taaja khabar....अपग्रेड होगा PM मोदी का विमान, लगेगा मिसाइल से बचने का सिस्टम.....पाकिस्तान में चुनाव नजदीक, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फायरिंग 400% बढ़ी....भारत, पाकिस्‍तान और चीन ने बढ़ाया परमाणु हथियारों का जखीरा....अगले चीफ जस्टिस कौन? कानून मंत्री बोले, सरकार की नीयत पर संदेह न करें....बातचीत को तैयार आप सरकार और आईएएस अफसर, अब उप राज्यपाल के पाले में गेंद....लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास बने होटेल में भीषण आग, 5 लोगों की मौत, कई गंभीर....बिहार: रोहतास में डीजे में बजाया- हम पाकिस्तानी, 8 गिरफ्तार....प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को जन्मदिन पर दी बधाई.....भीमा कोरेगांव हिंसा: हथियार के लिए नेपाली माओवादियों के संपर्क में थे नक्सली....केजरीवाल के धरने का नौंवा दिन, क्या अफसरों-LG से बनेगी बात?....
नई दिल्ली निपाह वायरस की चपेट में आने से केरल में लगभग 13 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 40 लोग इससे प्रभावित हैं। निपाह वायरस स्वाभाविक रूप से कश्ज़रुकी जानवरों से मनुष्यों तक फैलती है। यह रोग 2001 में और फिर 2007 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी सामने आया था। इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि केरल के बाहर के लोगों को केवल तभी सावधान रहना चाहिए जब वे प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा कर रहे हों या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ रहे हों। ऐसे में कुछ आसान उपाय अपनाकर निपाह वायरस से बचा जा सकता है। निपाह संक्रमण के लिए कोई प्रभावी उपचार नहीं हार्ट केयर फाउंडेशन (HCFI) के अध्यक्ष डॉ. के.के.अग्रवाल ने कहा, ‘क्लिनिकल तौर पर देखें तो निपाह वायरस के संक्रमण के लक्षणों की शुरुआत इंसेफेलाइटिक सिंड्रोम से होती है जिसमें बुखार, सिरदर्द, म्यालगिया की अचानक शुरुआत, उल्टी, सूजन, विचलित होना और मानसिक भ्रम शामिल है। संक्रमित व्यक्ति 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है। निपाह इंसेफेलाइटिस की मृत्यु दर 9 से 75 प्रतिशत तक है। निपाह वायरस संक्रमण के लिए कोई प्रभावी उपचार नहीं है। उपचार का मुख्य आधार बुखार और तंत्रिका संबंधी लक्षणों के प्रबंधन पर केंद्रित है। संक्रमण नियंत्रण उपाय महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि व्यक्तिगत रूप से यह ट्रांसमिशन से हो सकता है। गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को गहन देखभाल की आवश्यकता है।’ बीमारी से बचने के लिए जरूरी सुझाव -सुनिश्चित करें कि आप जो खाना खाते हैं वह चमगादड़ या उनके मल से दूषित न हो। - चमगादड़ या किसी भी पक्षी या जानवर के कुतरे फलों को खाने से बचें। - ताड़ के पेड़ के पास खुले कंटेनर में बनी शराब पीने से बचें। - बीमारी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। - अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं। - शौचालय के बाल्टी और मग को अच्छी तरह से साफ करें। - रोगी के लिए उपयोग किए जाने वाले कपड़े, बर्तन और सामान को अलग से साफ करें।
लखनऊ माइग्रेन का नाम सुनते ही दिमाग में सिर दर्द की तस्वीर आ जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि माइग्रेन के कारण पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है। जी हां, माइग्रेन सिर्फ सिर में ही नहीं, बल्कि पेट में भी हो सकता है। पेट में होने वाले माइग्रेन को ऐब्डॉमिनल माइग्रेन कहते हैं और इसकी वजह से आपको तेज दर्द, मरोड़, थकान और उल्टी हो सकती है। किनको होता है खतरा पेट का माइग्रेन आमतौर पर अनुवांशिक होता है और छोटे बच्चों को होता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा उन बच्चों को होता है जिनके माता-पिता पहले से माइग्रेन के शिकार हैं। बच्चों में भी इस तरह के माइग्रेन के मामले सबसे ज्यादा लड़कियों में देखे गए हैं। जिन बच्चों को बचपन में एब्डॉमिनल माइग्रेन की शिकायत होती है, बड़े होकर उन्हें सिर का माइग्रेन होने की संभावना भी बहुत ज्यादा होती है। ऐब्डॉमिनल माइग्रेन का कारण ऐब्डॉमिनल माइग्रेन के सही-सही कारण का अब तक पता नहीं लगा है, लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि शरीर में बनने वाले दो कंपाउंड हिस्टामाइन और सेरोटोनिन इस तरह के दर्द के जिम्मेदार होते हैं। शरीर में ये दोनों ही कंपाउंड ज्यादा चिंता करने और अवसाद के कारण बनते हैं। चाइनीज फूड्स और इंस्टैंट नूडल्स में इस्तेमाल होने वाला मोनोसोडियम ग्लूटामेट या एमएसजी, प्रोसेस्ड मीट और चॉकलेट के ज्यादा सेवन से भी शरीर में ये कंपाउंड बनते हैं। कई बार ज्यादा मात्रा में हवा निगल लेने के कारण भी ऐब्डॉमिनल माइग्रेन की समस्या हो सकती है। लक्षण- 1. पेट में तेज दर्द की समस्या 2. पेट का रंग पीला दिखाई देना 3. दिनभर थकान और सुस्ती 4. भूख कम लगना और खाने-पीने का मन न करना 5. आंखों के नीचे काले घेरे आना 6. आमतौर पर ऐब्डॉमिनल माइग्रेन के लक्षण पहले से नहीं दिखाई देते हैं। कई बार ऐब्डॉमिनल माइग्रेन का दर्द आधे घंटे में ही ठीक हो जाता है और कई दफा 2-3 दिन तक बना रहता है।
कुछ लोग सुबह सुबह उठते ही पहले चाय पीते हैं. कुछ लोग गरम पानी पीते हैं तो कुछ लोग ठंडा पानी पीते हैं. यह पीने से उनकी उस दिन से किस्मत तय होती है. क्यों न सुबह कुछ ऐसा पिएं जिससे आपकी ग्रह अच्छे हो जाएं और किस्मत चमक जाएं मेष- अदरक वाली चाय या बहुत कम अदरक डालकर पानी पिएं. वृष- दूधवाली चाय या थोड़ी मिश्री या एक चम्मच दही डालकर पानी पिएं. मिथुन- हरी इलायची वाली चाय या एक तुलसी पत्र डालकर पानी पिएं. कर्क- मिश्री डालकर दूध वाली चाय या बहुत कम दही डालकर पानी पिएं. सिंह- दालचीनी डालकर दूधवाली चाय या थोड़ी गुड़ डालकर पानी पिएं कन्या- पुदीने वाली चाय या एक चुटकी सौंफ डालकर पानी पीएं. तुला- एक दाना सूखा धनिया डालकर ग्रीन वाली चाय या एक चुटकी अजवाइन डालकर पानी पिएं. वृश्चिक- एक कड़ी पत्ते डालकर गुड़ वाली चाय या आधा चम्मच शहद डालकर पानी पिएं. धनु- एक दाना केसर वाली चाय या एक एक दाना मेथी चबा कर पानी पिएं. मकर- एक लौंग वाली चाय या एक चुटकी तिल चबा कर पानी पिएं. कुम्भ- एक दाना काली मिर्च वाली चाय या थोड़ी एक दाना काला जीरा डालकर पानी पिएं. मीन- एक तेजपत्ते वाली चाय या एक छोटा टुकड़ा कच्ची हल्दी चबाकर कर पानी पिएं.
नई दिल्ली डॉक्टर्स की फी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में जेब पर यह भारी पड़ने लगी है। हॉस्पिटल में ओपीडी खर्चों के लिए अब इंश्योरेंस कवर की जरूरत पड़ने लगी है। रेग्लुलर हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा तभी मिलता है जब हॉस्पिटलाइजेशन की जरूत पड़ती है। ओपीडी के माध्यम से इलाज या कंसल्टेशन का खर्च खुद वहन करना पड़ता है। लेकिन OPD प्लान प्रीमियम में आपको इस खर्च से भी राहत मिल जाती है। ओपीडी खर्चों में राहत को लेकर तमाम इंश्योरेंस कंपनियां अलग-अलग तरह के लाभ वाली पॉलिसी लेकर आई हैं। अपोलो म्यूनिख का हेल्थ वॉलेट रिजर्व बेनिफिट के रूप में OPD खर्चों के लिए भुगतान करता है। इसका इस्तेमाल फार्मेसी बिल, डेंटल ट्रीटमेंट, डायग्नोस्टिक टेस्ट, कंसल्टेशन जैसे खर्चों के लिए किया जा सकता है। बिना इस्तेमाल वाला बेनिफिट अगले वर्ष में चला जाता है और 6 पर्सेंट का क्यूमुलेटिव बोनस मिलता है। मैक्स बुपा की गोएक्टिव पॉलिसी एक बरस में प्रति अडल्ट 2500 रुपये तक के वार्षिक मेडिकल चेक-अप, डायग्नोस्टिक्स और 10 कैशलेस OPD कंसल्टेशन (500-600 रुपये प्रति कंसल्टेशन की लिमिट) का भुगतान करती है। यूनिवर्सल सॉम्पो के OPD बेनिफिट में चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस और हियरिंग ऐड के खर्चों को कवर किया जाता है। यूनिवर्सल सॉम्पो के चेयरमैन, ओ एन सिंह ने बताया, ‘इसमें बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम के तीन वर्ष का वेटिंग पीरियड है। सब-लिमिट सम एश्योर्ड के 1 पर्सेंट से चुने गए प्लान के अनुसार 7,500 रुपये की अधिकतम लिमिट तक है।’ पॉलिसीहोल्डर इसके तहत भुगतान ओरिजिनल प्रेस्क्रिप्शन और बिल जमा कर ले सकते हैं। ICICI लोम्बार्ड और स्टार हेल्थ के इस तरह के प्रॉडक्ट पहले से मौजूद हैं, जिनमें OPD का हिस्सा प्रीमियम स्लैब और सम एश्योर्ड पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आप स्टार हेल्थ गेन पॉलिसी के तहत 5 लाख रुपये का सम एश्योर्ड और 15,000 रुपये का प्रीमियम स्लैब चुनते हैं तो आपका OPD कंपोनेंट 8,635 रुपये होगा। इसके साथ कैरी फॉरवर्ड बेनिफिट भी मौजूद है। OPD कवरेज अच्छा बेनिफिट है, लेकिन यह महंगा भी है। आपको अपनी हेल्थ से जुड़ी जरूरतों और उम्र को ध्यान में रखकर यह आकलन करना होगा कि क्या यह बेनिफिट इसकी कॉस्ट के लिहाज से सही है। पॉलिसी लेते समय सब-लिमिट और केवल नेटवर्क में आने वाले हॉस्पिटल में इलाज करवाने की शर्तों का ध्यान रखें। आप चाहें तो OPD कवरेज लेने के बजाय इन्फ्लेशन का मुकाबला करने और मेडिकल से जुड़े खर्चों के लिए फंड को एक फिक्स्ड डिपॉजिट या लिक्विड फंड में रख सकते हैं। सभी प्रकार के कर समेत प्रीमियम। ICICI लोम्बार्ड कंप्लीट हेल्थ इंश्योरेंस (ऑप्शन A) चुने गए प्लान के हिसाब से आउटपेशेंट पर होने वाले खर्च को रीइम्बर्स करता है। अपोलो म्यूनिख हेल्थ वॉलेट का सम इंश्योर्ड और रिजर्व बेनिफिट अलग है, इसका इस्तेमाल OPD खर्च पर हो सकता है। मैक्स बुुपा गोएक्टिव का OPD कंसल्टेशन फी जोन-1 में 600 रुपये और जोन-2 में 500 रुपये है। स्रोत: COVERFOX nbt
गर्मियों के दिनों में मोसंबी का खट्टा मीठा जूस अमृत से कम नहीं है. ये बात सभी जानते हैं कि मोसंबी में विटामिन सी और पोटेशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है. खट्टे-मीठे स्वाद के चलते मोसंबी का जूस भारत का सबसे लोकप्रिय जूस है जो हर गली नुक्कड़ पर बेहद आसानी से मिलता है. मोसंबी में फाइबर भी पाया जाता है जो हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. आइए जानते हैं हमारी सेहत और शरीर के लिए कितना फायदेमंद है मोसंबी - 1. स्कर्वी एक ऐसी बीमारी है जिसमें मसूढ़ों से खून आने की शिकायत होती है. ये बीमारी विटामिन सी की कमी से होती है. मोसंबी के जूस में विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है जो इस बीमारी के लिए मददगाार साबित होता है. 2. पाचन क्रिया के लिए भी मोसंबी का जूस काफी फायदेमंद रहता है. अपनी मीठी खुशबू और एसिड की मात्रा के चलते मोसंबी का जूस पाचन क्रिया में भी मदद करता है. मोसंबी का जूस पेट की कई सारी समस्याओं से भी निजात दिलाता है. 3. क्या मोसंबी का जूस डायबिटीज़ के मरीजों के लिए फायदेमंद है ? जी हां, बिल्कुल है. आप 2 चम्मच मोसंबी के जूस को, 4 चम्मच आंवले के जूस और 1 चम्मच शहद के साथ रोज खाली पेट पिएं और फायदा खुद देखिए. 4. रोज मोसंबी का जूस पीने से रक्त संचार सही ढंग से होता है. मोसंबी का जूस हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है जिससे हमें बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है. 5. कभी सोचा है कि मोसंबी का जूस आपका वजन कम कर सकता है ? दरसल मोसंबी में कैलोरीज़ की मात्रा बहुत कम होती है. इसी वजह से ये वजन घटाने में भी मदद करता है. मोसंबी के जूस को शहद के साथ पीने से वजन की समस्या से छुटकारा मिलता है. 6. गर्भवती महिलाओं के लिए भी मोसंबी का जूस काफी फायदेमंद रहता है. ये मां और बच्चे दोनों की सेहत को फायदा पहुंचाता है. 7. हमारी आंखों की रोशनी के लिए भी मोसंबी फायदेमंद रहता है. पानी में मोसंबी के जूस की कुछ बूंद मिलाकर आंखों को धोने से आंखों के हर तरह के इन्फेक्शन से बचा जा सकता है. 8- मोसंबी के जूस को चेहरे पर लगाने से कील, मुंहासे और दाग-धब्बे जैसी समस्याओं से निजात मिलता है. 9. मोसंबी का जूस पीने से खून साफ होता है. इसे पीने से त्वचा का रंग भी निखरता है. 10. मोसंबी के जूस को पानी में डालकर नहाने से आप पसीने की बदबू जैसी समस्या से भी बच सकते हैं. 11. मोसंबी के जूस से कॉलेस्ट्रोल में कमी आती है और ब्लड प्रेसर की समस्या भी दूर होती है. 12. विटामिन सी की मात्रा होने से सर्दी जुकाम की परेशानी भी दूर होती है. 13. मोसंबी के जूस में कॉपर पाया जाता है जिससे ये बालों को कंडिशनर करने का काम करता है. इससे बाल धोने से बाल मुलायम और चमकदार बनते हैं. 14. मोसंबी के जूस से सूजन वाली जगह पर मालिश करने से सूजन और दर्द से भी राहत मिलती है. 15. मोसंबी के जूस से होंठो पर मालिश करने से फंटे होंठो की परेशानी भी दूर होती है.
ब्रसल्स अगर आप भी फिट और हेल्दी रहने के लिए ग्रीन टी का सेवन करते हैं तो यह खबर आपके लिए है। जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी पीना आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉरिटी (EFSA) की तरफ से की गई एक नई रिसर्च में यह बात सामने आयी है ग्रीन टी के सप्लिमेंट्स के हाई डोज से लिवर डैमेज हो सकता है। ऐंटीऑक्सिडेंट की मात्रा ज्यादा ब्रूअ्ड टी या इंस्टेंट टी ड्रिंक्स को सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इन ड्रिंक्स में ग्रीन टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद ऐंटिऑक्सिडेंट की मात्रा कम होती है। लेकिन इन ऐंटीऑक्सिडेंट्स का ज्यादा सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है और यही वजह है कि ग्रीन टी सप्लिमेंट्स में मौजूद ऐंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। 800 mg से ज्यादा का सेवन खतरनाक EFSA की मानें तो ज्यादातर ग्रीन टी सप्लिमेंट्स में 5 से 1000 मिलीग्राम तक ग्रीन टी होती है जबकि ब्रूअ्ड टी या टी इन्फ्यूजन में 90-300 मिलीग्राम तक। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो हर दिन 800 मिलीग्राम से ज्यादा ग्रीन टी का सेवन करना सेहत के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। हालांकि EFSA की मानें तो एक्सपर्ट्स ने अब तक कोई ऐसा डोज तैयार नहीं किया है जिसे पूरी तरह से सुरक्षित माना जा सके। वजन कम करने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल ग्रीन टी प्रॉडक्ट्स के इस्तेमाल से उत्तरी यूरोप के कई देशों में लिवर डैमेज के केसेज में काफी बढ़ोतरी हुई है जिसे देखते हुए EFSA ने ग्रीन टी और ग्रीन टी सप्लिमेंट्स में मौजूद कैटचिन्स का मूल्यांकन करने का फैसला किया। साथ ही EFSA ने कैटचिन्स के सेवन और लिवर डैमेज के बीच क्या संबंध है यह जानने की भी कोशिश की। दरअसल, वजन कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्रीन टी सप्लिमेंट्स का सेवन या तो खाली पेट किया जाता है या फिर हर दिन एक सिंगल डोज के तौर पर।
नई दिल्ली अतुल और संजय को ब्रेन स्ट्रोक हुआ...लेकिन दोनों ही न केवल लकवे से बच गए बल्कि दोनों की आवाज भी वापस आ गई। डॉक्टर का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद साढ़े चार घंटे का गोल्डन पीरियड होता है। इस दौरान मरीज का इलाज हो जाए तो कुछ हद तक लकवे से वापस आने का चांस होता है। ऐसा ही इन दोनों मरीजों के साथ हुआ। एक घंटे के अंदर अतुल और संजय को इलाज मिल गया, जिसकी वजह से लकवे का असर भी खत्म हो गया और दोनों की आवाज भी वापस आ गई। इंट्रावीनस से खुल जाती हैं ब्लॉक्ड नसें अपोलो अस्पताल के न्यूरॉलजिस्ट डॉ. विनीत सूरी ने कहा कि इंट्रावीनस एक ऐसी दवा है, जिसका इस्तेमाल अगर स्ट्रोक के अटैक पड़ने के साढ़े चार घंटे के अंदर किया जाए तो इसका बहुत फायदा मिलता है। यह दवा देने से जो भी नसें ब्लॉक हो जाती हैं वे 30 मिनट के अंदर पूरी तरह से खुल जाती हैं। विनीत ने कहा कि चिंता की बात यह है कि यह दवा देश में 1994 से इस्तेमाल हो रही है, लेकिन जागरुकता की कमी के वजह से सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों को ही इसका फायदा मिल पाता है। जितनी जल्दी इलाज मिले उतना अच्छा अतुल गुलाटी ने बताया कि ओखला में ऑफिस में मुझे स्ट्रोक आया था। मैं बोल नहीं पा रहा था। मेरे साथी ने मेरे ब्लड प्रेशर की जांच की तो पता चला कि 450 से भी ज्यादा है, वो तुरंत मुझे अपोलो लेकर आ गए। 20 से 30 मिनट के अंदर मैं अस्पताल में पहुंच गया। डॉक्टर सूरी ने कहा कि यही वजह है कि अतुल आज बात कर पा रहे हैं। अगर 3-4 घंटे के बाद आते तो जितनी रिकवरी अभी हुई है उतनी नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि यह सच है कि गोल्डन आवर साढ़े चार घंटे का है, लेकिन जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचता है, रिकवरी उतनी बेहतर होगी, वरना नसों में ब्लॉकेज की वजह से किसी के हाथ में लकवा हो जाता है तो किसी के पैर में, तो किसी की आवाज इतनी लड़खड़ा जाती है कि वह वापस नहीं आती। दवा से ब्लॉकेज न खुले तो स्टेंट का इस्तेमाल डॉक्टर ने कहा कि संजय के साथ भी ऐसा ही हुआ। ऑफिस से घर पहुंचे। पत्नी ने पानी पीने को दिया तो मुंह से पानी गिरने लगा, उनकी पत्नी को समझने में देर नहीं लगी कि यह स्ट्रोक है, वह तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल पहुंची और इलाज हो गया। डॉक्टर सूरी ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ कि उनके घर में पहले भी किसी को स्ट्रोक आया था, इसलिए वह इसके बारे में जानती थीं। हालांकि डॉक्टर ने कहा कि संजय की नसों में जो ब्लॉकेज थी वह दवा से नहीं खुली तो फिर स्टेंट का यूज कर ब्लॉकेज ओपन किया गया। अब दोनों मरीज ठीक हैं।
दूध का नाम सुनते ही कई लोगों की भौं सिकुड़ जाती है. लेकिन, अगर ठंडे दूध के फायदों का पता चल जाए तो इसे रोजाना पीना शुरू कर देंगे. ठंडा दूध ना केवल स्‍वास्‍थ्‍य से भरा होता है बल्‍कि टेस्‍ट में भी काफी लाजवाब माना जाता है. अगर गर्म दूध पीने के कई फायदे हैं तो ठंडा दूध भी कुछ कम नहीं है. ठंडा दूध पीने एसीडिटी, मोटापा, बार-बार भूख लगना आदि जैसी छोटी मोटी बीमारियां दूर हो सकती हैं. यही नहीं अगर आप जिम से आकर बुरी तरह से थक जाते हैं और तुरंत एनर्जी के लिए ठंडा दूध किसी औषधि से कम नहीं. इससे खोई हुई एनर्जी भी वापस आएगी और मसल्‍स को रिपेयर होने के लिए प्रोटीन भी मिलता है. फ्लेवर डालकर पीएं हेल्थ एक्सपर्ट श्वेता गर्ग का कहना है कि अगर आप ठंडा दूध सीधे नहीं पी सकते तो इसे स्‍वादिष्‍ट बनाने के लिए फ्लेवर भी मिक्‍स कर सकते हैं. ठंडा दूध पीने से पहले एक बात का बहुत ख्‍याल रखें कि अगर आपको सर्दी-जुखाम है तो इसे भूल कर भी ना पीएं. हम आप से ठंडे दूध के फायदों के बारे में बता रहे हैं, जो शायद ही आपको मालूम हो. अगर आप बिल्‍कुल ठंडा दूध पीएं तो शरीर को पहले उसे नॉर्मल तापमान पर लाने के लिए कैलोरी बर्न करनी पड़ेगी और फिर उसे पचाना पड़ेगा. इससे आपका मोटापा कंट्रोल में रहेगा. हल्‍का गुनगुना दूध पीने से नींद आती है क्‍योंकि, दूध में अमीनो एसिड ट्रिप्टोफान पाया जाता है जो कि दूध गर्म होने तथा स्‍टार्च वाले फूड के साथ पीने से दिमाग में घुस जाता है. लेकिन, ठंडे दूध में प्रोटीन होने की वजह से ऐसा नहीं हो पाता और इसलिए इसको दिन में कभी भी पी सकते हैं. क्‍या आपने कभी ठंडे दूध को एसिडिटी मिटाने के लिए पिया है? धीरे-धीरे ठंडा दूध पीने से पेप्‍टिक अल्‍सर के कारण से पैदा होने वाला दर्द भी दूर हो जाता है. खाना खाने के बाद अगर आपको बार-बार भूख लगती है तो आप ठंडा दूध पी सकते हैं. आप चाहें तो ठंडे दूध में ओट्स मिलाकर भी खा सकते हैं. बढाए गर्मी के दिनों में अगर आप कोल्‍ड कॉफी पीते हैं तो एक दम से तरोताजा हो जाएंगे. ठंडे दूध में एलेक्‍ट्रोलाइट्स होते हैं जो शरीर को डीहाइड्रेशन होने से रोकते हैं. अगर आप दिन में दो गिलास ठंडा दूध पीते हैं तो आपका शरीर हमेशा हाइड्रेट बना रहेगा. दूध पीने का सबसे अच्‍छा समय है कि इसे सुबह पिया जाए. इसमें गैस को दबाने के गुण होते हैं जो कि खाना पचाने के लिए लाभकारी है. यह फैट, घी या तेल को आराम से पचा सकता है. अगर इसमें अदरक या मिर्च मिला कर पिया जाए तो ज्‍यादा असरदार होता है. जिम में भारी कसरत करने के बाद अगर कोई एनर्जी से भरी ड्रिंक पीनी है तो आप ठंडा दूध पी सकते हैं. इससे मसल्‍स को रिपेयर होने के लिए प्रोटीन और शरीर को एनर्जी मिलती है. चेहरे पर ठंडा दूध लगाने से त्‍वचा क्‍लीन और टाइट बनती है. इससे त्‍वचा हाइड्रेट और स्‍मूथ हो जाती है.
अक्षय तृतीय के साथ ही 18 अप्रैल को चारधाम तीर्थयात्रा का क्रम शुरू हो जाएगा और बदरीनाथ धाम मंदिर के कपाट 30 अप्रैल की सुबह 4.30 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। चारधाम की यात्रा में बदरीनाथ धाम काफी प्रसिद्ध है। यह मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे बसा यह मंदिर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। आइए जानते हैं बदरीनाथ मंदिर के बारे में यह जरूरी बातें.. बदरीनाथ मंदिर को आदिकाल से स्थापित और सतयुग का पावन धाम माना जाता है। बड़ी बात यह है कि बदरीनाथ के दर्शन से पूर्व केदारनाथ के दर्शन करने की बात कही जाती है। बदरीनाथ मंदिर के कपाट भी साल में सिर्फ छह महीने के खुलते हैं जो अप्रैल के अंत या मई के प्रथम पखवाड़े में दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं। लगभग 6 महीने तक पूजा-अर्चना चलने के बाद नवंबर के दूसरे सप्ताह में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। बदरीनाथ मंदिर में एक कुंड है, जिसे तप्त कुंड कहा जाता है, जिसमें से गर्म पानी निकलता है। इस कुंडों में स्नान का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही इससे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। इसी कुंड से निकलने वाली गर्म पानी की धारा दिव्य शिला से होते हुए दो तप्त कुंडों तक जाती है, जिसमें यात्री स्नान करते हैं। माना जाता है गर्म पानी के कुंड में स्नान से करने से शरीर की थकावट के साथ ही चर्म रोगों से भी निजात मिलती है। इस पानी में गंधक की मात्रा काफी ज्यादा है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री इन तप्त कुंडों में स्नान के लिए भीड़ जुटती है। तमिल पंडितों के अनुसार, बदरीनाथ भगवान विष्णु के 108 प्रमुख प्रमुख मंदिरों में से एक हैं। जब भगवान विष्णु योगध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत अधिक हिमपात होने लगा। भगवान विष्णु हिम में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर (बदरी) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगीं। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देखकर कहा कि हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा। बदरीनाथ धाम के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने कहा है की कलियुग में वे अपने भक्तों को बद्रीनाथ में मिलेंगे। पुराणों में बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर बैकुंठ की उपमा दी गई है क्योंकि यहां साक्षात् भगवान विष्णु विराजमान हैं। बदरीनाथ के बारे यह भी माना जाता है कि यह कभी भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास हुआ करता था। रोते हुए बाल रुप में आए विष्णु भगवान ने इस स्थान को शिव से मांग लिया था। इस तरह शिव और पार्वती वो जगह छोडकर चले गए और विष्णु का वास वहां हो गया। बदरीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच बसा है। इसे नर नारायण पर्वत कहा जाता है। कहते हैं यहां पर भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने तपस्या की थी। नर अगले जन्म में अर्जुन और नारायण श्री कृष्ण हुए। बद्रीनाथ के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं जो रावल कहलाते हैं। यह जब तक रावल के पद पर रहते हैं इन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। रावल के लिए स्त्रियों का स्पर्श भी पाप माना जाता है। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देखकर कहा कि हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा। बदरीनाथ धाम के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने कहा है की कलियुग में वे अपने भक्तों को बद्रीनाथ में मिलेंगे। पुराणों में बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर बैकुंठ की उपमा दी गई है क्योंकि यहां साक्षात् भगवान विष्णु विराजमान हैं। बदरीनाथ के बारे यह भी माना जाता है कि यह कभी भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास हुआ करता था। रोते हुए बाल रुप में आए विष्णु भगवान ने इस स्थान को शिव से मांग लिया था। इस तरह शिव और पार्वती वो जगह छोडकर चले गए और विष्णु का वास वहां हो गया। इस मंदिर में बहुत से उत्सव मनाए जाते हैं लेकिन इनमें सबसे महत्वूर्ण माता मूर्ति मेला है, जो गंगा नदी के तट पर होता है। बदरीकाश्रम क्षेत्र में माता मूर्ति मंदिर नारायण पर्वत की तलहटी पर स्थित है। तब भगवान बदरीनाथ ने प्रतिवर्ष बामन द्वादशी को माता मूर्ति से मिलने के लिए आने का वचन दिया था। आज भी बदरीनाथ अपनी माता को दिए वचन का निर्वहन करते आ रहे हैं। बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रुप में भगवान उद्धव जी महाराज उत्सव डोली में बैठकर माता मूर्ति से मिलने के लिए जाते हैं। दिनभर माता के साथ रहकर शाम को बदरीनाथ धाम में विराजमान हो जाते हैं।.
आमतौर पर देखा जाता है कि खाने की बर्बादी न हो इसलिए लोग बासी खाना दोबारा गर्म करके खा लेते हैं। बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनको यदि हम दोबारा गर्म करके खाते हैं तो वह हमारी सेहत पर बुरा असर डालते हैं। खाने की कुछ चीजों को दोबारा गर्म करने पर उनमें मौजूद प्रोटीन जहां खत्म हो जाता है वहीं, कुछ भोजन ऐसे भी हैं जिनमें मौजूद कुछ तत्व दोबारा गर्म करने पर कैंसर कारकों में बदल जाते हैं। आगे की स्लाइड्स में आप भी पढ़ें, कि खाने की वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें दोबारा गर्म करने पर वह जहर के समान हो जाती हैं... चिकन को दोबारा गर्म करने के बाद इसमें मौजूद प्रोटीन कॉम्पोजिशन बदल जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आलू वैसे तो स्वास्थ्यवर्धक होता है लेकिन अगर इन्हें बनाकर बहुत अधिक देर तक रख दिया जाए तो इनमें मौजूद पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इसे दोबारा गर्म करके खाने से पाचन क्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर आप चुकंदर को पका कर खाते हैं और खाने के बाद जब यह बच जाता है तो इसे दोबारा गर्म करके नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से इसमें मौजूद नाइट्रेट समाप्त हो जाता है। मशरूम प्रोटीन का खजाना होता है। कोशिश की जानी चाहिए कि इसे हमेशा फ्रेश ही खाए जाए। मशरूम को दोबारा गर्म करके खाने से चिकन की ही तरह इसका भी प्रोटीन का कॉम्पोजिशन बदल जाता है, जो हानिकारक हो सकता है। अंडा भी प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत है लेकिन अंडे में मौजूद प्रोटीन दोबारा गर्म करने के बाद जहरीला हो जाता है। पालक को दोबारा गर्म करके खाना कैंसर का कारण बन सकता है। इसमें मौजूद नाइट्रेट दोबारा गर्म करने के बाद कुछ ऐसे तत्वों में बदल जाते हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। तेल को एक बार इस्तेमाल करने के बाद हटा देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि तेल को दोबारा गर्म करने पर इसमें एल्डीहाइड्स नामक केमिकल निकलता है जो टॉक्सिक होता है। यह केमिकल न्यूरो से संबंधित रोग और कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। कच्चे चावल में कुछ कीटाणु पाए जाते हैं, जो चावल पकने के बाद नष्ट तो हो जाते हैं। लेकिन चावल ठंडा होने पर वे कीटाणु फिर से पनपते लगते हैं और दोबारा गर्म करने पर भी वे कीटाणु नहीं मरते। चावल को दोबारा गर्म करके खाने पर फूड पॉयजनिंग हो सकती है।

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