taaja khabar....भारत ने पाकिस्तान को दिखाया 'ठेंगा', नहीं भेजा सीमा शुल्क मीटिंग का न्यौता...यूपीः 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा 6 जनवरी को....पंजाब: कैप्टन बयान पर नवजोत सिंह सिद्धू की बढ़ीं मुश्किलें, 18 मंत्रियों ने खोला मोर्चा...साबुन-मेवे की दुकान में मिले सीक्रेट लॉकर, 25 करोड़ कैश बरामद....J-K: शोपियां में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को घेरा, मुठभेड़ जारी...
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को अपना कैप्‍टन बताकर चौतरफा घिरे पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ राज्य के 18 मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया है। पंजाब के इन मंत्रियों की मांग है कि सिद्धू सीएम से माफी मांगें और 'बड़ों का सम्‍मान करना सीखें।' उधर, सिद्धू भी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह से माफी मांगने के मूड में दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। कैप्‍टन के वफादार मंत्री सिद्धू का मुद्दा सोमवार को होने वाली राज्‍य कैबिनेट की बैठक में उठा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक ये सभी मंत्री सिद्धू द्वारा माफी नहीं मांगने पर उनपर इस्तीफे का दबाव बनाने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच, ऐसी भी खबरें हैं कि सिद्धू इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उधर, इस मसले पर सिद्धू का कहना है कि 'उन्‍होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है।' चुनावी राज्‍य राजस्‍थान में चुनाव प्रचार कर रहे सिद्धू ने कहा, 'मैं ऐसे स्‍थान पर रहता हूं जहां दिमाग बिना भय के रहता है और सिर ऊंचा रहता है।' इससे पहले शुक्रवार को सिद्धू से पूछा गया था कि क्‍या करतापुर कॉरिडोर के शिलान्‍यास समारोह में पाकिस्‍तान जाने से उन्‍हें सीएम ने रोका था ? इस पर सिद्धू ने कहा, 'किस कैप्‍टन की बात कर रहे हो? ओह! कैप्‍टन अमरिंदर सिंह। वह सेना में एक कैप्‍टन थे, मेरे कैप्‍टन राहुल गांधी हैं। उनके (सीएम के) कैप्‍टन भी राहुल गांधी हैं।' इसके बाद शनिवार को पंजाब के मंत्री तृप्‍त रजिंदर सिंह बाजवा ने सिद्धू से कहा कि वह या तो इस्‍तीफा दें या माफी मांगें। इस बीच खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह ने कहा, 'मेरे कैबिनेट के ज्‍यादातर साथी चाहेंगे कि इस मुद्दे पर सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में चर्चा हो। विशेषकर इसलिए कि इसने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर किया है।' सिद्धू इस समय राजस्थान में प्रचार में व्यस्त हैं और यह साफ नहीं है कि वह कैबिनेट की बैठक में भाग लेने के लिए चंडीगढ़ आएंगे या नहीं। राज्‍य के एक अन्‍य मंत्री ने कहा, 'अमरिंदर सिंह के ज्‍यादातर वफादार मंत्री इस मुद्दे को कैबिनेट में उठाने के लिए उत्‍सुक हैं।' रविवार को पंजाब सरकार में मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने भी कहा था, 'मैं यह सुनकर थोड़ा नाराज हूं (नवजोत सिंह सिद्धू का बयान), बिल्‍कुल राहुल गांधी हमारे इंडियन कैप्टन हैं लेकिन सिद्धू यह भूल गए कि अमरिंदरजी हमारे सीएम हैं। उन्हें सम्मान करना चाहिए, यह कपिल शर्मा का शो नहीं है।' बता दें कि पंजाब कांग्रेस के नेताओं के खुलकर नाराजगी जताने के बाद विवाद बढ़ता देख सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने रविवार को उनके बचाव में सफाई दी थी। कौर ने यह कहकर विवाद थामने की कोशिश की है कि उनके पति हमेशा कहते हैं कि कैप्टन साहब उनके पिता के समान हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने कहा, 'नवजोतजी हमेशा कहते हैं कि कैप्टन साहब उनके पिता की तरह हैं। हम यह बात हमेशा स्पष्ट रखते हैं कि कैप्टन साहब का सम्मान सभी चीजों से ऊपर है। सिद्धू का आधा-अधूरा नहीं बल्कि पूरा बयान पढ़ा जाना चाहिए।'
चंडीगढ़ करतारपुर साहिब कॉरिडोर मुद्दे को लेकर एकबार फिर से पंजाब कांग्रेस में दोफाड़ की स्थिति देखने को मिल रही है। दरअसल, बुधवार को पाकिस्तान में शिलान्यास का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसमें जाने को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मिनिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू का अलग-अलग मत हैं। बता दें कि न्योता मिलने के बावजूद समारोह से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दूरी बनाए रखने का फैसला किया, जिसकी सोमवार को कांग्रेस नेताओं ने सराहना भी की। हालांकि, उन्होंने सिद्धू के फैसले पर चुप्पी साधे रखी। कुछ लोगों का मानना है कि यदि अमरिंदर सिंह खुद ही तय कर लेते कि उन्हें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना है तो यह मुद्दा ही न बनता। किसे चुनें? कांग्रेस में नेताओं के सामने चुनौती पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अपनी पिछली यात्रा के दौरान कॉरिडोर को लेकर वह सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए थे, कहीं न पाकिस्तान जाकर फिर से लाइमलाइट में आने की कोशिश उनकी प्रवृत्ति के अनुरूप है। उनके लिए यह उसी कार्यक्रम में आगे की पहल है। बात की जाए अमरिंदर सिंह की तो वह राज्य के मुखिया के साथ-साथ एक पूर्व सैनिक वाला भी रवैया रखते हैं।' कांग्रेस नेताओं में भी असमंजस की स्थिति थी कि वे अमरिंदर द्वारा पाकिस्तान के न्योते को अस्वीकार करने के निर्णय के साथ जाएं या फिर कॉरिडोर की दिशा में हुई पहल के लिए सिद्धू के साथ खड़े हों। अमृतसर हादसे के बाद विपक्ष के निशाने पर सिद्धू पार्टी के एक नेता ने बताया, 'पिछली बार, सिद्धू ने कहा था कि वह अपने निजी व्यवहार के चलते पाकिस्तान जा रहे हैं क्योंकि इमरान उनके दोस्त हैं। हालांकि, पार्टी ने उन्हें पाकिस्तान न जाने के लिए कहा था। केंद्रीय नेतृत्व से सिद्धू के करीबी रिश्ते, खासतौर पर राहुल और प्रियंका गांधी के साथ होने की वजह से वह अपने मुताबिक फैसले लेते हैं, जबकि उनके लिए राज्य के मुखिया का निर्देश उतनी अहमियत नहीं रखता है।' कॉरिडोर मुद्दा ऐसे वक्त में सामने आया है जब सिद्धू और उनकी पूर्व विधायक पत्नी नवजोत कौर अमृतसर रेल हादसे को लेकर विपक्ष के निशाने पर थे। गौरतलब है कि अमृतसर रेल हादसे में दशहरा पर्व के दौरान 61 लोगों की मौत होने का दावा किया गया था। पंजाब कांग्रेस प्रेजिडेंट सुनील जाखड़ ने रविवार को प्रॉजेक्ट के मद्देनजर सिद्धू की तारीफ की थी। अगले ही दिन उन्हें एक आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा, जिसमें उन्होंने पंजाब और संपूर्ण राष्ट्र के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा पाकिस्तान के न्योते को अस्वीकार करने के फैसले की जमकर सराहना की। दरअसल, पार्टी ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहती है कि उसके अंदरखाने में किसी भी तरह के विरोध की स्थिति बनी हुई है। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ सिद्धू का गले मिलना पार्टी की राज्य इकाई में तनाव की स्थिति पैदा कर गया था। '...तो कैप्टन अमरिंदर सिंह पर होता मेन फोकस' एक अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का दावा है, 'अकाली दल की केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की मौजूदगी के बावजूद यदि अमरिंदर सिंह कार्यक्रम में शिरकत करते तो लोगों का पूरा ध्यान पंजाब के मुख्यमंत्री पर ही होता। यही नहीं, लोगों की कॉरिडोर के प्रति इतनी प्रबल भावनाएं जुड़ी हुई थीं कि उनके लिए भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्ते कोई मायने ही नहीं रखते। ऐसे में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नैतिकता के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण फैसला किया है।' पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को अपने मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान दौरे को उनके 'सोचने का तरीका' बताया। कैप्टन करतारपुर कॉरिडोर की आधारशिला रखे जाने के मौके पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस समय पर सीमा पार की गोलियों से हमारे सैनिक और आम नागरिक मारे जा रहे हों, ऐसे समय पर वह ऐसा (पाकिस्तान जाने) करने के बारे में सोच भी नहीं सकते।
नई दिल्ली, 26 नवंबर 2018,भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बन रहे करतारपुर साहिब कॉरिडोर की नींव आज रखी जानी है. ये कॉरिडोर ऐलान के साथ ही राजनीतिक जंग का हिस्सा बन गया है. ऐलान के बाद श्रेय लेने की होड़ मची और अब नींव रखी जाने के दौरान भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है. पंजाब सरकार में मंत्री एसएस रंधावा ने नींव रखने से पहले शिलापट पर अपने, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब के अन्य मंत्रियों के नाम के आगे काली टेप लगाई. उन्होंने कहा कि इस पर अकाली-बीजेपी वाले नेताओं का नाम क्यों हैं. वह इसका विरोध कर रहे हैं. नहीं पता, कहां बनना है कॉरिडोर' पंजाब सरकार के मंत्रियों का कहना है कि कॉरिडोर बनाने का फैसला आनन-फानन में लिया गया है, केंद्र सरकार को अभी ये भी नहीं पता है कि कॉरिडोर कहां बनाना है. पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पाकिस्तान ने 28 नवंबर को आधारशिला रखने का कार्यक्रम तय कर दिया है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से आनन-फानन में केंद्र सरकार ने 26 नवंबर को ही पंजाब सरकार को आधारशिला का कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दे दिया. जबकि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया जिसे इस कॉरिडोर को बनाना है, उसे अब तक ये ही नहीं पता कि ये कॉरिडोर कहां से निकाला जाएगा और इस कॉरिडोर की आधारशिला कहां रखी जाएगी. राज्य सरकार में मंत्री सुखविंदर सिंह रंधावा ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल ने नवजोत सिद्धू को कौम का गद्दार बताया था, अब वो खुद पाकिस्तान जा रही हैं. वह क्या मुंह लेकर वहां जाएंगी. अकाली दल ने आजतक इस मुद्दे को नहीं उठाया था. कांग्रेस नेताओं की हो रही अनदेखी इसके अलावा उन्होंने आधारशिला के कार्यक्रम के दौरान हो रही अनदेखी पर भी सवाल उठाया. ग्रामीण और शहरी विकास मंत्री बाजवा ने केंद्र द्वारा समारोह के लिए व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि "पंजाब के नेताओं और मंत्रियों को वक्ताओं और मंच साझा करने वालों की सूची में कोई स्थान नहीं दिया गया है." हो चुकी है क्रेडिट को लेकर रार बता दें कि मोदी सरकार द्वारा कॉरिडोर का ऐलान करने के साथ ही इस पर क्रेडिट की जंग छिड़ गई थी. केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इसे अकाली दल की अपील पर लिया गया सरकार का फैसला बताया था, तो वहीं नवजोत सिंह सिद्धू ने उनकी तरफ से बनाए गए दबाव में लिया गया निर्णय बताया था.
चंडीगढ़ पाकिस्तान ने 28 नवंबर को होने वाले करतारपुर साहिब कॉरिडोर के शिलान्यास के मौके पर भारत के कई वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रण भेजा है। पाकिस्तान के इस आमंत्रण पर पंजाब के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने हामी भर दी है। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान जाना चाहते हैं। इस संबंध में उन्होंने सरकार से अनुमति मांगी है। अगर अनुमति मिली तो वह जरूर जाएंगे। हालांकि, प्रदेश के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्तान जाने से साफ इनकार कर दिया है। इससे पहले सुषमा स्वराज भी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में व्यस्त रहने का हवाला देते हुए वहां जाने से इनकार कर चुकी हैं। विदेश मंत्रालय से सिद्धू ने मांगी अनुमति नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के आमंत्रण का जवाब भेजा है। अपने इस पत्र में उन्होंने लिखा है, 'करतारपुर कॉरिडोर शिलान्यास के इस ऐतिहासिक क्षण में मैं आपसे मिलना चाहता हूं। मैंने इस आयोजन में शामिल होने के लिए अपना आवेदन विदेश मंत्रालय को भेजा है।' पहले भी पाकिस्तान जाने पर विवादों में घिरे थे सिद्धू पहले भी सितंबर महीने में सिद्धू पाकिस्तान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। समारोह के दौरान सिद्धू पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिले थे। समारोह के दौरान सिद्धू को पाक अधिकृत कश्मीर के राष्ट्रपति मसूद खान के पास भी बिठाया गया था। ये तस्वीरें वायरल होने के बाद वह विवादों में घिर गए थे। अमरिंदर ने पाकिस्तान जाने से किया इनकार सिद्धू की हामी के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री का आमंत्रण ठुकराते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने पाकिस्तान न जाने का कारण बताते हुए कहा कि पंजाब में आतंकी हमले लगातार जारी हैं। पाकिस्तान सेना द्वारा भारतीय सेना के जवानों को मारा जा रहा है, इसलिए वह पाकिस्तान के आमंत्रण पर वहां नहीं जाएंगे। सुषमा भी कर चुकी हैं इनकार करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में पाकिस्तान से न्योता मिलने के बावजूद सुषमा स्वराज वहां नहीं जाएंगीं। अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में व्यस्त रहने का हवाला देते हुए सुषमा स्वराज ने बताया है कि उनकी जगह दो केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। बता दें कि केंद्र सरकार ने अगले वर्ष गुरु नानक देव की 550वीं जयंती मनाने के लिए करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी देकर बड़ा फैसला लिया है। गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग में करतारपुर कॉरिडोर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। इसी के साथ सिखों का 70 साल लंबा इंतजार खत्म होगा। बता दें कि सिख समुदाय के लिए करतार साहब काफी मायने रखता है। यह सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है जहां गुरुनानक देव ने अपने जीवन के 18 साल बिताए।
अमृतसर, 21 नवंबर 2018,अमृतसर में निरंकारी भवन में हुए आतंकी हमले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार युवक पंजाब का स्थानीय निवासी ही है. उसने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की मदद से इस हमले को अंजाम दिया था. इस मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद शाम चार बजे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम है बिक्रमजीत सिंह. वह धालीवाल गांव का रहने वाला है. दूसरा आरोपी अवतार सिंह है, जिसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. अमरिंदर ने कहा कि आतंकी अब कश्मीर से पंजाब की ओर रुख कर रहे हैं. हम इसे रोकेंगे. अमरिंदर ने कहा कि हमले में इस्तेमाल मोटर साइकिल भी बरामद कर ली गई है. ये एक सीधा आतंकी हमला था. धर्म से इसका कोई लेना देना नहीं था. मैं पंजाब को विश्वास दिलाता हूं कि पाकिस्तान और आईएसआई को मुंहतोड़ जवाब देंगे. इस हमले के पीछे खालिस्तानी लिबरेशन फोर्स का हाथ है. हैंडग्रेनेड हमले के पीछे खालिस्तानी आतंकी हरमीत सिंह हैप्पी उर्फ पीएचडी की साजिश का खुलासा हुआ है. पाकिस्तान में छिपकर बैठे हरमीत सिंह हैप्पी उर्फ पीएचडी ने लोकल लड़कों की मदद से ये ग्रेनेड अटैक करवाया था. आजतक ने पहले ही किया था खुलासा पंजाब पुलिस ने एक लोकल युवक को हिरासत में लिया है, जिसने निरंकारी समागम स्थल पर हैंड ग्रेनेड फेकने की बात कबूली है. हैंड ग्रेनेड अटैक के लिए पैसा और ग्रेनेड पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आतंकी हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी ने मुहैया करवाया था. पटियाला से कुछ दिन पहले पकड़े गए खालिस्तान गदर फोर्स के आतंकी शबनम दीप सिंह ने इसके लिए स्लीपर सेल के माध्यम से इन दो लड़कों को बरगला कर अपने साथ जोड़ा था. शबनम दीप सिंह ने गरीब लड़कों को खालिस्तान के नाम पर बरगला कर उनको चंद हजार रुपए देकर हैंड ग्रेनेड फेंकने के लिए तैयार किया था. उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई थी.
अमृतसर, 20 नवंबर 2018, पंजाब के अमृतसर में निरंकारी भवन में हुए ग्रेनेड हमले से हर कोई चकित है. ये हमला रविवार को अमृतसर के राजसांसी इलाके में हुआ था. हमले के बाद से ही स्थानीय पुलिस, NIA समेत अन्य सुरक्षा टीमें इसकी जांच कर रही हैं. जिन लोगों ने भवन में ग्रेनेड फेंका था, उनकी तस्वीर भी सामने आ चुकी है. अब पुलिस ने बठिंडा में कई छापेमारी की और दो युवकों को गिरफ्तार किया. बताया जा रहा है कि इनका कनेक्शन अमृतसर हमले से हो सकता है. दोनों से पंजाब पुलिस पूछताछ कर रही है, दोनों ही पूछताछ में अपनी पहचान नहीं बता पाए हैं. रविवार को हुआ था हमला गौरतलब है कि रविवार को हुए हमले में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 अन्य घायल हुए थे. यह ग्रेनेड हमला अमृतसर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित आदिलवाल गांव में निरंकारी पंथ के सत्संग भवन में हुआ था. पुलिस सूत्रों ने इस हमले के पीछे खालिस्तानी समर्थकों का हाथ बताया, जबकि ISI कनेक्शन भी सामने आया था. ISI की शह पर कश्मीर के आतंकी संगठनों के साथ पाकिस्तान में छिपकर बैठे खालिस्तानी आतंकियों ने इस नेक्सैस को तैयार किया. बताया जा रहा है कि इस हमले के लिए विदेश से फंडिंग हुई है, जिसकी मदद से ही आईएसआई के स्लीपर सेल ने स्थानीय लड़कों को हैंड ग्रेनेड मुहैया कराई गई.
नई दिल्ली, 19 नवंबर 2018,पंजाब के अमृतसर में हुए आतंकी हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है. आम आदमी पार्टी के नेता एचएस फुल्का के बयान की हर कोई निंदा कर रहा है, अब उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की जा रही है. हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज ने सोमवार सुबह ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूछताछ की जानी चाहिए, उनके पाकिस्तानी समर्थन वाले बयान से ऐसा लगता है कि उनके लिंक वहां बैठे आतंकी से हो सकते हैं. अनिल विज ने लिखा कि इन लोगों ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाए और अब सेना प्रमुख को लेकर इस तरह का बयान देना काफी शर्मनाक है. क्या था फुल्का का बयान? पंजाब के आम आदमी पार्टी के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे एचएस फुल्का ने विवादित बयान दिया. उन्होंने अमृतसर में निरंकारी समागम में हुए आतंकी हमले के लिए सेनाध्यक्ष बिपिन रावत को जिम्मेदार बता दिया है. उन्होंने कहा, '' सेनाध्यक्ष बिपिन रावत पंजाब में आकर बोल गए थे कि राज्य पर आतंकी हमले का खतरा है. हो सकता है कि उन्होंने ही अपने लोगों से ब्लास्ट करवाया हो ताकि उनका बयान गलत साबित ना हो.'' हालांकि, बयान पर बवाल के बाद एचएस फुल्का ने सफाई भी दी. उन्होंने बाद में कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने कहा कि मेरा बयान कांग्रेस के खिलाफ था, ना कि सेना प्रमुख के खिलाफ था.
चंडीगढ़ अमृतसर में निरंकारी सत्संग पर हुए ग्रेनेड अटैक ने न केवल पंजाब सूबे को हिला दिया है बल्कि कुछ बड़ी आशंकाएं भी खड़ी हो गई हैं। रविवार को धार्मिक डेरे के कार्यक्रम में हुए इस हमले ने 1980 के दशक की उस पंजाब की याद दिला दी है जब निरंकारियों व सिखों के बीच हिंसा ने खालिस्तान मूवमेंट को रौद्र रूप दिया और पंजाब में आतंकवाद चरम पर पहुंच गया। हालांकि इस हमले में अलकायदा और आईएसआई कनेक्शन की आशंकाओं की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच अपने हाथों में ले ली है। तब निरंकारियों पर हुए हमले के बाद ही पंजाब में फैला था चरमपंथ निरंकारी समागम पर हुए हमले की फिलहाल कई थिअरी चर्चा में हैं। एक थिअरी सिख धर्म के आंतरिक संघर्ष की भी है, जिसने 1980 के दशक में पंजाब को आतंकवाद की आग में झोकने का काम किया था। इस पूरे मामले को समझने के लिए पहले आपको सिख-निरंकारी विवाद के बारे में जानना होगा। दरअसल निरंकारी मिशन की शुरुआत सिख धर्म के भीतर ही एक पंथ के रूप में हुई थी। 1929 में पेशावर (अब पाकिस्तान में) में बूटा सिंह ने निरंकारी मिशन की शुरुआत की थी। निरंकारियों ने सिखों के गुरुग्रंथ साहिब को गुरु मानने की पंरपरा का बहिष्कार करते हुए जीवित गुरु को मानने की बात कही। बंटवारे के बाद दिल्ली में निरंकारियों का मुख्यालय बना। बूटा सिंह, अवतार सिंह, बाबा गुरबचन सिंह, बाबा हरदेव सिंह, माता सविंदर हरदेव और माता सुदीक्षा निरंकारियों के 6 गुरु हुए। फिलहाल माता सुदीक्षा ही निरंकारियों की गुरु हैं। सिखों ने निरंकारी गुरु अवतार सिंह द्वारा रचित अवतारवाणी और युग पुरुष जैसी रचनाओं पर सिख धर्म और सिख गुरुओं की आलोचना का आरोप लगाया। सिखों और निरंकारियों के बीच का यही विवाद आगे चलकर हिंसक हो गया। 1980 के दशक में ही पंजाब में आतंकवाद के प्रमुख चेहरे जरनैल सिंह भिंडरावाले का भी उदय हो रहा था। भिंडरावाले की पहचान सिख कट्टरपंथी के रूप में बन रही थी और उसने निरंकारियों का खूब विरोध किया। 13 अप्रैल 1978 को अमृतसर में ही निरंकारी मिशन के एक कार्यक्रम के दौरान निरंकारियों और सिखों के बीच हिंसक संघर्ष में 16 लोग (3 निरंकारी, 13 सिख) मारे गए। इस घटना के बाद अकाल तख्त ने हुकमनामा जारी कर निरंकारियों को सिख धर्म से बाहर कर दिया, लेकिन हिंसा का यह दौर यहीं नहीं थमा। इस बीच सिखों ने प्रतिशोध लेने के लिए रणजीत सिंह नाम के एक कार्यकर्ता के नेतृत्व में 24 अप्रैल 1980 को निरंकारी गुरु गुरबचन सिंह की हत्या कर दी। इन दोनों हिंसाओं में आरोप भिंडारवाले पर लगे और उसके समर्थकों पर कई मुकदमे दर्ज हुए। इसके बाद पंजाब में आतंकवाद का खूनी दौर शुरू हो गया। आतंकवादियों के मूवमेंट को लेकर अलर्ट पर था पंजाब निरंकारी मिशन पर हुए हमले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पंजाब में आतंकवादियों के मूवमेंट को लेकर पहले से अलर्ट था। अलकायदा कमांडर जाकिर मूसा के पंजाब में देखे जाने की सूचना मिली थी। इससे पहले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के भी पंजाब में घुसने का अलर्ट जारी हुआ था। पिछले महीनों में पंजाब में संघ कार्यकर्ताओं की हत्या भी हुई थी। कुल मिलाकर देखा जाए तो पंजाब में हिंसा की घटनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं। एनआईए अब हर ऐंगल से इस मामले की जांच कर रही है। हालांकि सिख और निरंकारियों के बीच हिंसक संघर्ष के दौर को खत्म हुए दशकों बीत चुके हैं। जांच एजेंसियों ने भी अबतक इस मामले में सिख और निरंकारी विवाद का कोई ऐंगल पेश नहीं किया है, लेकिन जिस तरह से धार्मिक समागम को निशाना बनाया गया है वह खुद में ही सवाल खड़े करता है।
अमृतसर पंजाब के अमृतसर में धार्मिक डेरे के कार्यक्रम के दौरान ग्रेनेड हमले को लेकर आतंकी ऐंगल की बात भी सामने आ रही है। इस बीच राज्य के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस संभावना को खारिज नहीं किया है। इस बीच मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तीन सदस्यीय टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। बता दें कि अमृतसर के बाहरी इलाके में स्थित निरंकारी डेरे पर रविवार को हुए ग्रेनेड अटैक में 3 लोगों को मौत हो गई है, जबकि 10 लोग घायल हुए हैं। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है, 'आईएसआई समर्थित खालिस्तानी या कश्मीरी समूह के इस हमले में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। संदिग्ध ठिकानों पर पुलिस की टीमें हमलावरों की तलाश में छापे मार रही हैं। इसके साथ ही इस मामले को सुलझाने के लिए अलग-अलग ऐंगल पर कई टीमें काम कर रही हैं।' इसके साथ ही सीएम ने लोगों से शांति की अपील की है। सीएम कैप्टन अमरिंदर ने ट्वीट में कहा, 'अमृतसर में हुए ब्लास्ट को देखते हुए मैं पंजाब के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। काफी मुश्किल से हासिल की गई शांति को हम आतंकी शक्तियों के हाथों बर्बाद नहीं होने देंगे।' इसके साथ ही सीएम ने हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख की मुआवजा राशि और घायलों को मुफ्त इलाज मुहैया कराने का ऐलान किया है। डीजीपी ने जताई आतंकी साजिश की संभावना अमरिंदर का ट्वीट पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आतंकी ऐंगल की संभावना जताई थी। डीजीपी अरोड़ा ने कहा, 'इस घटना में आतंकी ऐंगल मालूम पड़ता है। इसकी वजह यह है कि अटैक किसी व्यक्ति पर न होकर एक समूह पर हुआ है। लोगों के एक समूह पर ग्रेनेड से हमला करने का कोई कारण नहीं बनता है। इसलिए हम इस घटना को आतंकी हमले के ऐंगल से देख रहे हैं। हालांकि जांच के बाद ही सच्चाई पता चलेगी, लेकिन पहली नजर में हम इसे आतंकी हमले के तौर पर ही देख रहे हैं।' पुलिस ने दो संदिग्धों को किया गिरफ्तार टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले को बाइक सवार हमलावरों ने अंजाम दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावरों ने चेहरे ढके हुए थे और बाइक की नंबर प्लेट पर कोई नंबर नहीं था। टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने हमले में शामिल दो संदिग्धों को अरेस्ट कर लिया है। पुलिस ने बताया कि यह हमला अमृतसर के राजासांसी इलाके के आदलीवाल गांव में हुआ। यह इलाका अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के करीब ही स्थित है। यह हमला जिस वक्त हुआ, तब परिसर में निरंकारी समूह के लोगों का धार्मिक कार्यक्रम चल रहा था। घटनास्थल का दौरा करने वाले पंजाब पुलिस के आईजी एस.एस. परमार ने कहा, 'एक ग्रेनेड फेंका गया था। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 10 लोग घायल हो गए थे। घायलों में दो की हालत गंभीर है।' पिस्तौल तान निरंकारी भवन में घुसे थे हमलावर हमले में सभी पीड़ित आसपास के गांवों के निरंकारी अनुयायी हैं, जो रविवार को साप्ताहिक धार्मिक सभा के लिए जुटे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि चेहरा ढककर मोटरसाइकिल से आए दो युवक गेट पर मौजूद एक महिला पर पिस्तौल तानकर जबरन निरंकारी भवन के परिसर में घुस गए। एक शख्स ने पुलिस को बताया, 'सबकुछ महज कुछ मिनटों में ही हो गया। वे घुसे, ग्रेनेड फेंके और फरार हो गए।'
नई दिल्ली: 2019 का लोकसभा चुनाव बेहद करीब है. देशभर में सियासी सरगर्मियां तेज हैं और इसी बीच हरियाणा के चौटाला परिवार में संग्राम छिड़ा हुआ है. आज पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला ने अपने बेटे अजय चौटाला को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. कुछ वक्त पहले उन्होंने अपने पोतों सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला को पार्टी भी निष्कासित कर दिया था. इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) पार्टी से दुष्यंत-दिग्विजय के निष्कासन के बाद से ही पार्टी में लगातार विद्रोह देखने को मिल रहा था. पार्टी कार्यकर्ता दुष्यंत के पक्ष में काली पट्टियां बांधकर धरने पर बैठ गये थे. वहीं दुष्यंत ने दावा किया कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नहीं हुई है. न ही अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला की तरफ से बर्खास्तगी के लिये कोई आदेश जारी हुए हैं. इससे पहले शिक्षक भर्ती घोटाले में जेल की सजा काट रहे इंडियन नेशनल लोकदल (आइएनएलडी) के महासचिव अजय चौटाला ने 5 नवंबर को पैरोल पर रिहा होने के बाद पार्टी और परिवार में चल रहे घमासान पर काफी आक्रमक प्रतिक्रिया दी थी. अजय चौटाला ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था, ''याचना नहीं अब रण होगा, जीवन या मरण होगा. दुर्योधन तू उत्तरदाई होगा. हिंसा का उत्तरदाई होगा." उन्होंने पार्टी में चल रहे उठापटक को लेकर ये भी कहा कि हक मांगने से नहीं छीनने से मिलता है.

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