taaja khabar....PNB ने अन्य बैंकों को चिट्ठी लिख किया सचेत, 10 अधिकारी निलंबित.....PNB केस की INSIDE स्टोरी: 7 साल पहले हुआ था फ्रॉड, सरकार की सख्ती से खुलासा....बिहार के आरा में आतंकियों के कमरे में धमाका, बड़ी साजिश नाकाम, 4 फरार.....तीन दिन में तीन यात्राएं, चुनावी मोड में बीजेपी, निशाना 2019 पर...मोदी केयर' पर केंद्र ने राज्यों की बुलाई बैठक, ममता पहले ही झाड़ चुकी हैं पल्ला....
नई दिल्लीः असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा के मुताबिक, पाप का फल है कैंसर. उनके इस बयान से हर कोई उनकी आलोचना कर रहा है. बहरहाल, आज हम आपको बता रहे हैं कैंसर के कारणों, लक्षणों और उससे होने वाले बचाव के बारे में. बुढ़ापे के साथ जल्दी बढ़ता है कैंसर- हर साल कैंसर के लगभग 11 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. इनमें से भारत में किसी भी वक्त 33 लाख लोग कैंसर से जूझ रहे होते हैं. कैंसर उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है और बुढ़ापे में कैंसर होने की संभावना काफी अधिक होती है. पहचानें इसके लक्षण- कैंसर कई तरह के होते हैं. ऐसे में कोई एक निश्चित लक्षण बताना संभव नहीं. कैंसर के लक्षण व्यक्ति की उम्र और उसके रहन-सहन भी नि‍र्भर करते हैं. डॉक्टर जांच के बाद ही कैंसर के टाइप की पुष्टि कर सकते हैं. कैंसर के लिए कौन है जिम्मेदार- चंडीगढ़, पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च के कम्यूनिटी मेडिसिन प्रोफेसर डॉ.अरूण.के.अग्रवाल के मुताबिक, लाइफस्टाइल और पर्यावरण कैंसर होने का एक बहुत बड़ा कारण है. इसमें बढ़ता वजन, डायट, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, मोटापा, शराब का सेवन, तंबाकू, काम का बोझ और कुछ इंफेक्शन शामिल हैं. ऐसे लोगों हो सकता है कैंसर का अधिक खतरा- जर्मनी की एक रिसर्च में ये बात सामने आई हैं कि जिन लोगों की हाइट अधिक होती है उन्हें कैंसर का खतरा अधिक होता है. यदि व्यक्ति की लंबाई सामान्य व्यक्ति से 6.5 इंच अधिक है तो उन्हें कार्डियोवस्कुलर डिजीज और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 6 फीसदी कम हो जाता है. लेकिन कैंसर होने का खतरा चार फीसदी बढ़ जाता है. लंबे लोगों को आमतौर पर ब्रेस्ट, आंत और त्वचा का कैंसर अधिक होता है. कैंसर का इलाज- कैंसर के इलाज के कई तरीके उपलब्ध हैं. यह मरीज की आयु, बीमारी की तीव्रता और फैलाव पर निर्भर है. लेकिन इलाज कैसा हो यह कोई अनुभवी और कुशल डॉक्टर ही बता सकता है. कैंसर का इलाज हर मरीज के लिए अलग-अलग होता है इससे मरीज के ज्यादा समय तक जिंदा रहने की संभावना बढ़ जाती है. घर का माहौल कैंसर रोगी को करता है जल्दी ठीक- एक रिसर्च के मुताबिक, घर का माहौल मरीज के ठीक होने में बेहतर भूमिका निभाता है क्योंकि वह अपने आरामदायक माहौल में रहता है और जल्दी स्वस्थ होने के लिए प्रेरित होता है. कैसे लड़े कैंसर से- कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाकर, लोगों की कैंसर को लेकर गलतफहमियों को दूर करके कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है. स्कूलों और वर्कप्लेस पर 30 मिनट किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करवाकर. फिर चाहे योगा हो या फिर कोई और फिजिकल एक्टिविटी. बच्चों और बड़ों दोनों को जंकफूड से दूर रखें. वर्कप्लेफस पर कर्मचारियों को हेल्दी बिहेवियर और सेहत के लिए मोटिवेट करें. घर और ऑफिस को स्मोकिंग, नशे और मादक पदार्थों से मुक्त माहौल दें. समय-समय पर बॉडी चैकअप करवाते रहें और कैंसर केयर के लिए विशेष कदम उठाएं. कैंसर के रोगियों को सपोर्ट करें और उनका साथ दें. सबसे जरूरी है हमें हेल्दी लाइफस्टाइल को प्रमोट करना है. अच्छी डायट लें. व्यायाम करें. कैंसर पेंशेट की सही से देखभाल करें. आयुर्वेद पद्धति के अनुसार इलाज- हल्दी, अदरक, मेथीदाना, अश्वगंधा, त्रिफला और अजवाइन ऐसी चीजें हैं जो हमारे शरीर की अग्नि को बनाए रखती हैं और अगर कीमोथैरेपी के साथ इन्हें दिया जाए तो कीमो के अन्य कुप्रभाव और दर्द दोनों ही काफी कम हो जाते हैं. इनसे रोगी में कैंसर की दवा को सुप्रभावी बनाने की क्षमता बढ़ जाती है और उसके शरीर में कमजोरी नहीं आती.
जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है तो दिल की धमनियों में फैट जमा होने लग जाता है. हृदय में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं होता है. मांसपेशियों को जरुरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण वह ठीक से काम करना बंद कर देती हैं. बिना किसी वर्कआउट या मेहनत के ही थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है. समय रहते कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल न किया जाए तो हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है. फैट को खत्म करने के व्यायाम सबसे अच्छा हल है. हार्ट ब्लॉकेज को दूर करने के लिए घरेलू डाइट के नुस्खे लौकी का जूस लौकी का ताजा जूस रेगुलर पीने से हार्ट ब्लॉकेज नहीं होती. लेकिन कभी भी कड़वे जूस का सेवन न करें. इसके अलावा सुबह की सैर रेगुलर करें. अश्वगंधा यह दिल की बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इन्फ़्लामेट्री, एंटी-ट्यूमर और रिजुवनेशन के गुण मौजूद होते हैं. दिल की कोशिकाओं को मजबूती मिलती है, जिससे दिल की तकलीफ पास नहीं आती. दालचीनी दालचीनी हार्ट ब्लॉकेज के लिए एक बेहतर औषधि है. यह सांस की तकलीफ दूर करने में भी सहायक है. लहसुन लहसुन के नियमित सेवन से कॉलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है. यह शरीर से गंदगी को बाहर निकालने का गुण रखता है. इलायची इलायची स्वाद और सुगंध में तो अच्छी होती ही है यह दिल के रोगों में भी लाभकारी हैं. आयुर्वेदिक गुणों में इसे दिल के इलाज में कारगर औषधि बताया गया है
करी पत्ता खाने के स्वाद और खूशबू दोनों को ही बढ़ा देता है और सॉउथ इंडियन खाने में तो इसका खूब उपयोग किया जाता है. करी पत्ता खाने के स्वाद के अलावा सेहत को भी स्वस्थ बनाएं रखने में मदद करता है. जनरल ऑफ प्लांट फूड्स फॉर न्यूट्रीशन के एक अध्ययन के अनुसार करी पत्ता ब्लड-शुगर का स्तर घटाता है. मधुमेह रोगियों के अलावा जो लोग वजन घटाना चाहते हैं, उन्हें भी करी पत्ता डाइट में शामिल करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, करी पत्ते में मौजूद पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं... 1. करी पत्ते में भरपूर मात्रा में आयरन और फॉलिक एसिड होता है और यह एनीमिया के खतरे को कम करता है. इसमें मौजूद विटामिन ए और सी लीवर को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं. 2. ब्लड-शुगर को कंट्रोल करने में मददगार है. करी पत्ते में मौजूद फाइबर इन्सुलिन को प्रभावित करके ब्लड-शुगर लेवल को कम करता है. 3. करी पत्ता खाने से वजन नियंत्रित रहता है और यह पाचन क्रिया को भी सही रखता है. करी पत्ते में कार्मिनटिव तत्व होता है, जिससे कब्ज नहीं होती. 4. यह दिल को मजबूत करके के साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित रखता है. 5. करी पत्ता एंटी ऑक्सि‍डेंट, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल होता है और यह स्किन इंफेक्शन से बचाव करता है.
अक्टूबर के महीन में कई ग्रहों की स्थितियां बदल रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण शनि का हो रहा है। 26 अक्टूबर को शनि महाराज वृश्चिक राशि से धनु में वापस आएंगे। इससे पहले 9 तारीख को शुक्र तारीख को शुक्र कन्या राशि में आ रहे हैं। इस महीने मंगल, बुध सूर्य की स्थिति भी बदल रही है। ऐसे में यह महीना आपके लिए कैसा रहेगा जानिए। सूर्य छठे स्थान में बुध के साथ युति में है। पंचम स्थान में सिंह राशि में मंगल के साथ शुक्र की युति है। सप्तम भाव में स्थित गुरु आपके लिए दांपत्य जीवन में उत्तम सुख प्रदान करने वाला बन सकता है। आपको भाग्यवृद्धि संबंधी अवसर मिलेंगे। शुक्र के पांचवें में होने से प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ेगी। नये संबंध जोड़ने अथवा पुराने संबंध सुधारने के लिए योग्य समय है। भागीदारी के लिए भी गणेशजी हरी झंडी दिखा रहे हैं। फिलहाल संतान के साथ संबंधों में गुस्से का कारण आंशिक तनाव आ सकता है, इसलिए गुस्से को नियंत्रण में रखें। विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और अध्ययन के लिए जोश में वृद्धि होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए उत्तम समय है। महीने के मध्य में सूर्य राशि बदलकर सप्तम स्थान में आएगा जो दांपत्य जीवन में अहं का टकराव करा सकता है। इसके साथ ही बुध के भी इसी स्थान में आने से संबंधों में नीरसता में थोड़ी वृद्धि होगी। मंगल और शुक्र दोनों छठे भाव में होने से आप कामकाज के स्थल पर उत्साह से काम करेंगे। विचारों में नवीनता रहेगी। दैनिक कार्यों को छोड़कर कुछ नया सृजन करने की उत्सुकता रहेगी। हालांकि, सहकर्मियों के साथ व्यवहार में गुस्से के कारण टकराव की संभावना रहेगी। इस समय विशेषकर जिन्हें ऐसिडिटी, त्वचा संबंधित समस्या, गुप्तरोग, आंखों में जलन आदि समस्या हो तो उन्हें स्वास्थ्य की विशेष संभाल रखनी होगी। सूर्य छठे स्थान में बुध के साथ युति में है। पंचम स्थान में सिंह राशि में मंगल के साथ शुक्र की युति है। सप्तम भाव में स्थित गुरु आपके लिए दांपत्य जीवन में उत्तम सुख प्रदान करने वाला बन सकता है। आपको भाग्यवृद्धि संबंधी अवसर मिलेंगे। शुक्र के पांचवें में होने से प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ेगी। नये संबंध जोड़ने अथवा पुराने संबंध सुधारने के लिए योग्य समय है। भागीदारी के लिए भी गणेशजी हरी झंडी दिखा रहे हैं। फिलहाल संतान के साथ संबंधों में गुस्से का कारण आंशिक तनाव आ सकता है, इसलिए गुस्से को नियंत्रण में रखें। विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और अध्ययन के लिए जोश में वृद्धि होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए उत्तम समय है। महीने के मध्य में सूर्य राशि बदलकर सप्तम स्थान में आएगा जो दांपत्य जीवन में अहं का टकराव करा सकता है। इसके साथ ही बुध के भी इसी स्थान में आने से संबंधों में नीरसता में थोड़ी वृद्धि होगी। मंगल और शुक्र दोनों छठे भाव में होने से आप कामकाज के स्थल पर उत्साह से काम करेंगे। विचारों में नवीनता रहेगी। दैनिक कार्यों को छोड़कर कुछ नया सृजन करने की उत्सुकता रहेगी। हालांकि, सहकर्मियों के साथ व्यवहार में गुस्से के कारण टकराव की संभावना रहेगी। इस समय विशेषकर जिन्हें ऐसिडिटी, त्वचा संबंधित समस्या, गुप्तरोग, आंखों में जलन आदि समस्या हो तो उन्हें स्वास्थ्य की विशेष संभाल रखनी होगी। आप की राशि से आठवें भाव में केतु का भ्रमण स्वास्थ्य में अधिक सावधानी रखने के लिए का संकेत दे रहा है। धन स्थान में स्थित राहु आपको आर्थिक चिंता कराएगा। इसके अलावा, नौकरी के स्थान में स्थित शनि नौकरीपेशा लोगों को कामकाज में विलंब का संकेत दे रहा है। हालांकि, अगर इसके अच्छे पहलुओं पर ध्यान दें तो पंचम स्थान में स्थित गुरु विद्यार्थी जातकों के लिए बेहतर अवसर प्रदान कराएगा। फिलहाल, आपमें अध्ययन संबंधी रुचि थोड़ी कम रहेगी परंतु समय बीतने पर उसमें उल्लेखनीय सुधार आएगा। आध्यात्मिक विषयों में भी आपकी ज्ञान जिज्ञासा बढ़ेगी। जो लोग गूढ़ विद्या, कर्मकांड आदि में रुचि रखते हैं वे भी इस दिशा में गहन अध्ययन के लिए आगे बढ़ सकते हैं। पैतृक संपत्ति में उलझनें उत्पन्न होंगी। जहां तक संभव हो वहां तक इस संबंध में पुराने केसों को फिलहाल मत खोलें, अन्यथा आपके लिए घाटे का सौदा साबित होगा। महीने के मध्य में आप विशेष रूप से पारिवारिक मामलों पर अथवा परिजनों की जरूरतें पूरा करने के लिए अधिक खर्च करेंगे। आपके घर में किसी मांगलिक अथवा धार्मिक प्रसंग का आयोजन होने की संभावना रहेगी। महीने के उत्तरार्द्ध में अचल संपत्ति संबंधी विवादों का समाधान हो सकता है। रियल एस्टेट, वाहन के क्रय-विक्रय अथवा मशीनरी के कामकाज से जुड़े हुए जातकों को प्रगति का अवसर प्राप्त होगा। महीने के अंत में प्रेम संबंधों में थोड़ी नीरसता बढ़ सकती है। परिवार में आप संतान पर अधिक ध्यान देंगे। आपके विवाह स्थान में राहु और सप्तम स्थान में केतु होने से व्यवसायिक मोर्चे पर भागीदार के साथ तथा परिवार में जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना रहेगी। ससुराल पक्ष से किसी लाभ की संभावना अधिक रहेगी। प्रथम सप्ताह में आप आध्यात्मिक विषयों में अधिक रुचि लेंगे। धन स्थान में स्थित शुक्र और मंगल की युति के कारण आय के साथ के साथ खर्च की मात्रा भी बढ़ेगी। उच्च अध्ययन करने वाले जातकों को विदेश यात्रा से संबंधित बढ़िया समाचार मिल सकते हैं। दूसरे सप्ताह में शुक्र राशि बदलकर आपकी राशि से तीसरे स्थान में बुध और सूर्य के साथ युति में आएगा। आपको कोई उद्यम करने की इच्छा अधिक होगा। नौकरीपेशा लोग नए अवसरों की तरफ विचार करें ऐसी संभावना अधिक रहेगी। इस समय आप परिवार की खुशियों पर खर्च करने में पीछे नहीं रहेंगे। महीने के पिछले पखवाड़े में बुध राशि परिवर्तन करके आपकी राशि से चौथे स्थान में गुरु के साथ तुला में आ रहा है। परिवार में कोई आनंद का समाचार मिल सकता है। सूर्य भी चौथे भाव में आएगा जिससे परिवार के सदस्यों के साथ व्यवहार में कहीं अहं की भावना नहीं आए इसका ख्याल रखें। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जातकों को अधिक मेहनत की तैयारी रखनी पड़ेगी। महीने के प्रारंभ में आपके जन्म के चंद्र से छठे में भ्रमण करता हुआ मकर का चंद्र, केतु के ऊपर से भ्रमण करेगा। यह आपकी नौकरी में, नौकर-चाकर के लिए, ननिहाल पक्ष अथवा रोग और शत्रु के लिए नकारात्मक परिणाम प्रदान करेगा। इन दिनों में चिंता अधिक सतत सताएगी जिसके कारण मानसिक रूप से रोगग्रस्त महसूस करेंगे। दुर्घटना का योग होने से वाहन चलाने में सतर्कता रखें। पैतृक संपत्ति से संबंधित कार्य भी होंगे। धार्मिक यात्राओं पर जाने का कार्यक्रम बनेगा। शनि की ढैय्या आ रही है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करें। भाग्यवृद्धि संबंधी अवसर प्राप्त होंगे। पिता के साथ अच्छा तालमेल बनेगा। आकस्मिक खर्च भी हो सकता है। अप्रत्याशित बीमारी की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य का ध्यान रखें। महीने के उत्तरार्ध में अथवा अकारण मानसिक चिंता महसूस होगी। आर्थिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा। पारिवारिक सुख की प्राप्ति होगी। 20, 21 तारीख को तुला राशि में से गोचर होते हुए चंद्र का तृतीय में से भ्रमण हो रहा है। छोटे भाई-बहन का आगमन होगा तथा मित्रों के साथ अच्छा तालमेल रहेगा। आनंदपूर्वक समय बिता सकेंगे। छोटी दूरी की यात्रा का योग दिखाई दे रहा है। महीने के अंतिम दिनों में प्रणय संबंधों में, संतान के अध्ययन के लिए, शेयर सट्टे जैसे आर्थिक मामलों में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। नौकरी, नौकर-चाकर, ननिहाल के लिए, तंदुरस्ती जैसे विषयों में मध्यम परिणाम मिलेंगे। इस महीने के प्रारंभ में बुध आपकी जन्म राशि के स्थान में भ्रमण कर रहा है। इसका उच्च राशि कन्या में भ्रमण करना आपके लिए अति उत्तम रहेगा। विद्यार्थी जातकों की एकाग्रता बढ़ेगी और अधिक उत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आप योजनाबद्ध ढंग से बढ़ेंगे। दांपत्य जीवन मध्यम रहेगा। कभी-कभी संबंधों में अहं का टकराव हो सकता है। किसी नई नौकरी में इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो उसके लिए शुभ समय है। बारहवें स्थान में स्थित शुक्र के कारण आपमें विपरीत लिंग वाले व्यक्तियों की तरफ आवश्यकता से अधिक आकर्षण रहेगा और उनके ऊपर खर्च भी खूब बढ़ जाएगा। इस स्थान में ही मंगल के होने से आप आवश्यकता से अधिक उत्साही अथवा उतावले भी रहेंगे जिससे आकस्मिक चोट की संभावना भी दिखाई दे रही है। सरकारी अथवा कानूनी कार्यों में आपकी प्रगति की संभावना रहेगी। महीने के मध्य में मंगल और शुक्र आपके विवाह स्थान में आएंगे जबकि बुध और सूर्य धन स्थान में आएंगे जिससे प्रेम संबंधों के लिए अनुकूल समय शुरू होगा। कोई भी कामकाज आप भारी उत्साह से और जोशपूर्वक करेंगे। अभी आपको बिजली का करंट, आकस्मिक चोट, औजार अथवा मशीनरी द्वारा रक्त निकले ऐसी चोट आदि से संभाल रखनी पड़ेगी। आय और व्यय का पलड़ा अभी संतुलन में रहेगा, क्योंकि आपकी आय तो रहेगी परंतु साथ ही साथ व्यवसायिक मोर्चे पर अथवा लंबी अवधि में मुनाफा मिलने से सुरक्षित निवेश में आप पैसा लगाएंगे। विद्यार्थी जातकों में फिलहाल सृजनात्मकता बढ़िया रहेगी। आपके दिमाग में नये विचार आएंगे अथवा अध्ययन में अलग ही पद्धति अपनाने की संभावना रहेगी। टेक्नीकल विषयों के अध्ययन में फिलहाल बढ़िया सफलता मिल सकती है। महीने के प्रारंभ में आपके लग्न स्थान में गुरु, धन स्थान में शनि, चतुर्थ स्थान में केतु, कर्म स्थान में राहु, लाभ स्थान में मंगल और शुक्र और व्यय स्थान में सूर्य व बुध की युति है। जायदाद के क्रय-विक्रय से संबंधित कार्य सरलता से हल कर सकेंगे। विदेश में पढ़ाई के प्रयोजन से जाने के इच्छुक जातकों के लिए अनुकूल चरण है। आपके प्रेम संबंधों में भी निकटता आएगी, पर आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपमें दंभ भाव नहीं आने पाएं। द्वितीय सप्ताह में दांपत्य संबंधों में निकटता बढ़ेंगी। 12,13,14 तरीख को आपको किसी बिजनस अथवा व्यापार के काम से दूसरे शहर में जाना हो सकता है। महीने के आखिरी पखवाड़े में सूर्य राशि परिवर्तन करके आपकी राशि में आएगा तथा मंगल राशि परिवर्तन करके आपकी राशि से बारहवें स्थान में आएगा। बुध के राशि परिवर्तन करके आपकी राशि में आने से दुर्घटना की संभावनाओं को देखते हुए वाहन संभलकर चलाएं। आनंद-प्रमोद से संबंधित गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ेगी। आपका परिवार प्रेम बढ़ेगा। महीने के अंतिम सप्ताह में माता के तबीयत की देखभाल करनी होगी। मानसिक कलेश रहेगा। सरकारी कामकाज में अथवा कोर्ट कचहरी के काम से आपको दौड़-धूप करनी पड़ सकती है। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो महीने के अंतिम दिनों में प्रेम की अभिव्यक्ति खूब बढ़िया तरीके से कर सकेंगे। महीने के प्रारंभ में जहां आपके कर्म स्थान में शुक्र और मंगल है, वहीं लाभ स्थान में बुध व सूर्य की युति है। महत्वपूर्ण कार्यों और कार्यक्रमों में अप्रत्याशित सहयोग तथा इच्छित परिणाम प्राप्त कराने वाला समय है। हालांकि, आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए आपको पहले से तैयारी रखनी पड़ेगी। नौकरीपेशा वर्ग को अगर आंतरिक खटपट की वजह से प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है तो उससे बाहर आएंगे। दांपत्य जीवन में मिलाजुला वातावरण रहेगा। दूसरे सप्ताह में आपकी बौद्धिक शक्ति अत्यधिक गहन होने से हरेक कार्य में छोटी से छोटी बात को भी ध्यान में रखेंगे। हमारे जो जातक आध्यात्मिक विद्या, ज्योतिषशास्त्र, कर्मकांड आदि में रुचि रखते हैं उनके लिए समय अनुकूल रहेगा। महीने के उत्तरार्ध में सूर्य और बुध राशि बदलकर बारहवें भाव में, जबकि मंगल और शुक्र ग्यारहवें भाव में आएंगे। विद्या अध्ययन के लिए विदेश जाने के इच्छुक हैं तो सफलता मिलेगी। सार्वजनिक जीवन में आप बहुत अधिक सक्रिय होंगे। धंधे संबंधी क्षेत्र में रुकावटों का सामना करना पड़ेगा, परंतु प्रगति होगी। महीने के अंत में इस अवधि के दौरान गणेशजी कह रहे हैं कि आप आलस और लापरवाही से दूर रहें तथा परिवार के साथ अधिक जुड़ाव रखें। सरकारी अथवा कानूनी विषयों में फिलहाल खर्च बढ़ सकता है। इसलिए थोड़ा विलंब भी हो सकता है। आपके कर्मस्थान में बुध का अपनी ही राशि में भ्रमण होने से वाणिज्य और व्यापार में वृद्धि की संभावना रहेगी। व्यवहारिक, सामाजिक तथा परिवार से संबंधित कार्य आगे बढ़ेंगे। बुजुर्गों तथा पिता की तरफ आप अधिक भावुक रहेंगे। दांपत्य संबंधों में सौहार्द बना रहेगा। प्रथम सप्ताह में प्रेमीजनों को मुलाकात के अवसर मिलेंगे। फिलहाल, आपके धन स्थान में केतु स्थित होने से आर्थिक मामलों में थोड़ी अनुकूलता तथा प्रतिकूलता दोनों रहेंगी। जमीन, मकान तथा संपत्ति से संबंधित कार्य को वेग मिलेगा। महीने के मध्य में आपको थोड़ी मानसिक दुविधा महसूस होगी और मन में अच्छे-बुरे विचार आएंगे। महीने के अंतिम पखवाड़े में सूर्य राशि बदलकर लाभ स्थान में आएगा। विदेश में व्यवसायिक प्रयोजन से जाने के इच्छुक जातकों के लिए यह बेहतर समय है। विवाह के इच्छुक जातकों के लिए भी शुभ संयोग बनेगा। अधिक आय के लिए एक से अधिक स्रोत खड़े करने पर भी आप गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे। खाने-पीने, होटल का व्यवसाय करने वाले को तथा सौंदर्य प्रसाधनों, गिफ्ट-आर्टिकल का व्यापार करने वालों का व्यापार अति उत्तम रहेगा। प्रणय संबंधी खर्चे अधिक होंगे। महीने के अंतिम दिनों में विशेष रूप से आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी चिंता होने की संभावना है। आप लोगों के साथ कम बातचीत करेंगे और कोई भी आर्थिक निर्णय लेने में अधिक समय लेंगे। महीने के पूर्वार्ध में घर में शुभ कार्य का आयोजन होगा। किसी नये कार्य में लगे रहेंगे और वह शुभ फल प्रदान करेगा। 2 और 3 तारीख के दौरान मिश्रित फल मिलेगा। मानसिक तनाव रहेगा, परंतु हाथ में लिया गया काम पूर्ण कर सकेंगे। 4 और 5 तारीख को व्यापार और कामकाज में आने वाले विघ्न दूर होंगे। किसी संबंधी से शुभ समाचार मिलेगा। आर्थिक मामले में स्थिति मजबूत बनेगी। आपकी पैसे की तंगी दूर होती महसूस होगी। उधार-वसूली करने के लिए उत्तम समय कहा जा सकता है, परंतु आपको भागीदार द्वारा या व्यवसाय में किसी से धोखा का होगा, इसलिए विशेष ध्यान रखना पड़ेगा। महीने के उत्तरार्ध में मन बैचेन और अशांत रहेगा। स्वास्थ्य ढीला रहेगा। यात्रा-प्रवास टालें, अन्यथा परेशानी का अनुभव करेंगे। यदि आपका कोई काम अटका हुआ हो तो इस सप्ताह में वह पूरा कर सकेंगे। महीने के अंतिम चरण में नौकरी में पदोन्नति मिलने की संभावना है। आपके मान तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मकान, गाड़ी तथा दूसरी अन्य सुख सुविधाओं का कार्य आसानी से हो सकता है। इस समय मित्रों, समाज, परिवार की तरफ से भाग्योदय होगा अथवा लाभ होता दिखाई देगा। सप्ताह के अंतिम भाग में चिंता बढ़ सकती है। महीने के प्रारंभ का समय दांपत्य जीवन का सुख उठाने के लिए उत्तम है। आपमें जोश व उत्साह की मात्रा बहुत ज्यादा रहेगी। विपरीत लिंग वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षण रहने से अंतरंग सुख हेतु भी शुरुआत का समय अनुकूल है। हालांकि, आपको अपने स्वभाव में गुस्से पर नियंत्रण रखना पड़ेगा। पूर्वार्ध में विशेष रूप से बुजुर्गों के साथ तथा कामकाज के स्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों या प्रतिष्ठित लोगों के साथ संबंधों में तनाव आने की संभावना है। जिनको ब्लड प्रेशर अथवा हृदय से संबंधित समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी। इस समय विशेष रूप से ज्योतिष विद्या, कर्मकांड, धार्मिक विषयों अथवा गूढ़ विद्या में गहन अध्ययन करना हो तो इसके लिए उत्तम समय है। समय गुजरने पर शुक्र और मंगल के आपके अष्टम स्थान में आने से विशेष रूप से जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता अधिक होगी। आकस्मिक चोट से बचने के लिए सतर्कता बरतनी पड़ेगी। महीने के उत्तरार्ध में सूर्य नौवें स्थान में आएगा तब प्रफेशनल विषयों में खर्च अधिक रहेंगे। हालांकि, इसके साथ गुरु के होने की वजह से स्थिति नियंत्रण में रहेगी। विदेश में कामकाज से जुड़े जातकों के कार्य धीमी परंतु एक समान गति से आगे बढ़ेंगे। विवाह के इच्छुक जातकों की भी यदि किसी जगह बात चल रही है तो गति धीमी रहेगी। आप सार्वजनिक जीवन में कम रुचि लेंगे। पत्नी अथवा ससुराल पक्ष की ओर से फायदा होगा। प्रारंभिक चरण में आपकी आय में वृद्धि होगी। व्यापार-धंधे में भी बढ़िया फायदा मिलेगा। हालांकि, इस समय कोई भी लंबी यात्रा अथवा छोटी दूरी का प्रवास आपके हित में रहेगा। शुरू के दिनों में ही शुक्र राशि बदलकर आपकी राशि से सातवें भाव में परिभ्रमण करेगा जो आपके लिए अशुभ रहेगा। शुक्र पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में झगड़े उत्पन्न करेगा। जीवनसाथी की तबीयत बिगड़ेगी। भागीदारों के साथ भी संबंध बिगड़ेंगे, क्योंकि इसी स्थान में पहले से ही सूर्य व बुध युति में है। इसके सिवाय, मंगल भी राशि बदलकर आपके सातवें भाव में प्रवेश करेगा जो आपको शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार रखेगा। मस्तिष्क तथा आंख में तकलीफ होगी। बुध राशि बदलकर आपकी राशि से आठवें स्थान में आएगा जो आपके लिए शुभ रहेगा। गूढ़ विद्या, ज्योतिष विद्या, कर्मकांड, आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि बढ़ेगी और उसमें गहन अध्ययन कर सकेंगे। विरासत और आकस्मिक धन लाभ होगा। महीने के उत्तरार्ध में सूर्य राशि बदलकर अष्टम भाव में आएगा जो गुरु और बुध के साथ युति करेगा। पेट का रोग होने से शारीरिक तकलीफ होगी। सरकार की तरफ से दंडित होने, अदालती कार्यवाही अथवा धरपकड़ होने का भय रहेगा। शत्रु अपना सर ऊंचा उठाएंगे तथा खर्चों में भी वृद्धि होगी। अंतिम सप्ताह में शनि मार्गी होकर आपकी राशि से दसवें कर्म स्थान में भ्रमण करेगा जो आपको धंधे में तकलीफ उत्पन्न कराएगा। अंतिम सप्ताह में जीवनसाथी के साथ संबंधों में आंशिक सुधार आएगा। आप परिवार को अधिक समय देने पर बल देंगे।
केला और दूध दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। अक्सर जो लोग मसल्स बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं, उन्हें केला-दूध खाने की सलाह दी जाती है। इतना ही बनाना शेक भी लोग बड़े चाव से पीते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केला और दूध का एक साथ सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यह शरीर के कई अंगों की फंक्शनिंग को प्रभावित करता है। आयुर्वेद भी केला और दूध के एक साथ खाने को सही नहीं मानता। एक अध्ययन से पता चला है कि केला और दूध का मिश्रण हमारे पाचन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इसकी वजह से साइनस संबंधी समस्या होने के भी आसार रहते हैं। आयुर्वेदाचार्य डॉ. सरोज पांडेय के मुताबिक केला और दूध दोनों पौष्टिक खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन दोनों को खाने में 20 मिनट का अंतर रखना जरूरी होता है नहीं तो यह पेट में गैस की समस्या उत्पन्न कर सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक किसी भी ठोस फल का किसी तरल से संयोजन अच्छा नहीं माना जाता है। इसके अनुसार केला और दूध साथ-साथ खाने पर शरीर में विषैले तत्वों का प्रभाव उत्पन्न होने लगता है। ऐसे में शरीर के तमाम अंगों की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा केला और दूध एक साथ खाने से शरीर भारी-भारी बना रहता है और मस्तिष्क की क्षमता भी इससे प्रभावित होती है। केला और दूध के सेवन का सबसे बेहतर तरीका है कि आप इसे अलग-अलग खाएं और पिएं। इससे शरीर को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। केला खाने के 20 मिनट बाद दूध पीना ज्यादा फायदेमंद है। अगर आप किसी डेयरी प्रॉडक्ट के साथ ही केले का सेवन करना चाहते हैं तो इसके लिए दूध की जगह दही का इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी दूध के साथ नहीं लेकिन दही के साथ केले का सेवन कर सकते हैं।
दिल्ली दिल्ली के कई इलाकों में कार्बाइड से केले पकाने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इन दिनों व्रत के दौरान फलों की ज्यादा मांग को देखते हुए कार्बाइड से कच्चे केले को कुछ ही घंटों में पका कर बाजारों में जहर के रूप में परोसा जा रहा है। पीला और सुंदर दिखने वाला केला लोगों का ध्यान तो अपनी ओर खींचता है, लेकिन यह केला सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है। खासकर त्योहार के दिनों में फलों को पकाने के लिए कार्बाइड का उपयोग दूसरे दिनों के मुकाबले अधिक किया जाता है। बाजारों से चित्तीदार छिलकेवाला केला गायब है, अब हर कहीं हरा और पीला केला ही नजर आ रहा है। कैंसर होने का खतरा कार्बाइड से पकाए गए केले खाने से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। डायटिशन अनिता लांबा ने बताया कि कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फॉस्फॉरस होता है। इससे एथिलिन ऑक्साइड गैस बनती है, जिससे फल पक जाते हैं। यह एक प्रकार का केमिकल है, जो बॉडी के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी खाने वाले को पेट खराब, उलटी, लूज मोशन, मुंह में छाले जैसी दिक्कत हो सकती है। लेकिन रेग्युलर इस तरह से पकाए गए फल खाने वाले को आंत की लाइनिंग में अल्सर हो सकता है। आगे जाकर यह अल्सर ठीक नहीं हुआ तो कैंसर का रूप ले सकता है। इसकी वजह से बच्चों में सांस की दिक्कत हो सकती है, आंखों की रोशनी कम हो सकती है। शरीर के लिए है नुकसानदेह इस बारे में एम्स की डायटिशन अंजली भोला ने बताया कि यह केमिकल किसी भी फॉर्म में बॉडी को नुकसान ही पहुंचाता है। अगर फलों में इस तरह का केमिकल यूज हो रहा है तो यह चिंता की बात है। केला तो सभी लोग खाते हैं। खासकर त्योहार में तो यह बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इस पर कंट्रोल लगानी चाहिए। बर्फ से पकाए गए केले होते हैं बदरंग कई केला गोदामों में बर्फ से केला पकाने का काम किया जाता रहा है, लेकिन अधिक खर्चीला और ज्यादा समय लगने की वजह से बर्फ से केले पकाने का सिस्टम लगभग खत्म होने की कगार पर है। बाहरी दिल्ली के केला गोदाम मालिकों के मुताबिक, बर्फ से पकाया गया केला काला और बदरंग हो जाता है, जिसे लोग खराब केला समझकर नहीं खरीदते। जबकि कार्बाइड का इस्तेमाल करके पकाए गए केले का रंग नींबू जैसा पीला हो जाता है। उसमें कोई दाग-धब्बा नहीं रहता और वह ताजा और अच्छा दिखता है। कार्बाइड से केला पकाना गैरकानूनी साल 2010 में बागवानी बोर्ड के माध्यम से सरकार को फल पकाने के लिए कार्बाइड की जगह एथिलीन इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया था जिसके बाद दिल्ली सरकार ने फलों को कार्बाइड से पकाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद दिल्ली में कार्बाइड से केले पकाने का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है। इन इलाकों में हो रहा कारोबार फल मंडी और लोकल बाजारों के आसपास कुछ ही घंटों में हरे केले को पीला बनाने के काम को अंजाम दिया जा रहा है। आजादपुर, सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी, नांगलोई, शालीमार बाग, जहांगीरपुरी, उत्तम नगर, आदर्श नगर, शकूरपुर, रामपुरा, बवाना और कंझावला में यह कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। यहां ट्रकों से उतरता तो हरा केला है, लेकिन कुछ ही घंटों के बाद इन केलों को कार्बाइड से पकाकर बाजारों में बेच दिया जाता है। जहर के इस खेल से अनजान लोग केले का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं।
मसालों के बिना खाना बनाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हल्दी, धनिया, जीरा, मेथी, अजवाइन, हींग वगैरह ऐसे मसाले हैं, जो रोजाना के खाने में डाले जाते हैं और इनसे खाने का स्वाद बढ़ जाता है। लेकिन हाल ही में आई एक नई हेल्थ रिसर्च के मुताबिक, ये मसाले न सिर्फ खाने को टेस्टी बनाते हैं बल्कि हमारी सेहत को दुरुस्त रखने में भी मदद करते हैं। इन मसालों को रोजाना अपने खाने में शामिल करने से आप कई तरह की गंभीर बीमारियों से बचे रहेंगे... आमतौर पर जीरे का इस्तेमाल होता है छौंक लगाने में। इस मसाले में काफी तादाद में आयरन होता है। इसका सेवन नियमित रूप से करने से खून की कमी को दूर किया जा सकता है। इसमें मौजूद ऐंटि-इंफ्लेमेटरी और ऐंटि-ऑक्सिडेंट गुण ट्यूमर को बढ़ने से रोकते हैं। इसके अलावा जीरे का सेवन बवासीर में भी लाभकारी माना जाता है। जीरे में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो आपकी पाचन क्रिया को ठीक करता है। इतना ही नहीं जीरा त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद इंजाइम्स, विटमिन और मिनरल त्वचा को हेल्थी रखते हैं। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने में भी जीरा बहुत कारगर है। बेहद वजनी 88 महिलाओं पर की गई रिसर्च में ये पाया गया कि वजन कम करना है तो जीरे का सेवन करना चाहिए। ये ना सिर्फ एक्ट्रा कैलरी बर्न करता है बल्कि मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ाता है और डायजेशन ठीक करता है। एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच जीरा रात भर भिगोकर रख दें। सुबह इसे उबालें और चाय की तरह इस पानी को पीएं। इसके रोजाना सेवन से शरीर से एक्स्ट्रा फैट निकल जाता है। जीरा पाउडर को दही के साथ मिलाकर भी लिया जा सकता है। जीरे के पाउडर को पानी में मिलाकर इसमें कुछ बूंदें शहद की मिलाकर भी पी सकते हैं। लौंग, पाचन तंत्र को ठीक करता है। दांत दर्द से बचने के लिए लौंग के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद ऐंटिसेप्टिक गुणों के कारण इसे बेहतर माउथवॉश भी कहते हैं। इसमें प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फॉरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक ऐसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। इसमें विटमिन ए और सी, मैग्नीशियम और फाइबर भी पाया जाता है। यह शरीर के सभी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा, यह मुहांसों को दूर करने में भी मदद करता है। रसोईघर में हमेशा रहने वाली अजवाइन में औषधीय गुण छिपे हैं। इसमें ऐंटिऑक्सिडेंट, विटमिन्स और मिनरल्स मौजूद होते हैं। अजवाइन न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि यह आपके पेट से जुड़ी बीमारियों को भी दूर रखने में मदद करती है। स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम्स से छुटकारा दिलाने में अजवाइन बेहद कारगर है। अजवाइन में थोड़ा-सा दूध और पानी मिलाकर पीस लें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर ठंडे पानी से धोएं। हफ्ते में 2-3 बार इस पेस्ट का इस्तेमाल करें। हर तरह की स्किन प्रॉब्लम्स दूर हो जाएगी। करी पत्ता ब्यूटी से लेकर हेल्थ तक के लिए कई तरह से फायदेमंद है। अगर आपके शरीर में खून की कमी है, तो आप खाने में करी पत्ते का उपयोग करें। करी पत्ते में आयरन प्रचूर मात्रा में पाया जाता हैं, जो कि शरीर के लिए एक मुख्य पोषक तत्व है। करी पत्ते में विटमिन सी और ए पाया जाता है, जो लीवर को ठीक करता है। अगर आप डाइबीटीज को नियंत्रित रखना चाहते हैं तो आप करी पत्ते का उपयोग करें। करी पत्ते में पाये जाने वाला फाइबर इंसुलिन ब्लड शुगर को कम करता है। करी पत्ते का उपयोग कलेस्ट्रॉल का स्तर कम कर देता है जिसकी वजह से दिल संबंधी बीमारियां होने की संभावना कम हो जाती हैं। अगर आपकी त्वचा में इंफेक्शन हो जाए तो करी पत्ते का उपयोग करें। करी पत्ते में मौजूद ऐंटिऑक्सिडेंट, ऐंटिफंगल गुण त्वचा के लिए लाभदायक हैं।
ज्यादातर लोगों को पपीता बहुत पसंद होता है। कुछ लोग इसे खाली पेट खाना पसंद करते हैं, तो कुछ सलाद के रूप में खाते हैं तो वहीं कुछ लोग शरीर की डिटॉक्सिंग के लिए पपीते का जूस पीते हैं। पपीते में ढेर सारे औषधीय गुण मौजूद हैं और यह ऐंटीबैक्टेरियल और ऐंटीफंगल के रूप में काम करता है। इतना ही नहीं इसके पत्ते डेंगू बुखार से लड़ने में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इतने गुणों से भरपूर पपीते का नकारात्मक पक्ष भी है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें कि आखिर क्यों, महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से पपीता सर्वश्रेष्ठ फल नहीं है.. एक फल के रूप में पपीता के कई लाभ हैं लेकिन इसके बीज और जड़ गर्भपात का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, कच्चा पपीता खाने से गर्भाशय के संकुचन का खतरा हो सकता है। हालांकि यह खतरा पके हुए पपीते में बहुत अधिक मात्रा में नहीं होता, बावजूद इसके गर्भावस्था के दौरान पपीता नहीं खाना चाहिए। ज्यादातर लोग इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि पपीता उनके लिए सबसे अच्छा फल है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप इसे बहुत अधिक मात्रा में खाएं। अधिक पपीता खाने से आपके इसाफ़गस यानी भोजन की नली में रुकावट आती है और नली को नुकसान पहुंच सकता है। एक दिन में एक कप से अधिक पपीता न खाएं। पपीता के पत्तों में पेपीन पाया जाता है जो बच्चे के लिए विष हो सकता है और यहां तक कि इससे जन्मजात दोष भी हो सकता है। स्तनपान के दौरान पपीता खाना कितना सुरक्षित है इस बारे में भी अब तक बहुत कुछ पता नहीं चल पाया है। लिहाजा बच्चे के जन्म से पहले और जन्म के बाद भी जब तक मां, बच्चे को अपना दूध पिलाती है उन्हें पपीता खाने से बचना चाहिए। पपीता में मौजूद लेटेक्स की वजह से कुछ लोगों में ऐलर्जी हो सकती है। कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा ज्यादा होती है ऐसे में एक बार फिर कच्चा पपीता जोखिम भरा फल हो सकता है। पपीता खाने से ब्लड शुगर कम हो सकता है। ऐसे में अगर आप ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए दवा खा रहे हैं, तो पपीते का सेवन आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है। पपीते के बीज का अर्क पुरुषों में प्रजनन क्षमता को कम कर सकता है। ऐसा कहा जाता है कि यह शुक्राणुओं की संख्या को कम करता है। यहां तक की शुक्राणुओं की गतिशीलता को भी प्रभावित करता है। पपीता के कई स्वास्थ्य लाभ हैं लेकिन इसका अधिक सेवन विष के समान हो सकता है क्योंकि इसमें बेंज़िल आइसोथायोसाइनेट यौगिक पाया जाता है।
नई दिल्ली,महालया मांगलिक पर्व दुर्गा पूजा से सात दिन पहले नए चांद के महत्व को दर्शाता है. माना जाता है कि इसके साथ ही त्योहारों का मौसम शुरू होता है और यह हमारे जीवन में उल्लास, शांति और समृद्धि लेकर आता है. महालय का पर्व नवरात्र के प्रारंभ और पितृपक्ष के अंत का प्रतीक है. इस बार शारदीय नवरात्र‍ि गुरुवार यानी कि 21 सितंबर से शुरू होगा. अश्व‍िन महीने की अमावस्या को महालया होती है. दशहरे के पहले जो अमावस्या की रात आती है उसे 'महालया अमावस्या' के नाम से जाना जाता है. एक तरह से इसी दिन से दशहरा की शुरुआत हो जाती है. जानिये क्या है महालया और इसका महत्व पितृपक्ष भाद्र पद मास की पूर्णिमा को शुरू होता है और 16 दिन रहता है. इसके बाद अश्व‍िन मास की अमावस्‍या को खत्म हो जाता है. इसी अमावस्‍या को ही महालया अमावस्‍या भी कहते हैं. पितृ विसर्जन 2017 के बारे में जानें सब कुछ यहां, कैसे होगा विष योग का निवारण, दान का महत्व गरूड पुराण में पितृपक्ष के बाद आने वाले महालया अमावस्या का खास महत्व है. हिन्‍दु धर्म की मान्‍यतानुसार इस दिन हमारे पूर्वज या पितृगण वायु के रूप में हमारे घर के दरवाजे पर आकर दस्‍तक देते हैं तथा अपने घर परिवार वालों से श्राद्ध की इच्छा रखते हैं. वे चाहते हैं कि उनके घर परिवार वाले उनका श्राद्ध करें और उन्‍हे तृप्‍त करके दोबारा विदा करें. अकाल मृत्यु से ग्रसित व्यक्तियों का श्राद्ध भी इसी दिन होता है. ऐसी मान्यता है कि पूर्वज खुश होकर आर्शीवाद देते हैं और परिवार धन, विद्या, सुख से संपन्‍न रहता है. गरूड पुराण के अनुसार यह भी माना जाता है कि यदि श्राद्ध पक्ष में पितरों की तिथी आने पर जब उन्‍हे अपना भोजन नहीं मिलता है तो वे क्रोधित होकर श्राप देते हैं. जिसके कारण वह घर परिवार कभी भी उन्‍नति नहीं कर पाता है तथा उस घर से धन, बुद्धि, विद्या आदि का विनाश हो जाता है. पिंडदान से पितरों की मुक्ति एक मान्यता यह भी कि इस समय भारत में नई फसलों का पकना भी शुरू हो जाता है. इसलिए पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने के प्रतीक रूप में, सबसे पहला अन्न उन्हें पिंड के रूप में भेंट करने की प्रथा रही है. इसके बाद ही लोग नवरात्रि, विजयादशमी और दीवाली जैसे त्योहारों के जश्न मनाते हैं
नई दिल्ली, 25 अगस्त आज गणेश चतुर्थी है और आपके घर में मेहमान बनकर अगले दस दिनों तक रहने वाले हैं. आज से गणेश महोत्सव का शुभ आरंभ हो गया है. जानिये ये इतना महत्वपूर्ण क्यों है और विघ्नहर्ता के इस दिव्य उत्सव का शुभ-लाभ आपको कैसे मिल सकता है. गणपति के आगमन की दिव्य तिथि का महिमा क्या है और कब पधारने वाले हैं गणपति. गणेश चतुर्थी की महिमा - गणेश चतुर्थी का पर्व मुख्य रूप से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है - माना जाता है कि इसी दिन प्रथम पूज्य श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था - मान्यता ये भी है कि इस दिन भगवान गणेश जी धरती पर आकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं - गणेश चतुर्थी की पूजा की अवधि अनंत चतुर्दशी तक चलती है, इस दौरान गणपति धरती पर ही निवास करते हैं - इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 25 अगस्त से 05 सितम्बर तक रहेगा - इस बार गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12.00 से 01.30 तक होगा हर साल विघ्नहर्ता आते हैं और भक्तों के साथ रहकर उनके सुख-दुख का हिस्सा बनते हैं. मान्यता है कि इस दौरान गणपति अपने भक्तों के सभी दुख और परेशानियों का अंत कर देते हैं. लेकिन इसके लिए गणपति को प्रसन्न करना जरूरी है. तो आइए हम आपको गणेश चतुर्थी पर गणपति पूजन की विशेष विधि बताते हैं. इस विधि से पूजन करेंगे तो निश्चित ही प्रसन्न हो जाएंगे विघ्नहर्ता गणेश... गणेश चतुर्थी पर कैसे करें गणपति की पूजा - गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना दोपहर के समय करें , साथ में कलश भी स्थापित करें . - लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मूर्ति की स्थापना करें. इस मंत्र का उच्चारण करें - ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।। - दिन भर जलीय आहार ग्रहण करें या केवल फलाहार करें - शाम के समय गणेश जी की यथा शक्ति पूजा-उपासना करें और उनके सामने घी का दीपक जलाएं - गणपति को अपनी उम्र की संख्या के बराबर लड्डुओं का भोग लगाएं , साथ ही उन्हें दूब भी अर्पित करें - फिर अपनी इच्छा के अनुसार गणपति के मन्त्रों का जाप करें - चन्द्रमा को नीची दृष्टि से अर्घ्य दें , क्योंकि चंद्र दर्शन से आपको अपयश मिल सकता है - अगर चन्द्र दर्शन हो ही गया है तो उसके दोष का तुरंत उपचार कर लें - अंत में प्रसाद बांटें और अन्न-वस्त्र का दान करें

Top News

http://www.hitwebcounter.com/