taaja khabar....पोखरण में एक और कामयाबी, मिसाइल 'हेलिना' का सफल परीक्षण.....अगले 10 साल में बाढ़ से 16000 मौतें, 47000 करोड़ की बर्बादी: एनडीएमए....बड़े प्लान पर काम कर रही भारतीय फौज, जानिए क्या होंगे बदलाव...शूटर दीपक कुमार ने सिल्वर पर किया कब्जा....शेयर बाजार की तेज शुरुआत, सेंसेक्स 155 और न‍िफ्टी 41 अंक बढ़कर खुला....राम मंदिर पर बोले केशव मौर्य- संसद में लाया जा सकता है कानून...'खालिस्तान की मांग करने वालों के दस्तावेजों की हो जांच, निकाला जाए देश से बाहर'....
नई दिल्ली देश के कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है। बिहार के वर्तमान राज्यपाल को जहां अब जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी गई है, वहीं लालजी टंडन को अब बिहार का राज्यपाल पद संभालना होगा। राज्यपाल पद की जिम्मेदारी जिन्हें सौंपी गई है, उनमें लालजी टंडन के अलावा गंगा प्रसाद, तथागत रॉय, कप्तान सिंह सोलंकी समेत पांच नाम शामिल हैं। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी रहे लालजी टंडन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। अब तक बिहार के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक को अब जम्मू और कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। इनके अलावा गंगा प्रसाद को सिक्किम, तथागत रॉय को मेघालय और कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी रहे लालजी टंडन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। अब तक बिहार के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक को अब जम्मू और कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। इनके अलावा गंगा प्रसाद को सिक्किम, तथागत रॉय को मेघालय और कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इसके अलावा सत्यदेव नारायण को हरियाणा का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं, उत्तराखंड के राज्यपाल का कार्यभार बेबी रानी मौर्या को सौंपा गया है। इनमें से सत्यदेव नारायण जहां नीतीश सरकार में तो वहीं लालजी टंडन उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में सत्यपाल मलिक वर्तमान राज्यपाल एनएन वोहरा की जगह लेंगे। आपको बता दें, इसी साल जून में जम्‍मू कश्‍मीर सरकार के गिरने के बाद से ही वहां राज्‍यपाल शासन लागू है।
पेइचिंग चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अति महत्वाकांक्षी 'बेल्ट-रोड' ( ओबीओआर + ) परियोजना को तगड़ा झटका लगा है। मलयेशिया ने इस परियोजना से अपने कदम खींचते हुए इन्हें कैंसिल कर दिया है। अपनी चीन की यात्रा के आखिरी दिन इस बात की जानकारी दी है। आपको बता दें कि भारत सहित दुनिया के तमाम देशों को चीन के इस प्रॉजेक्ट से आपत्ति है। भारत गिलगित बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) विवादित क्षेत्र से गुजरने वाली चीन की इस परियोजना को अपनी संप्रुभता के खिलाफ बता रहा है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन इस परियोजना को चलाने के लिए दी जाने वाली भारी भरकम रकम को लोन ट्रैप की तरह इस्तेमाल कर सकता है। मलेयशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने भी पैसे का ही हवाला लेकर परियोजना को कैंसिल करने की जानकारी दी है। महातिर ने बताया कि चीन + के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों ने ही उनके इस फैसले को स्वीकार किया है। इससे पहले चीन ने दावा किया था कि परियोजना पर होने वाला निवेश दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है। इस प्रॉजेक्ट में 20 अरब डॉलर की ईस्ट कोस्ट रेल लिंग और 2.3 अरब डॉलर के दो एनर्जी पाइपलाइन बनने थे जो पहले से ही सस्पेंड चल रहे हैं। महातिर ने कहा, 'यह सारा मामला इनमें बहुत ज्यादा पैसे लगाने का था और हमारी सामर्थ्य इतनी नहीं है। हम इस पैसे को अदा नहीं कर सकते और फिलहाल हमें मलयेशिया में इन प्रॉजेक्ट्स की जरूरत भी नहीं है।' हालांकि महातिर ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में ये प्रॉजेक्ट फिर से शुरू किए जा सकते हैं। पीएम ने कहा कि अभी मलयेशिया का फोकस राष्ट्रीय कर्ज को कम करने का है। अपनी पहले की नजीब रजक की सरकार पर मूर्खताओं का आरोप लगाते हुए महातिर ने कहा कि अपने कर्जे को लेकर अगर हम सतर्क नहीं रहे तो हम दिवालिया हो सकते हैं। नजीब रजक को हराकर महातिर सत्ता में आए हैं। फिलहाल रजक पर भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं। महातिर ने कहा कि इन प्रॉजेक्ट्स से बाहर निकलने के लिए पेनल्टी के तौर पर अभी भी पैसे देने पड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें यह भी जानना है कि इन प्रॉजेक्ट्स के लिए अबतक दिए गए पैसों का क्या हुआ।
पेइचिंग चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अति महत्वाकांक्षी 'बेल्ट-रोड' ( ओबीओआर + ) परियोजना को तगड़ा झटका लगा है। मलयेशिया ने इस परियोजना से अपने कदम खींचते हुए इन्हें कैंसिल कर दिया है। अपनी चीन की यात्रा के आखिरी दिन इस बात की जानकारी दी है। आपको बता दें कि भारत सहित दुनिया के तमाम देशों को चीन के इस प्रॉजेक्ट से आपत्ति है। भारत गिलगित बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) विवादित क्षेत्र से गुजरने वाली चीन की इस परियोजना को अपनी संप्रुभता के खिलाफ बता रहा है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन इस परियोजना को चलाने के लिए दी जाने वाली भारी भरकम रकम को लोन ट्रैप की तरह इस्तेमाल कर सकता है। मलेयशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने भी पैसे का ही हवाला लेकर परियोजना को कैंसिल करने की जानकारी दी है। महातिर ने बताया कि चीन + के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों ने ही उनके इस फैसले को स्वीकार किया है। इससे पहले चीन ने दावा किया था कि परियोजना पर होने वाला निवेश दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है। इस प्रॉजेक्ट में 20 अरब डॉलर की ईस्ट कोस्ट रेल लिंग और 2.3 अरब डॉलर के दो एनर्जी पाइपलाइन बनने थे जो पहले से ही सस्पेंड चल रहे हैं। महातिर ने कहा, 'यह सारा मामला इनमें बहुत ज्यादा पैसे लगाने का था और हमारी सामर्थ्य इतनी नहीं है। हम इस पैसे को अदा नहीं कर सकते और फिलहाल हमें मलयेशिया में इन प्रॉजेक्ट्स की जरूरत भी नहीं है।' हालांकि महातिर ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में ये प्रॉजेक्ट फिर से शुरू किए जा सकते हैं। पीएम ने कहा कि अभी मलयेशिया का फोकस राष्ट्रीय कर्ज को कम करने का है। अपनी पहले की नजीब रजक की सरकार पर मूर्खताओं का आरोप लगाते हुए महातिर ने कहा कि अपने कर्जे को लेकर अगर हम सतर्क नहीं रहे तो हम दिवालिया हो सकते हैं। नजीब रजक को हराकर महातिर सत्ता में आए हैं। फिलहाल रजक पर भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं। महातिर ने कहा कि इन प्रॉजेक्ट्स से बाहर निकलने के लिए पेनल्टी के तौर पर अभी भी पैसे देने पड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें यह भी जानना है कि इन प्रॉजेक्ट्स के लिए अबतक दिए गए पैसों का क्या हुआ।
इस्लामाबाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथग्रहण में जाने को लेकर भारत में घिरे कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के समर्थन में अब खुद इमरान आ गए हैं। इमरान ने ट्विटर पर जहां एक तरफ सिद्धू को शुक्रिया कहते हुए उन्हें शांति का दूत बताया है तो वहीं, सिद्धू की आलोचनाओं को शांति के लिए हानिकारक करार दिया है। अपने ट्वीट्स में इमरान ने एक बार फिर कश्मीर राग दोहराया और कहा कि इसे बातचीत के जरिए ही हल किया जा सकता है। इमरान ने ट्वीट किया, 'मैं सिद्ध का मेरे शपथग्रहण समारोह में पाकिस्तान आने के लिए शुक्रिया अदा करता हूं। वह शांति के दूत हैं और उन्हें पाकिस्तान के लोगों ने बहुत सारा प्यार दिया। जो लोग उन्हें निशाना बना रहे हैं वे उपमहाद्वीप में शांति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शांति के बिना हमारे लोग विकास नहीं कर सकते।' इमरान ने अगले ट्वीट में लिखा, 'आगे बढ़ने के लिए भारत और पाकिस्तान को कश्मीर सहित सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए। गरीबी मिटाने और उपमहाद्वीप में जीवनस्तर को ऊपर ले जाने का सबसे बेहतर रास्ता बातचीत के जरिए हमारे मतभेद सुलझाना और व्यापार शुरू करना है।' बता दें कि इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी थी। सिद्धू ने कहा था कि वह सिर्फ दोस्ती के नाते इमरान के शपथग्रहण में गए थे और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। सिद्धू ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ से उन्होंने सिर्फ शपथग्रहण में मुलाकात की थी और पाकिस्तान के लोगों ने उन्हें जो प्यार, स्नेह दिया वह उससे ओत-प्रोत हैं।
तिरुवनंतपुरम भारी बारिश और बाढ़ से फिलहाल केरल को राहत है। रविवार से बारिश धीमी पड़ गई है। जन-जीवन की रेल धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। हालांकि 8 अगस्त से मौत का आंकड़ा 223 हो गया है। बारिश और बाढ़ से राज्य को हुए नुकसान का आकलन करीब 20 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है। केरल में बाढ़ की वजह से आई तबाही के बाद देश ही नहीं बल्कि अलग-अलग मुल्कों से लोग मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस सिलसिले में संयुक्त अरब अमीरात ने केरल के पुनरुद्धार के लिए करीब 700 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा, 'केरल की मदद के लिए कई लोग आगे आए हैं। भारत क अलग-अलग राज्यों से मदद के साथ ही दूसरे राष्ट्र भी बाढ़ प्रभावित केरल के लिए मदद भेज रहे हैं। यूएई ने एक राहत पैकेज का प्रस्ताव दिया है और दूसरे खाड़ी देश भी चारों ओर से हमारी मदद कर रहे हैं।' वहीं, अरबपति एनआरआई और अबु धाबी में स्थित वीपीएस हेल्थकेयर के चेयरमैन डॉक्टर शमशीर वयालिल ने केरल के आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए 50 करोड़ रुपये का दान देने का फैसला किया है, जो कि अबतक निजी रूप से दी जानेवाली रकम में सबसे ज्यादा है। वयालिल एक प्रॉजेक्ट स्थापित करेंगे। इसके जरिए पीड़ितों की तीन तरह की मदद मिल पाएगी, जिसमें रहना, स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल है। बारिश से अब तक कितनी तबाही? आंकड़ों के मुताबिकस केरल में बारिश के बाद भीषण तबाही से 40,000 हेक्टेयर से भी अधिक की फसलों का नुकसान हो चुका है। 26,000 से भी अधिक मकान तहस-नहस हो गए हैं। इंसानों के साथ ही करीब 46,000 मवेशी और 2 लाख से अधिक पोल्ट्री (मुर्गी, आदि) का नुकसान हुआ है। बाढ़ ने राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमर किस हद तक तोड़ दी है इसका पता इस बात चलता है कि लगभग एक लाख किलोमीटर सड़कें तबाह हो चुकी हैं। इनमें 16,000 किलोमीटर लोक निर्माण विभाग की और 82,000 किलोमीटर स्थानीय सड़कें शामिल हैं। साथ ही 134 पुल भी बुरी तरह ध्वस्त हैं। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 11,000 करोड़ रुपये तय सदी की सबसे भयानक त्रासदी में हुए नुकसान से निपटने के लिए केरल को बड़ी आर्थिक सहायता की जरूरत पड़ने वाली है। इस साल राज्य के बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 11,000 करोड़ रुपये तय किए गए थे। बाढ़ के बाद केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपये की मदद दी है। माना जा रहा है कि लोगों के व्यक्तिगत बीमा से 500 करोड़ रुपये की मदद भी मिल सकती है। वहीं, कोच्चि एयरपोर्ट का भी 2,500 करोड़ का बीमा कवर है लेकिन क्लेम की राशि इससे कम बताई जा रही है।
नई दिल्ली, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील के मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी और उनकी सरकार को घेरने की कोशिश करते रहे हैं. उन्होंने इस सौदे से अनिल अंबानी की कंपनी को हजारों करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का भी आरोप लगाया है. लेकिन अनिल अंबानी ने अब राहुल को दूसरा लेटर लिखकर यह दावा किया है कि 'कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्वियों ने कांग्रेस को गलत जानकारी दी है तथा उसे गुमराह किया है.' पिछले हफ्ते राहुल गांधी को भेजे गए लेटर में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) के मुखिया अनिल अंबानी ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए एक-एक आरोप का बिंदुवार जवाब दिया है. लेटर में अनिल अंबानी ने अपने और कंपनी के ऊपर किए जा रहे हमलों पर गहरी पीड़ा का इजहार किया है. गौरतलब है कि इसके पहले अनिल अंबानी ने 12 दिसंबर, 2017 को राहुल गांधी को पहला लेटर लिखा था. उस लेटर में उन्होंने तर्क दिया था कि रिलायंस समूह को यह सौदा इसलिए मिला क्योंकि उसके पास डिफेंस शिप बनाने का अनुभव था. रिलायंस-दसॉ के JV द्वारा कोई निर्माण नहीं अनिल अंबानी द्वारा राहुल गांधी को लिखे दूसरे लेटर में कहा गया है कि सभी आरोप निराधार, गलत जानकारी पर आधारित और दुर्भाग्यपूर्ण हैं. अनिल अंबानी ने कहा, 'राफेल लड़ाकू विमान का निर्माण रिलायंस या दसॉ रिलायंस के संयुक्त उद्यम द्वारा नहीं किया जा रहा. सभी 36 विमानों का 100 फीसदी निर्माण फ्रांस में किया जाएगा और फ्रांस से उनका भारत को निर्यात किया जाएगा. राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि एडीएजी समूह का लड़ाकू विमान निर्माण में कोई अनुभव न होने के बावजूद उसे 45,000 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया गया. इसके जवाब में अनिल अंबानी ने कहा, '36 राफेल विमानों के लिए भारत में खरीद जाने वाले एक रुपये के भी, एक भी कम्पोनेंट का निर्माण रिलायंस द्वारा नहीं किया जाएगा.' अंबानी ने कहा, 'हमारी भूमिका ऑफसेट निर्यात और अन्य निर्यात जवाबदेही तक सीमित है. इसमें BEL और DRDO जैसी सार्वजनिक कंपनियों के अलावा 100 से ज्यादा मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यम (MSME) शामिल होंगे. इससे भारत की विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी और यह खुद 2005 से यूपीए सरकार द्वारा चलाई जा रही ऑफसेट नीतियों के अनुरूप ही है.' मनगढ़ंत अनुमान अनिल अंबानी ने कहा, 'रक्षा मंत्रालय ने रिलायंस समूह की किसी भी कंपनी को 36 राफेल विमानों के बारे में कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया है और यह कहना कि रिलायंस को हजारों करोड़ रुपये का फायदा होने जा रहा है, असल में कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाई गई मनगढ़ंत परिकल्पना है. भारत सरकार के साथ हमारा कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ है.' पहले ही हो गया था कंपनी का गठन इस आरोप पर कि साल 2015 में राफेल सौदे की घोषणा से 10 दिन पहले ही रिलायंस डिफेंस का गठन हुआ था, अंबानी ने कहा, 'रिलायंस समूह ने दिसंबर 2014-जनवरी 2015 में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में उतरने की घोषणा कर दी थी. फरवरी 2015 में हमने बस भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों को यह बताया कि कंपनी का गठन कर लिया गया है.'
इस्लामाबाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के नवगठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम का नाम ‘एग्जिट कंट्रोल लिस्ट’ में शामिल करने का फैसला किया गया। इस फैसले के बाद दोनों पाकिस्तान छोड़कर नहीं जा सकेंगे। सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुआई में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में आर्थिक चुनौतियों और खर्च में कटौती से जुड़े उपायों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने सरकार के भ्रष्टाचार निरोधी अभियान के तहत शरीफ और मरियम के नाम को ‘एग्जिट कंट्रोल लिस्ट’ में शामिल करने का निर्णय किया है। मंत्रिमंडल ने कानून और गृह मंत्रालयों को शरीफ के बेटों हसन और हुसैन और पूर्व वित्त मंत्री इसहाक डार के खिलाफ जारी रेड वॉरंट की तामील करते हुए उन्हें पाकिस्तान लाने का निर्देश दिया। तीनों राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों में नामजद हैं और जवाबदेही अदालत इन्हें ‘भगोड़ा अपराधी’ घोषित कर चुकी है। मंत्री ने कहा कि कानून मंत्रालय को शरीफ परिवार के स्वामित्व वाले एवेनफील्ड संपत्ति को लेकर ब्रिटेन की सरकार से संपर्क करने का भी निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। बता दें, मुशर्रफ पिछले साल से दुबई में हैं और कई मामलों में पाकिस्तानी अदालतों ने उनके खिलाफ समन जारी किया है। चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में यह भी निर्णय किया गया कि बहुत जरूरी नहीं होने पर प्रधानमंत्री अगले तीन महीने तक विदेशी दौरों पर नहीं जाएंगे। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इस्लामाबाद पाकिस्तान अपने नवनियुक्त विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के उस बयान से सोमवार को साफ पलट गया जिसमें कुरैशी ने दावा किया था कि भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत का ऑफर दिया है। इस्लामाबाद ने साफ किया है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस्लामाबाद को किसी प्रकार की बातचीत का न्योता नहीं दिया है। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के नए पीएम इमरान खान बधाई पत्र भेजा था। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि कुरैशी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने बातचीत का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि कुरैशी ने ये जरूर कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में वही बातें लिखी हैं जो वह पहले भी कहते रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को भेजे पत्र में कहा था कि भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण पड़ोसी रिश्तों के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत पड़ोसी पाकिस्तान के साथ सकारात्मक और सार्थक साझेदारी के लिए आशान्वित है। इमरान खान को लिखे खत में मोदी ने आतंकवाद मुक्त दक्षिण एशिया के लिए काम करने की जरूरत पर जोर दिया। सूत्रों ने बताया कि इसमें प्रधानमंत्री ने किसी प्रकार का कोई प्रस्ताव नहीं रखा था। प्रवक्ता ने कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंत्येष्टि में शामिल होने गए पाकिस्तानी कानून मंत्री अली जफर की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीच सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सभी मसलों के हल के लिए बिना बाधा के बातचीत का पक्षधर है। आपको बता दें कि पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में पड़ोसी देशों से रिश्ते सुधारने की बात कही है। रविवार शाम को उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को अपने सभी पड़ोसियों के साथ 'बेहतरीन संबंध' रखने की दिशा में काम करना होगा क्योंकि इसके बिना देश में शांति लाना संभव नहीं होगा। देश के 22वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद राष्ट्र के नाम करीब एक घंटे लंबे भाषण में खान ने आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की चुनौतियों को सामने रखा था।
नई दिल्ली चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत चीन ग्वादर में अपने 5 लाख नागरिकों के लिए 15 करोड़ डॉलर की लागत से एक शहर बना रहा है। दक्षिण एशिया में यह अपनी तरह का चीन का पहला शहर होगा। माना जा रहा है कि इस प्रस्तावित शहर में 2022 से करीब 5 लाख लोग रहने लगेंगे। चीन की योजना के मुताबिक, ये लोग पाकिस्तानी बंदरगाह ग्वादर पर बनने वाले फाइनैंशल डिस्ट्रिक्ट में काम करेंगे। इस रेजिडेंशल इलाके में सिर्फ चीन के नागरिक ही रहेंगे। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान के इस क्षेत्र का इस्तेमाल चीन की ‘कॉलोनी यानी उपनिवेश’ के तौर पर होगा। जानकारी के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने 36 लाख वर्ग फुट की इंटरनैशनल पोर्ट सिटी को खरीदा है। इस पर वह 15 करोड़ डॉलर में एक रेजिडेंशल प्रॉजेक्ट बनाएगा। यहां 2022 से 5 लाख कर्मचारी रहने लगेंगे। चीन ने अफ्रीका और सेंट्रल एशिया में प्रॉजेक्ट्स पर काम करने वाले अपने नागरिकों के लिए वहां कॉम्प्लेक्स और सब सिटी तैयार किए हैं। चीनी नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने पूर्वी रूस और म्यांमार के उत्तरी में कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया है। चीनी नागरिकों के लिए इस तरह के रेजिडेंशल प्रॉजेक्ट्स को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। चीन ने पाकिस्तान की पाइपलाइंस, रेलवे, हाइवे, पावर प्लांट्स, इंडस्ट्रियल एरिया और मोबाइल नेटवर्क में निवेश किया है। इनमें चीन के मैन्युफैक्चरिंग वाले शहरों के लिए माल लाने-ले जाने के लिए सुरक्षित और अच्छी शिपिंग लेन और रेलवे, पोर्ट रेनॉवेशन और ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी से बना नया फ्री जोन भी शामिल है। 39 प्रस्तावित CPEC प्रॉजेक्ट्स में से 19 या तो पूरे हो गए हैं या होने वाले हैं। इन पर चीन ने 2015 से अब तक करीब 18.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। बेल्ट इनीशिएटिव के तहत CPEC का रेलवे प्रोजेक्ट दशकों तक चले कंस्ट्रक्शन के बाद पटरी पर है। हालांकि, रोड और शिपिंग लेन का काम ग्वादर में अटका हुआ है। BRI प्रोजेक्ट पर नजर रखने वाले एनालिस्टों का कहना है कि अगर यह परियोजना सफल होती है तो वर्ल्ड ट्रेड में चीन का दखल और बढ़ेगा। ग्वादर को कार्गो शिप की आवाजाही के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके तहत नौ बिल्डिंग और समुद्र के किनारे करीब 3.2 किमी का मल्टीपर्पज बर्थ बनाने की योजना है। CPEC दूसरे देश में चीन की तरफ से सबसे बड़ा निवेश है।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें देशवासियों के उसूलों के लिए काम करने वाला नेता बताया। पीएम ने अटल बिहारी के योगदान को याद करते हुए कहा कि अटल ने अपने काम से देश को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाया। विदेश नीति से लेकर देश को मजबूत बनाने के लिए अटल ने वह सबकुछ किया जो जरूरी था। परमाणु परीक्षण से लेकर कश्मीर तक अटल ने ऐसी नीति बनाई जहां से भारत की दुनिया में मजबूत पहचान बनी। कश्मीर पर अटल की दूर दृष्टि के कारण ही पूरी दुनिया का नजरिया बदला और पूरी दुनिया में आतंकवाद की चर्चा होने लगी। पूर्व पीएम अटल की याद में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रार्थना सभा में पीएम मोदी ने कहा कि किशोर अवस्था से लेकर अंत तक जबतक शरीर ने अटल का साथ दिया वह देश के लिए ही जिए। सामान्य लोगों के लिए काम किया। उन्होंने कहा, 'जब अटल ने राजनीति की शुरुआत की उस काल मे राजनीति की मुख्यधारा के निकट कोई अन्य विचारधारा दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। देश का लंबा कालखंड राजनीतिक जीवन में छुआछूत का कालखंड रहा। पल-पल अपमानित करने का प्रयास किए जाने के बावजूद और अलग विचार होने के बाद भी राष्ट्र के प्रति समर्पण होने कारण शून्य में सृष्टि का निर्माण कैसे होता यह अटल के काम से पता चलता है।' कश्मीर पर पाकिस्तान को घेरा, आंतक पर होने लगी चर्चा पीएम मोदी ने कहा कि पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को जम्मू-कश्मीर पर जवाब देना पड़ता था। उन्होंने कहा, 'यह अटल की दिव्य दृष्टि ही थी कि जब उनको यह दायित्व मिला तो उन्होंने इसे कुशलतापूर्वक पूरा किया। कश्मीर की जगह आतंकवाद पर चर्चा होने लगी। कौन आतंक के साथ और कौन आतंक के खिलाफ इसपर दुनिया बात करने लगी। आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी दुनिया को साथ लाने के लिए वह सफलतापूर्वक आगे बढ़े।' पोखरण को याद कर अटल की हिम्मत तारीफ की पीएम मोदी ने कहा, 'अटल केवल नाम से अटल नहीं थे बल्कि उनके व्यवहार में भी अटल भाव नजर आता है। 11 मई 1998 में पोखरण परीक्षण कर भारत ने सारी दुनिया को चौंका दिया। देश में इस परीक्षण की तैयारी दशकों से हो रखी थी, लेकिन हो नहीं पा रहा था। यह अटल थे जिसके अटल निर्णय ने ऐसा कर दिखाया। 11 मई को हमारे देश के वैज्ञानिकों की सिद्धि थी। अटल ने भी यह उपलब्धि वैज्ञानिकों को समर्पित किया था। सारे विश्व ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिए थे। दुनिया के अधिकांश देश हमारे खिलाफ हो गए थे। उस समय के हालात में हमारा रुक जाना स्वभाविक था लेकिन यह अटल थे जिन्होंने 13 मई को दोबारा परमाणु परीक्षण कर विश्व को चुनौती दे डाली कि भारत अटल है और झुकने वाला नहीं है। यह भारत का सामर्थ्य था।' राज्य बंटवारे पर भी अटल को किया याद उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड का विभाजन कर अटल ने यह साबित किया कैसे बिना किसी कटुता के और व्यवस्थाओं में अफरा-तफरी के बिना सबको साथ लेकर निर्णय कैसे किया जाता है। पीएम मोदी ने कहा, 'आज देश नतीजे देख रहा है कि तीनों राज्य अपने बलबूते पर राज्य का विकास निभा रहे हैं। अटल की दूरदर्शिता का परिणाम था कि तीनों राज्यों को हम पनपते देख रहे हैं।' 'गठबंधन राजनीति के प्रणेता बने' पीएम मोदी ने अटल को याद करते हुए कहा कि जिस तरह की स्थिति अटल को झेलनी पड़ी कोई और होता तो वह डिग जाता। उन्होंने कहा, 'अटल डिगे नहीं। उन्हें देश के जन सामान्य पर भरोसा था। वह अटके नहीं, रुके नहीं। देश की राजनीति में बदलाव आया जो साथ चलने को तैयार नहीं थे वे साथ आए। अटल ने क्षेत्रीय अस्मिता का सम्मान करते हुए सबको साथ लेकर चलने की प्रक्रिया की शुरुआत की। यह सब अटल की दिव्य दृष्टि के कारण हुआ।' सबपर अटल का जादू पीएम मोदी ने एशियन गेम्स में कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतने वाले बजरंग पूनिया की तारीफ करते हुए कहा, 'कल एशियन गेम्स में भारत का एक बेटा बजरंग पूनिया गोल्ड मेडल जीतता है और भारत को पहला गोल्ड मेडल मिलता है। पूनिया कभी अटल से मिले नहीं होंगे लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपना गोल्ड मेडल अटल को समर्पित करते हैं। मैं समझता हूं कि इससे बड़ी जिंदगी की कोई ऊंचाई और सफलता नहीं हो सकती है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी आपके बारे में बताती है।'

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