taaja khabar....पोखरण में एक और कामयाबी, मिसाइल 'हेलिना' का सफल परीक्षण.....अगले 10 साल में बाढ़ से 16000 मौतें, 47000 करोड़ की बर्बादी: एनडीएमए....बड़े प्लान पर काम कर रही भारतीय फौज, जानिए क्या होंगे बदलाव...शूटर दीपक कुमार ने सिल्वर पर किया कब्जा....शेयर बाजार की तेज शुरुआत, सेंसेक्स 155 और न‍िफ्टी 41 अंक बढ़कर खुला....राम मंदिर पर बोले केशव मौर्य- संसद में लाया जा सकता है कानून...'खालिस्तान की मांग करने वालों के दस्तावेजों की हो जांच, निकाला जाए देश से बाहर'....
नई दिल्ली, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल को लेकर पार्टी को और आक्रामक देखना चाहते हैं. जिसके लिए कांग्रेस संगठन को देशभर में राफेल के मुद्दे को आम जनता तक पहुंचाने की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है. पार्टी के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने इस बाबत अंदरखाने पार्टी संगठन को खत भी भेज दिया है. कांग्रेस ने 25 अगस्त से लेकर 30 सितम्बर तक देश भर के लिए कार्यक्रम तय कर किए हैं. अपने जर्मनी और लंदन दौरे से पहले राहुल पार्टी संगठन को राफेल मुद्दे को लेकर कार्यक्रम का प्रारूप दे गए हैं. तय कार्यक्रम को पांच चरणों मे बांटा गया है: 1. 25 अगस्त से कांग्रेस राफेल पर देशव्यापी प्रेस कांफ्रेंस करेगी, जो 6 सितंबर तक जारी रहेगी. 2. सभी बड़े नेता बड़े शहरों, राज्य मुख्यालयों में प्रेस कांफ्रेंस करेंगे. 3. 7 सितंबर से 15 सितंबर तक ब्लॉक से लेकर जिला स्तर पर प्रदर्शन और कलेक्टर के दफ्तर तक मार्च होगा. 4. इसके बाद 16 से 30 सितंबर तक राज्य स्तर पर प्रदर्शन होना तय हुआ है. 5. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आजाद 5 सितंबर को रांची में प्रेस कांफ्रेंस. 29 अगस्त को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर प्रेस कांफ्रेंस करेंगे. वहीं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, ग्वालियर और हिसार में प्रेस को संबोधित करेंगे. इसके बाद अंत में दिल्ली में बड़ी प्रेस वार्ता से इस अभियान का समापन होगा. जिसमें खुद राहुल गांधी हिस्सा लेंगे. इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने आजतक से कहा कि, राफेल एक बड़ा घोटाला है, जो आईने की तरह साफ है. राहुल गांधी ने जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब पीएम और रक्षा मंत्री के पास नहीं है. हम इस मामले को ब्लॉक स्तर तक लेकर जाएंगे. क्या हैं कांग्रेस के आरोप? कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार ने जिस विमान की डील की थी, उसी विमान को मोदी सरकार तीन गुना कीमत में खरीद रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस नई डील में किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर की बात नहीं हुई है. पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के मुताबिक यूपीए सरकार की डील के अनुसार, 126 में से 18 एयरक्राफ्ट ही फ्रांस में बनने थे बाकी सभी HAL के द्वारा भारत में बनने थे.
नई दिल्ली, इंडिया टुडे-कार्वी के मूड ऑफ द नेशन जुलाई 2018 पोल (MOTN, जुलाई 2018) ने देश की सियासी नब्ज को समझने के लिए सर्वे किया. सर्वे के मुताबिक देश के आधे से ज्यादा लोग मानते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या में राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा होगा. सर्वे के मुताबिक 52 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो मानते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा लोकसभा चुनाव में बनेगा. जबकि 33 फीसदी लोग मानते हैं कि ये मुद्दा नहीं रहेगा. वहीं, 15 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जिनकी इस मुद्दे पर कोई राय नहीं है. हालांकि अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे को लेकर जनवरी में किए सर्वे में 48 फीसदी लोगों का मानना था कि चुनाव में राम मंदिर मुद्दा होगा और 38 फीसदी ऐसे लोग थे जिन्होंने जवाब नहीं में दिया था. जबकि 19 फीसदी ऐसे लोग थे जिनकी कोई राय नहीं थी. अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीमकोर्ट में चल रही है. साधु-संत लगातार बीजेपी पर राम मंदिर निर्माण के लिए दबाव बनाने में जुटे हैं. दो दिन पहले ही यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा था कि अगर कोई विकल्प नहीं बचता है, तो केंद्र सरकार इसके लिए सदन में कानून ला सकती है. हालांकि, मौजूदा वक्त में संसद के दोनों सदनों में बहुमत न होने का हवाला देते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने चुनावी संकेत भी दे दिए. मौर्य ने कहा, 'राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर लगातार सुनवाई चल रही है. हमें आशा है कि जल्द ही इस पर फैसला आएगा.' केशव प्रसाद मौर्य ने संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास बहुमत न होने का हवाला देते हुए ये भी कहा था कि अभी राम मंदिर निर्माण के लिए वह कानून नहीं ला सकते हैं क्योंकि उसे राज्यसभा से पास कराने में मुश्किल आएगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस संबंध में कानून ला सकती है, जब बीजेपी के पास दोनों सदनों में पर्याप्त संख्याबल होगा. मौर्य ने कहा, 'जब ऐसी स्थिति आएगी कि कानून लाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा और दोनों सदनों में बीजेपी के पास पर्याप्त सांसद होंगे, ये दोनों बातें याद रखनी हैं.' मौर्य ने कहा, 'अभी संसद में हमारे (बीजेपी) पास पर्याप्त संख्या नहीं हैं. अगर हम लोकसभा में कानून लाते हैं तो राज्यसभा में कम संख्या होने के चलते हम निश्चित रूप से हार जाएंगे.' मौर्य ने ये भी कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण विश्व हिंदू परिषद के स्वर्गीय नेता अशोक सिंघल, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व प्रमुख रामचंद्र दास परमहंस और मारे गए कारसेवकों को श्रद्धांजलि होगी.
नई दिल्ली, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने चौथी बार पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर लोकपाल चयन समिति की बैठक का बहिष्कार किया है. उन्होंने इस बार भी विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाए जाने का विरोध किया है. यह बैठक 21 अगस्त को ही होनी है. उन्होंने कहा है कि वह तब तक मीटिंग में हिस्सा नहीं ले सकेंगे जब तक कि उन्हें सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता होने के नाते पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा नहीं दिया जाता. वह इससे पहले भी तीन मौकों पर इसी वजह से बैठक का बहिष्कार कर चुके हैं. खड़गे ने कहा है कि उन्होंने 28 फरवरी, 10 अप्रैल, 18 जुलाई को भी इसी आशय के पत्र लिखे थे. उन्होंने कहा है कि बार-बार चिट्ठी लिखने के बावजूद उन्हें सरकार की ओर से लोकपाल चयन समिति की बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य की हैसियत से बुलाया जा रहा है. उन्होंने पीएम से कहा है कि वह ब्रीफ के पॉइंट नंबर आठ का भी जिक्र करना चाहते हैं जिसमें लिखा है कि मौजूदा चयन समिति में चार सदस्य हैं- प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, भारत के मुख्य न्यायाधीश और प्रमुख न्यायवादी होने के नाते मुकुल रोहतगी. इससे भी यह स्पष्ट होता है कि समिति में लोकपाल एक्ट के तहत किसी विशेष आमंत्रित सदस्य का प्रावधान नहीं है. खड़गे ने कहा है कि शायद सरकार की मंशा यह जताना है कि विपक्ष लगातार लोकपाल एक्ट को लागू करने में परेशानी खड़ी कर रहा है. उन्होंने कहा कि संसद की सेलेक्ट कमेटी के लोकपाल एक्ट में संशोधन करने के बावजूद सरकार इसे हाउस में पेश नहीं कर रही है. उन्होंने कहा है कि लोकपाल अधिनियम 2013 के अनुसार सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा नहीं देने तक वह इस बैठक में हिस्सा नहीं ले सकेंगे.
नई दिल्ली,अपने पाकिस्तान दौरे पर नवजोत सिंह सिद्धू की सफाई के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उनपर हमला बोला है. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सिद्धू कह रहे थे कि वह बतौर क्रिकेटर पाकिस्तान गए हैं, लेकिन आज उनका बयान पूरा राजनीतिक है. उन्होंने कहा कि पंजाब के सीएम ने भी बाजवा से गले मिलने का विरोध किया था, तो फिर किसने सिद्धू को पार्टी में इस बात के लिए सपोर्ट किया है. राहुल गांधी को इस बात का जवाब देना चाहिए. पात्रा ने कहा कि सिद्धू अपनी करनी की बराबरी वाजपेयी की यात्रा से कर रहे हैं, उन्हें ये याद रखना चाहिए कि वह प्रधानमंत्री नहीं हैं. सिर्फ एक राज्य में मंत्री हैं. सिद्धू कह रहे हैं कि पाकिस्तान दोस्ती चाहता है लेकिन सच ये है कि वह सिर्फ आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस भारत में पाकिस्तान डेस्क बना रही है, राहुल गांधी को जरूर जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने देश के सेना प्रमुख को सड़क का गुंडा कहती है. उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू प्रेस कांफ्रेंस करके कहते है कि दो दिनों में पाकिस्तान ने मुझे वो दे दिया जो मुझे पूरी उम्र नहीं मिला हिन्दुस्तान में, हम राहुल गांधी जी से पूछना चाहते है कि आपके नेताओं को पाकिस्तान जाकर ऐसा क्या मिल जाता है? BJP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता लगातार पाकिस्तान को ऑक्सीजन देने का काम कर रहें है. नवजोत सिंह सिद्धू ने जिस प्रकार अपनी प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से भारत को कटघरे में खड़ा करने का जो काम किया है उसके लिए राहुल गांधी देश को जवाब दें.
नई दिल्ली, इस साल चार राज्यों में होने वाले विधानसभा और फिर अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा को अपने नेताओं की गलतबयानी का खतरा महसूस होने लगा है. पार्टी को आशंका है कि बयानबाजी के लिए मशहूर उसके नेता अपने बड़बोलेपन या ऊलजुलूल बयानों से पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन नेताओं की सूची तैयार की गई है, जो इसके लिए पार्टी में कुख्यात हो चुके हैं. भाजपा के एक बड़े नेता से मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस बात को लेकर काफी चौंकन्ने हैं कि पार्टी के किसी नेता की ओर से गलतबयानी या फिर कोई अनर्गल बात न कही जाए. उन्होंने सभी प्रदेश अध्यक्षों और संगठन मंत्रियों को कहा कि यह सुनिश्चित करें कि किसी भी मुद्दे पर पार्टी द्वारा अधिकृत व्यक्ति ही बयान दे. सूत्रों का कहना है कि कई बार इस तरह की बयानबाजी की वजह से पूरा चुनावी परिदृश्य ही बदल जाता है. पार्टी एक पूरी सोची समझी रणनीति और मुद्दों को लेकर चुनाव में आगे बढ़ती है. ऐसे में मुद्दों या रणनीति से हटकर बयानबाजी से पार्टी को नुकसान हो सकता है. इसके लिए पिछले लोकसभा चुनाव का उदाहरण भी पार्टी फोरम पर दिया जा रहा है कि कैसे भाजपा के एक नेता जो अब केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं उनके बयान की वजह से भाजपा पांच सीटों पर साधारण अंतर से हार गई थी. सूत्रों का कहना है कि महिला उत्पीड़न, दलित, अल्पसंख्यक और मंदिर जैसे मुद्दे पर संजीदगी दिखाने की नसीहत पार्टी कार्यकर्ताओं को दी गई है. विरोधी दल के नेताओं के खिलाफ अमर्यादित शब्दों और इशारों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह भी दी जा रही है. गौरतलब है कि चुनावी सरगर्मी में अक्सर पार्टी नेता ऐसे बयान देते रहते हैं, जो मीडिया में छा जाते हैं और जिन पर भरपूर विवाद भी होता है. ऐसे नेता हर पार्टी में हैं. गुजरात चुनाव में ही कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की पीएम मोदी को नीच बताने वाला बयान भला कैसे कोई भूल सकता है. भाजपा नहीं चाहती कि विपक्षी पार्टियों की इस बीमारी के शिकार उसके अपने नेता भी हो जाएं और विरोधी उनका फायदा उठा लें.
कानपुर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में जाने और वहां के सेना प्रमुख को गले लगाने के मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू बुरी तरह फंस गए हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद अब उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक अदालत ने सिद्धू के खिलाफ देशद्रोह के आरोप वाली याचिका को मंजूर कर लिया है. अब मामले की सुनवाई 27 अगस्त को होगी. इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि दुश्मन देश के सेना प्रमुख से गले मिलना देशद्रोह है. एडवोकेट प्रियांशु सक्सेना ने एमएम-7 कोर्ट में मामला दर्ज कराते हुए कहा कि सिद्धू का दुश्मन देश जाकर वहां के सेना प्रमुख से गले मिलना देशद्रोह की श्रेणी में आता है. लिहाजा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. इस पर कोर्ट ने अर्ज़ी को मंजूर करते हुए वादी के बयान के लिए 27 अगस्त की तारीख मुकर्रर कर दी. सक्सेना ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू पकिस्तान गए थे और वहां आर्मी चीफ के गले मिलकर शत्रु के प्रति प्रेम दिखाया. उन्होंने कहा, 'मामले में मेरे पास जो भी साक्ष्य है, उसको मैं कोर्ट में प्रस्तुत करूंगा.' वहीं, पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का खुलकर बचाव किया है. उन्होंने सिद्धू को शांति का दूत बताते हुए उनकी आलोचना करने वालों पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सिद्धू के पाकिस्तान आने पर उनकी आलोचना करने वाले शांति के पक्ष में नही हैं. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए. इमरान खान ने पाकिस्तान आने पर सिद्धू का शुक्रिया भी अदा किया. बता दें कि इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने और पाकिस्तानी सेना प्रमुख से गले मिलने को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू तीखी आलोचना का सामना कर रहे हैं. उनके खिलाफ अब तक देशद्रोह के दो केस भी दर्ज हो चुके हैं. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी अपने मंत्री सिद्धू पर निशाना साध चुके हैं. नए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान ने कहा कि सिद्धू को पाकिस्तान की जनता से अद्भुद प्यार और स्नेह मिला. सिद्धू की आलोचना करने वाले शांति के पक्ष मे नहीं हैं. शांति के बिना हमारे अपने लोग आगे नहीं बढ़ सकते हैं. इमरान खान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को वार्ता के लिए आना चाहिए और कश्मीर समेत सभी विवादित मुद्दों को सुलझाना चाहिए. इस क्षेत्र में गरीबी उन्मूलन और उन्नति का सबसे अच्छा रास्ता बातचीत के जरिए मतभेदों को हल करना और व्यापार शुरू करना है.
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उसके पिछले साल के आदेश के बाद अबतक नेताओं के मामलों के लिए कितनी विशेष अदालतें बनाई गई हैं। सर्वोच्च अदालत ने पिछली साल 14 दिसंबर को केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि राजनेताओं से जुड़े मामलों की खास जांच के लिए 12 विशेष अदालतें बनाई जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन विशेष अदालतों को एक मार्च तक शुरू हो जाना चाहिए। जस्टिस रंजन गोगोई को नेतृत्व वाली बेंच ने मंगलवार को मोदी सरकार से विशेष अदालतों, सेशंस या मैजिस्ट्रियल कोर्ट और उनके क्षेत्रीय अधिकार की जानकारी देने को कहा है। बेंच ने सरकार से पूछा है कि मैजिस्ट्रियल और सत्र न्यायालयों के समक्ष लंबित मामलों के अलावा इन विशेष अदालतों के सामने भी अटके हुए केसों की जानकारी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह पूछा कि उसके द्वारा बनाई गई विशेष अदालतों के अलावा भी क्या सरकार ने अन्य अतिरिक्त अदालतों के गठन का इरादा दिखाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की है। दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने बेंच को जानकारी दी कि एक सेशंस और एक मैजिस्ट्रियल, दो विशेष अदालतों का अबतक गठन किया जा चुका है। बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 28 अगस्त या इससे पहले इस संबंध में अन्य जानकारियों के साथ हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि इन दोनों विशेष अदालतों को कितने मामले ट्रांसफर किए गए हैं। सुनवाई के दौरान इस मामले के याचिकाकर्ता और ऐडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि केंद्र ने इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल किया है लेकिन उसकी कॉपी अबतक उन्हें नहीं मिली है। केंद्र की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने बेंच को बताया कि इस साल मार्च में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी कॉपी याची को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पिछले साल एक नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा था कि 10 मार्च को दिए गए एक साल टाइम फ्रेम में विधायकों और सांसदों के खिलाफ 1581 मामलों (2014 के आम चुनावों के शपथ पत्र के मुताबिक) में से कितने केसों का नतीजा निकला। कितने नेता दोषी या दोष मुक्त सिद्ध हुए। कोर्ट ने इसमें आगे जोड़ा कि 2014 से 2017 के बीच क्या किसी वर्तमान या पूर्व विधायक या सांसद के खिलाफ आपराधिक मामला दाखिल किया गया? और अगर ऐसा हुआ तो इसकी भी विस्तृत जानकारी दें। आपक बता दें कि सुप्रीम कोर्ट उन याचिकओं पर सुनवाई कर रहा है जिसमे सजायाफ्ता नेताओं को जेल की सजा के बाद छह साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य बनाने संबंधी जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों को संविधान के अनुरूप नहीं होने की घोषणा करने का आग्रह किया गया है।
नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए बीजेपी सभी राज्यों में अस्थि कलश यात्रा निकालने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को बीजेपी के सभी प्रदेश अध्यक्षों को स्वर्गीय नेता का एक-एक अस्थि कलश सौंपेंगे ताकि वे उसे अपने राज्य की राजधानी से लेकर ताल्लुका तक ले जाएं। इसके साथ ही सभी जगह श्रद्धांजलि सभाएं भी की जाएंगी। बीजेपी का मानना है कि वाजपेयी को देश का हर नागरिक श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता है। इसी वजह से पार्टी ने इस तरह की अस्थि कलश यात्रा निकालने का फैसला किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सभी प्रदेशाध्यक्षों से कहा गया है कि वे इस कलश को सम्मान के साथ अपने प्रदेश के हर हिस्से में ले जाएं और सभी लोगों को उनके दर्शन कराने के बाद पवित्र नदियों में विधि के साथ विसर्जित करें। सूत्रों का कहना है कि यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में पार्टी इसे गांवों तक ले जाना चाहती है ताकि वहां लोग अपने उदारवादी छवि के नेता को याद कर सकें। पार्टी को यह भी लग रहा है कि जब वहां अस्थि कलश यात्रा पहुंचेगी तो जाहिर है कि उन्हें इस महान नेता के कार्यों की भी याद आएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा श्रद्धांजलि सभाएं भी होंगी ताकि लोग उन्हें याद कर सकें।
जम्मू जम्मू-कश्मीर में दर्दनाक हादसा हुआ है। माता के दर्शन करने के लिए जा रहे श्रद्धालुओं से भरी कार चिनाब नदी में गिर गई। हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की खबर है। मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। अभी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। घटना जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुआ है। बताया जा रहा है कि एक ईको स्पोर्ट कार में सवार होकर श्रद्धालु मचेल माता के दर्शन करने के लिए जा रहे थे। कार बेकाबू होकर 800 मीटर नीचे नदी में जा गिरी। अब तक 12 श्रद्धालुओं के शव बरामद कर लिए गए हैं। एक बच्चे को सुरक्षित बचाया गया है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बताया जा रहा है कि जम्मू के डोडा जिले के एक ही परिवार के सात लोगों की इस हादसे में मौत हुई है। बाकी की पहचान की कोशिश की जा रही है।
तंगधार, जम्मू-कश्मीर के तंगधार में मंगलवार को पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलीबारी में भारतीय सेना का एक जवान जख्मी हो गया है. पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को सीजफायर का उल्लंघन किया और स्नाइपर अटैक किया. आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान की ओर से इस इलाके में गोलीबारी की जा रही है. कुपवाड़ा जिले में आने वाले तंगधार इलाके में पाकिस्तान ने आर्मी पोस्ट पर पांच राउंड की स्नाइपर फायरिंग की. जिसमें भारत का एक जवान घायल हुआ. जवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसी पोस्ट पर 13 अगस्त को पाकिस्तान की गोलीबारी में एक जवान शहीद हुआ था. गौरतलब है कि पाकिस्तान में नई-नई सरकार बनी है, लेकिन अभी भी पाकिस्तान के रंग पुराने ही हैं. पाकिस्तानी सेना ने सोमवार को भी बारामुला जिले के उरी क्षेत्र के कोमलकोट में मोर्टार से हमला किया था. इसके अलावा भी कुछ दिन पहले बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर में भी पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था, इस दौरान कई आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की थी. सुरक्षाबलों ने घुसपैठियों को माकूल जवाब देते हुए चार आतंकियों को मार गिराया था. इसमे दो जवान भी शहीद हुए थे.

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