लिए संघर्ष करना पड़ता था, क्योंकि उनके दोनों पैरों में छह-छह उंगलियां हैं। पांव की अतिरिक्त चौड़ाई खेलों में उसकी लैंडिंग को मुश्किल बना देती है इसी कारण उनके जूते जल्दी फट जाते हैं। कोच का क्या है कहना स्वप्ना के बचपन के कोच सुकांत सिन्हा ने कहा कि उसे अपने खेल संबंधी महंगे उपकरण खरीदने में काफी परेशानी होती है। बकौल सुकांत, ‘मैं 2006 से 2013 तक उनका कोच रहा। वह काफी गरीब परिवार से आती है और उसके लिए अपनी ट्रेनिंग का खर्च उठाना मुश्किल होता है। जब वह चौथी क्लास में थी तब ही मैंने उसमें प्रतिभा देख ली थी। इसके बाद मैंने उसे ट्रेनिंग देना शुरू किया।’
नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले रेसलर बजरंग पूनिया और महिला पहलवान विनेश फोगाट इस साल राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार की दौड़ में है। भारतीय कुश्ती महासंघ के एक सूत्र ने बताया कि बजरंग ने महासंघ के जरिए नामांकन भर दिया है जबकि विनेश की सिफारिश खेल मंत्रालय कर सकता है। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एशियाई खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन की समीक्षा सितंबर के पहले सप्ताह में करेंगे। इसके बाद मंत्रालय चयन समिति को राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए अपने सुझाव दे सकता है। हर साल खेल पुरस्कार महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर 29 सितंबर को दिए जाते हैं लेकिन इस बार समारोह 25 सितंबर को होगा ताकि एशियाई खेलों से तारीख का टकराव नहीं हो। डब्ल्यूएफआई के एक अधिकारी ने कहा,‘बजरंग ने खेल रत्न पुरस्कार के लिए नामांकन दे दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाड के शानदार प्रदर्शन के बाद वह इस पुरस्कार के हकदार हैं। हमें नहीं पता कि विनेश ने खुद नामांकन भरा है या नहीं लेकिन मंत्रालय उनके नाम की अनुशंसा कर सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘दोनों ही खेल रत्न पुरस्कार के प्रबल दावेदार हैं और दोनों जीतते हैं तो कोई हैरानी नहीं होगी।’ खेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के साथ विनेश और बजरंग भी प्रबल दावेदार हैं। अधिकारी ने कहा, ‘बजरंग और विनेश ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में असाधारण प्रदर्शन किया है। खासकर एशियाई खेलों में तो प्रतिस्पर्धा काफी कठिन थी। मंत्रालय को 30 अप्रैल की कटऑफ तारीख को मिली सूची में विनेश और बजरंग के नाम नहीं थे लेकिन एशियाई खेलों में प्रदर्शन की समीक्षा बैठक जल्दी ही होगी और मंत्रालय कुछ खिलाड़ियों के नाम की अनुशंसा चयन समिति को करेगा।’ उन्होंने कहा, ‘दोनों ही खेल रत्न पुरस्कार के प्रबल दावेदार हैं और दोनों जीतते हैं तो कोई हैरानी नहीं होगी।’ खेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के साथ विनेश और बजरंग भी प्रबल दावेदार हैं। अधिकारी ने कहा, ‘बजरंग और विनेश ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में असाधारण प्रदर्शन किया है। खासकर एशियाई खेलों में तो प्रतिस्पर्धा काफी कठिन थी। मंत्रालय को 30 अप्रैल की कटऑफ तारीख को मिली सूची में विनेश और बजरंग के नाम नहीं थे लेकिन एशियाई खेलों में प्रदर्शन की समीक्षा बैठक जल्दी ही होगी और मंत्रालय कुछ खिलाड़ियों के नाम की अनुशंसा चयन समिति को करेगा।’ विनेश एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनीं। उन्होंने इंचियोन एशियाड में ब्रॉन्ज जीता था। साथ ही 2014 और 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों में सोने का तमगा हासिल किया था। बजरंग ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में स्वर्ण के अलावा विश्व चैंपियनशिप 2013 में ब्रॉन्ज जीता। उन्होंने 2014 एशियाई खेलों और ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर मेडल जीता था। अब तक एक ही साल में सर्वाधिक चार खिलाड़ियों को खेलरत्न सम्मान 2016 में दिया गया जब रियो ओलिंपिक के बाद पी वी सिंधु, साक्षी मलिक, दीपा कर्मकार और जीतू राय को इससे नवाजा गया था।

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