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मेरठ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 2019 में भी 2014 जैसा रिजल्ट हासिल करने के लिए गांवों पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले वक्त में `लाभार्थी संपर्क प्रमुख’ पार्टी के खेवनहार बनेंगे। क्षेत्र, जिला, मंडल और बूथ स्तर पर इन 'लाभार्थी संपर्क प्रमुखों' को तैनात किया जाएगा। इन पर पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाने और सीनियर नेताओं के गांव-गांव लगने वाली चौपाल और प्रवास के दौरान जनता से जुड़ाव पैदा करने का जिम्मा होगा। इसी के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ को किसान हितैषी के तौर पर पेश किए जाने की तैयारी है। इसके लिए 20 से 25 अक्टूबर और 28 अक्टूबर से 2 नवंबर तक बीस हजार से ज्यादा गांवों के किसानों से धन्यवाद पत्र लिखवाने को अभियान चलेगा। बीजेपी की चुनावी रणनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि शहरी क्षेत्र में पार्टी पहले से मजबूत है, संगठन भी सशक्त है। गांवों में लोगों को जोड़ने पर जोर देना चाहिए। बीजेपी के एक सीनियर नेता के मुताबिक, 'तय किया गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वालों का समर्थन हासिल करने के लिए बनाए प्लान के मुताबिक इन `लाभार्थी संपर्क प्रमुख’ की तैनाती तय की जाए। इनका जाल ऐसा होगा कि सरकारी योजना का लाभ हासिल करने वाले किसी भी वर्ग के लाभार्थी तक उनकी पहुंची होगी। यूपी के हर बूथ, हर मंडल, हर जिला और हर क्षेत्र पर इनको रखा जाएगा। इनका काम लाभार्थी से मिलकर यह समझाने की कोशिश करना होगा कि सरकार उनके जरूरत के वक्त में काम आई, अब चुनाव में वह सरकार यानी बीजेपी के साथ खड़े हों।' 'सांसद-विधायक गांवों में करेंगे प्रवास' पार्टी के प्लान के मुताबिक `लाभार्थी संपर्क प्रमुख’ की इस कवायद के बाद ग्राम संपर्क अभियान में नवंबर से जनवरी तक पार्टी के एमपी-एमएलए गांवों में प्रवास करेंगे। बीजेपी के वेस्ट यूपी प्रवक्ता गजेंद्र शर्मा के मुताबिक, 'तीन महीने में हर एमपी-एमएलए को कम से कम 50 गांव या सेक्टर में जाना होगा। एक महीने में पूरे प्रदेश में तीन दिन एक साथ यह प्रवास अभियान चलेगा। इस अभियान में एक दिन में कम से पांच से सात गांव और सेक्टर को कवर करना होगा। यानी तीन महीने में 50 गांव पूरे करने होंगे। ग्राम संपर्क अभियान के तहत `लाभार्थी संपर्क प्रमुख’ एमपी-एमएलए को लाभार्थियों से मिलवाकर पुख्ता समर्थन हासिल करने की स्क्रिप्ट लिखी जाएगी।' दरअसल, पार्टी का मानना है कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले लोग ईमानदारी से सरकार के साथ खड़े हो गए, तब गैर बीजेपी दलों के संभावित गठबंधन से पार पाना आसान हो जाएगा। इसी के तहत ग्राम चौपाल अभियान की दूसरी कड़ी भी शुरू होगी, जिसमें सीएम, मंत्री, पदाधिकारी गांव में रात बिताएंगे। इसकी तिथि इसी सप्ताह घोषित होने की उम्मीद पार्टी में जताई जा रही हैं। इस बार उन गांवों में चौपाल लगाई जाएगी, जहां पहले चरण में नहीं लगी थी। योगी को किसान हितैषी के तौर पर पेश करने की तैयारी किसानों को लेकर उमड़े सभी राजनीतिक दलों के प्रेम के मद्देनजर बीजेपी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को किसान हितैषी के तौर पर पेश करने की तैयारी में है। बीजेपी का प्लान है कि यूपी के हर किसान बाहुल्य गांव से योगी सरकार के किसानों के हित में उठाए कदम के पक्ष में धन्यवाद पत्र भिजवाया जाए। 20 अक्टूबर से 25 अक्तटूबर और 28 अक्तूबर से 2 नवंबर तक दो चरण में पत्र लिखवाने का अभियान बीजेपी किसान मोर्ची शुरू करेगा। मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय त्यागी का कहना है, '20 हजार से ज्यादा गांव के लाखों किसान योगी को अपने हक और भले के लिए किए गए कामों के बदले धन्यवाद पत्र लिखकर देंगे। योगी सरकार में गन्ने का बकाया भुगतान, मिलों के विस्तारीकरण, फसलों के दाम में वृद्धि, कर्जमाफी आदि ऐतिहासिक काम हुए, जो पहले किसी और सरकार ने नहीं किए।'
श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के बारामूला में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया है। आतंकियों के पास से अत्याधुनिक एके-201 राइफल, दो चीन निर्मित पिस्टल्स और अन्य हथियार बरामद हुए हैं। इससे पहले सुबह ही तीन और आतंकियों को एलओसी के पास मार गिराया गया था। इस तरह शुक्रवार को पांच आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है। उत्तर कश्मीर के बारामूला में शुक्रवार को आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया है। यहां के क्रलहार में हुई इस कार्रवाई में मारे गए आतंकियों के पास से एके-201 राइफल, चीन में निर्मित पिस्टल्स और अन्य हथियार भी मिले हैं। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, 'यह कोई हमला नहीं था। पुलिस नाकेबंदी कर जांच कर रही थी और संदिग्ध गतिविधि दिखी। दोनों संदिग्धों से जब आईडी कार्ड मांगा गया तो उनमें से एक ने पुलिस और सीआरपीएफ पर गोली चलानी चाही लेकिन उसे मौके पर ही मार दिया गया। दूसरे ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे भी मार गिराया गया। उनके पास से हथियार बरामद हुए हैं।' सूत्रों ने बताया कि आतंकी राज्य में घुसपैठ कर आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की ताक में हैं। सेना के उच्च अधिकारी ने बताया कि इस खबर के बाद सेना अलर्ट पर है और आतंकी मंसूबों को नष्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आतंकी हमले की आशंका के मद्देनजर आर्मी, पुलिस, सीआरपीएफ समेत सभी सुरक्षा बलों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। इससे पहले बारामूला जिले में शुक्रवार सुबह ही सेना ने एनकाउंटर में तीन आंतकवादियों को मार गिराया। ये सभी आतंकवादी नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास मारे गए हैं। उनके पास से सेना के जवानों ने चार एके-47 रायफल और चार खाने से भरे बैग बरामद किए हैं। सेना को बारामूला के बोनियार में आतंकियों के घुसपैठ की जानकारी मिली थी। शुक्रवार सुबह सेना के जवान यहां पहुंचे और आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ शुरू हुई। अभी सेना का सर्च अभियान लगातार जारी है। 300 आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना इससे पहले सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि घाटी में अभी करीब 300 आतंकी सक्रिय हैं और करीब 250 आतंकी लॉन्चपैड पर सीमा पार से घुसपैठ की फिराक में हैं। मीडिया से बात करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने भी कहा था कि कश्मीर घाटी में 300 से अधिक आतंकी सक्रिय हैं। वहीं सीमा और एलओसी से सटे पाकिस्तानी टेरर लॉन्च पैड्स पर करीब 250 आतंकियों के मौजूद होने के इनपुट मिले हैं। एक दिन पहले गुरुवार को 55 राष्ट्रीय राइफल्स के कुछ जवान पुलवामा के लसीपोरा इलाके में पट्रोलिंग कर रहे थे, जब उनपर आतंकी हमला हुआ। ब्रिज क्रॉस कर रहे जवानों को देखकर आतंकियों ने पहले से लगाई एक आईईडी में ब्लास्ट किया था, जिसकी चपेट में आने से कई सैन्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। यही नहीं ब्लास्ट के बाद वाहन सवार सैनिकों पर ताबड़तोड़ फायरिंग भी की गई थी।
नई दिल्ली सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को पुलिस फोर्स की सुरक्षा में दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे मुमकिन नहीं होने दिया। इस विवाद में राजनीतिक दल भी एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इस बीच, सीपीएम ने सबरीमाला विवाद की तुलना बाबरी मस्जिद विवाद से कर दी है। बताते चलें कि सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को पुलिस फोर्स की सुरक्षा में दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे मुमकिन नहीं होने दिया। इस विवाद में राजनीतिक दल भी एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इस बीच, सीपीएम ने सबरीमाला विवाद की तुलना बाबरी मस्जिद विवाद से कर दी है। सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सबरीमाला प्रदर्शन और बाबरी प्रकरण का पैटर्न एक ही जैसा है। येचुरी ने सारे विवाद का ठीकरा बीजेपी और संघ पर फोड़ा है। साथ ही कांग्रेस को घेरते हुए यह भी कहा कि वहां चोर ही पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं। येचुरी ने कहा है कि किसी भी श्रद्धालु को मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जा रहा लेकिन कुछ असामाजिक तत्व इसकी आड़ में समस्या खड़ी कर रहे हैं। राज्य देवासम मंत्री ने साजिश की आशंका जताई उधर, केरल सरकार इस पूरे विवाद के दौरान बैकफुट पर नजर आ रही है। राज्य देवासम (धार्मिक ट्रस्ट) मंत्री काडाकमपल्ली सुंदरन ने कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर समस्या खड़ी करना चाह रहे थे। यही वजह है कि उन्हें मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस मामले में साजिश रची गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो महिलाएं जब पवित्र 18 कदम की चढ़ाई शुरू करतीं तो यहां के प्रदर्शन को पूरे केरल में फैलाने की साजिश थी। उन्होंने कहा कि हम उन ताकतों का साथ नहीं दे सकते जो रक्तपात की तैयारी कर रहे थे। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शुक्रवार को महिलाएं सबरीमाला मंदिर में प्रवेश नहीं पाईं। प्रदर्शनकारियों के दबाव की वजह से पुलिस को जहां पीछे हटना पड़ा, वहीं मंदिर जाने के लिए निकलीं दो महिलाओं को भी लौटना पड़ा। केरल सरकार ने कहा कि मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत है लेकिन कुछ ऐक्टिविस्ट भी घुसने की कोशिश में थीं। हैदराबाद के मोजो टीवी की जर्नलिस्ट कविता जक्कल और ऐक्टिविस्ट रिहाना फातिमा मंदिर में नहीं घुस पाईं। कांग्रेस ने भी साधा निशाना इस बीच कांग्रेस नेता आर. चेन्निथला ने कहा है कि सबरीमाला मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं है। सिर्फ श्रद्धालु ही मंदिर में जा सकते हैं। इस समय केरल की पुलिस जो कर रही है वह गलत है। अगर हमारी सरकार होती तो हम इस मामले को अच्‍छे से हैंडल करते। हम भक्‍तों से बात करते और हिंसा नहीं होती।
नई दिल्ली ऐंटी इन्कम्बेंसी के साथ ही कांग्रेस से मिल रही कड़ी चुनौती को देखते हुए बीजेपी एक बार फिर राज्य में अपने पुराने नुस्खे को अपनाते हुए कई दिग्गज नेताओं समेत 40 फीसदी विधायकों का पत्ता काट सकती है। पार्टी को लग रहा है कि इन सीटों पर नए उम्मीदवारों को उतारने से वोटरों की नाराजगी दूर हो सकेगी। पार्टी का कहना है कि पिछली बार भी उसने लगभग 25 फीसदी उम्मीदवार बदल दिए थे, जिसके सकारात्मक नतीजे देखने को मिले थे।पार्टी सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की ओर से हाल ही में सभी विधायकों के बारे में सर्वे कराया गया है और इसकी रिपोर्ट लगभग तैयार है। उम्मीद है कि अगले एक से दो दिन में इस रिपोर्ट पर पार्टी के दिग्गज नेता विचार करेंगे। इसके अलावा पार्टी को पहले भी ऐसे विधायकों के बारे में जानकारी मिल चुकी है, जिनसे वहां के वोटर नाराज हैं। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जन-आशीर्वाद यात्रा पर निकले थे, उस वक्त भी विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर यह आकलन किया गया था कि किस विधायक के प्रति लोगों का विश्वास है और किनके प्रति नाराजगी। पार्टी के एक नेता के मुताबिक इसका आकलन इस आधार पर भी किया गया कि जन-आशीर्वाद यात्रा के दौरान कितनी भीड़ थी और उसका रुख क्या था। कुछ जगह खुद मुखयमंत्री को स्थानीय लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। जिससे पता चला कि वहां के विधायकों की परफॉर्मेंस से लोग नाखुश हैं। इसी तरह के फीडबैक लेकर अब पार्टी इस तैयारी में है कि ऐंटी इन्कम्बेंसी को कम करने के लिए 40 फीसदी तक विधायक बदल दिए जाएं। इस फार्मूले की जद में कई दिग्गज मंत्री भी आ सकते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आकलन लगाया जा रहा है कि पिछली बार बीजेपी के जीते 165 में से 60 से 70 विधायकों का टिकट काटा जा सकता है। उनकी जगह पार्टी युवा और ऐसे नेताओं को टिकट देने की तेयारी में है, जिनकी छवि बेहतर हो और युवा वर्ग को रिझा सकें।
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2018, हरियाणा में पलवल जिले के उटावड़ गांव में बन रही मस्जिद खुलाफा-ए-रशीदीन में टेरर फंडिंग मामले को लेकर एनआईए के खुलासे से सनसनी मची हुई है. एनआईए के मुताबिक हाफिज़ सईद भारत के अलग-अलग हिस्सों में मस्जिदों, मदरसों और मजलूमों को सहारा देकर उन्हें आतंक के लिए उकसाने की कोशिश कर रहा है. एनआईए सूत्रों से आजतक को इस बार पता चला है कि पलवल में बनी मस्जिद को हाफिज सईद और फ़लाह-ए- इंसानियत और लश्कर-ए-तैयबा 5 साल से फंडिंग कर रहे थे. इतना ही नहीं एनआईए के सूत्रों के मुताबिक पलवल की मस्जिद ढाई करोड़ रुपये में बनी है. हवाला ऑपरेटर सलमान को लश्कर ने इस मस्जिद को बनाने के लिए कुल 80 लाख रुपये दिए थे, बाकी पैसा कहां से आया है, एनआईए इसकी गहन जांच कर रही है.एनआईए के रडार पर 3-4 नए लोग हैं. जिनके यहां टेरर फंडिंग का पैसा पहुंचा है. एनआईए सूत्रों के मुताबिक टेरर फंडिंग का पैसा राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मुम्बई और कश्मीर में पहुंचा है. जिसकी जांच बड़े स्तर पर एनआईए कर रही है. आपको बता दें कि मस्जिद के इमाम मोहम्मद सलमान को दुबई निवासी पाकिस्तानी नागरिक कामरान के नाम से 80 लाख का चेक मिला था. ऐसा माना जा रहा है कि कामरान आतंकी संगठन के लिए काम करता है और भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा उपलब्ध कराता है. एनआईए एक केस दर्ज कर इस मामले की जांच की रही है. एनआईए के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत में आतंकी फंडिंग के लिए फलाह-ए-इंसानियत के नेटवर्क के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी कुछ महीने पहले मिली थी. इसके आधार पर इस साल जुलाई में एनआईए ने एफआइआर भी दर्ज की थी. जांच में पता चला कि निजामुद्दीन में रहने वाला मोहम्मद सलमान यूएई में रहने वाले फलाह-ए-इंसानियत के पाकिस्तानी कारिंदे के संपर्क में था. मोहम्मद सलमान को फलाह-ए-इंसानियत के दुबई और अन्य देशों में बैठे गुर्गे हवाला के मार्फत लगातार पैसे भेज रहे थे. जिसे बाद में जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक पहुंचाया जाता था. एनआईए ने मोहम्मद सलमान के साथ-साथ फलाह-ए-इंसानियत की ओर से पैसे मंगाने वाले दरियागंज के हवाला ऑपरेटर मोहम्मद सलीम उर्फ मामा और श्रीनगर निवासी अब्दुल राशिद को भी गिरफ्तार किया था.
लुधियाना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को पंजाब के शहर पटियाला के एक मशहूर चाटवाले के पास 1 करोड़ 20 लाख रुपये की अघोषित संपत्ति का पता चला। गुरुवार को डिपार्टमेंट ने वहां का सर्वे किया तो चाटवाले ने इतनी बड़ी अघोषित संपत्ति का खुलासा किया। यह चाट वाला कैटरर का काम भी करता है। याद रहे कि इसी महीने लुधियाना के एक पकौड़े वाले + ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की छापेमारी के दौरान 60 लाख रुपये सरेंडर किए थे। बहरहाल, अघोषित आय का खुलासा करने के आधार पर अब चाट वाले को करीब 52 लाख रुपये का टैक्स देना होगा। चाट वाले के यहां आयकर विभाग की टीम ने बुधवार को ही सर्वे शुरू किया था। टीम लुधियाना-3 और पटियाला कमिश्नरी के प्रमुख आयुक्त परनीत सचदेव की अगुवाई में सर्वे कर रही थी। उस दौरान पाया गया कि चाट वाले ने न केवल अपनी आमदनी के बड़े हिस्से को गुप्त रखा और उसका अचल संपत्ति में निवेश किया, बल्कि उसने दो सालों से इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भी फाइल नहीं किया। आईटी डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि चाटा वाले ने दो पार्टी हॉल बनाए थे। वह किसी समारोह में चाट मुहैया कराने के लिए 2.5 से 3 लाख रुपये तक चार्ज किया करता था। अधिकारियों का अनुमान है कि टैक्स चोरी की रकम और बढ़ सकती है क्योंकि ज्यादार खरीद-बिक्री का कोई लिखित हिसाब-किताब नहीं रखा गया है। डिपार्टमेंट के सूत्रों ने कहा कि चाट वाले पर कार्रवाई की कार्यवाही जल्द शुरू होगी।
जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में शुक्रवार सुबह सेना ने एनकाउंटर में तीन आंतकवादियों को मार गिराया। ये सभी आतंकवादी नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास मारे गए हैं। उनके पास से सेना के जवानों ने चार एके 47 रायफल और चार खाने से भरे बैग बरामद किए हैं। आतकंवादियों और सेना के बीच अभी मुठभेड़ जारी है। सेना को बारामूला के बोनियार में आतंकियों के घुसपैठ की जानकारी मिली थी। शुक्रवार सुबह सेना के जवान यहां पहुंचे और आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ शुरू हुई। फायरिंग में सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया। अभी सेना का सर्च अभियान लगातार जारी है। 300 आतंकी सक्रीय होने की सूचना इससे पहले सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि घाटी में अभी करीब 300 आतंकी सक्रिय हैं और करीब 250 आतंकी लॉन्चपैड पर सीमा पार से घुसपैठ की फिराक में हैं। मीडिया से बात करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने भी कहा था कि कश्मीर घाटी में 300 से अधिक आतंकी सक्रिय हैं। वहीं सीमा और एलओसी से सटे पाकिस्तानी टेरर लॉन्च पैड्स पर करीब 250 आतंकियों के मौजूद होने के इनपुट मिले हैं। बढ़ा दी गई थी चौकसी सूत्रों ने बताया कि आतंकी राज्य में घुसपैठ कर आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की ताक में हैं। सेना के उच्च अधिकारी ने बताया कि इस खबर के बाद सेना अलर्ट पर है और आतंकी मंसूबों को नष्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आतंकी हमले की आशंका के मद्देनजर आर्मी, पुलिस, सीआरपीएफ समेत सभी सुरक्षा बलों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। आतंकवादियों को घाटी में घुसने से रोकने के लिए आर्मी ने अपनी चौकसी भी बढ़ा दी गई थी। गुरुवार को हुआ था आईईडी हमला सेना की 55 राष्ट्रीय राइफल्स के कुछ जवान गुरुवार रात पुलवामा के लसीपोरा इलाके में पट्रोलिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक ब्रिज को क्रॉस कर रहे जवानों को देखकर आतंकियों ने पहले से लगाई एक आईईडी में ब्लास्ट किया, जिसकी चपेट में आने से कई सैन्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। यही नहीं ब्लास्ट के बाद वाहन सवार सैनिकों पर ताबड़तोड़ फायरिंग भी की गई। इस घटना के बाद यहां मौजूद सेना के जवानों ने भी आतंकियों पर जवाबी कार्रवाई की।
तिरुवनंतपुरम/ निलक्कल सबरीमला में भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंदिर में प्रवेश के लिए पहुंचने वाली महिलाएं लौटाई जा रही हैं तो कई महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की होने की घटना सामने आ रही है। उधर, मंदिर में प्रवेश का प्रयास करने वाली महिला ऐक्टिविस्ट रेहाना फातिमा के घर पर शुक्रवार को कुछ लोगों ने तोड़फोड़ भी की है। इस बीच राज्य में विपक्षी कांग्रेस ने केरल पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सबरीमाला मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं है। शुक्रवार को सबरीमाला मंदिर के बाहर का नजारा युद्ध के मैदान में बदल गया। माहवारी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे लोगों ने सबरीमाला सन्निधानम के समीप वलिया नदापंडाल में दो महिलाओं को आगे जाने से रोका। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई महिलाएं प्रवेश के लिए पहुंच रही हैं लेकिन उन्हें एंट्री पॉइंट से ही लौटाया जा रहा है। मंदिर के बाहर विरोध जारी शुक्रवार को दो महिलाओं ने आईजी के साथ करीब 250 पुलिसकर्मियों के सुरक्षा घेरे में मंदिर में प्रवेश की कोशिश की लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। मंदिर में घुसने का प्रयास करने वाली महिला पत्रकार कविता जक्कल और ऐक्टिविस्ट रेहाना फातिमा को बाहर से ही लौटना पड़ा। इधर फातिमा के कोचि स्थित घर में कुछ अज्ञात लोगों ने तोड़फोड़ भी की है। लौटाई गई क्रिस्चन महिला सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए पहुंची एक क्रिस्चन महिला को भी विरोध के बाद वापस लौटना पड़ा। महिला मैरी स्वीटी ने बताया कि उसे महिला पत्रकार और महिला ऐक्टिविस्ट के विरोध के बाद लौटाए जाने की बात नहीं पता थी। वह दर्शन करने पहुंची थी लेकिन प्रदर्शन और विरोध के कारण उसे बिना दर्शन के ही लौटना पड़ा। 'सबरीमाला मंदिर है, कोई पर्यटन स्थल नहीं' इस बीच कांग्रेस के नेता आर चेन्निथला ने कहा है कि सबरीमाला मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं है। सिर्फ श्रद्धालु ही मंदिर में जा सकते हैं। इस समय केरल की पुलिस जो कर रही है वह गलत है। अगर हमारी सरकार होती तो हम इस मामले को अच्‍छे से हैंडल करते। हम भक्‍तों से बात करते और हिंसा नहीं होती। उन्‍होंने कहा कि हमने राज्‍यपाल से बात की है और ताजा स्थिति से अवगत कराया है। वहां पर न केवल हिंदू बल्कि अन्‍य धर्मों के लोग भी जा रहे हैं। सब लोग चिंतित हैं। महिला कार्यकर्ता रेहाना को पुलिस की वर्दी दी गई जो गलत है।
नई दिल्ली, मोदी सरकार पर घर के अंदर से ही चौतरफा दबाव बनता जा रहा है कि वो राम मंदिर के निर्माण के लिए सदन में क़ानून लाए और अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे. इस संभावना पर अंतिम मोहर लगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयदशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत के बयान से. संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर के लिए कानून बनाना चाहिए. अगर भागवत यह बात कह रहे हैं तो वो एक तरह से सीधे सरकार को इशारा कर रहे हैं कि संघ और भाजपा के समर्थकों और राम के प्रति आस्था रखने वालों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार को सदन में राम मंदिर के लिए क़ानून लाना चाहिए. मोदी सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए दबाव कम नहीं है. ज़मीन पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को जवाब देने से लेकर खुद को मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध दिखाना भाजपा के लिए ज़रूरी होता जा रहा है. दूसरी ओर संतों ने सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है कि मंदिर निर्माण में देरी वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. संतों का कहना है कि क्या भाजपा मंदिर निर्माण का अपना वादा भूल गई है और क्यों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार का बयान पार्टी की ओर से बार-बार दिया जा रहा है. ध्यान रहे कि संतों के एक बड़े वर्ग और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े महंतों ने इस वर्ष 6 दिसंबर से अयोध्या में मंदिर निर्माण की घोषणा कर दी है. संत समाज का कहना है कि वो मंदिर निर्माण का काम शुरू कर देंगे, सरकार रोकना चाहती है तो रोके. संतों का यह आह्वान सरकार के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं है. केंद्र की मोदी सरकार और राज्य में योगी सरकार के लिए यह बहुत मुश्किल होगा कि संतों को रोकने के लिए वे किसी भी प्रकार का बल प्रयोग करें. इससे भाजपा को अपने समर्थकों के बीच खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है. संत समाज की इस घोषणा को संघ प्रमुख के आज के भाषण से एक तरह की वैधता मिल गई है. संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वो राम मंदिर के लिए कोर्ट के फैसले का इंतज़ार नहीं करना चाहता और सरकार इसके लिए क़ानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे. सरकार लाएगी विधेयक? ऐसी स्थिति में भाजपा के पास अब एक ही रास्ता बचता नज़र आ रहा है और वो यह है कि राम मंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्थापित करने के लिए मोदी सरकार सदन के आगामी शीतकालीन सत्र में राम मंदिर के विधेयक को रखे. इससे भाजपा को लाभ भी है. पहला तो यह कि सरकार लोगों के बीच चुनाव से ठीक पहले यह स्थापित करने में सफल होगी कि उनकी मंशा राम मंदिर के प्रति क्या है. वो अपने मतदाताओं को बता सकेगी कि कम से कम भाजपा और मोदी अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध हैं. दूसरा लाभ यह है कि विपक्ष के लिए यह एक सहज स्थिति नहीं होगी. विपक्ष इसपर टूटेगा. कांग्रेस के लिए यह आसान नहीं होगा कि वो राम मंदिर पर प्रस्ताव का विरोध करके अपनी सॉफ्ट हिंदुत्व की पूरी कोशिशों को मिट्टी में मिला दे. इससे विपक्ष में बिखराव भी होगा और सपा बसपा जैसी पार्टियों के वोटबैंक में भी सेंध लगेगी. ध्यान रहे कि संतों और मतदाताओं के बीच संदेश देने के लिए चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार के सामने यह एक अहम और अंतिम मौका है. जनवरी से प्रयाग में शुरू हो रहे कुंभ के दौरान भी सरकार को संत समाज के सामने मंदिर के प्रति अपनी जवाबदेही स्पष्ट करनी होगी. मोदी सरकार के लिए आगामी शीतकालीन सत्र इस सरकार का अंतिम सत्र होगा. इसके बाद का बजट सत्र एक मध्यावधि बजट के साथ समाप्त हो जाएगा और देश आम चुनाव में लग जाएगा. चुनाव से ठीक पहले अपने मतदाताओं के बीच राम मंदिर के लिए विश्वास जताना सरकार के लिए ज़रूरी है. देखना यह है कि सरकार इस विश्वास को जताने के लिए किस सीमा तक जाती है.
नई दिल्ली दिल्ली के पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश की बहू अनुराधा चौधरी के खिलाफ साकेत की एक कोर्ट ने 'ढिंढोरा' पिटवाने का आदेश दिया है। उन पर फर्जीवाड़े से जमीनें बेचकर ठगी करने का आरोप है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया हुआ है, लेकिन पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि वह अपने पते से लापता हैं। इसलिए कोर्ट में उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा-82 के तहत भगौड़ा घोषित करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। उसकी प्रक्रिया के तहत कोर्ट ने उनके घर के मेन गेट पर 82 की कार्यवाही का नोटिस चस्पा करने का आदेश दिया है। साथ ही उनके बारे में एरिया में पब्लिक अनाउंसमेंट कराने और अखबारों में विज्ञापन देने का निर्देश भी जारी किया है। इस कार्यवाही में कोई ढिलाई न बरती जाए, इस वास्ते अदालत ने कहा है कि आरोपी के घर पर नोटिस चस्पा करने के फोटोग्राफ्स अदालत में पेश किए जाएं। साथ ही सोसायटी के दो सम्मानित लोगों की गवाही भी ली जाए, जिससे कि यह पुष्टि हो सके कि उपरोक्त कार्यवाही सही तरीके से पूरी गई है। यह निर्देश मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट की कोर्ट ने जारी किए हैं। इस बाबत 1 दिसंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अनुराधा चौधरी के खिलाफ कड़कड़डूमा की एक कोर्ट में भी चीटिंग, जालसाजी, षड्यंत्र व अन्य दफाओं में एक केस दाखिल है। उसमें भी सीआरपीसी की धारा 82 के तहत भगौड़ा घोषित करने की कार्यवाही चल रही है। उसके बावजूद आरोपी पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। साकेत कोर्ट में दाखिल केस में भी जांच अधिकारी ने यही रिपोर्ट दी है कि आरोपी घर से लापता हैं। इसलिए उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट तामील नहीं हो रहा है। बता दें कि साकेत कोर्ट से 29 सितंबर को गैर जमानती वारंट जारी हुआ था। जांच अधिकारी द्वारा उन्हें लापता बताए जाने पर साकेत कोर्ट ने भी भगौड़ा घोषित करने की कार्यवाही शुरू कर दी है। इस सिलसिले में पुलिस का कहना है कि आरोपी अनुराधा चौधरी के सरिता विहार स्थित घर पर कई बार दबिश दी गई, लेकिन वह घर पर नहीं मिलीं। उनके ऊपर एक कंपनी बनाकर फर्जीवाड़े से करोड़ों की जमीन बेचने का आरोप है। कड़कड़डूमा कोर्ट में चल रहे केस में शाहदरा निवासी विकास भारद्वाज ने साल 2015 में ज्योति नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई कि अनुराधा व अन्य आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों पर एक जमीन का सौदा करके सवा करोड़ रुपये ठग लिए।

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