taaja khabar....भारत ने पाकिस्तान को दिखाया 'ठेंगा', नहीं भेजा सीमा शुल्क मीटिंग का न्यौता...यूपीः 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा 6 जनवरी को....पंजाब: कैप्टन बयान पर नवजोत सिंह सिद्धू की बढ़ीं मुश्किलें, 18 मंत्रियों ने खोला मोर्चा...साबुन-मेवे की दुकान में मिले सीक्रेट लॉकर, 25 करोड़ कैश बरामद....J-K: शोपियां में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को घेरा, मुठभेड़ जारी...
नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव खत्म होते ही लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी तेज हो गई है. बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन को लेकर दिल्ली में विपक्षी पार्टियों की बैठक जारी है. हालांकि, इस बैठक से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दूरी बनाई है. इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा, ममता बनर्जी (TMC), चंद्रबाबू नायडू (TDP), अरविंद केजरीवाल (AAP), फारुख अब्दुल्ला (NC), एमके स्टालिन (DMK), शरद पवार (NCP) समेत तमाम विपक्षी दल के नेता पहुंचे हुए हैं. इस बैठक में 17 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं. यह बैठक कई मायने में अहम है. क्योंकि 11 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है और पांच विधानसभा चुनाव के नतीजे भी सामने आ रहे हैं. तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चन्द्रबाबू नायडू इस बैठक का समन्वय कर रहे है. उन्होंने सभी गैर-बीजेपी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है. एक सूत्र ने कहा, ''बैठक का मुख्य एजेंडा एक गैर-बीजेपी मोर्चा बनाने के लिए भविष्य की कार्रवाई तय करना है.' बता दें, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है. हालांकि, अभी तक सीटों को लेकर ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन जो खबरें है उसके मुताबिक बसपा 35-40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बाकी के सीटों पर सपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और दूसरे छोटे दल जो गठबंधन में शामिल होंगे उनके प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस गठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं करने का फैसला लिया गया है. लेकिन, रायबरेली और अमेठी पर गठबंधन कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा कर रहा है. महागठबंधन का स्वरूप क्या होगा इसके लिए फिलहाल इंतजार करना होगा, लेकिन 11 दिसंबर के नतीजे के बाद स्थिति बहुत हद तक साफ हो जाने की संभावना है. क्योंकि, 11 दिसंबर को पांच विधानसभा चुनावों के नतीजे आने वाले हैं. चुनावी सर्वे के मुताबिक, कांग्रेस राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में वापसी करने को तैयार है. वर्तमान में तीनों राज्यों पर बीजेपी का कब्जा है.
नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोल दिया है। प्रधानमंत्री ने एक के बाद एक ट्वीट में कहा, 'डॉक्टर उर्जित पटेल बहुत उच्च कोटि के अर्थशास्त्री हैं और उन्हें मैक्रो इकॉनमिक मुद्दों की गहरी समझ है। उन्होंने बैंकिंग सिस्टम को अराजकता से निकालकर व्यवस्थित और अनुशासित किया। उनके नेतृत्व में आरबीआई में वित्तीय स्थिरता आई।' उगले ट्वीट में पीएम ने लिखा, 'डॉक्टर उर्जित पटेल पूर्ण पेशेवर और निर्विवाद रूप से सत्यनिष्ठ हैं। वह गवर्नर और डेप्युटी गवर्नर के रूप में छह साल तक आरबीआई में रहे। उन्होंने महान विरासत छोड़ी है, हम उन्हें याद करेंगे।' वित्त मंत्री ने ट्वीट किया, 'गवर्नर और डेप्युटी गवर्नर के रूप में डॉक्टर उर्जित पटेल द्वारा देश की सेवा की सरकार प्रशंसा करती है। उनके साथ काम करना मेरे लिए खुशी की बात रही और उनकी विद्वता का लाभान्वित हुआ। मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।' सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा, 'उनका इस्तीफा हमारी अर्थव्यवस्था, आरबीआई और सरकार के लिए बुरा है। उन्हें कम से कम जुलाई, अगली सरकार के सत्ता में आने तक रहना चाहिए था। प्रधानमंत्री को उन्हें कॉल करनी चाहिए और वजह का पता लगाएं। जनहित में उन्हें पद छोड़ने से रोकना चाहिए।' अहमद पटेल ने कहा, 'जिस तरह आरबीआई गवर्नर को पद छोड़ने के लिए विवश किया गया वह भारत के मॉनिटरी और बैंकिंग सिस्टम के लिए झटका है। वास्तव में बीजेपी सरकार ने आर्थिक आपातकाल लगा दिया है। देश की प्रतिष्ठा दांव पर है।'
नई दिल्ली/लंदन भारतीय बैंकों के साथ धोखाधड़ी कर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को लंदन कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माल्या के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। आपको बता दें कि अगुस्टा वेस्टलैंड केस में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को प्रत्यर्पित कर भारत लाने के बाद सरकार के लिए यह दूसरी अच्छी खबर आई है। लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में जज एम्मा अर्बथनॉट ने यह फैसला सुनाया। CBI ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। अब माल्या के प्रत्यर्पण का मामला सेक्रटरी ऑफ स्टेट (होम अफेयर्स) साजिद जाविद के पास भेज दिया गया है। किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे 62 वर्षीय माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से माल्या जमानत पर है। ऊपरी अदालत जाने का है विकल्प आपको बता दें कि जज को यह फैसला सुनाना था कि क्या माल्या का भारत प्रत्यर्पण किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लगाए गए आरोपों पर मुकदमा चलना चाहिए। फैसला आने के बाद मामले को ब्रिटेन के गृह विभाग के पास भेज दिया गया है और अब देश के गृह मंत्री को इस पर फैसला लेना है। गौर करने वाली बात यह है कि माल्या 14 दिन के भीतर इस फैसले को ब्रिटिश उच्च न्यायालय में चुनौती भी दे सकता है। फैसले से पहले माल्या ने क्या कहा? गौरतलब है कि माल्या अपने खिलाफ मामले को राजनीति से प्रेरित बताता रहा है। फैसले से पहले माल्या ने ट्वीट कर कहा, 'मैंने एक भी पैसे का कर्ज नहीं लिया। कर्ज किंगफिशर एयरलाइंस ने लिया था। कारोबारी विफलता की वजह से यह पैसा डूबा है। गारंटी देने का मतलब यह नहीं है कि मुझे धोखेबाज बताया जाए।’ माल्या ने कहा कि मैंने मूल राशि का 100 प्रतिशत लौटाने की पेशकश की है। इसे स्वीकार किया जाए। आपको बता दें कि माल्या के खिलाफ प्रत्यर्पण का मामला मैजिस्ट्रेट की अदालत में पिछले साल 4 दिसंबर को शुरू हुआ था।
नई दिल्ली केंद्र सरकार के साथ चल रही तनातनी के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। आपको बता दें कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता सहित कुछ मुद्दों को लेकर सरकार के साथ मतभेद की खबरों के बाद यह अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि वह पद छोड़ सकते हैं। उर्जित पटेल ने इस्तीफे में कहा है, 'व्यक्तिगत कारणों की वजह से मैंने मौजूदा पद तत्काल प्रभाव से छोड़ने का फैसला किया है। वर्षों तक रिजर्व बैंक में विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ मुझे रिजर्व बैंक में सेवा का मौका मिला, यह मेरे लिए सम्मान की बात है।' गौरतलब है कि उर्जित पटेल का कार्यकाल सितंबर 2019 में खत्म होने वाला था। उन्होंने आगे लिखा, 'आरबीआई स्टाफ, ऑफिसर्स और मैनेजमेंट के समर्थन और कड़ी मेहनत से बैंक ने हाल के वर्षों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। मैं इस मौके पर अपने साथियों और आरबीआई के डायरेक्टर्स के प्रति कृतज्ञता जाहिर करता हूं और उन्हें भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।' रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर केंद्र सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर पिछले कई दिनों से बहस चल रही थी। सितंबर 2016 में बने थे गवर्नर पटेल सितंबर 2016 में रिजर्व बैंक के 24वें गवर्नर नियुक्त किए गए थे। वह तीन साल के लिए नियुक्त किए गए थे। इससे पहले वह रिजर्व बैंक में ही डेप्युटी गवर्नर थे। सरकार पर हमलावर होगा विपक्ष आपको बता दें कि आरबीआई गवर्नर ने ऐसे समय में इस्तीफा दिया है जब एक दिन बाद ही संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। सोमवार को ही विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की रणनीति बनाने के लिए बैठक भी की है। राफेल, बेरोजगारी, किसान समेत कई मसलों को लेकर पहले से ही केंद्र पर हमलावर विपक्ष अब आरबीआई के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है।
नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2018, अंतरिक्ष की दुनिया में भारत लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहा है. सोमवार को भारत ने अंतरमहाद्विपीय बैलेस्टिक अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया. ये परीक्षण दोपहर एक बजकर तीस मिनट पर किया गया है. इस मिसाइल का ये सातवां परीक्षण है. 5500 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल का यह परीक्षण ओडिशा के समुद्री तट पर किया गया. अग्नि 5 की रेंज 5500 KM. से भी अधिक है. यानी अब अग्नि-5 की मिसाइल की जद में चीन, यूरोप और पाकिस्तान सब आ गए हैं. अग्नि 5 टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे एडवांस मिसाइल है, इसमें नेवीगेशन, गाइडेंस, वॉरहेड और इंजन की अत्याधुनिक सुविधाएं हैं. वहीं अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के बाद अब भारत पांचवां देश है जिसके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता है. यानी ये एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक 5000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता रखने वाली मिसाइल है. 3 चरण में ठोस इंजन से चलने वाली अग्नि-5 मिसाइल को अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) स्थित एकीकृत परीक्षण क्षेत्र के परिसर 4 से हवा में दागा गया. अग्नि 5 के बारे में... आपको बता दें कि 17.5 मीटर लम्बी, 2 मीटर चौड़ी, 50 टन वजन की यह मिसाइल डेढ़ टन विस्फोटक ढोने की ताकत रखती है. इसकी गति ध्वनि की गति से 24 गुना अधिक है. इससे पहले अग्नि-5 का सफल परीक्षण 2012, दूसरा 2013, तीसरा 2015, चौथा 2016, पांचवां जनवरी 2018, छठां जून 2018 एवं सातवां सफल परीक्षण आज किया गया है.
नई दिल्‍ली, 10 दिसंबर 2018,मोदी सरकार ने देश भर के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. दरअसल, सरकार नेशनल पेंशन स्किम (NPS) में अपना योगदान बढ़ाने का एलान किया है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को स्‍कीम में बदलावों की घोषणा की. एनपीएस में योगदान चार फीसदी बढ़ा सरकार ने एनपीएस में योगदान चार फीसदी बढ़ाकर 14 फीसदी करने के साथ ही रिटायरमेंट के बाद निकाली गई 60 फीसदी की रकम को टैक्स-फ्री कर दिया गया है. हालांकि, कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 फीसदी बना रहेगा. जेटली ने कर्मचारियों के 10 फीसदी तक योगदान के लिए आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत कर प्रोत्साहन की भी घोषणा की . फिलहाल सरकार तथा कर्मचारियों का योगदान एनपीएस में 10-10 फीसदी है . कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 प्रतिशत पर बना रहेगा, जबकि सरकार का योगदान 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी किया गया है . 60% अमाउंट ट्रांसफर की मंजूरी वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारी रिटायरमेंट के समय कुल पेंशन फंड का 60 फीसदी निकाल सकेंगे, बाकी 40 फीसदी का निवेश निश्चित आय उत्पादों या शेयर इक्विटी में किया जा सकता है. पहले 40 फीसदी रकम ही निकालने का प्रावधान था. वित्त मंत्री ने कहा कि यदि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के समय एनपीएस में जमा धन का कोई भी हिस्सा निकालने का निर्णय नहीं करता है और 100 फीसदी पेंशन योजना में हस्तांतरित करता है, तो उसकी पेंशन अंतिम बार प्राप्त वेतन का 50 फीसदी से अधिक होगी. क्‍या है एनपीएस दरअसल, नेशनल पेंशन स्किम (NPS) एक रिटायरमेंट सेविंग्स अकाउंट है. इसकी शुरुआत भारत सरकार ने 1 जनवरी, 2004 को की थी. पहले यह स्कीम सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी. हालांकि 2009 के बाद इसे निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी शुरू किया गया है. यहां बता दें कि NPS अकाउंट खुलवाने के लिए न्‍यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 65 साल है.
नई दिल्ली अगुस्टा वेस्टलैंड केस में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की CBI रिमांड 5 दिनों के लिए और बढ़ा दी। मिशेल से 5 दिनों तक हिरासत में पूछताछ के बाद उसे सोमवार को स्पेशल सीबीआई जज अरविंद कुमार की कोर्ट में पेश किया गया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट से मिशेल की 9 दिनों की रिमांड मांगी। एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि मिशेल जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अपनी दलील में सीबीआई ने कहा, 'हमें उससे LR (लेटर्स रोगेटरी) को लेकर पूछताछ करनी है, जो 5 देशों से प्राप्त हुआ है। केस में मिशेल ने इटैलियन जांच में सहयोग नहीं किया।' हालांकि कोर्ट ने रिमांड 5 दिन ही बढ़ाने का निर्देश दिया। हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के नमूने देखने की सीबीआई के आवेदन पर स्पेशल कोर्ट ने मिशेल के वकील से जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट इस पर कल सुनवाई करेगा। CBI Special Court fixes 30 minutes time, both in morning and evening every day, for the counsel of Christian Michel… https://t.co/i6SjlqHE3t — ANI (@ANI) 1544440060000 वकील दो बार मिल सकेंगे इसके साथ ही CBI की स्पेशल अदालत ने मिशेल के वकील को रोज सुबह और शाम में 30 मिनट का समय दिया है। हालांकि सीबीआई चाहती थी कि वकील को एक दिन में केवल एक बार मिलने की अनुमति दी जाए। ब्रिटिश हाई कमिशन को मिलने की इजाजत उधर, सीबीआई ब्रिटिश हाई कमिशन को क्रिश्चियन मिशेल से मिलने की इजाजत देने को राजी हो गई है। एजेंसी ने कहा, 'हमसे पहले ही ब्रिटिश काउंसलर्स के द्वारा इस बाबत अप्रोच किया गया है। हमने उन्हें अपना वकील रखने की बात स्वीकार कर ली है।' दलाली नहीं, मिशेल ने बताया कंसल्टेंसी फीस आपको बता दें कि अगुस्टा वेस्टलैंड डिफेंस डील में दलाली लेने के आरोप में अरेस्ट किए गए ब्रिटिश नागरिक क्रिस्चन मिशेल ने पैसे लेने की बात स्वीकार की है। हालांकि मिशेल ने इसे घूसखोरी न बताते हुए कंसल्टेंसी फीस करार दिया है। मिशेल ने पूछताछ में यूपीए नेताओं या फिर रक्षा मंत्रालय से पैसे लेने की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया। मिशेल ने कहा कि उसने यूपीए सरकार से कोई घूस नहीं ली बल्कि अगुस्टा वेस्टलैंड से कंसल्टेंसी फीस ली थी।
नई दिल्ली/लंदन भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने आज लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश होने से पहले मीडिया से कहा कि उनके प्रत्यर्पण केस से जुड़ी सुनवाई का उसके लोन सेटलमेंट ऑफर से कोई लेनादेना नहीं है। माल्या ने कहा कि वह सुबह से ही भारतीय न्यूज चैनल देख रहा है जिसमें उसके प्रत्यर्पण की संभावनाओं पर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं। माल्या ने कहा, 'जब सारी बातें कही ही जा रही हैं, तो मुझे कुछ कहने को बचता क्या है।' जब उससे पूछा गया कि उसका लोन रीपेमेंट ऑफर कितना जेनुइन था, तो उसने कहा, 'कृपया यह समझिए कि पैसा मैंने कोर्ट के सामने ऑफर दिए थे और कोई भी कोर्ट के सामने फर्जी ऑफर नहीं दे सकता।' दरअसल, संकट में फंसे शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मुकदमे पर फैसला आ सकता है। इस संबंध में थोड़ी देर में सुनवाई शुरू होने वाली है। इसके लिए लंदन के कोर्ट में माल्या के साथ-साथ उनके वकील और भारत सरकार के पक्षकार भी कोर्ट पहुंच चुके हैं। किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे 62 वर्षीय माल्या पर बैंकों के साथ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। सितंबर महीने तक विभिन्न बैंकों का उस पर ब्याज सहित कुल 9,990.07 करोड़ बकाया हो चुका है। आइए जानते हैं, माल्या के लोन फ्रॉड से जुड़ीं 10 बड़ी बातें... 1. अप्रैल 2017 से प्रत्यर्पण वॉरंट के बाद से माल्या जमानत पर है। माल्या अपने खिलाफ मामले को राजनीति से प्रेरित बताता रहा है। माल्या के खिलाफ प्रत्यर्पण का मामला वेस्टमिंस्टर कोर्ट मैजिस्ट्रेट की अदालत में 4 दिसंबर, 2017 को शुरू हुआ था। 2. लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में जज एम्मा अर्बथनॉट की बेंच विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मुकदमे की सुनवाई कर रही हैं। यहां विजय माल्या का पक्ष वकील क्लेयर मॉन्टगॉमरी रख रहे हैं जबकि क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPC) भारत सरकार की पैरवी कर रही है। 3. अगर कोर्ट माल्या के प्रत्यर्पण का अनुमति देता है, तो इसके बाद मामला ब्रिटेन के होम डिपार्टमेंट के पास जाएगा। जहां से माल्या के प्रत्यर्पण की अनुमति पर फैसला होगा। अगर फैसला माल्या के खिलाफ आता है तो वह ऊंची अदालत में इसे चुनौती भी दे सकता है। वहीं, भारत सरकार के खिलाफ फैसला आता है तो सीबीआई और ईडी को 14 दिनों के अंदर उच्च अदालत में अपील करनी होगी। 4. प्रत्यर्पण के मुकदमे की सुनवाई के के दौरान माल्या ने कहा कि भारत छोड़ने से पहले वह वित्त मंत्री से मिलकर आया था। माल्या ने कहा, 'मैं सेटलमेंट के मामले में वित्त मंत्री से मिला था, लेकिन बैंकों ने मेरे सेटलमेंट प्लान को लेकर सवाड़ खड़े किए।' इस बयान पर भारत में सियासत गरमा गई। विपक्षी दलों ने वित्त मंत्री जेटली और सत्ताधारी दल बीजेपी पर माल्या को विदेश भगाने का आरोप लगाया। 5. हालांकि, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बात को ब्लॉग के जरिए तुरंत खारिज कर दिया। इस बयान के बाद वित्त मंत्री ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'विजय माल्या ने कहा कि वह भारत छोड़ने से पहले सेटलमेंट ऑफर को लेकर मुझसे मिले थे। तत्थात्मक रूप से यह बयान पूरी तरह झूठ है। 2014 से अब तक मैंने माल्या को मुलाकात के लिए कोई अपॉइंमेंट नहीं दिया है, ऐसे में मुझसे मिलने का सवाल ही नहीं उठता।' 6. वेस्टमिंस्टर कोर्ट में विजय माल्या ने भारत में जेलों की खराब हालत का बहाना बनाकर भी जज को प्रभावित करने का प्रयास किया। इस पर जज ने भारत सरकार से मुंबई के ऑर्थर रोड जेल में तैयार शेल का विडियो भी पेश करने को कहा। इसके बाद भारतीय अधिकारियों ने माल्या के वकीलों को ऑर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 का विडियो दिखाया। 7. विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस ने साल 2004 से 2012 के बीच 17 बैंकों से कुल 7,800 करोड़ रुपये का लोन लिया था। माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के लिए लोन मांगते वक्त बैंकों को पर्सनल गारंटी दी थी। बैंक कर्ज की रकम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 1,900 करोड़ रुपये पंजाब नैशनल बैंक 800 करोड़ रुपये IDBI 800 करोड़ रुपये बैंक ऑफ इंडिया 650 करोड़ रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा 550 करोड़ रुपये यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया 430 करोड़ रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 410 करोड़ रुपये यूको बैंक 320 करोड़ रुपये कॉर्पोरेशन बैंक 310 करोड़ रुपये इंडियन ओवरसीज बैंक 140 करोड़ रुपये फेडरल बैंक 90 करोड़ रुपये पंजाब ऐंड सिंध बैंक 60 करोड़ रुपये ऐक्सिस बैंक 50 करोड़ रुपये अन्य बैंक 603 करोड़ रुपये 8. कर्नाटक हाई कोर्ट ने 4 मार्च, 2016 को विजय माल्या को देश छोड़ने और उसका पासपोर्ट जब्त का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था। उसके पांचवें दिन 9 मार्च 2016 को अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या विदेश भाग चुका है। 9. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने उसे बड़ा झटका देते हुए उसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। दरअसल, ईडी ने विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर उसकी संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही शुरू की तो माल्या के वकील इस पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट से माल्या को इस पर राहत नहीं मिल सकी। 10. अगुस्टा हेलिकॉप्टर दलाली के मुख्य आरोपी क्रिश्चियन मिशेल के भारत प्रत्यर्पण के बाद विजय माल्या ने लगातार ट्वीट कर भारतीय बैंकों से कर्ज की पूरी रकम लेने की गुहार लगाई। हालांकि, वह सिर्फ मूलधन चुकाने का ही ऑफर दे रहा है, ब्याज नहीं। माल्या ने ट्वीट कर कहा, 'मैंने एक भी पैसे का कर्ज नहीं लिया। कर्ज किंगफिशर एयरलाइंस ने लिया। कारोबारी विफलता की वजह से यह पैसा डूबा है। गारंटी देने का मतलब यह नहीं है कि मुझे धोखेबाज बताया जाए।'
नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र मंगलवार से शुरू हो रहा है। उससे पहले सोमवार को आज केंद्र सरकारी की तरफ से सभी पार्टियों की मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे। हर संसद सत्र से पहले औपचारिकता के तौर पर यह मीटिंग बुलाई जाती है। हालांकि, मंगलवार को ही 5 राज्यों के चुनावों के नतीजे भी आ रहे हैं और 2019 के चुनावों से पहले संसद का यह शीतकालीन सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र में राफेल डील पर चर्चा की मांग रखा। पीएम मोदी ने विपक्ष को आश्वसान दिया कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। सर्वदलीय बैठक में परंपरा के अनुसार सरकार का अजेंडा सभी दलों के सामने रखा जाता है। संसद सत्र में सदन का कामकाज ठीक प्रकार से चले इसके लिए सहयोग की अपील की जाती है। इस बैठक में पीएम मोदी और मंत्रियों के साथ दूसरे दलों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे सीपीआई के डी. राजा जैसे नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया। विपक्ष भी हालांकि लोकसभा चुनावों को देखते हुए अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर रहा है। सोमवार को ही विपक्षी दल महागठबंधन पर चर्चा करने के लिए बैठक कर रहे हैं। टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चन्द्रबाबू नायडू ने बैठक बुलाई जिसमें फारूक अब्दुल्ला, अखिलेश यादव समेत कई अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के भी बैठक में भाग लेने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, 09 दिसंबर 2018,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली जाएंगे. 16 दिसंबर को होने वाली इस यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. बताया जा रहा है कि मोदी रायबरेली में सोनिया के ड्रीम प्रोजेक्ट रेल कोच फैक्ट्री का जायजा लेंगे और कई योजनाओं का शिलान्यास करने के साथ जनसभा को संबोधित करेंगे. अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में पहली बार पीएम मोदी रायबरेली जा रहे हैं. मोदी की इस यात्रा को आगामी लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस के लिए रायबरेली की सीट काफी अहम है. 2004 से सोनिया गांधी इस सीट से सांसद हैं. प्रचंड मोदी लहर में भी सोनिया अपनी इस सीट को बचाने में कामयाब रही थीं, लेकिन 2019 में सोनिया को उनके घर में मात देने के लिए मोदी ने नया प्लान बनाया है. इसके तहत उनके ड्रीम प्रोजेक्ट रेल कोच फैक्ट्री को लेकर मोदी सरकार कई घोषणाएं कर सकती है. कोच फैक्ट्री पर सियासत यूपीए-1 की सरकार में रेलवे कोच फैक्ट्री का निर्माण किया गया था. लेकिन बीजेपी का आरोप है कि 2014 तक इस फैक्ट्री में किसी भी कोच का निर्माण नहीं किया गया. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि 2007 से 2014 तक फैक्ट्री पर यूपीए सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया. मोदी सरकार बनने के बाद कोच फैक्ट्री को शुरू किया गया. इस साल फैक्ट्री लगभग 700 कोच बनाने के लिए तैयार है. आने वाले दो सालों में 3 हजार कोच बनाने का लक्ष्य रखा गया है. मंत्री ने ली तैयारी बैठक रविवार को योगी सरकार के मंत्री महेंद्र सिंह रायबरेली पहुंचे. उन्होंने जिले के आला-अधिकारियों के साथ तैयारियों का जायजा लिया. मंत्री से पहले मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय भी यहां पहुंचे थे. उन्होंने रेल फैक्ट्री और जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की थी.

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