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ब्रसल्स अगर आप भी फिट और हेल्दी रहने के लिए ग्रीन टी का सेवन करते हैं तो यह खबर आपके लिए है। जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी पीना आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉरिटी (EFSA) की तरफ से की गई एक नई रिसर्च में यह बात सामने आयी है ग्रीन टी के सप्लिमेंट्स के हाई डोज से लिवर डैमेज हो सकता है। ऐंटीऑक्सिडेंट की मात्रा ज्यादा ब्रूअ्ड टी या इंस्टेंट टी ड्रिंक्स को सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इन ड्रिंक्स में ग्रीन टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद ऐंटिऑक्सिडेंट की मात्रा कम होती है। लेकिन इन ऐंटीऑक्सिडेंट्स का ज्यादा सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है और यही वजह है कि ग्रीन टी सप्लिमेंट्स में मौजूद ऐंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। 800 mg से ज्यादा का सेवन खतरनाक EFSA की मानें तो ज्यादातर ग्रीन टी सप्लिमेंट्स में 5 से 1000 मिलीग्राम तक ग्रीन टी होती है जबकि ब्रूअ्ड टी या टी इन्फ्यूजन में 90-300 मिलीग्राम तक। अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो हर दिन 800 मिलीग्राम से ज्यादा ग्रीन टी का सेवन करना सेहत के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। हालांकि EFSA की मानें तो एक्सपर्ट्स ने अब तक कोई ऐसा डोज तैयार नहीं किया है जिसे पूरी तरह से सुरक्षित माना जा सके। वजन कम करने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल ग्रीन टी प्रॉडक्ट्स के इस्तेमाल से उत्तरी यूरोप के कई देशों में लिवर डैमेज के केसेज में काफी बढ़ोतरी हुई है जिसे देखते हुए EFSA ने ग्रीन टी और ग्रीन टी सप्लिमेंट्स में मौजूद कैटचिन्स का मूल्यांकन करने का फैसला किया। साथ ही EFSA ने कैटचिन्स के सेवन और लिवर डैमेज के बीच क्या संबंध है यह जानने की भी कोशिश की। दरअसल, वजन कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्रीन टी सप्लिमेंट्स का सेवन या तो खाली पेट किया जाता है या फिर हर दिन एक सिंगल डोज के तौर पर।
नई दिल्ली अतुल और संजय को ब्रेन स्ट्रोक हुआ...लेकिन दोनों ही न केवल लकवे से बच गए बल्कि दोनों की आवाज भी वापस आ गई। डॉक्टर का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद साढ़े चार घंटे का गोल्डन पीरियड होता है। इस दौरान मरीज का इलाज हो जाए तो कुछ हद तक लकवे से वापस आने का चांस होता है। ऐसा ही इन दोनों मरीजों के साथ हुआ। एक घंटे के अंदर अतुल और संजय को इलाज मिल गया, जिसकी वजह से लकवे का असर भी खत्म हो गया और दोनों की आवाज भी वापस आ गई। इंट्रावीनस से खुल जाती हैं ब्लॉक्ड नसें अपोलो अस्पताल के न्यूरॉलजिस्ट डॉ. विनीत सूरी ने कहा कि इंट्रावीनस एक ऐसी दवा है, जिसका इस्तेमाल अगर स्ट्रोक के अटैक पड़ने के साढ़े चार घंटे के अंदर किया जाए तो इसका बहुत फायदा मिलता है। यह दवा देने से जो भी नसें ब्लॉक हो जाती हैं वे 30 मिनट के अंदर पूरी तरह से खुल जाती हैं। विनीत ने कहा कि चिंता की बात यह है कि यह दवा देश में 1994 से इस्तेमाल हो रही है, लेकिन जागरुकता की कमी के वजह से सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों को ही इसका फायदा मिल पाता है। जितनी जल्दी इलाज मिले उतना अच्छा अतुल गुलाटी ने बताया कि ओखला में ऑफिस में मुझे स्ट्रोक आया था। मैं बोल नहीं पा रहा था। मेरे साथी ने मेरे ब्लड प्रेशर की जांच की तो पता चला कि 450 से भी ज्यादा है, वो तुरंत मुझे अपोलो लेकर आ गए। 20 से 30 मिनट के अंदर मैं अस्पताल में पहुंच गया। डॉक्टर सूरी ने कहा कि यही वजह है कि अतुल आज बात कर पा रहे हैं। अगर 3-4 घंटे के बाद आते तो जितनी रिकवरी अभी हुई है उतनी नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि यह सच है कि गोल्डन आवर साढ़े चार घंटे का है, लेकिन जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचता है, रिकवरी उतनी बेहतर होगी, वरना नसों में ब्लॉकेज की वजह से किसी के हाथ में लकवा हो जाता है तो किसी के पैर में, तो किसी की आवाज इतनी लड़खड़ा जाती है कि वह वापस नहीं आती। दवा से ब्लॉकेज न खुले तो स्टेंट का इस्तेमाल डॉक्टर ने कहा कि संजय के साथ भी ऐसा ही हुआ। ऑफिस से घर पहुंचे। पत्नी ने पानी पीने को दिया तो मुंह से पानी गिरने लगा, उनकी पत्नी को समझने में देर नहीं लगी कि यह स्ट्रोक है, वह तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल पहुंची और इलाज हो गया। डॉक्टर सूरी ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ कि उनके घर में पहले भी किसी को स्ट्रोक आया था, इसलिए वह इसके बारे में जानती थीं। हालांकि डॉक्टर ने कहा कि संजय की नसों में जो ब्लॉकेज थी वह दवा से नहीं खुली तो फिर स्टेंट का यूज कर ब्लॉकेज ओपन किया गया। अब दोनों मरीज ठीक हैं।
दूध का नाम सुनते ही कई लोगों की भौं सिकुड़ जाती है. लेकिन, अगर ठंडे दूध के फायदों का पता चल जाए तो इसे रोजाना पीना शुरू कर देंगे. ठंडा दूध ना केवल स्‍वास्‍थ्‍य से भरा होता है बल्‍कि टेस्‍ट में भी काफी लाजवाब माना जाता है. अगर गर्म दूध पीने के कई फायदे हैं तो ठंडा दूध भी कुछ कम नहीं है. ठंडा दूध पीने एसीडिटी, मोटापा, बार-बार भूख लगना आदि जैसी छोटी मोटी बीमारियां दूर हो सकती हैं. यही नहीं अगर आप जिम से आकर बुरी तरह से थक जाते हैं और तुरंत एनर्जी के लिए ठंडा दूध किसी औषधि से कम नहीं. इससे खोई हुई एनर्जी भी वापस आएगी और मसल्‍स को रिपेयर होने के लिए प्रोटीन भी मिलता है. फ्लेवर डालकर पीएं हेल्थ एक्सपर्ट श्वेता गर्ग का कहना है कि अगर आप ठंडा दूध सीधे नहीं पी सकते तो इसे स्‍वादिष्‍ट बनाने के लिए फ्लेवर भी मिक्‍स कर सकते हैं. ठंडा दूध पीने से पहले एक बात का बहुत ख्‍याल रखें कि अगर आपको सर्दी-जुखाम है तो इसे भूल कर भी ना पीएं. हम आप से ठंडे दूध के फायदों के बारे में बता रहे हैं, जो शायद ही आपको मालूम हो. अगर आप बिल्‍कुल ठंडा दूध पीएं तो शरीर को पहले उसे नॉर्मल तापमान पर लाने के लिए कैलोरी बर्न करनी पड़ेगी और फिर उसे पचाना पड़ेगा. इससे आपका मोटापा कंट्रोल में रहेगा. हल्‍का गुनगुना दूध पीने से नींद आती है क्‍योंकि, दूध में अमीनो एसिड ट्रिप्टोफान पाया जाता है जो कि दूध गर्म होने तथा स्‍टार्च वाले फूड के साथ पीने से दिमाग में घुस जाता है. लेकिन, ठंडे दूध में प्रोटीन होने की वजह से ऐसा नहीं हो पाता और इसलिए इसको दिन में कभी भी पी सकते हैं. क्‍या आपने कभी ठंडे दूध को एसिडिटी मिटाने के लिए पिया है? धीरे-धीरे ठंडा दूध पीने से पेप्‍टिक अल्‍सर के कारण से पैदा होने वाला दर्द भी दूर हो जाता है. खाना खाने के बाद अगर आपको बार-बार भूख लगती है तो आप ठंडा दूध पी सकते हैं. आप चाहें तो ठंडे दूध में ओट्स मिलाकर भी खा सकते हैं. बढाए गर्मी के दिनों में अगर आप कोल्‍ड कॉफी पीते हैं तो एक दम से तरोताजा हो जाएंगे. ठंडे दूध में एलेक्‍ट्रोलाइट्स होते हैं जो शरीर को डीहाइड्रेशन होने से रोकते हैं. अगर आप दिन में दो गिलास ठंडा दूध पीते हैं तो आपका शरीर हमेशा हाइड्रेट बना रहेगा. दूध पीने का सबसे अच्‍छा समय है कि इसे सुबह पिया जाए. इसमें गैस को दबाने के गुण होते हैं जो कि खाना पचाने के लिए लाभकारी है. यह फैट, घी या तेल को आराम से पचा सकता है. अगर इसमें अदरक या मिर्च मिला कर पिया जाए तो ज्‍यादा असरदार होता है. जिम में भारी कसरत करने के बाद अगर कोई एनर्जी से भरी ड्रिंक पीनी है तो आप ठंडा दूध पी सकते हैं. इससे मसल्‍स को रिपेयर होने के लिए प्रोटीन और शरीर को एनर्जी मिलती है. चेहरे पर ठंडा दूध लगाने से त्‍वचा क्‍लीन और टाइट बनती है. इससे त्‍वचा हाइड्रेट और स्‍मूथ हो जाती है.
अक्षय तृतीय के साथ ही 18 अप्रैल को चारधाम तीर्थयात्रा का क्रम शुरू हो जाएगा और बदरीनाथ धाम मंदिर के कपाट 30 अप्रैल की सुबह 4.30 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। चारधाम की यात्रा में बदरीनाथ धाम काफी प्रसिद्ध है। यह मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। उत्तराखंड में अलकनंदा नदी के किनारे बसा यह मंदिर भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। आइए जानते हैं बदरीनाथ मंदिर के बारे में यह जरूरी बातें.. बदरीनाथ मंदिर को आदिकाल से स्थापित और सतयुग का पावन धाम माना जाता है। बड़ी बात यह है कि बदरीनाथ के दर्शन से पूर्व केदारनाथ के दर्शन करने की बात कही जाती है। बदरीनाथ मंदिर के कपाट भी साल में सिर्फ छह महीने के खुलते हैं जो अप्रैल के अंत या मई के प्रथम पखवाड़े में दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं। लगभग 6 महीने तक पूजा-अर्चना चलने के बाद नवंबर के दूसरे सप्ताह में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। बदरीनाथ मंदिर में एक कुंड है, जिसे तप्त कुंड कहा जाता है, जिसमें से गर्म पानी निकलता है। इस कुंडों में स्नान का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही इससे स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। इसी कुंड से निकलने वाली गर्म पानी की धारा दिव्य शिला से होते हुए दो तप्त कुंडों तक जाती है, जिसमें यात्री स्नान करते हैं। माना जाता है गर्म पानी के कुंड में स्नान से करने से शरीर की थकावट के साथ ही चर्म रोगों से भी निजात मिलती है। इस पानी में गंधक की मात्रा काफी ज्यादा है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री इन तप्त कुंडों में स्नान के लिए भीड़ जुटती है। तमिल पंडितों के अनुसार, बदरीनाथ भगवान विष्णु के 108 प्रमुख प्रमुख मंदिरों में से एक हैं। जब भगवान विष्णु योगध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत अधिक हिमपात होने लगा। भगवान विष्णु हिम में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर (बदरी) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगीं। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देखकर कहा कि हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा। बदरीनाथ धाम के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने कहा है की कलियुग में वे अपने भक्तों को बद्रीनाथ में मिलेंगे। पुराणों में बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर बैकुंठ की उपमा दी गई है क्योंकि यहां साक्षात् भगवान विष्णु विराजमान हैं। बदरीनाथ के बारे यह भी माना जाता है कि यह कभी भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास हुआ करता था। रोते हुए बाल रुप में आए विष्णु भगवान ने इस स्थान को शिव से मांग लिया था। इस तरह शिव और पार्वती वो जगह छोडकर चले गए और विष्णु का वास वहां हो गया। बदरीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच बसा है। इसे नर नारायण पर्वत कहा जाता है। कहते हैं यहां पर भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने तपस्या की थी। नर अगले जन्म में अर्जुन और नारायण श्री कृष्ण हुए। बद्रीनाथ के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं जो रावल कहलाते हैं। यह जब तक रावल के पद पर रहते हैं इन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। रावल के लिए स्त्रियों का स्पर्श भी पाप माना जाता है। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देखकर कहा कि हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा। बदरीनाथ धाम के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने कहा है की कलियुग में वे अपने भक्तों को बद्रीनाथ में मिलेंगे। पुराणों में बदरीनाथ धाम को पृथ्वी पर बैकुंठ की उपमा दी गई है क्योंकि यहां साक्षात् भगवान विष्णु विराजमान हैं। बदरीनाथ के बारे यह भी माना जाता है कि यह कभी भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास हुआ करता था। रोते हुए बाल रुप में आए विष्णु भगवान ने इस स्थान को शिव से मांग लिया था। इस तरह शिव और पार्वती वो जगह छोडकर चले गए और विष्णु का वास वहां हो गया। इस मंदिर में बहुत से उत्सव मनाए जाते हैं लेकिन इनमें सबसे महत्वूर्ण माता मूर्ति मेला है, जो गंगा नदी के तट पर होता है। बदरीकाश्रम क्षेत्र में माता मूर्ति मंदिर नारायण पर्वत की तलहटी पर स्थित है। तब भगवान बदरीनाथ ने प्रतिवर्ष बामन द्वादशी को माता मूर्ति से मिलने के लिए आने का वचन दिया था। आज भी बदरीनाथ अपनी माता को दिए वचन का निर्वहन करते आ रहे हैं। बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रुप में भगवान उद्धव जी महाराज उत्सव डोली में बैठकर माता मूर्ति से मिलने के लिए जाते हैं। दिनभर माता के साथ रहकर शाम को बदरीनाथ धाम में विराजमान हो जाते हैं।.
आमतौर पर देखा जाता है कि खाने की बर्बादी न हो इसलिए लोग बासी खाना दोबारा गर्म करके खा लेते हैं। बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनको यदि हम दोबारा गर्म करके खाते हैं तो वह हमारी सेहत पर बुरा असर डालते हैं। खाने की कुछ चीजों को दोबारा गर्म करने पर उनमें मौजूद प्रोटीन जहां खत्म हो जाता है वहीं, कुछ भोजन ऐसे भी हैं जिनमें मौजूद कुछ तत्व दोबारा गर्म करने पर कैंसर कारकों में बदल जाते हैं। आगे की स्लाइड्स में आप भी पढ़ें, कि खाने की वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें दोबारा गर्म करने पर वह जहर के समान हो जाती हैं... चिकन को दोबारा गर्म करने के बाद इसमें मौजूद प्रोटीन कॉम्पोजिशन बदल जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आलू वैसे तो स्वास्थ्यवर्धक होता है लेकिन अगर इन्हें बनाकर बहुत अधिक देर तक रख दिया जाए तो इनमें मौजूद पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इसे दोबारा गर्म करके खाने से पाचन क्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर आप चुकंदर को पका कर खाते हैं और खाने के बाद जब यह बच जाता है तो इसे दोबारा गर्म करके नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से इसमें मौजूद नाइट्रेट समाप्त हो जाता है। मशरूम प्रोटीन का खजाना होता है। कोशिश की जानी चाहिए कि इसे हमेशा फ्रेश ही खाए जाए। मशरूम को दोबारा गर्म करके खाने से चिकन की ही तरह इसका भी प्रोटीन का कॉम्पोजिशन बदल जाता है, जो हानिकारक हो सकता है। अंडा भी प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत है लेकिन अंडे में मौजूद प्रोटीन दोबारा गर्म करने के बाद जहरीला हो जाता है। पालक को दोबारा गर्म करके खाना कैंसर का कारण बन सकता है। इसमें मौजूद नाइट्रेट दोबारा गर्म करने के बाद कुछ ऐसे तत्वों में बदल जाते हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। तेल को एक बार इस्तेमाल करने के बाद हटा देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि तेल को दोबारा गर्म करने पर इसमें एल्डीहाइड्स नामक केमिकल निकलता है जो टॉक्सिक होता है। यह केमिकल न्यूरो से संबंधित रोग और कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। कच्चे चावल में कुछ कीटाणु पाए जाते हैं, जो चावल पकने के बाद नष्ट तो हो जाते हैं। लेकिन चावल ठंडा होने पर वे कीटाणु फिर से पनपते लगते हैं और दोबारा गर्म करने पर भी वे कीटाणु नहीं मरते। चावल को दोबारा गर्म करके खाने पर फूड पॉयजनिंग हो सकती है।
नई दिल्लीः असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा के मुताबिक, पाप का फल है कैंसर. उनके इस बयान से हर कोई उनकी आलोचना कर रहा है. बहरहाल, आज हम आपको बता रहे हैं कैंसर के कारणों, लक्षणों और उससे होने वाले बचाव के बारे में. बुढ़ापे के साथ जल्दी बढ़ता है कैंसर- हर साल कैंसर के लगभग 11 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. इनमें से भारत में किसी भी वक्त 33 लाख लोग कैंसर से जूझ रहे होते हैं. कैंसर उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है और बुढ़ापे में कैंसर होने की संभावना काफी अधिक होती है. पहचानें इसके लक्षण- कैंसर कई तरह के होते हैं. ऐसे में कोई एक निश्चित लक्षण बताना संभव नहीं. कैंसर के लक्षण व्यक्ति की उम्र और उसके रहन-सहन भी नि‍र्भर करते हैं. डॉक्टर जांच के बाद ही कैंसर के टाइप की पुष्टि कर सकते हैं. कैंसर के लिए कौन है जिम्मेदार- चंडीगढ़, पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च के कम्यूनिटी मेडिसिन प्रोफेसर डॉ.अरूण.के.अग्रवाल के मुताबिक, लाइफस्टाइल और पर्यावरण कैंसर होने का एक बहुत बड़ा कारण है. इसमें बढ़ता वजन, डायट, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, मोटापा, शराब का सेवन, तंबाकू, काम का बोझ और कुछ इंफेक्शन शामिल हैं. ऐसे लोगों हो सकता है कैंसर का अधिक खतरा- जर्मनी की एक रिसर्च में ये बात सामने आई हैं कि जिन लोगों की हाइट अधिक होती है उन्हें कैंसर का खतरा अधिक होता है. यदि व्यक्ति की लंबाई सामान्य व्यक्ति से 6.5 इंच अधिक है तो उन्हें कार्डियोवस्कुलर डिजीज और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 6 फीसदी कम हो जाता है. लेकिन कैंसर होने का खतरा चार फीसदी बढ़ जाता है. लंबे लोगों को आमतौर पर ब्रेस्ट, आंत और त्वचा का कैंसर अधिक होता है. कैंसर का इलाज- कैंसर के इलाज के कई तरीके उपलब्ध हैं. यह मरीज की आयु, बीमारी की तीव्रता और फैलाव पर निर्भर है. लेकिन इलाज कैसा हो यह कोई अनुभवी और कुशल डॉक्टर ही बता सकता है. कैंसर का इलाज हर मरीज के लिए अलग-अलग होता है इससे मरीज के ज्यादा समय तक जिंदा रहने की संभावना बढ़ जाती है. घर का माहौल कैंसर रोगी को करता है जल्दी ठीक- एक रिसर्च के मुताबिक, घर का माहौल मरीज के ठीक होने में बेहतर भूमिका निभाता है क्योंकि वह अपने आरामदायक माहौल में रहता है और जल्दी स्वस्थ होने के लिए प्रेरित होता है. कैसे लड़े कैंसर से- कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाकर, लोगों की कैंसर को लेकर गलतफहमियों को दूर करके कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है. स्कूलों और वर्कप्लेस पर 30 मिनट किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करवाकर. फिर चाहे योगा हो या फिर कोई और फिजिकल एक्टिविटी. बच्चों और बड़ों दोनों को जंकफूड से दूर रखें. वर्कप्लेफस पर कर्मचारियों को हेल्दी बिहेवियर और सेहत के लिए मोटिवेट करें. घर और ऑफिस को स्मोकिंग, नशे और मादक पदार्थों से मुक्त माहौल दें. समय-समय पर बॉडी चैकअप करवाते रहें और कैंसर केयर के लिए विशेष कदम उठाएं. कैंसर के रोगियों को सपोर्ट करें और उनका साथ दें. सबसे जरूरी है हमें हेल्दी लाइफस्टाइल को प्रमोट करना है. अच्छी डायट लें. व्यायाम करें. कैंसर पेंशेट की सही से देखभाल करें. आयुर्वेद पद्धति के अनुसार इलाज- हल्दी, अदरक, मेथीदाना, अश्वगंधा, त्रिफला और अजवाइन ऐसी चीजें हैं जो हमारे शरीर की अग्नि को बनाए रखती हैं और अगर कीमोथैरेपी के साथ इन्हें दिया जाए तो कीमो के अन्य कुप्रभाव और दर्द दोनों ही काफी कम हो जाते हैं. इनसे रोगी में कैंसर की दवा को सुप्रभावी बनाने की क्षमता बढ़ जाती है और उसके शरीर में कमजोरी नहीं आती.
जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है तो दिल की धमनियों में फैट जमा होने लग जाता है. हृदय में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं होता है. मांसपेशियों को जरुरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण वह ठीक से काम करना बंद कर देती हैं. बिना किसी वर्कआउट या मेहनत के ही थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है. समय रहते कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल न किया जाए तो हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है. फैट को खत्म करने के व्यायाम सबसे अच्छा हल है. हार्ट ब्लॉकेज को दूर करने के लिए घरेलू डाइट के नुस्खे लौकी का जूस लौकी का ताजा जूस रेगुलर पीने से हार्ट ब्लॉकेज नहीं होती. लेकिन कभी भी कड़वे जूस का सेवन न करें. इसके अलावा सुबह की सैर रेगुलर करें. अश्वगंधा यह दिल की बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इन्फ़्लामेट्री, एंटी-ट्यूमर और रिजुवनेशन के गुण मौजूद होते हैं. दिल की कोशिकाओं को मजबूती मिलती है, जिससे दिल की तकलीफ पास नहीं आती. दालचीनी दालचीनी हार्ट ब्लॉकेज के लिए एक बेहतर औषधि है. यह सांस की तकलीफ दूर करने में भी सहायक है. लहसुन लहसुन के नियमित सेवन से कॉलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है. यह शरीर से गंदगी को बाहर निकालने का गुण रखता है. इलायची इलायची स्वाद और सुगंध में तो अच्छी होती ही है यह दिल के रोगों में भी लाभकारी हैं. आयुर्वेदिक गुणों में इसे दिल के इलाज में कारगर औषधि बताया गया है
करी पत्ता खाने के स्वाद और खूशबू दोनों को ही बढ़ा देता है और सॉउथ इंडियन खाने में तो इसका खूब उपयोग किया जाता है. करी पत्ता खाने के स्वाद के अलावा सेहत को भी स्वस्थ बनाएं रखने में मदद करता है. जनरल ऑफ प्लांट फूड्स फॉर न्यूट्रीशन के एक अध्ययन के अनुसार करी पत्ता ब्लड-शुगर का स्तर घटाता है. मधुमेह रोगियों के अलावा जो लोग वजन घटाना चाहते हैं, उन्हें भी करी पत्ता डाइट में शामिल करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, करी पत्ते में मौजूद पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं... 1. करी पत्ते में भरपूर मात्रा में आयरन और फॉलिक एसिड होता है और यह एनीमिया के खतरे को कम करता है. इसमें मौजूद विटामिन ए और सी लीवर को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं. 2. ब्लड-शुगर को कंट्रोल करने में मददगार है. करी पत्ते में मौजूद फाइबर इन्सुलिन को प्रभावित करके ब्लड-शुगर लेवल को कम करता है. 3. करी पत्ता खाने से वजन नियंत्रित रहता है और यह पाचन क्रिया को भी सही रखता है. करी पत्ते में कार्मिनटिव तत्व होता है, जिससे कब्ज नहीं होती. 4. यह दिल को मजबूत करके के साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित रखता है. 5. करी पत्ता एंटी ऑक्सि‍डेंट, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल होता है और यह स्किन इंफेक्शन से बचाव करता है.
अक्टूबर के महीन में कई ग्रहों की स्थितियां बदल रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण शनि का हो रहा है। 26 अक्टूबर को शनि महाराज वृश्चिक राशि से धनु में वापस आएंगे। इससे पहले 9 तारीख को शुक्र तारीख को शुक्र कन्या राशि में आ रहे हैं। इस महीने मंगल, बुध सूर्य की स्थिति भी बदल रही है। ऐसे में यह महीना आपके लिए कैसा रहेगा जानिए। सूर्य छठे स्थान में बुध के साथ युति में है। पंचम स्थान में सिंह राशि में मंगल के साथ शुक्र की युति है। सप्तम भाव में स्थित गुरु आपके लिए दांपत्य जीवन में उत्तम सुख प्रदान करने वाला बन सकता है। आपको भाग्यवृद्धि संबंधी अवसर मिलेंगे। शुक्र के पांचवें में होने से प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ेगी। नये संबंध जोड़ने अथवा पुराने संबंध सुधारने के लिए योग्य समय है। भागीदारी के लिए भी गणेशजी हरी झंडी दिखा रहे हैं। फिलहाल संतान के साथ संबंधों में गुस्से का कारण आंशिक तनाव आ सकता है, इसलिए गुस्से को नियंत्रण में रखें। विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और अध्ययन के लिए जोश में वृद्धि होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए उत्तम समय है। महीने के मध्य में सूर्य राशि बदलकर सप्तम स्थान में आएगा जो दांपत्य जीवन में अहं का टकराव करा सकता है। इसके साथ ही बुध के भी इसी स्थान में आने से संबंधों में नीरसता में थोड़ी वृद्धि होगी। मंगल और शुक्र दोनों छठे भाव में होने से आप कामकाज के स्थल पर उत्साह से काम करेंगे। विचारों में नवीनता रहेगी। दैनिक कार्यों को छोड़कर कुछ नया सृजन करने की उत्सुकता रहेगी। हालांकि, सहकर्मियों के साथ व्यवहार में गुस्से के कारण टकराव की संभावना रहेगी। इस समय विशेषकर जिन्हें ऐसिडिटी, त्वचा संबंधित समस्या, गुप्तरोग, आंखों में जलन आदि समस्या हो तो उन्हें स्वास्थ्य की विशेष संभाल रखनी होगी। सूर्य छठे स्थान में बुध के साथ युति में है। पंचम स्थान में सिंह राशि में मंगल के साथ शुक्र की युति है। सप्तम भाव में स्थित गुरु आपके लिए दांपत्य जीवन में उत्तम सुख प्रदान करने वाला बन सकता है। आपको भाग्यवृद्धि संबंधी अवसर मिलेंगे। शुक्र के पांचवें में होने से प्रेम संबंधों में निकटता बढ़ेगी। नये संबंध जोड़ने अथवा पुराने संबंध सुधारने के लिए योग्य समय है। भागीदारी के लिए भी गणेशजी हरी झंडी दिखा रहे हैं। फिलहाल संतान के साथ संबंधों में गुस्से का कारण आंशिक तनाव आ सकता है, इसलिए गुस्से को नियंत्रण में रखें। विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और अध्ययन के लिए जोश में वृद्धि होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने के लिए उत्तम समय है। महीने के मध्य में सूर्य राशि बदलकर सप्तम स्थान में आएगा जो दांपत्य जीवन में अहं का टकराव करा सकता है। इसके साथ ही बुध के भी इसी स्थान में आने से संबंधों में नीरसता में थोड़ी वृद्धि होगी। मंगल और शुक्र दोनों छठे भाव में होने से आप कामकाज के स्थल पर उत्साह से काम करेंगे। विचारों में नवीनता रहेगी। दैनिक कार्यों को छोड़कर कुछ नया सृजन करने की उत्सुकता रहेगी। हालांकि, सहकर्मियों के साथ व्यवहार में गुस्से के कारण टकराव की संभावना रहेगी। इस समय विशेषकर जिन्हें ऐसिडिटी, त्वचा संबंधित समस्या, गुप्तरोग, आंखों में जलन आदि समस्या हो तो उन्हें स्वास्थ्य की विशेष संभाल रखनी होगी। आप की राशि से आठवें भाव में केतु का भ्रमण स्वास्थ्य में अधिक सावधानी रखने के लिए का संकेत दे रहा है। धन स्थान में स्थित राहु आपको आर्थिक चिंता कराएगा। इसके अलावा, नौकरी के स्थान में स्थित शनि नौकरीपेशा लोगों को कामकाज में विलंब का संकेत दे रहा है। हालांकि, अगर इसके अच्छे पहलुओं पर ध्यान दें तो पंचम स्थान में स्थित गुरु विद्यार्थी जातकों के लिए बेहतर अवसर प्रदान कराएगा। फिलहाल, आपमें अध्ययन संबंधी रुचि थोड़ी कम रहेगी परंतु समय बीतने पर उसमें उल्लेखनीय सुधार आएगा। आध्यात्मिक विषयों में भी आपकी ज्ञान जिज्ञासा बढ़ेगी। जो लोग गूढ़ विद्या, कर्मकांड आदि में रुचि रखते हैं वे भी इस दिशा में गहन अध्ययन के लिए आगे बढ़ सकते हैं। पैतृक संपत्ति में उलझनें उत्पन्न होंगी। जहां तक संभव हो वहां तक इस संबंध में पुराने केसों को फिलहाल मत खोलें, अन्यथा आपके लिए घाटे का सौदा साबित होगा। महीने के मध्य में आप विशेष रूप से पारिवारिक मामलों पर अथवा परिजनों की जरूरतें पूरा करने के लिए अधिक खर्च करेंगे। आपके घर में किसी मांगलिक अथवा धार्मिक प्रसंग का आयोजन होने की संभावना रहेगी। महीने के उत्तरार्द्ध में अचल संपत्ति संबंधी विवादों का समाधान हो सकता है। रियल एस्टेट, वाहन के क्रय-विक्रय अथवा मशीनरी के कामकाज से जुड़े हुए जातकों को प्रगति का अवसर प्राप्त होगा। महीने के अंत में प्रेम संबंधों में थोड़ी नीरसता बढ़ सकती है। परिवार में आप संतान पर अधिक ध्यान देंगे। आपके विवाह स्थान में राहु और सप्तम स्थान में केतु होने से व्यवसायिक मोर्चे पर भागीदार के साथ तथा परिवार में जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना रहेगी। ससुराल पक्ष से किसी लाभ की संभावना अधिक रहेगी। प्रथम सप्ताह में आप आध्यात्मिक विषयों में अधिक रुचि लेंगे। धन स्थान में स्थित शुक्र और मंगल की युति के कारण आय के साथ के साथ खर्च की मात्रा भी बढ़ेगी। उच्च अध्ययन करने वाले जातकों को विदेश यात्रा से संबंधित बढ़िया समाचार मिल सकते हैं। दूसरे सप्ताह में शुक्र राशि बदलकर आपकी राशि से तीसरे स्थान में बुध और सूर्य के साथ युति में आएगा। आपको कोई उद्यम करने की इच्छा अधिक होगा। नौकरीपेशा लोग नए अवसरों की तरफ विचार करें ऐसी संभावना अधिक रहेगी। इस समय आप परिवार की खुशियों पर खर्च करने में पीछे नहीं रहेंगे। महीने के पिछले पखवाड़े में बुध राशि परिवर्तन करके आपकी राशि से चौथे स्थान में गुरु के साथ तुला में आ रहा है। परिवार में कोई आनंद का समाचार मिल सकता है। सूर्य भी चौथे भाव में आएगा जिससे परिवार के सदस्यों के साथ व्यवहार में कहीं अहं की भावना नहीं आए इसका ख्याल रखें। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जातकों को अधिक मेहनत की तैयारी रखनी पड़ेगी। महीने के प्रारंभ में आपके जन्म के चंद्र से छठे में भ्रमण करता हुआ मकर का चंद्र, केतु के ऊपर से भ्रमण करेगा। यह आपकी नौकरी में, नौकर-चाकर के लिए, ननिहाल पक्ष अथवा रोग और शत्रु के लिए नकारात्मक परिणाम प्रदान करेगा। इन दिनों में चिंता अधिक सतत सताएगी जिसके कारण मानसिक रूप से रोगग्रस्त महसूस करेंगे। दुर्घटना का योग होने से वाहन चलाने में सतर्कता रखें। पैतृक संपत्ति से संबंधित कार्य भी होंगे। धार्मिक यात्राओं पर जाने का कार्यक्रम बनेगा। शनि की ढैय्या आ रही है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करें। भाग्यवृद्धि संबंधी अवसर प्राप्त होंगे। पिता के साथ अच्छा तालमेल बनेगा। आकस्मिक खर्च भी हो सकता है। अप्रत्याशित बीमारी की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य का ध्यान रखें। महीने के उत्तरार्ध में अथवा अकारण मानसिक चिंता महसूस होगी। आर्थिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा। पारिवारिक सुख की प्राप्ति होगी। 20, 21 तारीख को तुला राशि में से गोचर होते हुए चंद्र का तृतीय में से भ्रमण हो रहा है। छोटे भाई-बहन का आगमन होगा तथा मित्रों के साथ अच्छा तालमेल रहेगा। आनंदपूर्वक समय बिता सकेंगे। छोटी दूरी की यात्रा का योग दिखाई दे रहा है। महीने के अंतिम दिनों में प्रणय संबंधों में, संतान के अध्ययन के लिए, शेयर सट्टे जैसे आर्थिक मामलों में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। नौकरी, नौकर-चाकर, ननिहाल के लिए, तंदुरस्ती जैसे विषयों में मध्यम परिणाम मिलेंगे। इस महीने के प्रारंभ में बुध आपकी जन्म राशि के स्थान में भ्रमण कर रहा है। इसका उच्च राशि कन्या में भ्रमण करना आपके लिए अति उत्तम रहेगा। विद्यार्थी जातकों की एकाग्रता बढ़ेगी और अधिक उत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आप योजनाबद्ध ढंग से बढ़ेंगे। दांपत्य जीवन मध्यम रहेगा। कभी-कभी संबंधों में अहं का टकराव हो सकता है। किसी नई नौकरी में इंटरव्यू देने जा रहे हैं तो उसके लिए शुभ समय है। बारहवें स्थान में स्थित शुक्र के कारण आपमें विपरीत लिंग वाले व्यक्तियों की तरफ आवश्यकता से अधिक आकर्षण रहेगा और उनके ऊपर खर्च भी खूब बढ़ जाएगा। इस स्थान में ही मंगल के होने से आप आवश्यकता से अधिक उत्साही अथवा उतावले भी रहेंगे जिससे आकस्मिक चोट की संभावना भी दिखाई दे रही है। सरकारी अथवा कानूनी कार्यों में आपकी प्रगति की संभावना रहेगी। महीने के मध्य में मंगल और शुक्र आपके विवाह स्थान में आएंगे जबकि बुध और सूर्य धन स्थान में आएंगे जिससे प्रेम संबंधों के लिए अनुकूल समय शुरू होगा। कोई भी कामकाज आप भारी उत्साह से और जोशपूर्वक करेंगे। अभी आपको बिजली का करंट, आकस्मिक चोट, औजार अथवा मशीनरी द्वारा रक्त निकले ऐसी चोट आदि से संभाल रखनी पड़ेगी। आय और व्यय का पलड़ा अभी संतुलन में रहेगा, क्योंकि आपकी आय तो रहेगी परंतु साथ ही साथ व्यवसायिक मोर्चे पर अथवा लंबी अवधि में मुनाफा मिलने से सुरक्षित निवेश में आप पैसा लगाएंगे। विद्यार्थी जातकों में फिलहाल सृजनात्मकता बढ़िया रहेगी। आपके दिमाग में नये विचार आएंगे अथवा अध्ययन में अलग ही पद्धति अपनाने की संभावना रहेगी। टेक्नीकल विषयों के अध्ययन में फिलहाल बढ़िया सफलता मिल सकती है। महीने के प्रारंभ में आपके लग्न स्थान में गुरु, धन स्थान में शनि, चतुर्थ स्थान में केतु, कर्म स्थान में राहु, लाभ स्थान में मंगल और शुक्र और व्यय स्थान में सूर्य व बुध की युति है। जायदाद के क्रय-विक्रय से संबंधित कार्य सरलता से हल कर सकेंगे। विदेश में पढ़ाई के प्रयोजन से जाने के इच्छुक जातकों के लिए अनुकूल चरण है। आपके प्रेम संबंधों में भी निकटता आएगी, पर आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपमें दंभ भाव नहीं आने पाएं। द्वितीय सप्ताह में दांपत्य संबंधों में निकटता बढ़ेंगी। 12,13,14 तरीख को आपको किसी बिजनस अथवा व्यापार के काम से दूसरे शहर में जाना हो सकता है। महीने के आखिरी पखवाड़े में सूर्य राशि परिवर्तन करके आपकी राशि में आएगा तथा मंगल राशि परिवर्तन करके आपकी राशि से बारहवें स्थान में आएगा। बुध के राशि परिवर्तन करके आपकी राशि में आने से दुर्घटना की संभावनाओं को देखते हुए वाहन संभलकर चलाएं। आनंद-प्रमोद से संबंधित गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ेगी। आपका परिवार प्रेम बढ़ेगा। महीने के अंतिम सप्ताह में माता के तबीयत की देखभाल करनी होगी। मानसिक कलेश रहेगा। सरकारी कामकाज में अथवा कोर्ट कचहरी के काम से आपको दौड़-धूप करनी पड़ सकती है। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो महीने के अंतिम दिनों में प्रेम की अभिव्यक्ति खूब बढ़िया तरीके से कर सकेंगे। महीने के प्रारंभ में जहां आपके कर्म स्थान में शुक्र और मंगल है, वहीं लाभ स्थान में बुध व सूर्य की युति है। महत्वपूर्ण कार्यों और कार्यक्रमों में अप्रत्याशित सहयोग तथा इच्छित परिणाम प्राप्त कराने वाला समय है। हालांकि, आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए आपको पहले से तैयारी रखनी पड़ेगी। नौकरीपेशा वर्ग को अगर आंतरिक खटपट की वजह से प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है तो उससे बाहर आएंगे। दांपत्य जीवन में मिलाजुला वातावरण रहेगा। दूसरे सप्ताह में आपकी बौद्धिक शक्ति अत्यधिक गहन होने से हरेक कार्य में छोटी से छोटी बात को भी ध्यान में रखेंगे। हमारे जो जातक आध्यात्मिक विद्या, ज्योतिषशास्त्र, कर्मकांड आदि में रुचि रखते हैं उनके लिए समय अनुकूल रहेगा। महीने के उत्तरार्ध में सूर्य और बुध राशि बदलकर बारहवें भाव में, जबकि मंगल और शुक्र ग्यारहवें भाव में आएंगे। विद्या अध्ययन के लिए विदेश जाने के इच्छुक हैं तो सफलता मिलेगी। सार्वजनिक जीवन में आप बहुत अधिक सक्रिय होंगे। धंधे संबंधी क्षेत्र में रुकावटों का सामना करना पड़ेगा, परंतु प्रगति होगी। महीने के अंत में इस अवधि के दौरान गणेशजी कह रहे हैं कि आप आलस और लापरवाही से दूर रहें तथा परिवार के साथ अधिक जुड़ाव रखें। सरकारी अथवा कानूनी विषयों में फिलहाल खर्च बढ़ सकता है। इसलिए थोड़ा विलंब भी हो सकता है। आपके कर्मस्थान में बुध का अपनी ही राशि में भ्रमण होने से वाणिज्य और व्यापार में वृद्धि की संभावना रहेगी। व्यवहारिक, सामाजिक तथा परिवार से संबंधित कार्य आगे बढ़ेंगे। बुजुर्गों तथा पिता की तरफ आप अधिक भावुक रहेंगे। दांपत्य संबंधों में सौहार्द बना रहेगा। प्रथम सप्ताह में प्रेमीजनों को मुलाकात के अवसर मिलेंगे। फिलहाल, आपके धन स्थान में केतु स्थित होने से आर्थिक मामलों में थोड़ी अनुकूलता तथा प्रतिकूलता दोनों रहेंगी। जमीन, मकान तथा संपत्ति से संबंधित कार्य को वेग मिलेगा। महीने के मध्य में आपको थोड़ी मानसिक दुविधा महसूस होगी और मन में अच्छे-बुरे विचार आएंगे। महीने के अंतिम पखवाड़े में सूर्य राशि बदलकर लाभ स्थान में आएगा। विदेश में व्यवसायिक प्रयोजन से जाने के इच्छुक जातकों के लिए यह बेहतर समय है। विवाह के इच्छुक जातकों के लिए भी शुभ संयोग बनेगा। अधिक आय के लिए एक से अधिक स्रोत खड़े करने पर भी आप गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे। खाने-पीने, होटल का व्यवसाय करने वाले को तथा सौंदर्य प्रसाधनों, गिफ्ट-आर्टिकल का व्यापार करने वालों का व्यापार अति उत्तम रहेगा। प्रणय संबंधी खर्चे अधिक होंगे। महीने के अंतिम दिनों में विशेष रूप से आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी चिंता होने की संभावना है। आप लोगों के साथ कम बातचीत करेंगे और कोई भी आर्थिक निर्णय लेने में अधिक समय लेंगे। महीने के पूर्वार्ध में घर में शुभ कार्य का आयोजन होगा। किसी नये कार्य में लगे रहेंगे और वह शुभ फल प्रदान करेगा। 2 और 3 तारीख के दौरान मिश्रित फल मिलेगा। मानसिक तनाव रहेगा, परंतु हाथ में लिया गया काम पूर्ण कर सकेंगे। 4 और 5 तारीख को व्यापार और कामकाज में आने वाले विघ्न दूर होंगे। किसी संबंधी से शुभ समाचार मिलेगा। आर्थिक मामले में स्थिति मजबूत बनेगी। आपकी पैसे की तंगी दूर होती महसूस होगी। उधार-वसूली करने के लिए उत्तम समय कहा जा सकता है, परंतु आपको भागीदार द्वारा या व्यवसाय में किसी से धोखा का होगा, इसलिए विशेष ध्यान रखना पड़ेगा। महीने के उत्तरार्ध में मन बैचेन और अशांत रहेगा। स्वास्थ्य ढीला रहेगा। यात्रा-प्रवास टालें, अन्यथा परेशानी का अनुभव करेंगे। यदि आपका कोई काम अटका हुआ हो तो इस सप्ताह में वह पूरा कर सकेंगे। महीने के अंतिम चरण में नौकरी में पदोन्नति मिलने की संभावना है। आपके मान तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मकान, गाड़ी तथा दूसरी अन्य सुख सुविधाओं का कार्य आसानी से हो सकता है। इस समय मित्रों, समाज, परिवार की तरफ से भाग्योदय होगा अथवा लाभ होता दिखाई देगा। सप्ताह के अंतिम भाग में चिंता बढ़ सकती है। महीने के प्रारंभ का समय दांपत्य जीवन का सुख उठाने के लिए उत्तम है। आपमें जोश व उत्साह की मात्रा बहुत ज्यादा रहेगी। विपरीत लिंग वाले व्यक्तियों के प्रति आकर्षण रहने से अंतरंग सुख हेतु भी शुरुआत का समय अनुकूल है। हालांकि, आपको अपने स्वभाव में गुस्से पर नियंत्रण रखना पड़ेगा। पूर्वार्ध में विशेष रूप से बुजुर्गों के साथ तथा कामकाज के स्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों या प्रतिष्ठित लोगों के साथ संबंधों में तनाव आने की संभावना है। जिनको ब्लड प्रेशर अथवा हृदय से संबंधित समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी। इस समय विशेष रूप से ज्योतिष विद्या, कर्मकांड, धार्मिक विषयों अथवा गूढ़ विद्या में गहन अध्ययन करना हो तो इसके लिए उत्तम समय है। समय गुजरने पर शुक्र और मंगल के आपके अष्टम स्थान में आने से विशेष रूप से जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता अधिक होगी। आकस्मिक चोट से बचने के लिए सतर्कता बरतनी पड़ेगी। महीने के उत्तरार्ध में सूर्य नौवें स्थान में आएगा तब प्रफेशनल विषयों में खर्च अधिक रहेंगे। हालांकि, इसके साथ गुरु के होने की वजह से स्थिति नियंत्रण में रहेगी। विदेश में कामकाज से जुड़े जातकों के कार्य धीमी परंतु एक समान गति से आगे बढ़ेंगे। विवाह के इच्छुक जातकों की भी यदि किसी जगह बात चल रही है तो गति धीमी रहेगी। आप सार्वजनिक जीवन में कम रुचि लेंगे। पत्नी अथवा ससुराल पक्ष की ओर से फायदा होगा। प्रारंभिक चरण में आपकी आय में वृद्धि होगी। व्यापार-धंधे में भी बढ़िया फायदा मिलेगा। हालांकि, इस समय कोई भी लंबी यात्रा अथवा छोटी दूरी का प्रवास आपके हित में रहेगा। शुरू के दिनों में ही शुक्र राशि बदलकर आपकी राशि से सातवें भाव में परिभ्रमण करेगा जो आपके लिए अशुभ रहेगा। शुक्र पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में झगड़े उत्पन्न करेगा। जीवनसाथी की तबीयत बिगड़ेगी। भागीदारों के साथ भी संबंध बिगड़ेंगे, क्योंकि इसी स्थान में पहले से ही सूर्य व बुध युति में है। इसके सिवाय, मंगल भी राशि बदलकर आपके सातवें भाव में प्रवेश करेगा जो आपको शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार रखेगा। मस्तिष्क तथा आंख में तकलीफ होगी। बुध राशि बदलकर आपकी राशि से आठवें स्थान में आएगा जो आपके लिए शुभ रहेगा। गूढ़ विद्या, ज्योतिष विद्या, कर्मकांड, आध्यात्मिक ज्ञान में रुचि बढ़ेगी और उसमें गहन अध्ययन कर सकेंगे। विरासत और आकस्मिक धन लाभ होगा। महीने के उत्तरार्ध में सूर्य राशि बदलकर अष्टम भाव में आएगा जो गुरु और बुध के साथ युति करेगा। पेट का रोग होने से शारीरिक तकलीफ होगी। सरकार की तरफ से दंडित होने, अदालती कार्यवाही अथवा धरपकड़ होने का भय रहेगा। शत्रु अपना सर ऊंचा उठाएंगे तथा खर्चों में भी वृद्धि होगी। अंतिम सप्ताह में शनि मार्गी होकर आपकी राशि से दसवें कर्म स्थान में भ्रमण करेगा जो आपको धंधे में तकलीफ उत्पन्न कराएगा। अंतिम सप्ताह में जीवनसाथी के साथ संबंधों में आंशिक सुधार आएगा। आप परिवार को अधिक समय देने पर बल देंगे।
केला और दूध दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। अक्सर जो लोग मसल्स बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं, उन्हें केला-दूध खाने की सलाह दी जाती है। इतना ही बनाना शेक भी लोग बड़े चाव से पीते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केला और दूध का एक साथ सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यह शरीर के कई अंगों की फंक्शनिंग को प्रभावित करता है। आयुर्वेद भी केला और दूध के एक साथ खाने को सही नहीं मानता। एक अध्ययन से पता चला है कि केला और दूध का मिश्रण हमारे पाचन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इसकी वजह से साइनस संबंधी समस्या होने के भी आसार रहते हैं। आयुर्वेदाचार्य डॉ. सरोज पांडेय के मुताबिक केला और दूध दोनों पौष्टिक खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन दोनों को खाने में 20 मिनट का अंतर रखना जरूरी होता है नहीं तो यह पेट में गैस की समस्या उत्पन्न कर सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक किसी भी ठोस फल का किसी तरल से संयोजन अच्छा नहीं माना जाता है। इसके अनुसार केला और दूध साथ-साथ खाने पर शरीर में विषैले तत्वों का प्रभाव उत्पन्न होने लगता है। ऐसे में शरीर के तमाम अंगों की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा केला और दूध एक साथ खाने से शरीर भारी-भारी बना रहता है और मस्तिष्क की क्षमता भी इससे प्रभावित होती है। केला और दूध के सेवन का सबसे बेहतर तरीका है कि आप इसे अलग-अलग खाएं और पिएं। इससे शरीर को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। केला खाने के 20 मिनट बाद दूध पीना ज्यादा फायदेमंद है। अगर आप किसी डेयरी प्रॉडक्ट के साथ ही केले का सेवन करना चाहते हैं तो इसके लिए दूध की जगह दही का इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी दूध के साथ नहीं लेकिन दही के साथ केले का सेवन कर सकते हैं।

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