taaja khabar...रोहिंग्या की अवैध बस्तियों को बढ़ावा दे रहे तृणमूल कांग्रेस के नेता: एजेंसियां.....नरम पड़े चीन के तेवर? साझा सैन्य अभ्यास का दिया प्रस्ताव......चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर फिर सक्रिय हुए विपक्षी दल, आज बैठक.....लंदन में पीएम मोदी के सेशन से मिले साफ संकेत, क्या है बीजेपी का इलेक्शन प्लान?...कठुआ कांड के बाद किस करवट बैठेगी जम्मू-कश्मीर की सियासत?...
बेंगलुरु, कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने 218 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी सीट से चुनाव लड़ेंगे. उनके बेटे यतींद्र को वरुणा विधानसभा सीट से टिकट मिला है. इसके अलावा मल्लिकार्जुन खडगे के बेटे और मौजूदा विधायक प्रियांक खडगे को चैतपुर सीट से टिकट दिया गया है. पांच सीटों पर बना है सस्पेंस कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटें हैं और कांग्रेस ने पांच सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया है. एक सीट पर एंग्लो-इंडियन उम्मीदवार का मनोनयन किया जाएगा. बीजेपी एक हफ्ते पहले ही कर्नाटक चुनाव के लिए अपने 72 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी है. कांग्रेस ने जिन सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है, उनमें सिंगडी, नागथन, मेलूकोटे, कित्तूर, रायचूर और शांतिनगर सीटें शामिल हैं. 30 नेता मांग रहे थे बच्चों के लिए टिकट कांग्रेस के कम से कम 30 नेता अपने बेटे-बेटियों के लिए टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन इनमें से केवल पांच को ही टिकट मिल सका है. इनमें सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र, रामालिंगा रेड्डी की बेटी सौम्या, कृष्णप्पा के बेटे कृष्ण, शामनुर शिवशंकरप्पा के बेटे एसएस मल्लिकार्जुन, टीबी जयचंद्रा के बेटे संतोष जयचंद्रा और मल्लिकार्जुन खडगे के बेटे प्रियांक खडगे. इनमें से कुछ इस समय भी विधायक हैं. 14 विधायकों का कटा टिकट कांग्रेस ने 14 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है और उस संदेश पर अमल करने की कोशिश की है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि वे कार्यकर्ताओं और काम करने वालों को टिकट देंगे. इस समय सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 122 सीटें हैं, जबकि बीजेपी के पास 43 और जेडीएस के पास 37 सीटें हैं. बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा शिकारीपुरा सीट से चुनाव में उतर रहे हैं. कर्नाटक में विधानसभा की सभी 224 सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा. 12 मई को राज्य में वोटिंग के बाद गिनती 15 मई को की जाएगी.
नई दिल्ली: इलेक्शन कमीशन के जरिए पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में नामांकन की तारीख बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद ही तृणमूल कांग्रेस के कई उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया. इसके बाद से ही विपक्ष राज्य की सत्तारूढ़ सरकार टीएमसी पर गड़बड़ी करने और दूसरे उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ने देने का आरोप लगा रही है. वहीं टीएमसी का कहना है कि विपक्ष के पास खुद कोई उम्मीदवार नहीं था, ऐसे में अपनी हार के लिए वो खुद ही जिम्मेदार हैं. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक, तीन और पांच मई को पंचायत चुनाव होने हैं. पहले नामांकन की आखिरी तारीख नौ अप्रैल थी. उम्मीदवारों को नामांकन फाइल नहीं करने देने की शिकायत मिलने के बाद इस तारीख को सोमवार को 10 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था. नई दिल्ली: इलेक्शन कमीशन के जरिए पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में नामांकन की तारीख बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद ही तृणमूल कांग्रेस के कई उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया. इसके बाद से ही विपक्ष राज्य की सत्तारूढ़ सरकार टीएमसी पर गड़बड़ी करने और दूसरे उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ने देने का आरोप लगा रही है. वहीं टीएमसी का कहना है कि विपक्ष के पास खुद कोई उम्मीदवार नहीं था, ऐसे में अपनी हार के लिए वो खुद ही जिम्मेदार हैं. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक, तीन और पांच मई को पंचायत चुनाव होने हैं. पहले नामांकन की आखिरी तारीख नौ अप्रैल थी. उम्मीदवारों को नामांकन फाइल नहीं करने देने की शिकायत मिलने के बाद इस तारीख को सोमवार को 10 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था. निर्विरोध जीते टीएमसी उम्मीदवार तृणमूल कांग्रेस ने बीरभूम जिला परिषद की 42 में से 41 सीटों पर जीत हासिल कर ली है. पंचायत चुनाव से पहले ही टीएमसी ने बीरभूम पंचायत समिति की भी 19 में से 14 सीटों को निर्विरोध जीत लिया है. इसी तरह मुर्शिदाबाद के किंडी में भी टीएमसी ने 30 में से 29 और भरतपुर-2 में सभी 21 पंचायत समितियों पर जीत हासिल कर ली है. बुर्वान में भी सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार सभी 37 पंचायत समितियों की सीटों पर निर्विरोध विजेता घोषित कर दिए गए हैं. विपक्ष बोला- उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोका टीएमसी की इस एकतरफा जीत से विपक्ष का खासा नाराज है. उन्होंने पार्टी पर चुनावों में धांधली का आरोप लगाने के साथ ही दूसरे पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ने देने की बात कही. बीरभूम जिले के बीजेपी अध्यक्ष रामकृष्ण रॉय ने कहा कि 'ये जीत बॉम्ब और बंदूक की संस्कृति को दर्शाती है. उन्होंने (टीएमसी ने) लोगों को चुनाव से पहले ही डरा कर रखा है और अब वे दावा कर रहे हैं कि विकास के आधार पर वो ये सीटें जीते हैं.' सीपीएम विधायक सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि ये जीत टीएमसी ने इन सीटों को जीता नहीं बल्कि गलत तरीके से कब्जा कर लिया है. उन्होंने कहा कि 'विपक्ष के उम्मीदवारों को टीएमसी ने खड़े ही नहीं होने दिया. उन्हें नामांकन भरने से रोका गया. बिना चुनौती की इस जीत की कोई साख नहीं है.' टीएमसी ने आरोपों को बताया गलत हालांकि, विपक्ष के आरोपों को टीएमसी ने गलत ठहराया है. बीरभूम जिले के टीएमसी अध्यक्ष अनुब्रटा मंडल ने कहा कि 'हम इस बात से हैरान हैं कि विपक्ष को जिला परिषद के लिए कोई उम्मीदवार ही नहीं मिला. उन्हें किसी ने भी नामांकन भरने से नहीं रोका. उनके पास लोगों का सपोर्ट ही नहीं था, जिस वजह से वे इन जगहों पर उम्मीदवार नहीं ढूंढ पाए.'
नई दिल्ली,दलित उत्पीड़न के खिलाफ सोमवार को राजघाट पर कांग्रेस के एक दिवसीय उपवास का मजाक बन गया. उपवास के पहले ही छोले-भटूरे खाते हुए नेताओं की तस्वीर वायरल होने से चर्चा का रुख ही पलट गया. इस उपवास में राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस नेताओं ने लोगों को राजघाट पर बुलाया और खुद उपवास से पहले रेस्टोरेंट में पहुंच गए. जिसके बाद राहुल का ये उपवास विवादों में घिर कर रह गया. उपवास से पहले 'छोले-भटूरे' वाली पार्टी दरअसल दिल्ली कांग्रेस के नेता उपवास से पहले चांदनी चौक के मशहूर छेनाराम की दुकान पर बैठकर खाते छोले-भटूरे खाते देखे गए. कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन यहां भी अध्यक्षता कर रहे थे. उनके एक ओर हारून युसूफ थे और टेबल के दूसरी तरफ अरविंदर सिंह लवली. साथ में गाजर का अचार, भुनी हुई हरी मिर्च और मसालेदार आलू. उपवासी नेताओं के मुख पर तृप्ति के भाव देखकर शायद आज गांधी जी भी धन्य हो जाते. कांग्रेसियों के छोले-भटूरे की पार्टी का खुलासा बीजेपी नेता हरीश खुराना ने किया. खुराना ने एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें कांग्रेस नेता अजय माकन, हारुन युसूफ, अरविंदर सिंह लवली छोले-भटूरे खा रहे हैं. हरीश खुराना दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मदन लाल खुराना के बेटे हैं. कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली ने इस तस्वीर के सही होने की बात भी स्वीकार कर ली. टाइटलर-सज्जन मंच से आउट! राहुल गांधी के उपवास वाले स्थल पर पहुंचने से पहले भी एक विवाद हुआ. राजघाट से कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को वापस भेज दिया गया. बताया जा रहा है कि जैसे ही टाइटलर वहां पहुंचे तो अजय माकन ने उनके कान में कुछ कहा, जिसके बाद वो वापस चले गए. जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार 1984 में हुए सिख दंगों के आरोपी हैं. हालांकि, जगदीश टाइटलर ने कहा है कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं, बल्कि जनता के बीच में जाकर बैठेंगे. इसके बाद मीडिया में जैसे ही टाइटलर और सज्जन कुमार को राजघाट से वापस भेजने की खबरें चलीं, बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला कर दिया. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने आज इन दोनों नेताओं के राजघाट से वापस भेजकर एक तरह कबूल कर ली है कि 1984 में जो कत्लेआम हुआ था, उसमें कांग्रेस नेता दोषी हैं. उपवास स्थल से भीड़ गायब दो विवादों के बाद जैसे ही राहुल गांधी राजघाट पहुंचे, वहां से लोगों की भीड़ कम होने लगी. क्योंकि पहले तो राहुल के आने का वक्त सुबह 11 बजे बताया जा रहा था, लेकिन जब राहुल गांधी वक्त पर नहीं पहुंचे और वहां से जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को वापस भेजने की खबरें आ गईं. इस विवाद पर कांग्रेसी सफाई दे ही रहे थे कि राहुल के साथ उपवास में शामिल होने वाले कांग्रेस नेताओं के छोले-भटूरे खाने की खबर आ गई. शायद लगातार विवाद की वजह से आम कार्यकर्ता राजघाट से वापस चले गए. क्योंकि वो सुबह-सुबह उपवास में शामिल होने के लिए राजघाट पहुंचे थे. क्योंकि जितनी भीड़ सुबह 10 बजे तक राजघाट पर थी, वो राहुल के पहुंचने तक छट चुकी थी. हालांकि देर ही सही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सांकेतिक उपवास के लिए राजघाट पहुंचे. यहां पहुंचते ही राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर जातिवादी और दलित विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि BJP की दमनकारी विचाराधारा के खिलाफ उनकी पार्टी हमेशा खड़ी रहेगी. गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की प्रदेश इकाइयों के प्रमुखों को समाज के सभी वर्गों में सौहार्द्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रव्यापी उपवास रखने के निर्देश दिया था. दिल्ली के अलावा पूरे देश में तमाम नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस मुख्यालयों पर अपना उपवास रख रहे थे.aajtak
कोलकाता, पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. अब सूबे के साउथ 24 परगना में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा पंचायत चुनावों में बीजेपी की महिला प्रत्याशी को सरेआम पीटने का मामला सामने आया है. बीजेपी महिला प्रत्याशी पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उस समय हमला बोला, जब वो बारुईपुर एसडीओ ऑफिस में नामांकन दाखिल करने पहुंचीं. टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा महिला को पीटने का वीडियो भी वायरल हो रहा है. टीएमसी कार्यकर्ताओं की पिटाई से महिला जमीन पर गिर पड़ी. इस घटना को वहां मौजूद लोग तमानबीन बने देखते रहे. किसी ने भी टीएमसी के कार्यकर्ताओं को रोकने की जहमत नहीं दिखाई. इसी महीने के शुरुआत में भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें रिटर्निंग ऑफिसर के सामने ही टीएमसी कार्यकर्ता बीजेपी उम्मीदवार की पिटाई करते हुए दिखाई दिए थे. इसके अलावा शुरुआती महीने में पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में नामांकन के दौरान भी जमकर हिंसा हुई थी. कई जिलों में विपक्षी पार्टियों के नेताओं पर हमले किए गए थे. टीएमसी नेताओं द्वारा नामांकन के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरें आई थीं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर टीएमसी पर पलटवार की चेतावनी दी थी. मालूम हो कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार है. बीजेपी जिलाध्यक्ष की छड़ी से पिटाई, दर्जनों घायल अप्रैल के शुरुआत में मुर्शिदाबाद में बीजेपी जिला अध्यक्ष गौरीशंकर घोष और उनके समर्थकों को उस वक्त छड़ी से पीटा गया था, जब वे लालबाग बीडीओ ऑफिस अपना नामांकन पत्र लेने गए थे. घोष के मुताबिक टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पूरे बीडीओ ऑफिस पर कब्जा जमा रखा था और विपक्षी नेताओं पर हमले कर रहे थे. उन्हें अपना फॉर्म भी कलेक्ट नहीं करने दिया था. इस घटना में कम से कम एक दर्जन बीजेपी कार्यकर्ता घायल हुए थे. हुगली में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला हुगली जिले में आरामबाग स्थित एसडीओ ऑफिस अपना नामांकन पत्र लेने गए बीजेपी कार्यकर्ताओं पर भी हमले हुए थे. यहां टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें धकियाने के साथ जूते से भी पिटाई की थी और अधिकारियों के सामने उन्हें ऑफिस से बाहर खींचकर निकाल दिया था. इसके अलावा बीजेपी की वीरभूम जिले की इंचार्ज कलोशोना मंडल पर कथित रूप से उस समय हमला हुआ था, जब वो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के दफ्तर विपक्षी नेताओं को पर्याप्त सुरक्षा न देने की शिकायत लेकर पहुंची थीं. इसी तरह की घटना बांकुरा और पूर्वी बर्दवान जिले में भी हुई थी.
कोलकाता पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा की खबरें लगातार मीडिया की सुर्खियां बनी हुई हैं। चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के चौथे दिन भी शुक्रवार को जमकर राजनीतिक हिंसा हुई। हालांकि इस दौरान धुर-विरोधी बीजेपी, कांग्रेस और सीपीएम कार्यकर्ता एक साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से भिड़ते नजर आए। मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमले का जवाब कांग्रेस, सीपीएम और बीजेपी के समर्थकों ने मिलकर दिया। इस घटना में 6 लोग घायल हो गए। इन हिंसा की घटनाओं की शुरुआत बंगाल के बीरभूम जिले के नालहाटी से हुई। जहां बीजेपी समर्थकों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए ब्लॉक ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिसवालों से झड़प भी हुई। इस झड़प के दौरान पुलिसवालों ने बीजेपी समर्थकों पर रबर बुलेट्स चला दीं। उधर पश्चिमी मिदनापुर में बीजेपी-टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में 10 लोग घायल हो गए जबकि पूर्वी बर्दवान जिले में लेफ्ट-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में 8 लोग घायल हुए। इन झड़पों में जो किसी दल के नहीं थे, वे भी सुरक्षित नहीं रहे। दक्षिणी 24 परगना जिले में टीएमसी नेता अरबुल इस्लाम के बेटे हकीमुल इस्लाम के हमले में 16 निर्दलीयों को भी चोटें आईं। हालांकि अरबुल ने इस घटना में उनके बेटे का हाथ होने से इनकार किया है।
नई दिल्ली, भारत के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस अब इससे पीछे हट गई है. लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि अब ये मुद्दा बंद हो गया है, हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं. बता दें कि पिछले कुछ समय से ऐसी अटकलें चल रही थीं कि कांग्रेस अन्य विपक्ष पार्टियों के साथ मिलकर महाभियोग लाने की तैयारी कर रही है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अब ये मुद्दा बंद हो गया है, हमने लोकसभा में कभी इस बात को नहीं उठाया. उन्होंने कहा कि हालांकि इस बात को लेकर राज्यसभा में चर्चाएं थीं, लेकिन अब वहां पर भी ऐसा नहीं हो रहा है. हमने लोकसभा में इस तरह की कोशिश नहीं की थी. गौरतलब है कि ऐसी खबरें थीं कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने करीब 60 सांसदों का समर्थन हासिल कर लिया था, जिसके साथ वे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहे थे. इनमें कांग्रेस के अलावा लेफ्ट, सपा, बसपा, एनसीपी जैसी पार्टियां शामिल थी. हालांकि, इस प्रस्ताव की शुरुआत होने के साथ ही ये मुद्दा दब गया. एकमत नहीं थी कांग्रेस! सूत्रों के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य अहमद पटेल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपनी इस राय से अवगत भी करा दिया है. कांग्रेस ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले उससे जुड़े तमाम सियासी नफा-नुकसान पर गौर कर रही है. कांग्रेस के कुछ नेताओं को लगता है कि चुनावी साल में पार्टी के इस तरह के कदम को बीजेपी राम मंदिर विरोधी और हिन्दू विरोधी करार देकर फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है. वहीं कांग्रेस लीगल सेल के प्रमुख और सांसद विवेक तनखा ने भी कहा है कि महाभियोग को लेकर पार्टी ने अभी कोई फैसला नहीं किया है.
नई दिल्ली, गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रभारी महासचिव के नाते अशोक गहलोत की मेहनत से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी खासे प्रभावित लगते हैं. यही वजह है कि उन्हें जनार्दन द्विवेदी की जगह कांग्रेस संगठन महासचिव की कुर्सी सौंप दी गई. गहलोत को नई जिम्मेदारी सौंपने के साथ ही राहुल ने उनसे पार्टी के खस्ताहाल संगठन में जान फूंकने के लिए प्लान मांगा. सूत्रों के मुताबिक गहलोत ने इस दिशा में 7 सूत्री प्लान राहुल को बताया. बताया जाता है कि प्लान राहुल को पसंद आया और उन्होंने इस पर अमल शुरू करने के लिए गहलोत को मौखिक रूप से हरी झंडी भी दिखा दी है. कांग्रेस में संगठन महासचिव का पद काफी अहम माना जाता है. गहलोत से पहले सोनिया गांधी के विश्वासपात्र माने जाने वाले जनार्दन द्विवेदी के कंधों पर ये जिम्मेदारी थी. गहलोत को उनके पुराने सांगठनिक अनुभव को देखते हुए संगठन महासचिव बनाया गया है. एनएसयूआई से शुरुआत करने वाले गहलोत यूथ कांग्रेस, सेवादल का सफर तय करते हुए तीन बार राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. साथ ही एआईसीसी में भी बतौर महासचिव दो बार वो जगह पा चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक गहलोत कांग्रेस संगठन की मजबूती के लिए अपने 7 सूत्री प्लान का पूरा ब्यौरा तैयार कर जल्दी ही राहुल से दोबारा मुलाकात करेंगे. उसके बाद प्लान पर जमीनी काम शुरू कर दिया जाएगा. कांग्रेस संगठन की दुरुस्तगी के प्लान में बूथ से लेकर संगठन में हर स्तर पर नट-बोल्ट कसने की बात है. 1. देश भर में समयसीमा तय करके प्रदेश, ज़िला और बूथ कमेटियों का गठन किया जाए. इसके लिए पार्टी के प्रदेशों महासचिवों और प्रदेश अध्यक्षों को जल्दी ही निर्देश जारी कर दिए जाएंगे. 2. सभी कमेटियों में जगह पाने वालों का एक डेटा बैंक भी तैयार किया जाएगा. इसमें उनकी डिटेल्स, बैकग्राउंड और विशेषज्ञता की जानकारी भी होगी. इसके जरिए व्यक्ति की विशेषता देखकर जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जायेगा या कोई पद दिया जायेगा. 3. पार्टी संगठन में हर स्तर पर 5 वर्गों को कम से कम कुल 50 फीसदी स्थान दिया जायेगा। इन वर्गों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाएं और अल्पसंख्यक शामिल रहेंगे. 4. केंद्रीय कांग्रेस से दिए जाने वाले प्रोग्रामों को किस तरह हर स्तर पर परफॉर्म किया गया, उसकी मॉनिटरिंग की जाएगी. साथ ही अपने जिले, बूथ या प्रदेश स्तर के मुद्दों पर खुद संगठन ने क्या किया, इसकी भी मॉनिटरिंग होगी. 5. मॉनिटरिंग गम्भीरता से हो इसके लिए सबको पेपर कटिंग और वीडियो क्लिपिंग भी तैयार रखनी होगी. मॉनिटरिंग के लिए ही राहुल गांधी ने हर राज्य में एक प्रभारी के साथ 4 प्रभारी सचिवों की नियुक्ति का फॉर्मूला बनाया है. 6. हर स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम और अधिवेशन तय समयसीमा में आयोजित करने होंगे. इनमें विशेषज्ञों, जानकारों और नेताओं के लेक्चर भी होंगे. इस काम की भी मॉनिटरिंग होगी. 7. तय हुआ है कि संगठन को मजबूत करने की इस पूरी कवायद की समीक्षा के लिए खुद राहुल हर चार महीने में राज्य के प्रभारी और चारों प्रभारी सचिवों के साथ बैठक किया करेंगे. हालांकि सियासी जरूरत के हिसाब से कभी भी ये मुलाकात हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक राहुल का गहलोत को साफ निर्देश है कि मॉनिटरिंग के बाद जवाबदेही भी तय की जाए. बेहतर प्रदर्शन करने वालों को इनाम और खराब प्रदर्शन करने वालों को सजा का नियम कड़ाई से अमल में लाया जाएगा. साथ ही पार्टी में आपसी फूट और अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेन्स की नीति का पालन होगा. इसके अलावा पार्टी संगठन में पदों पर बैठे 40 फीसदी लोग ही रिपीट होंगे और 60 फीसदी नए चेहरे होंगे. इन नए लोगों में खासकर वो होंगे जो अर्से से पार्टी में हैं, लेकिन पदों पर नहीं है. साथ ही पार्टी में आए कुछ नए लोगों को भी मौका दिया जा सकता है. राहुल पहले ही प्रदेश अध्यक्षों और महासचिवों को निर्देश दे चुके हैं कि, पीसीसी डेलिगेट्स और एआईसीसी मेंबरों की नियुक्ति में भी 40 फीसदी जगह 40 साल से कम उम्र के लोगों को दी जाएं. अपने नए फॉर्मूले पर बात करते हुए अशोक गहलोत ने कहा ‘जी हां, राहुल जी ने संगठन की दुरुस्तगी के लिए कई नए निर्देश दिए हैं, जिनका पालन होगा. साथ ही सबकी जवाबदेही जरूर तय होगी.’ गहलोत ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि इंदिरा, राजीव और सोनिया की तरह ही राहुल भी कांग्रेस को आगे लेकर जाएंगे. सारी मशक्कत का निचोड़ यही है कि राहुल पार्टी संगठन को नई धार देकर सियासी रण में उतरने की तैयारी में हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि कागज पर जो रणनीति है वो जमीन पर कितनी मजबूती और गंभीरता से उतारी जाती है. यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के वक्त भी राहुल के कई कागजी प्रोजेक्ट जमीन पर कामयाब नहीं हो पाए थे. उनका कांग्रेस में पार्टी टिकट हासिल करने के लिए प्राइमरी करानी का पायलट प्रोजेक्ट भी परवान नहीं चढ़ सका था. बहरहाल, गहलोत जैसा जमीनी और मझा सिपहसालार मिलने के बाद कांग्रेस संगठन में नई जान फूंकने का प्लान कितना कामयाब रहता है, ये आने वाला वक्त ही बताएगा. aajtak
नई दिल्ली, दिल्ली कांग्रेस दफ्तर में शीला दीक्षित, अजय माकन, हारून यूसुफ, अरविंदर लवली, सज्जन कुमार और महाबल मिश्रा समेत कई पूर्व विधायक और सांसदों की बैठक हुई. बैठक में अगले 1 महीने केजरीवाल सरकार को जनता के बीच जमीन पर घेरने के लिए रणनीति बनाने पर विचार किया गया. दिल्ली कांग्रेस ने बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी पर केजरीवाल सरकार पर बिजली कंपनियों से मिले होने का आरोप लगाया है. प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन के मुताबिक, सरकार बिना किसी ऑडिट के बिजली कंपनियों को सब्सिडी के नाम पर करोड़ों की रकम दे रही है. कांग्रेस ने दलितों के अधिकारों पर 4 अप्रैल के दिन संसद घेराव की भी रणनीति बनाई है. दिल्ली कांग्रेस ने बिजली सस्ती करने के केजरीवाल सरकार के दावों को जनता से खिलवाड़ करार दिया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नई कीमतों से बिजली सस्ती नहीं बल्कि महंगी हुई है और ये कदम प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया गया है. दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन के मुताबिक, बिजली कंपनियों को बिना किसी बहीखाते के सब्सिडी की 1412 करोड़ की रकम केजरीवाल सरकार दे रही है. कांग्रेस ने अपनी मासिक बैठक में तय किया है कि वे जनता के बीच केजरीवाल सरकार की असलियत लेकर जाएगी. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी बिजली की कीमतों पर केजरीवाल सरकार पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है. केजरीवाल सरकार को कांग्रेस ने बताया विफल कांग्रेस के मुताबिक, उनके कार्यकाल में दिल्ली में राशन कार्ड धारकों की संख्या 34 लाख 55 हज़ार थी, जो अब घटकर 19 लाख 41 हज़ार रह गई है. 5 लाख राशन कार्ड धारकों को अभी भी राशन नहीं मिल पा रहा है. कांग्रेस ने पानी की किल्लत के मुद्दे पर भी केजरीवाल सरकार को विफल बताया है. कांग्रेस के दिल्ली के सभी बड़े नेताओं की बैठक में दलित अधिकारों पर भी केंद्र को घेरने की रणनीति बनाई गई है. कांग्रेस 4 अप्रैल के दिन संसद का घेराव भी केंद्र के खिलाफ करेगी. बता दें कि दिल्ली कांग्रेस की बैठक में शीला दीक्षित समेत सभी बड़े नेताओं ने शिरकत की. कांग्रेस हर महीने ऐसी बैठकों के जरिए दिल्ली के ज्वलंत मुद्दों पर सत्तारूढ़ पार्टी को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है.
बेंगलुरु कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। यहां तीन बड़ी पार्टियां- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर चुनाव मैदान में हैें।12 मई को राज्य की 224 सीटों पर मतदान है। वहीं, 15 मई को राज्य में चुनी गई सरकार पर मतगणना के बाद फैसला होना है। आइये जानने की कोशिश करते हैं यहां के तीन प्रमुख दलों की क्या है ताकत और क्या है कमजोरी: कांग्रेस ताकत: - सिद्धारमैया के नेतृत्व में पार्टी की सरकार होने के चलते अन्न भाग्य, आरोग्य भाग्य, क्षेत्र भाग्य और इंदिरा कैंटीन जैसी योजनाओं का फायदा लोगों को मिल रहा है। इसका लाभ चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है। - राज्य में सीएम ने एक नई राजनीति की शुरुआत करते हुए अहिंडा (पिछड़े), दलित और मुस्लिमों को साथ लाकर मजबूत स्थिति में खड़ा किया है। इसके बाद अलग धर्म के मुद्दे पर लिंगायत समुदाय को भी साधने की कोशिश हुई है। - कर्नाटक की राजनीति में देर से आने के बावजूद कांग्रेस ने सीएम और पार्टी का नेता सबकी पसंद से चुना। सिद्धारमैया एकमात्र सीएम हैं, जो पिछले चार दशकों में पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए हैं। - पंजाब के बाद कर्नाटक में भी खुद को बचाकर रखने के लिए कांग्रेस कड़ी तैयारी कर रही है। कमजोरी: - सरकार की जनहित योजनाओं के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार और पार्टी के बीच तालमेल की कमी है। - बड़े नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। - सिद्धारमैया की लीडरशिप को समर्थन के अलावा कई मुद्दों पर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी है। - कई मामलों में पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा की मौजूदगी खेल बिगाड़ सकती है। - अहिंडा को मजबूत करने की सरकार की कोशिश के बाद सीएम पर बीजेपी की ओर से लगे हैं तुष्टीकरण के आरोप। बीजेपी ताकत: - बीएस येदियुरप्पा को सीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश कर बीजेपी ने बड़े भगवा चेहरे के सहारे पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट किया है। - सिद्धारमैया की लिंगायत समुदाय को लुभाने की कोशिश के बावजूद इसका 15 से 17 प्रतिशत वोट शेयर बीजेपी के साथ जा सकता है क्योंकि येदियुरप्पा उनके समुदाय से हैं। राज्य की 100 सीटों पर लिंगायत समुदाय का प्रभाव है। - पीएम मोदी की अपील एक बार फिर काम आ सकती है। कमजोरी: - येदियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले। कांग्रेस ने तो उनको 'जेलबर्ड' तक कहा। - अमित शाह की कोशिश के बावजूद येदियुरप्पा और केएस ईश्वरप्पा के बीच गुटबाजी की स्थिति। दोनों ही शिवामोगा जिले से। - केंद्र सरकार के चौथे साल में पीएम मोदी पर ज्यादा भरोसा। - देवगौड़ा की अपील से ऐंटी-बीजेपी वोटों में बंटवारे की कम संभावना बचती है। जेडी (एस) ताकत: - खासकर वर्किंग क्लास के बीच एचडी कुमारस्वामी की लोकप्रियता। - बीएसपी और लेफ्ट दलों के साथ पार्टी का गठबंधन। तेलुगू सुपरस्टार पवन कल्याण को साथ लाने की कोशिश। - ओल्ड मैसूर क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने के लिए बनते समीकरण। कमजोरी: - पिता-पुत्र की पार्टी होने का वंशवादी टैग। - एक खास इलाके में सीमित रहते हुए पूरे कर्नाटक में पार्टी का मौजूद न होना और वोटरों को लुभाने वाले नेताओं की कमी। - कांग्रेस और बीजेपी के मुकाबले जेडी (एस) के पास रिसोर्सेज की कमी।
लखनऊ गोरखपुर और फूलपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव में शानदार जीत के बाद यूपी में महागठबंधन के लिए प्रयासरत समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष अखिलेश यादव को तगड़ा झटका लगा है। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे एसपी की नींद उड़ गई है। सोमवार को मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में तो एसपी के साथ लड़ेगी लेकिन उपचुनावों में बीएसपी काडर उस तरह से सक्रिय नहीं रहेगा जैसा कि वह गोरखपुर-फूलपुर उपचुनावों में था। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा के उपचुनावों में मिली जीत के बाद उत्साहित एसपी यह उम्मीद कर रही थी कि उसे आगामी कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा के उपचुनावों में भी बीएसपी का साथ मिलेगा और वह भारतीय जनता पार्टी को हराने में कामयाब हो सकेगी। मायावती के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि एसपी को अब उपचुनावों में अकेले ही उतरना पड़ेगा। बीएसपी के जिला ओर जोनल कोऑर्डिनेटर्स की मीटिंग के बाद मायावती ने मीडिया से कहा, 'जिस प्रकार बीएसपी का काडर गोरखपुर और फूलपुर के चुनावों में सक्रिय था, वैसा आगामी उपचुनावों में नहीं दिखेगा।' राज्यसभा में इकलौती सीट भी ना जीत पाने के तीन दिन बाद आए इस बयान से एसपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आपको बता दें कि एसपी के समर्थन के बावजूद बीएसपी उम्मीदवार भीमराव आंबेडकर चुनाव नहीं जीत पाए थे। राज्यसभा चुनाव में हार के बाद मायावती ने एसपी के प्रयासों के प्रति संतोष तो व्यक्त किया लेकिन एसपी प्रमुख अखिलेश यादव को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताते हुए कहा था कि अखिलेश निर्दलीय विधायक राजा भैया के जाल में फंस गए। उन्होंने यह भी कहा, 'अगर मैं अखिलेश की जगह होती तो पहली प्राथमिकता बीएसपी के उम्मीदवार को देती।' 'बीजेपी को हराने के लिए एकजुट हो विपक्ष' सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने सोमवार को बीएसपी पदाधिकारियों की मीटिंग में यह संदेश दिया कि 2019 में बीजेपी को हराने के लिए सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर लड़ना ही होगा। उन्होंने कहा, 'हमने देश की भलाई के लिए एसपी-बीएसपी गठबंधन के बारे में फैसला किया है। भाजपा लोगों को एसपी-बीएसपी के बारे में चाहे जितना भड़काने की कोशिश कर ले लेकिन वह सफल नहीं होगी।' राष्ट्रीय लोकदल पर फिर से विचार करेगी बीएसपी राज्यसभा चुनावों में राष्ट्रीय लोकदल ने बीएसपी को समर्थन देने की बात कही थी लेकिन उसके एक विधायक का वोट खारिज हो गया। बीएसपी का मानना है कि ऐसा जानबूझकर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया, ऐसे में गठबंधन की स्थिति में आरएलडी की भूमिका पर फिर से विचार करना होगा। आंबेडकर जयंती से होगी बीएसपी के लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत बीएसपी आगामी 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के अवसर पर अपने लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करेगी। पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने आंबेडकर जयंती को जोर-शोर से मनाए जाने का ऐलान किया। इस अवसर पर लखनऊ में बड़ा आयोजन किया जाएगा।

Top News

http://www.hitwebcounter.com/