taaja khabar...रोहिंग्या की अवैध बस्तियों को बढ़ावा दे रहे तृणमूल कांग्रेस के नेता: एजेंसियां.....नरम पड़े चीन के तेवर? साझा सैन्य अभ्यास का दिया प्रस्ताव......चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर फिर सक्रिय हुए विपक्षी दल, आज बैठक.....लंदन में पीएम मोदी के सेशन से मिले साफ संकेत, क्या है बीजेपी का इलेक्शन प्लान?...कठुआ कांड के बाद किस करवट बैठेगी जम्मू-कश्मीर की सियासत?...
नई दिल्ली चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर विपक्षी दलों की बैठक के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। एक एनजीओ की जनहित याचिका में कहा गया है कि आर्टिकल 121 के तहत जब तक संसद में किसी जज को हटाने का प्रस्ताव नहीं रखा जाता, तब तक सांसद किसी जज के बारे में इस तरह पब्लिक फोरम में चर्चा नहीं कर सकते। चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग की चर्चा को सुप्रीम कोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही कहा कि हाल के दिनों में जो कुछ हुआ है, वह परेशान कर देने वाला है। याचिका में कहा गया है, 'सार्वजनिक रूप से चर्चा के चलते सवालों के घेरे में आया कोई भी जज सुचारू रूप से अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभा सकता है, इस तरह की चर्चा से न्यायपालिका की स्वतंत्रता भी बाधित होती है।' जनहित याचिका (PIL) में मीडिया को महाभियोग के मसले पर रिपोर्टिंग से रोकने की मांग भी की गई है। कोर्ट ने महाभियोग को लेकर हो रही मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन की मांग पर अटॉनी जनरल से राय मांगी है। अब सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा कि क्या मीडिया को महाभियोग पर चर्चा से रोका जा सकता है और क्या सांसदों को भी महाभियोग पर चर्चा से प्रतिबिंधित किया जा सकता है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव पर फिर सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को ही कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की एक अहम बैठक होनेवाली है, जिसमें CJI के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग को अंतिम रूप दिया जा सकता है। विपक्षी दल यह प्रस्ताव उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को भी सौंप सकते हैं। सूत्रों के अनुसार संसद परिसर में हो रही इस बैठक में कांग्रेस, NCP, एसपी, बीएसपी के अलावा कुछ अन्य दल भी शामिल होंगे। इसके बाद विपक्षी दल राज्यसभा के चेयरमैन से मिलेंगे और प्रस्ताव आज ही उन्हें सौंप सकते हैं। चेयरमैन से पहले ही समय मांगा गया है। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस और DMK, जो शुरुआत में CJI के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में थीं, अब इसमें शामिल नहीं हैं। महाभियोग पर चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जज बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया था। आपको बता दें कि जज लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे। SC का फैसला चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने ही दिया है।
अहमदाबाद नरोदा पाटिया दंगे के मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है।उच्च न्यायालय ने कोडनानी समेत 17 लोगों को बरी कर दिया है। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि माया कोडनानी की वारदात वाली जगह पर मौजूदगी साबित नहीं हुई है। हालांकि बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को दोषी करार देते हुए उच्च न्यायालय ने 21 साल जेल की सजा सुनाई है। इससे पहले निचली अदालत ने बजरंगी को मौत तक जेल में रहने की सजा दी थी। इस तरह इस फैसले से बाबू बजरंगी को भी थोड़ी राहत मिली है। अदालत ने 12 आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है। इन सभी को 21 साल जेल की सजा सुनाई गई है। 2 अन्य लोगों पर फैसला आना अभी बाकी है, जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी है। उच्च न्यायालय ने दंगा पीड़ितों की मुआवजे की मांग को भी खारिज कर दिया है। जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस ए. एस. सुपेहिया की पीठ ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल अगस्त में फैसला सुरक्षित रख लिया था। अगस्त 2012 में एसआईटी की विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी समेत 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोडनानी को 28 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी समेत सभी आरोपियों ने हाई कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। बाबू बजरंगी को निचली अदालत ने मौत तक के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। माया कोडनानी पर था लोगों को भड़काने का आरोप गुजरात में 2007 से 2009 के दौरान महिला एवं बाल कल्याण राज्य मंत्री रहीं माया कोननानी को नरोदा पाटिया मामले में गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। कोडनानी पर आरोप था कि उन्होंने दंगाइयों को मुस्लिम बस्तियों में हमले के लिए अपने भाषण के जरिए उकसाया था। नरोदा गाम दंगा के मामले में भी कोडनानी आरोपी हैं। यह दंगा भी उसी दिन हुआ था, जब नरोदा पाटिया में हिंसा हुई थी। इसमें मुस्लिम समुदाय के 11 लोगों की मौत हो गई थी। पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं माया कोडनानी पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ रहीं माया कोडनानी को दंगे के मामले में 2009 में गिरफ्तार किया गया था। अगस्त, 2012 में विशेष एसआईटी अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए 28 साल की आजीवन कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि 2014 में स्वास्थ्य खराब होने के आधार पर उन्हें जमानत मिल गई थी। वह इन दिनों लोप्रोफाइल जिंदगी जी रही हैं और राजनीतिक गतिविधियों से दूर हैं। कैसे भड़का था नरोदा पाटिया का दंगा 26 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के गोधरा स्टेशन पहुंचने पर उस बोगी में आग लगा दी गई थी, जिसमें अयोध्या से लौट रहे 57 कारसेवक सवार थे। इसके बाद पूरे गुजरात में माहौल खराब हो गया और इसी कड़ी में 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के नरोदा पाटिया में दंगा हुआ, जिसमें 97 लोग मारे गए।
वॉशिंगटन अमेरिका 1 मई से वॉशिंगटन में पाकिस्तानी राजनयिकों पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। पाकिस्तान ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की और कहा कि अमेरिका पाकिस्तान राजनयिकों और कंसुलर कर्मचारियों पर कुछ विशेष प्रकार के प्रतिबंध लगाने जा रहा है। पाकिस्तान का यह कॉमेंट अमेरिकी स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स के वरिष्ठ अधिकारी थॉमस शैनन के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका पाकिस्तान के राजनयिकों पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। पाकिस्‍तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता मोहम्‍मद फैसल ने इस्लामाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'मुद्दा परस्पर लेन-देन का है। इसे लेकर दोनों देशों के बीच बात जारी है और हमें उम्मीद है कि यह मामला जल्द सुलझ जाएगा। फिलहाल इस बारे में कहने के लिए कुछ भी नहीं है।' बता दें कि अमेरिका ने कथित तौर पर नया कोड ऑफ कंडक्ट तैयार किया है जिसके मुताबिक, पाकिस्तानी राजनयिकों को 40 किलोमीटर के दायरे में ही सफर करने की इजाजत होगी। इससे ज्यादा की यात्रा शुरू करने से पहले अमेरिकी प्रशासन की मंजूरी लेना जरूरी है। इतना ही नहीं, उनके लिए दूतावास और वाणिज्य दूतावासों के 20 मील के दायरे में ही घर लेना भी अनिवार्य है। हालांकि अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर लगाए जाने वाले ऐसे किसी भी प्रतिबंध पर कोई कॉमेंट नहीं किया, लेकिन पाकिस्तान द्वारा उसके डिप्लोमेट्स पर लगाए गए प्रतिबंधों को जरूर कबूल किया। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में अमेरिकी राजनयिक कर्नल जोसेफ इमैनुअल हॉल की गाड़ी से टकराकर एक बाइक सवार की मौत के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंदन में एक विशेष इंटरेक्शन सेशन से बीजेपी के इलेक्शन प्लान के साफ संकेत मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आनेवाले चुनावों में उनका कैंपेन किस तरह का रहने वाला है। वह 2019 समेत अगले चुनावों में यह कहकर कांग्रेस पर हमला करते दिखाई दे सकते हैं कि UPA की तुलना में उनकी सरकार ने विकास की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री ने ऑडियंस से कहा कि उनका पांच साल का कार्यकाल UPA के 10 साल के कार्यकाल से भारी होगा और लोगों को इसी से एनडीए सरकार की तुलना करनी चाहिए। दरअसल, इसमें यह संकेत निहित था कि अगर वह दूसरा कार्यकाल पाते हैं तो वह अपने पिछले कार्यकाल के लिए ही जवाबदेह होंगे। मोदी ने कहा, 'इन 5 वर्षों की तुलना होनी चाहिए और हमने हर पैरामीटर पर विकास किया है।' इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान से फैलाए जा रहे आतंकवाद जैसे मसलों को लेकर उनका नजरिया बिल्कुल उद्देश्यपूर्ण रहनेवाला है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत अब बदल गया है। जो आतंकवाद को स्पॉन्सर करते हैं, मैं उनको उन्हीं की भाषा में जवाब दूंगा।' प्रधानमंत्री ने बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक्स के बाद पाकिस्तान की सेना ने फोन लाइन पर आने से इनकार कर दिया था। पीएम ने कहा, 'मैं पाकिस्तान को सूचना देना चाहता था जिससे वे शवों को उठा सकें लेकिन वे करीब एक घंटे तक टालमटोल करते रहे।' उन्होंने कहा कि समझौते की तरफ झुकाव रखने की बजाए हमारा फोकस और मंशा बिल्कुल अलग थी। उनकी टिप्पणियों से साफ हो गया है कि वह भ्रष्टाचार और खराब गवर्नेंस को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधेंगे। वह कहेंगे कि यह उन्हें पिछली सरकार से विरासत में मिली थी। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि गवर्नेंस की रफ्तार काफी सुधरी है जिससे जनता के बीच आत्मविश्वास की एक नई भावना पैदा हुई है। पीएम ने इस मौके पर अपने निजी अनुभवों को भी साझा किया, जब वह रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने जिंदगी के साथ सामंजस्य बिठाना और उसकी चुनौतियों को स्वीकार किया और 'प्रधान सेवक' के तौर पर भी कर रहा हूं। पहले की तरह PM ने लंदन के इस कार्यक्रम में भी कहा कि सत्ता अभी तक कुछ 'परिवारों' के लिए रिजर्व थी पर अब ऐसा नहीं रहा। पीएम ने खुद को बदलाव करने वाले एजेंट के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि वह 'यथास्थिति' से संतुष्ट होनेवाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इस बेसब्री से खुश हूं, जो हमसे उम्मीद की जा रही है। लोग अब ज्यादा से ज्यादा अच्छी सड़कें चाहते हैं।' पीएम ने आगे कहा, 'पिछले चार वर्षों में ऐसा ही सिस्टम तैयार किया गया है... मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता हूं लेकिन तुलनात्मक अध्ययन जरूरी है। आज हमने देश के बारे में वास्तव में अपने देश के तौर पर सोचना शुरू किया है। लोकतंत्र कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। यह एक पार्टनरशिप है।' उन्होंने कहा कि सरकार का बेंचमार्क यही है कि क्या वह समाज के आखिरी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने में सफल रही या नहीं। उन्होंने कठुआ रेप की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे बुरा कुछ भी नहीं है कि विभिन्न सरकारों के समय को लेकर रेप की घटनाओं की तुलना की जाए। स्कैम न होने की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं गलती कर सकता हूं लेकिन गलत मंशा नहीं होगी। मैं आलोचकों के निशाने पर हूं। जो पत्थर फेंकते हैं, मैं उनका इस्तेमाल रास्ते बनाने में करता हूं।'nbt
नई दिल्ली पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में अवैध रूप से बसे रोहिंग्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं। केंद्रीय एजेंसियों का कहना है कि ये लोग राज्य सरकार की जमीन में अवैध रूप से बसे हैं और इससे अवैध रूप से बसने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिलता है। एजेंसियों का कहना है कि रोहिंग्याओं की पहचान करने में पश्चिम बंगाल सरकार गंभीर नहीं दिखती है। एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश से सटे जिले के हरदहा, बरुईपुर इलाकों में 130 से ज्यादा रोहिंग्या परिवार अवैध रूप से बसे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को अडवाइजरी कर ऐसे लोगों की पड़ताल करने की कहा है ताकि उन्हें प्रत्यर्पित किया जा सके। अधिकारी ने कहा कि केंद्र की अडवाइजरी के बाद भी पश्चिम बंगाल सरकार भारतीय क्षेत्र में रोहिंग्याओं की अवैध एंट्री पर निगरानी रखने को लेकर गंभीर नहीं है। एक खुफिया अधिकारी ने कहा, 'सीमा के पास इन लोगों के कैंप बनना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। इससे मानव तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है, इसके अलावा रोहिंग्याओं की अवैध एंट्री और बढ़ सकती है।' अधिकारी ने दावा किया कि रोहिंग्याओं की घुसपैठ से बरुईपुर के स्थानीय समुदाय में गुस्सा है। खासतौर पर स्थानीय नेतृत्व के एक वर्ग की ओर से इन्हें बसाने को लेकर उत्साह दिखाए जाने से लोगों में नाराजगी है। तृणमूल नेता दे रहे अवैध रोहिंग्या बस्तियों को बढ़ावा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि यहां बसे कैंपों को कोलकाता स्थित एक एनजीओ देश बचाओ सामाजिक कमिटी की ओर से मदद मिल रही है। इस एनजीओ का संचालन कोलकाता के हुसैन गाजी करते हैं, जबकि कथित तौर पर इसे फंडिंग हैदराबाद स्थित एक चैरिटी संगठन से मिलती है। सलामाह नाम के इस संगठन की ओर से गाजी को 4 लाख रुपये की रकम रोहिंग्याओं को बसाने के लिए दी गई। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि जिले में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के नेता रोहिंग्या के अवैध रूप से बसने को बढ़ावा दे रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि सरकारी जमीनों पर इन कैंपों का लगना चिंता की बात है। रोहिंग्याओं को मदद की अपील कर चुकी हैं ममता बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पहले भी रोहिंग्याओं के प्रति नरमी दिखा चुकी हैं। बीते साल उन्होंने ट्वीट किया था, 'संयुक्त राष्ट्र की ओर से रोहिंग्या समुदाय के लोगों की मदद की अपील का हमें समर्थन करना चाहिए।' यही नहीं बनर्जी ने कहा था कि सरकार को आतंकियों से संपर्क रखने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन दहशतगर्द और अन्य लोगों में अंतर करना होगा। पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 40,000 रोहिंग्या अवैध रूप से बसे हुए हैं।
नई दिल्ली डोकलाम विवाद के बाद चीन ने अपने तेवरों में नरमी दिखाते हुए भारतीय सेना के साथ अभ्यास का प्रस्ताव दिया है। इस सैन्य अभ्यास को चीन ने डोकलाम विवाद से ठीक पहले बिना कोई कारण बताए स्थगित कर दिया था। लेकिन अब डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमन के दौरे से पहले चीन का यह स्टैंड उसके रवैये में बदलाव का संकेत देता है। अगले सप्ताह सीतारमन पेइचिंग के दौरे पर जाने वाली हैं। डोकलाम में बर्फ पिघलने से कुछ दिन पहले ही यह प्रस्ताव चीन ने दिया है। चीन ने अपने आधिकारिक प्रस्ताव में कहा है कि दोनों देशों की सेनाएं इस साल के अंत तक कभी साझा सैन्य अभ्यास कर सकती हैं। 24 अप्रैल को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन में हिस्सा लेने के लिए सीतारमन पेइचिंग में होंगी। इस संबंध में उनकी चीनी डिफेंस मिनिस्टर वेइ फेंघे से भी बातचीत हो सकती है। एससीओ के विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए इसी दौरान सुषमा स्वराज भी पेइचिंग में होंगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच सालाना सैन्य अभ्यास स्थगित चल रहा है। आमतौर पर हर साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच रक्षा सचिव स्तर की बैठक में सैन्य अभ्यास का शेड्यूल तय होता है। 2016 के अंत में भारत ने चीन के साथ 2017 में सैन्य अभ्यास का प्रस्ताव दिया था, लेकिन चीन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इसके चलते अभ्यास का समय तय करने वाले सचिव स्तर की वार्ता तय नहीं हो सकी और जून, 2017 तक डोकलाम में चीनी सेना उतर गई थी। इसके बाद फिर पूरा साल बिना किसी बातचीत के ही गुजर गया। यही नहीं डोकलाम में दोनों देशों की सेनाएं करीब 70 दिन तक आमने सामने डटी रहीं, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। इस बार चीन ने साझा अभ्यास का प्रस्ताव दिया है। यदि दोनों मंत्रियों के बीच प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो इसके बाद सचिव स्तर की वार्ता होगी और फिर अगले कुछ महीनों के भीतर ही तारीख तय होगी। बता दें कि डोकलाम पठार पर अब भी चीनी सैनिक निर्माण कार्य की कोशिश में हैं, जिस पर भारतीय सेना की पैनी नजर है।
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर विपक्ष फिर सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को संसद भवन में इसको लेकर एक अहम बैठक होने जा रही है। यह मीटिंग जस्टिस लोया की मौत की जांच की अपील सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के एक दिन बाद होने जा रही है। पता चला है कि गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से शुक्रवार का अप्वाइंटमेंट मांगा है। माना जा रहा है कि मीटिंग का फैसला कांग्रेस के सीनियर लीडर्स के बीच हुई चर्चा के बाद लिया गया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सुबह 11 बजे उन सभी दलों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है, जिनके नेता जज लोया के मौत की जांच को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने गए थे। बैठक के बाद वेंकैया नायडू से मुलाकात करने की तैयारी है। चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर चर्चा सबसे पहले 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुई थी। कांग्रेस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सबसे बड़ी अदालत के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जज लोया की मौत के मामले को चिंता का विषय बताया था। हालांकि, कुछ सहयोगी दलों के प्रतिनिधि इस बैठक से अनुपस्थित भी रह सकते हैं, क्योंकि वे दूसरी गतिविधियों में व्यस्त हैं। तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वह राज्य के पंचायत चुनाव में व्यस्त है और चर्चा में शामिल होने में असमर्थ है। केरल की पार्टी IUML ने भी इतनी जल्दी दिल्ली पहुंचने में असमर्थता जताई है। बजट सत्र के दौरान महाभियोग विपक्ष के अजेंडे में ऊपर था, लेकिन कुछ अहम क्षेत्रीय दलों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, लेकिन जज लोया पर फैसले के बाद चर्चा की दोबारा शुरुआत होने जा रही है। याचिका पर संसद सत्र के दौरान ही करीब 70 सांसद हस्ताक्षर कर चुके हैं। कैसे आता है महाभियोग प्रस्ताव किसी भी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी एक सदन में लाया जा सकता है। लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव आने के लिए सदन के कम से कम 100 सदस्यों के दस्तखत प्रस्ताव के पक्ष में समर्थन के रूप में होने चाहिए। वहीं, राज्यसभा में इस प्रस्ताव के लिए सदन के 50 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है। किसी भी सदन में यह प्रस्ताव आता है तो उस प्रस्ताव पर सदन का सभापति या अध्यक्ष उस प्रस्ताव को स्वीकार या खारिज कर सकता है।
स्टॉकहोम चीन में यूरोपियन यूनियन (EU) के 28 राजदूतों में से 27 ने चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की निंदा करते हुए कहा है कि इससे मुक्त व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा और चीन की कंपनियों को गैर वाजिब फायदा मिलेगा। इन राजदूतों की ओर से तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि EU के ट्रेड के लिए उदार नियम बनाने के एजेंडा को BRI से नुकसान होगा और सब्सिडी प्राप्त करने वाली चीन की कंपनियों के पक्ष में स्थितियां बनेंगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी यूरोप के दौरे पर हैं और वह भारत को यूरोप के एक प्रमुख सहयोगी के तौर पर पेश कर रहे हैं। पिछले दिनों भारत ने भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का हवाला देकर इस प्रॉजेक्ट का विरोध किया था। यह रिपोर्ट जुलाई में होने वाले EU-चीन समिट की तैयारियों के हिस्से के तौर पर जारी की गई है। यूरोपियन कमिशन BRI को लेकर EU की एक साझा स्थिति बनाने पर काम कर रहा है। BRI छह इकनॉमिक कॉरिडोर में 65 देशों से गुजरेगा। पिछले साल मई में पेइचिंग में हुए पहले BRI समिट में EU ने चीन के साथ BRI ट्रेड डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। BRI पर EU के राजदूतों की रिपोर्ट में हंगरी के राजदूत शामिल नहीं हैं क्योंकि उनके देश को BRI से फायदा मिलना है। EU के ऑफिशल्स का कहना है कि यूरोप को चीन के साथ सहयोग करने से मना नहीं करना चाहिए और यूरोप को अपनी शर्तें रखनी चाहिए। भारत की तरह यूरोप में भी BRI को लेकर आशंकाएं हैं। भारत कर चुका है विरोध भारत ने हाल ही में BRI को लेकर अपना रवैया दोहराते हुए कहा था इसमें शामिल चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, ‘कोई भी देश ऐसे प्रॉजेक्ट को स्वीकार नहीं कर सकता जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसकी प्रमुख चिंताओं को नजरअंदाज करता है। हमारा मानना है कि कनेक्टिविटी से जुड़ी कोशिशें वैश्विक स्वीकृति वाले नियमों, कानून के शासन, पारदर्शिता और समानता पर आधारित होनी चाहिए।’ BRI प्रॉजेक्ट्स के लिए चीन की कंपनियों को फायदा का भी EU विरोध कर रहा है। EU के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रॉजेक्ट में सभी सहभागियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। जर्मनी के बड़े बिजनस ग्रुप सीमेंस के CEO, जो काइजर ने जनवरी में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में कहा था, ‘चीन का ‘वन बेल्ट बन रोड’ प्रॉजेक्ट नया वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन होगा- चाहे हम इसे पसंद करें या नहीं।’ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले सप्ताह कहा था कि विदेश के कुछ लोगों का यह दावा गलत है कि BRI चीन का एक षड़यंत्र है।
नई दिल्ली इंटरनैशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) का कहना है कि जीडीपी के अनुपात में भारत पर बहुत ज्यादा कर्ज है, लेकिन वह सही नीतियों के जरिए इसे तेजी से कम करने का प्रयास कर रहा है। आईएमएफ के वित्तीय मामलों के विभाग के डेप्युटी डायरेक्टर अब्देल सेन्हादजी का कहना है कि वित्त वर्ष 2017 में भारत सरकार का कर्ज सकल घरेलू उत्पाद का 70 प्रतिशत रहा है। उन्होंने कहा, 'कर्ज का स्तर काफी ज्यादा है, लेकिन अधिकारी सही नीतियों के माध्यम से इसे मध्यम स्तर पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।' वहीं आईएमएफ ने चीन के कर्ज को चुनौती बताते हुए कहा कि चीन के लिए कर्ज का स्तर एक बड़ी चुनौती है और इसे कम करने के लिए पेइचिंग को रेवेन्यू के स्रोतों पर फिर से विचार करना चाहिए। आईएमएफ के शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भारत संघीय स्तर पर अपने राजकोषीय घाटे को तीन प्रतिशत और कर्ज के अनुपात को 40 प्रतिशत के मध्यम स्तर पर लाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि यह लक्ष्य सही है।' इसके अलावा उन्होंने कहा, 'चीन के मामले में मुख्य चिंता कुल कर्ज के संचय के स्तर और गति को साथ करना है। ऐसे में कर्ज के स्तर पर नियंत्रण और खास तौर पर कर्ज के संचय की गति चीनी अर्थव्यवस्था के कड़ी चुनौती है।' इस सब से अलग, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स द्वारा किए गए सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया कि भारत इस साल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के बीच टॉप पर होने का दावा कर सकता है। यह सर्वे 11 अप्रैल से 18 अप्रैल के बीच हुआ। इसमें दावा किया गया कि इस वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती है। आईएमएफ के प्रजेंटेशन में इस बात का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर की टेंशन भारत की तरक्की में भी रूकावट बन सकती है।
नई दिल्ली देश के कई राज्यों में उपजी कैश की कमी की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कमर कस ली और गुरुवार को ही उन राज्यों में करंसी की खेप भेजने का ऐलान कर दिया ताकि फौरी तौर पर इस समस्या से निजात मिल सके। करंसी की खेप कई राज्यों में गुरुवार शाम तक पहुंच गई और कई एटीएम मशीनों में पैसा मिलना शुरू भी हो गया। एएनआई के मुताबिक, वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि देश में करीब 86 पर्सेंट एटीएम सही स्थिति में हैं और कैश वितरित कर रहे हैं। वहीं पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, नॉर्थ-ईस्ट, उड़ीसा और तमिलनाडु में 90 पर्सेंट से ज्यादा एटीएम मशीनों से लोगों को कैश दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकार बिहार को अतिरक्त 1000 करोड़ की राशि देने की योजना बना रही है। सूत्रों ने आगे बताया कि बिहार में 66 पर्सेंट एटीएम मशीनों में अब पैसा है। तेलंगाना में 77 पर्सेंट एटीएम मशीनों के जरिए पैसा वितरित किया जा रहा है। आंध्र पद्रेश में भी 70 पर्सेंट एटीएम मशीनों के जरिए लोगों को पैसा दिया जा रहा है। कैश की कमी से लोगों का हाल बेहाल बता दें कि बिहार और तेलंगाना के अलावा देश के राज्यों में एटीएम मशीनों में कुछ दिन से कैश नहीं है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिहार के पूर्णिया, आरा, गोपालगंज जैसे क्षेत्रों में लोगों को अभी भी एटीएम मशीनों से खाली लौटना पड़ रहा है। पैसे न मिलने की वजह से लोग दर-दर भटक रहे हैं। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि कैश की समस्या से शुक्रवार तक निजात मिल जाएगी। कैश की किल्लत खत्म करने के लिए फौरी तौर पर कई राज्यों में करंसी की खैप भेजी गई है। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी कैश की सप्लाई बढ़ा दी है। कैश किल्लत की वजह? वहीं गुरुवार को संवाददाताओं से बात करते हुए एसबीआई चेयरमैन ने कहा था कि कैश की कमी की समस्या व्यापक नहीं है। यह तेलंगाना और बिहार जैसे राज्यों तक सिमटी है। इसके लिए उन्होंने कैश की जमाखोरी कर रहे लोगों को ताजा नकदी संकट के लिए जिम्मेदार बताया था। इससे पहले वित्त मंत्रालय ने कहा था कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे कुछ राज्यों में सामान्य से ज्यादा मांग देखी गई। उसके बाद आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग + ने बताया था कि देशभर में इस महीने के पहले 12-13 दिनों में ही 45,000 करोड़ रुपये की निकासी हुई जबकि आम तौर पूरे महीने में 20,000 करोड़ रुपये की मांग हुआ करती है।

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