taaja khabar....PNB ने अन्य बैंकों को चिट्ठी लिख किया सचेत, 10 अधिकारी निलंबित.....PNB केस की INSIDE स्टोरी: 7 साल पहले हुआ था फ्रॉड, सरकार की सख्ती से खुलासा....बिहार के आरा में आतंकियों के कमरे में धमाका, बड़ी साजिश नाकाम, 4 फरार.....तीन दिन में तीन यात्राएं, चुनावी मोड में बीजेपी, निशाना 2019 पर...मोदी केयर' पर केंद्र ने राज्यों की बुलाई बैठक, ममता पहले ही झाड़ चुकी हैं पल्ला....
नई दिल्ली पीएनबी घोटाले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी और वित्त मंत्री पर हमला बोला। राहुल गांधी का कहना था कि बिना उच्च स्तरीय संरक्षण के इतने बड़ा घोटाला नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी ने शनिवार को यह हमला कांग्रेस अधिवेशन के सिलसिले में बनाई गई पार्टी की संचालन समिति की मीटिंग के बाद बोला। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस का अधिवेशन दिल्ली में आगामी 16 से 18 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस मीटिंग में बैंक घोटाले पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कांग्रेस ने संकेत दिया कि बजट सत्र के दूसरे चरण में वह इस मामले को लेकर सरकार को घेरेगी। इससे पहले कांग्रेस समान विचारधारा वाले दलों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करके एक कॉमन रणनीति बनाएगी। मीडिया प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस बैंक घोटाले से जुड़े तमाम तथ्य सभी दलों के सामने रख आगे की रणनीति पर चर्चा करेगी। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर जेपीसी की मांग से भी इनकार नहीं किया है।
चेन्नई तमिलनाडु में बीजेपी की कोई खास जनाधार भले न हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर ही वहां एक बड़ा राजनीतिक फैसला हुआ था। इस फैसले ने ही AIADMK को बिखरने से बचाया था। तमिलनाडु के डेप्युटी सीएम ओ पन्नीरसेल्वम ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की बात मानकर उन्होंने ईके पलनिसामी से हाथ मिलाया और एआईएडीएमके सरकार का हिस्सा बने थे। उन्होंने राजनीति से जुड़े अपने कैडर और पद के लिए भी पीएम की सलाह मानने को वजह बताया। पन्नीरसेल्वम ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझसे कहा था कि पार्टी को बचाने के लिए आपको एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाना चाहिए। तब मैंने हामी भरने के साथ ही यह भी कहा था कि मैं कोई मंत्री नहीं बनूंगा और सिर्फ पार्टी के लिए काम करूंगा।' पन्नीरसेल्वम के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने ही उन्हें मंत्री पद संभालने और राजनीति में हिस्सा लेने के लिए कहा था और इस वजह से आज वह मंत्री हैं। पन्नीरसेल्वम ने भावुक बयान देते हुए कहा, 'मैंने जो परेशानियां और अपमान सहा है उसकी कोई हद नहीं।' उन्होंने कहा कि मेरी जगह कोई और होता तो अबतक आत्महत्या कर चुका होता। अपने राजनीतिक कद का श्रेय जयललिता को देते हुए उन्होंने कहा, 'मैं अम्मा की वजह से ही इतनी मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर पाया।' बता दें कि जयललिता के निधन के बाद पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर काफी तनातनी का दौर चला था। पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी और माना जा रहा था कि पार्टी को संभालना और आगे बढ़ाना अब मुश्किल हो जाएगा, लेकिन पिछले साल दोनों धड़े साथ आ गए। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने भी दोनों धड़ों के विलय का स्वागत किया था। मोदी ने कहा था कि तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार सीएम पलनिसामी और उप मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम को पूरा समर्थन देगी। मोदी ने उस दौरान ट्वीट कर कहा था, 'मैं ओ पन्नीरसेल्वम और शपथ लेनेवाले अन्य लोगों को बधाई देता हूं। मुझे उम्मीद है कि आनेवाले सालों में तमिलनाडु विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।' दरअसल माना जा रहा था कि AIADMK विलय में पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अहम भूमिका निभाई है, क्योंकि पार्टी राज्य में अपना आधार मजबूत करना चाहती है।
नई दिल्ली कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए हाल में गठबंधन करने वाले जेडीएस और बीएसपी ने अब सीपीएम और सीपीआई को भी अपने साथ लाने की कोशिश की है। यह 'गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस गठबंधन' बनाने की कोशिश का हिस्सा है। खबरों के मुताबिक बीएसपी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर में आगामी लोकसभा उप चुनावों के लिए बीजेपी और कांग्रेस-एसपी गठबंधन का मुकाबला करने के लिए आरएलडी के नेता अजित सिंह को गठबंधन करने का प्रस्ताव भेजा है। यह कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं, जब कांग्रेस नेतृत्व और उसके कुछ सहयोगी दलों ने शक जताया है कि बीजेपी अपने खिलाफ बड़ा गठबंधन बनाने की कोशिशों को नाकाम करने के लिए काम कर रही है। हालांकि, जेडीएस-बीएसपी कैंप का कहना है कि यह गठबंधन कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने के लिए बनाया गया है और इसमें बीजेपी की कोई भूमिका नहीं है। मायावती शनिवार को बेंगलुरु में जेडीएस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा और कुमारस्वामी के साथ एक रैली को संबोधित करेंगी। दोनों दलों के बीच गठबंधन में बड़ी भूमिका निभाने वाले जेडीएस के महासचिव दानिश अली ने कहा, 'कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर चल रही है। हमने सत्ता विरोधी वोटों का फायदा उठाने के लिए गठबंधन बनाया है। हमारे ऐसा नहीं करने पर ये वोट बीजेपी के पास जाते।' जेडीएस-बीएसपी गठबंधन उन्हीं दलित (24%) और मुस्लिम (13%) मतदाताओं पर फोकस करेगा, जो कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हैं। राज्य में सीपीएम और सीपीआई की अधिक मौजूदगी नहीं है, लेकिन इन दलों को साथ लाने में जेडीएस की दिलचस्पी की वजह यह दिखाना है कि तीसरा मोर्चा बनाने के लिए गैर-कांग्रेस और गैर-बीजेपी गठबंधन एक आधार हो सकता है। ऐसा पता चला है कि सीपीएम और सीपीआई के नेताओं ने इस बारे में फैसला लेने की जिम्मेदारी राज्य में अपने नेताओं को दी है। हालांकि, वाम दलों के नेताओं को यह आशंका है कि त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में जेडीएस पाला बदलकर बीजेपी के साथ जा सकती है। उत्तर प्रदेश में बीएसपी की अजित सिंह को साथ लाने की कोशिश पिछले वर्ष सोनिया गांधी की ओर से बुलाई गई विपक्ष की संयुक्त मीटिंग में मायावती के हिस्सा लेने के बाद शुरू हुई थी। उत्तर प्रदेश में लोकसभा उपचुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य के अपनी सीटों से इस्तीफा देने की वजह से हो रहे हैं।
बेंगलुरु कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के लिए पहुंचे हैं। दौरे के तहत वह बस से राज्य के कई इलाकों में जाकर रैलियां कर रहे हैं। कांग्रेस को भले ही राहुल के रोड शो से उम्मीदें हों लेकिन लोगों को इसकी वजह से काफी परेशानी भी हो रही है। वहीं, कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) को इससे करोड़ों का फायदा एक दिन में हुआ है। दरअसल, राहुल की जनाशीर्वाद यात्रा के लिए कोप्पल और रायचुरू जिलों से लोगों को रैलीस्थल तक पहुंचाने के लिए बसों का इंतजाम किया गया है। इस काम के लिए केएसआरटीसी की हजारों बसों को लगाया गया है। बताया जा रहा है कि 10 फरवरी को 2300 बसें कांग्रेस नेताओं ने इस्तेमाल की थीं। इनमें से बेल्लारी, होसपेट और कोप्पल से 300 बसें और गडग से 200 बसें लगाई गई थीं। वहीं 11 फरवरी को कोप्पल से 600 बसें लोगों को लाने के लिए लगाई गई थीं। केएसआरटीसी को इससे 3.62 करोड़ रुपये का फायदा एक दिन में हुआ है लेकिन बसों की कमी के चलते आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों को प्राइवेट गाड़ियों का इंतजाम करना पड़ रहा है। यही नहीं, राहुल गांधी की यात्रा हैदराबाद-कर्नाटक के रास्ते होनी है। इस कारण रास्तों को बदला भी गया है। कई रास्तों पर यातायात रोक दिया गया है। इसकी वजह से लोगों को और भी मुश्किल हो रही है। परीक्षाओं के लिए जा रहे छात्रों को और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल की यात्रा खत्म होने तक स्थिति ऐसी ही बनी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
नई दिल्ली: 'पकौड़ा' पॉलिटिक्‍स'' जारी है. छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव से बीजेपी सांसद और छत्तीसगढ़ सीएम रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह ने बजट पर चर्चा के दौरान ने गुरुवार को कांग्रेस पर गरीबों का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘चाय वाले’ का मजाक बनाया गया तो कांग्रेस 44 सीटों तक पहुंच गई और पकौड़ा वाले का मजाक उड़ाकर अगली बार वह पांच सीटों पर सिमट जाएगी. लोकसभा में आम बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के अभिषेक सिंह ने कहा कि जिस तरह चायवाले का मजाक बनाने पर कांग्रेस 2014 के आम चुनाव में 44 सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी ठीक उसी तरह 'पकौड़ा बेचने वाले मेहनतकश लोगों का मजाक बनाने के बाद वह 2019 में पांच सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगी. विपक्षी पार्टियों पर साधा निशाना अभिषेक सिंह ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनमें बजट को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि 5 लाख का बीमा सरकार कैसे कर पाएगी? इस बात को इस देश की जनता ने 2014 में ही समझ लिया था. तभी उन्हें विपक्ष में जाकर बैठा दिया. इन्हें तब भी भरोसा नहीं हुआ जब नोटबंदी और जीएसटी का निर्णय मोदी सरकार ने लिया था. गरीबों का मजाक उड़ा रही कांग्रेस सिंह ने कहा कि जनता हमारे साथ है. लगातार राज्यों के विधानसभा चुनाव में हमारा साथ दे रही है. विपक्ष से कहा कि आप हमारी नीतियों की आलोचना करें तो यह ठीक है लेकिन पोहा, पकौड़ा बेचने वालों का माखौल न उड़ाएं. गरीब यह अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा. हम गरीबों के लिए काम कर रहे हैं. सिंह ने कहा कि देश में गरीब आदमी अपनी मेहनत से परिवार का पेट पालता है और आगे बढ़ता है, लेकिन कुछ लोग इनका मजाक बना रहे हैं. चुनाव में इन लोगों को जवाब मिलेगा. गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति पकौड़े की दुकान लगाता है और रोज वह 200 रुपये कमाकर घर जाता है तो आप उसे रोजगार कहेंगे या नहीं? संसद के मौजूदा सत्र में अक्सर कोई न कोई सदस्य पकौड़े का उल्लेख करता है. सत्तापक्ष और विपक्ष के कई सदस्यों ने इस मामले को लेकर एक दूसरे पर निशाना साधा है.
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को लोकसभा में बोल रहे थे तो कांग्रेस सांसदों ने अचानक जोर जोर से नारेबाजी शुरू कर दी. कांग्रेस के इस ‘फ्लैश प्रोटेस्ट’ ने सभी को हैरान किया. सूत्रों के मुताबिक इस ‘गुरिल्ला स्टाइल’ विरोध की रणऩीति कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ही बनाई थी. पार्टी के सभी सांसदों को 12 बजे दोपहर तक लोकसभा पहुंचने के लिए कहा गया था. सूत्रों के मुताबिक सदन में इस तरह के विरोध को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी कुछ हिचक रही थीं लेकिन राहुल ने अपने सिपहसालारों को पूरी ताकत के साथ ‘मुद्दों पर आधारित’ नारेबाजी के लिए ग्रीन सिग्नल दिया. बताया जा रहा है कि लोकसभा में पार्टी के व्हिप ज्योदिरादित्य सिंधिया ने इस पूरी रणनीति को सदन में अंजाम दिया और राहुल गांधी ने इस पर बारीक नजर रखी. जैसे ही सदन में कांग्रेस सांसदों ने नारेबाजी शुरू की और हाथों में कागज की तख्तियां लहरानी शुरू की, लेफ्ट फ्रंट समेत और विपक्षी दल भी विरोध में उनका साथ देने लगे. दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस के सांसद जब फुल वॉल्यूम में नारे लगा रहे थे तो सोनिया गांधी की ये फिक्र थी की कहीं उनके गले खराब ना हो जाएं. सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी ने सांसदों को टाफियां भी भिजवाईं जिससे उनके गले को राहत मिल सके. सदन में कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सबसे ज्यादा नारे लगाए. रंजीत रंजन ने कहा, ये साफ हिदायत थी कि हमें मुद्दों को लेकर नारे लगाने हैं और प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत तौर पर कोई निशाना नहीं साधना. हमारी पार्टी मुद्दों पर आधारित राजनीति करती है, प्रधानमंत्री की तरह नहीं जो विपक्षी नेताओं पर व्यक्तिगत आक्षेप करते हैं.
कोलकाता पश्चिम बंगाल की उलुबेड़िया लोकसभा सीट और नोयापाड़ा विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जरूर राहत की सांस ली होगी, लेकिन बीजेपी के लिए यह हार में छिपी जीत साबित हुई है। इन दोनों सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे। यह पार्टी के लिए वहां बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल की उलुबेड़िया लोकसभा सीट और नोयापाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए। नतीजों में तृणमूल ने ही बाजी मारी। तृणमूल नोयापाड़ा सीट को कांग्रेस से छीन अपने खाते में ले आई, तो वहीं उलुबेड़िया सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रहा। बीजेपी के लिए दोनों ही सीटों पर दूसरे स्थान पर रहना संतोषजनक रहा। नोयापाड़ा विधानसभा सीट उपचुनाव में तृणमूल प्रत्याशी सुनील सिंह ने 1,11,729 वोटों के साथ चुनाव जीता। यहां पर बीजेपी के संदीप बनर्जी दूसरे स्थान पर रहे। वहीं सीपीएम की गार्गी चटर्जी तीसरे और कांग्रेस के गौतम बोस चौथे नंबर पर रहे। इसी तरह उलुबेड़िया लोकसभा सीट टीएमसी के सांसद सुल्तान अहमद के निधन के बाद खाली हुई थी, जहां से दिवंगत नेता की पत्नी सजदा अहमद चुनाव लड़ रही थीं। उन्हें मिली 4 लाख 70 हजार वोटों की बंपर जीत को जनभावना की लहर के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन बीजेपी प्रत्याशी अनुपम मलिक, सीपीएम और कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी दोनों ही सीटों पर बीजेपी ने दूसरा स्थान हासिल कर राज्य में अपने बढ़ते जनाधार की ताकत दिखा दी है। पिछले साल हुए निकाय चुनावों में भी बीजेपी दूसरे स्थान पर रही थी। यह नतीजे राज्य में कई दशकों तक शासन करने वाली सीपीआई (एम) और कांग्रेस पार्टी के लिए खतरे की घंटी की तरह साबित हुए हैं। वहीं बीजेपी 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पॉजिटिव संकेत के तौर पर देख रही है।
शिलॉन्ग (मेघालय)/नई दिल्ली. कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक यानी RSS पर लैंगिग भेदभाव को लेकर तंज कसा है। राहुल ने कहा है कि RSS में पुरुषों को ही तरजीह दी जाती है। इसके लिए उन्होंने महात्मा गांधी और मोहन भागवत के बीच तुलना कर दी। राहुल ने कहा- अगर आप महात्मा गांधी के फोटो देखें तो पाएंगे कि उनके दाएं और बाएं महिलाएं रहती थीं। लेकिन, अगर आप मोहन भागवत के फोटो देखेंगे तो पाएंगे कि या तो वो अकेले रहते हैं या फिर पुरुषों से घिरे नजर आते हैं। बता दें कि मेघालय में 27 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। RSS महिलाओं के विरोध में - मेघालय में कांग्रेस 15 साल से सरकार में है। लेकिन, इस बार उसे इस नॉर्थ-ईस्ट स्टेट में बीजेपी से कड़ी चुनौती मिल रही है। राहुल गांधी ने यहां बुधवार से इलेक्शन कैंपेन शुरू किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से बातचीत भी की। - राहुल गांधी ने कहा- RSS महिलाओं को कमजोर करना चाहती है। क्या कोई जानता है कि संघ की लीडरशिप में कितनी महिलाएं हैं? जीरो। अगर आप महात्मा गांधी को देखें तो उनकी इस तरफ (इशारे से दाएं) और इस तरफ (फिर इशारे से बाएं) महिलाएं रहती थीं। लेकिन, आप मोहन भागवत के फोटो देखें तो? या तो वो अकेले नजर आएंगे या फिर पुरुषों से घिरे नजर आएंगे। हम लड़ाई संघ की आईडियोलॉजी के खिलाफ - राहुल ने कहा- हम पूरे देश में RSS की विचारधारा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। वो एक शख्स की सोच को देश पर थोपना चाहते हैं। - कांग्रेस प्रेसिडेंट ने आगे कहा- RSS और बीजेपी पूरे देश में क्या कर रही है? खास तौर पर नॉर्थ-ईस्ट में? वो आपके कल्चर, लैंग्वेज और जीने के तरीके को बदलना चाहती है। - राहुल ने कहा कि अगर कांग्रेस केंद्र में फिर सरकार बनाती है तो जीएसटी का मौजूदा स्ट्रक्चर बदलेगी। इससे ज्यादा आसान बनाया जाएगा। - कांग्रेस के बारे में बात करते हुए राहुल ने कहा- हम महिलाओं और पुरुषों को इलेक्शन का टिकट देने में बैलेंस बनाना चाहते हैं। मैं मेघालय की महिलाओं से अपील करता हूं कि वे कांग्रेस से जुड़ें। इससे हमें टिकट देने में च्वॉइस की आजादी रहेगी।
औरंगाबाद: 2019 का आम चुनाव नजदीक आ रहा है ऐसे में सियासी समीकरण बदलने की उम्मीद बढ़ती जा रही है. कुछ नए समीकरण बनने के आसार दिख रहे हैं और कुछ पुराने समीकरण टुटने के कयास लगए जा रहे हैं. इस बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण के एक बयान ने सियासी समीकरण बदलने के संकेत दिए हैं. दरअसल कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि शिवसेना अगर बीजेपी विरोधी दलों के साथ आना चाहती है तो पार्टी को पहले राजग से नाता तोड़ कर सत्ता से हटना होगा. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने संकेत किया कि अगर उनकी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मंजूरी देता है तो शिवसेना और कांग्रेस के साथ औपचारिक गठजोड़ हो सकता है . चह्वाण ने संवाददाताओं को बताया, “शिवसेना बीजेपी के साथ सत्ता में है और अगर यह अलग होकर बीजेपी विरोधी दलों के साथ आना चाहती है तो हमलोग इस पर विचार करेंगे और (गठबंधन के लिए) एक प्रस्ताव दिल्ली भेजा जा सकता है.’’ बता दें कि शिवसेना महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ सरकार में है लेकिन समय समय पर पार्टी के नेताओँ के साथ खुद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते रहे हैं. हालांकि बीजेपी से अलग हो कर चुनाव लड़ने पर अभी तक शिवसेना ने कोइ प्रतिक्रिया नहीं दी है.
पटना चारा घोटाला में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद अब उनकी पार्टी में भी संकट के बादल छाने लगे हैं। पार्टी के जनरल सेक्रटरी अशोक सिन्हा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे की वजह में अशोक सिन्हा ने साफ किया कि वह लालू की जगह पार्टी की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव की कार्यशैली से नाखुश हैं। उन्होंने कहा, ' मौजूदा समय में आरजेडी अप्रासंगिक हो गई है इसलिए बेहतर है कि समय बर्बाद करने की जगह पार्टी छोड़ दी जाए। तेजस्वी यादव लालू जी की तरह पार्टी का नेतृत्व नहीं कर सकते।' पिछले दिनों लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सजा होने के बाद उनकी गैरमौजूदगी में आरजेडी की बागडोर उनके पुत्र और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को सौंप दी गई थी। इसके बाद से ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के आंतरिक कलह को खत्म करना माना जा रहा था, लेकिन जनरल सेक्रटरी के इस्तीफे के साथ उन्हें पहला झटका मिला है। पार्टी के अंदरखाने में उपजी कलह को खत्म करने के साथ ही तेजस्वी के सामने बिहार में पार्टी के परंपरागत वोट को भी साथ बनाए रखने की भी चुनौती है। आरजेडी की सियासी अग्निपरीक्षा गौरतलब है कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद आरजेडी की सियासी अग्निपरीक्षा अगले महीने (फरवरी) में होनी है। अररिया लोकसभा सीट सहित दो विधानसभा सीटों जहानाबाद और भभुआ में उपचुनाव होने हैं। अररिया संसदीय सीट आरजेडी सांसद मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के निधन के कारण खाली हुई है। वहीं, जहानाबाद सीट आरजेडी विधायक मुद्रिका सिंह यादव के निधन और भभुआ विधानसभा सीट बीजेपी विधायक आनंद भूषण पांडेय के नवंबर में निधन होने से खाली है। अररिया संसदीय सीट को बनाए रखना आरजेडी के लिए बड़ी चुनौती है। अररिया विधानसभा सीट से तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम अभी जेडीयू से विधायक हैं। आरजेडी सरफराज को फिर से दल में लाने की कोशिश कर रही है और उन्हें ही इस सीट से लड़वाना चाहती है। जेडीयू भी उन्हें अपने दल से ही टिकट दे सकती है, लेकिन पहले यह तय करना होगा कि यह सीट जदयू के हिस्से रहेगी या बीजेपी के।

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