taaja khabar...रोहिंग्या की अवैध बस्तियों को बढ़ावा दे रहे तृणमूल कांग्रेस के नेता: एजेंसियां.....नरम पड़े चीन के तेवर? साझा सैन्य अभ्यास का दिया प्रस्ताव......चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर फिर सक्रिय हुए विपक्षी दल, आज बैठक.....लंदन में पीएम मोदी के सेशन से मिले साफ संकेत, क्या है बीजेपी का इलेक्शन प्लान?...कठुआ कांड के बाद किस करवट बैठेगी जम्मू-कश्मीर की सियासत?...
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट से कर्नल पुरोहित को राहत मिली है। कोर्ट अब कर्नल पुरोहित केस की सुनवाई मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोप तय होने के समय ही करेगा। अनलॉफुल ऐक्टिविटीज प्रिवेंशन ऐक्ट के तहत अभियोजन पक्ष की याचिका को कर्नल पुरोहित ने चुनैती दी थी। बता दें कि 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में कर्नल श्रीकांत पुरोहित आरोपी हैं। इस मामले में कर्नल पुरोहित को 21 अगस्त 2017 को जमानत मिली थी। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था तब वे सेना की मिलिटरी इंटेलिजेंस के लिए काम कर रहे थे। गौरतलब है कि 2009 में मालेगांव के अंजुमन चौक में शकील गुड्स ऐंड ट्रांसपॉर्ट कंपनी के बाहर धमाका हुआ था जिसमें 6 लोग मारे गए थे और 101 घायल हुए थे। इस मामले की जांच पहले महाराष्ट्र एटीएस ने की थी। एटीएस ने मामले में मकोका की धाराएं लगाईं थीं। एटीएस ने अपनी चार्जशीट में कर्नल पुरोहित के खिलाफ हिंदुत्व को बढ़ावा देने और लोगों के मन में डर पैदा करने के लिए धमाके करवाने के आरोप तय किए थे। एटीएस के मुताबिक कर्नल के संगठन 'अभिनव भारत' ने धमाकों की साजिश रची थी। 2011 में सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी थी। 2016 में कर्नल पुरोहित के खिलाफ NIA ने मकोका की धाराएं हटा ली थीं।
नई दिल्ली जज बीएच लोया केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस एक बार फिर से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग को आगे बढ़ाने में जुटी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को सौंपा। मीटिंग के बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमने मीटिंग के दौरान 5 आधार देते हुए महाभियोग के प्रस्ताव की मंजूरी मांगी है। हमने महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस वाइस-प्रेजिडेंट को सौंप दिया है और उनसे प्रस्ताव पेश करने की मंजूरी देने की मांग की है। कांग्रेस के महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर एनसीपी, सीपीआई, एसपी, बीएसपी और मुस्लिम लीग ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने विपक्षी दलों की मीटिंग भी बुलाई थी, लेकिन तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके और बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी ने इस बैठक से ही किनारा कर लिया। यही नहीं प्रस्ताव के नोटिस पर साइन करने वाली समाजवादी पार्टी भी मीटिंग से दूर ही रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरजेडी विपक्षी दलों की बैठक में तो शामिल नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि उसने भी महाभियोग का समर्थन करने की बात कही है। ये गिनाए 5 कारण - विपक्ष का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को मीडिया में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी। - चीफ जस्टिस के प्रशासनिक फैसलों को लेकर थी खासी नाराजगी। - मीडिया में आने वाले चार जज बताना चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। - पिछले तीन महीने में कुछ नहीं बदला। चीफ जस्टिस ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। - चीफ जस्टिस निष्पक्षता के लिए जाने जाएं। जज लोया और प्रसाद इंस्टिट्यूट को लेकर विवाद हुआ। कांग्रेस ने कहा, 50 की जरूरत हमारे पास 71 सांसद प्रस्ताव को पेश किए जाने के लिए 50 सांसदों की संख्या जरूरी होती है और हमने 71 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस सौंपा है। यही नहीं हमने लिखित रूप से यह भी कहा कि इनमें से 7 सांसद जल्दी ही रिटायर हो जाएंगे, इन्हें न भी गिना जाए तो भी प्रस्ताव के लिए जरूरी संख्या हमारे पास है। आजाद ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे।'
अहमदाबाद गुजरात के नरोदा पाटिया दंगे में हाई कोर्ट से पूर्व मंत्री माया कोडनानी को राहत मिल गई है। उच्च न्यायालय ने उन्हें निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है। गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़की हिंसा में सबसे बड़ा नरसंहार कहे जाने वाले इस दंगे में माया कोडनानी पर लोगों को उकसाने का आरोप था। इससे पहले निचली अदालत ने कोडनानी को 28 साल जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने 31 अन्य लोगों को निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। पढ़ें, किन वजहों से कोडनानी को हाई कोर्ट से मिली राहत... - अदालत ने कहा कि दंगे की जगह पर माया कोडनानी की मौजूदगी साबित नहीं हुई है। यह सबसे बड़ा आधार था, जो गुजरात सरकार में मंत्री रहीं कोडनानी के लिए राहत की वजह बना। - दंगे का केस दर्ज किए जाने के दौरान 11 गवाहों में से किसी ने भी माया कोडनानी का नाम नहीं लिया। - सरकारी वकील प्रशांत देसाई ने कहा कि 11 गवाहों ने कोडनानी की वारदात स्थल पर मौजूदगी को लेकर अलग-अलग बयान दिए थे। लेकिन सभी के बयानों में विरोधाभास पाया गया। - कोर्ट ने कहा कि माया कोडनानी पर आपराधिक साजिश का आरोप साबित नहीं होता है। - कोर्ट में एक गवाह ने कहा था कि माया कोडनानी कार से उतरीं और पुलिस से बात की। हालांकि पुलिस ने गवाह की इस बात को खारिज कर दिया। - यही नहीं उच्च न्यायालय ने दंगा पीड़ितों की मुआवजे की मांग को भी खारिज कर दिया है। अब भी इस मामले में लटक रही कोडनानी पर तलवार भले ही माया कोडनानी को नरोदा पाटिया दंगे में सजा से राहत मिल गई है, लेकिन अब भी उन पर नरोदा गाम दंगे के केस में तलवार लटक रही है। यह दंगा भी 28 फरवरी, 2002 को ही हुआ था, जब नरोटा पाटिया में हिंसा हुई थी। इसमें मुस्लिम समुदाय के 11 लोगों की मौत हो गई थी।
नई दिल्ली, अजमेर और मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में बरी हो चुके स्वामी असीमानंद को बीजेपी ट्रंप कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर सकती है. पश्चिम बंगाल में सियासी जमीन तलाश रही बीजेपी असीमानंद के राज्य में उतारने की तैयारी कर रही है. बीजेपी के प्रदेश ईकाई असीमानंद की मदद लेने के साफ संकेत दिए हैं. पीटीआई के मुताबिक पश्चिम बंगाल के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि मैं स्वामी असीमानंद को निजी तौर पर लंबे समय से जानता हूं. मैं उनसे बात करुंगा और उन्हें पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए काम करने के लिए लाने का प्रयास करूंगा. उन्होंने लंबे समय तक बंगाल में आदिवासियों के बीच काम किया है. पार्टी के लिए कई तरह से वो मदद कर सकते हैं. बता दें कि असीमानंद के छोटे भाई सुशांत सरकार मौजूदा समय में हुगली से बीजेपी के सचिव हैं. सुशांत सरकार ने कहा कि अगर उनके भाई राज्य में काम संभालते हैं तो उन्हें खुशी होगी. सुशांत सरकार ने कहा कि हमारा पूरा परिवार संघ परिवार के लिए समर्पित है. अगर मेरे भाई बंगाल आते हैं और यहां काम करना चाहते हैं तो हमें बहुत खुश होगी. स्वामी असीमानंद का जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के कामारपुकार स्थित नाबा कुमार सरकार के घर हुआ था और उन्होंने 1971 में विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री की थी. असीमानंद अपने ज्वलंत भाषण और अल्पसंख्यक विरोधी रुख रखने के लिए जाने जाते हैं. वह स्कूल के दिनों से ही दक्षिणपंथी समूह के साथ जुड़ गए थे. राज्य के पुरुलिया और बांकुरा जिलों में वनवासी कल्याण आश्रम में वह पूर्ण कालिक कार्य कर रहे हैं. यह वही आश्रम हैं जिसे 1981 में नाबा कुमार ने स्वामी असीमानंद के नाम कर दिया था. गौरतलब है कि सोमवार को ही अदालत ने 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में 66 वर्षीय असीमानंद और चार अन्य को आरोपों से बरी कर दिया था.
जम्मू, कठुआ गैंगरेप एवं हत्या कांड के बाद दबाव में मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले BJP नेता चौधरी लाल सिंह CBI से मामले की जांच कराने की मांग कर रहे हैं. अपनी इसी मांग को लेकर लाल सिंह आज जम्मू से एक रैली निकालेंगे. लाल सिंह ने मौजूदा क्राइम ब्रांच की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं, जिसे वह रैली के दौरान भी उठा सकते हैं. जम्मू से कठुआ के बीच यह रैली सफारी चौक से होकर गुजरेगी और 85 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जिसमें 12 स्टॉपेज होंगे. बता दें कि राज्य की PDP और BJP की गठबंधन सरकार में वन मंत्री चौधरी लाल सिंह और उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा को दबाव के चलते इस्तीफा देना पड़ा था. चंद्रप्रकाश गंगा भी BJP से हैं. दोनों ही बीजेपी नेताओं ने मामले में आरोपियों के समर्थन में हिंदू एकता मंच द्वारा आयोजित रैली में हिस्सा लिया था. इस रैली में आरोपियों को बचाने की मांग की गई थी. PDP सरकार में शामिल बीजेपी के दोनों मंत्रियों ने शुक्रवार को इस्तीफा दिया था. दोनों ही गठबंधन सरकार में मंत्री थे. लाल सिंह PDP पर कठुआ केस को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाकर हमला कर सकते हैं. चौधरी लाल सिंह की इस रैली में मुख्य आरोपी सांझी राम की बेटी सहित मामले की जांच CBI से कराने की मांग रखने वाले लोग शामिल हो सकते हैं. बता दें कि सांझीराम की बेटी ने सोमवार को कहा कि कठुआ केस की जांच सीबीआई से कराई जाए और अगर वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी की सजा दी जाए. इससे पहले सोमवार को पीड़ित परिवार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर से बाहर मामले की सुनवाई किए जाने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. पीड़िता के परिवार को डर है कि निचली अदालत में इस केस की ईमानदारी से सुनवाई नहीं होगी और उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा. इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया.
जम्मू-कश्मीर में एक ही वक्त पर दो तरह की लड़ाई लड़ी जा रही है। सामने जो लड़ाई दिख रही है वो एक मासूम के साथ हुए वहशीपन के खिलाफ और इंसाफ को लेकर है। लेकिन पर्दे के पीछे की लड़ाई राजनीतिक दलों के बीच इस घटना की बिसात पर सियासी जमीन बचाने को लेकर चल रही है। कठुआ कांड के बाद वहां राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच शह और मात का खेल भी शुरू हो गया है। पीडीपी इस मौके का फायदा अवाम के बीच यह संदेश देने के लिए उठाना चाहती है कि गठबंधन के बावजूद वह बीजेपी के दबाव में नहीं है और सरकार अपनी शर्तों पर चला रही है। वहीं बीजेपी की जिद्दोजहद गठबंधन बचाने के साथ-साथ अपना वोट बैंक बचाने की भी है। मुख्य विपक्षी दल नैशनल कॉन्फ्रेंस, इस कांड को अपनी प्रतिद्वंद्वी पीडीपी के बीजेपी से गठबंधन का परिणाम बताकर सत्ता से बाहर किए जाने का हिसाब बराबर करने की फिराक में है। क्या गठबंधन जारी रहेगा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए हालात में क्या बीजेपी-पीडीपी गठबंधन जारी रहेगा? एक आम धारणा हो सकती है कि बीजेपी के लिए यह मौका है गठबंधन से अलग होकर अपने वोटबैंक को संदेश देने का कि विचारधारा से वह कोई समझौता नहीं कर सकती, सत्ता उसके लिए गौण है। पीडीपी की विचारधारा को लेकर कई मौकों पर बीजेपी को मौन सहमति से शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। उन सबसे एक झटके में पीछा छुड़ा लेने का यह एक मौका हो सकता है। लेकिन इस आम धारणा के विपरीत राजनीतिक नजरिये से देखने पर लगता है कि गठबंधन जारी रखना फिलहाल बीजेपी की मजबूरी है। दो वजहों से बीजेपी इस गठबंधन को जारी रखना चाहेगी। पहली वजह तो यह कि बच्ची के साथ हुए वहशीपन के विरोध में गुस्से की लहर के बीच बीजेपी ने गठबंधन तोड़ा और सरकार से अलग हुई तो यह संदेश जाने का खतरा रहेगा कि पार्टी बलात्कारियों की हिमायत कर रही है। यह संदेश उसकी छवि को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी वजह यह है कि 2019 के आम चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं। बीजेपी अपने एक सहयोगी को दुश्मन बनाने से बचना चाहेगी। कश्मीर की राजनीतिक नब्ज को अच्छे से समझने वाले स्थानीय पत्रकार शुजात बुखारी भी एनबीटी से कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता कि बीजेपी फौरीतौर पर गठबंधन से अलग होना चाहेगी, यह गठबंधन फिलहाल यूं ही जारी रहेगा, लेकिन बहुत स्थाई नहीं रहेगा।' यह भी पढ़ें: पूर्व मंत्री लाल सिंह ने निकाला विरोध जुलूस क्या बीजेपी को नुकसान हुआ है? कश्मीर यूनिवर्सिटी के राजनीतिशास्त्री प्रफेसर डॉ. नूर अहमद बाबा कहते हैं कि कठुआ के घटनाक्रम ने बीजेपी को स्थानीय स्तर पर काफी नुकसान पहुंचाया है। बीजेपी की उधेड़बुन से राष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि पर आंच आई तो स्थानीय स्तर पर उसके वोटबैंक में नाराजगी बढ़ी। डॉ. नूर कहते हैं कि बीजेपी जम्मू की सभी सीटें जीतकर आई है। वह वहां की जनभावनाओं की नुमाइंदगी करती है। इसी वजह से बलात्कार के आरोपियों के साथ खड़े होना उसकी मजबूरी थी। वह इस कांड की संवेदनशीलता को समझने में नाकाम रही। उसे लग रहा था कि यह आम घटनाक्रम है, जिसको लेकर दो पाले हैं। उसे अपने को हिन्दू वाले पाले में खड़े दिखाना है लेकिन इस कांड ने पूरे देश को जब एक कर दिया तो बीजेपी को महसूस हुआ कि वह तो गलत पाले में खड़ी है, उसने तुरंत अपना पाला बदला तो जम्मू के लोगों में उसके प्रति नाराजगी पैदा हो गई। जम्मू के लोगों को लगता है कि बीजेपी ने अपनी छवि बचाने के लिए पैंतरेबाजी की। दबाव में आने का ही परिणाम रहा कि बलात्कारियों के हिमायत में निकली रैली में शामिल होने वाले दो मंत्रियों से उसने इस्तीफे ले लिए। पीडीपी को क्या हासिल हुआ? महबूबा मुफ्ती वक्ती तौर पर यह दिखाने में कामयाब रही हैं कि वो बीजेपी के दबाव में नहीं काम कर रही हैं, कश्मीर के लोगों की भावनाओं के अनुकूल वो बीजेपी को झुका सकती हैं। शुजात बुखारी कहते हैं, 'लेकिन अगर आप यह समझते हैं बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार बनाने से आम कश्मीरी में पीडीपी को लेकर जो नाराजगी पैदा हुई है, वो इस घटनाक्रम से खत्म हो गई है तो आप गलत हो सकते हैं। वह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर नाराजगी इतनी जल्दी खत्म नहीं हो सकती।' नैशनल कॉन्फ्रेंस इस घटनाक्रम को पीडीपी के बीजेपी के साथ गठबंधन से जोड़कर पेश कर रही है। उसकी कोशिश घाटी में पीडीपी के खिलाफ माहौल बनाने की है। उधर, कांग्रेस दुविधा में है। जम्मू उसका भी कभी गढ़ था। कश्मीर में नैशनल कॉन्फ्रेंस-पीडीपी ने कभी उसे उभरने का मौका नहीं दिया। कांग्रेस की मजबूरी यह दिख रही है कि वह घाटी की भावनाओं के खिलाफ भी नही दिखना चाहती और न ही जम्मू की। आगे क्या हो सकता है? धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की राजनीति तेजी पकड़ेगी। कश्मीर और जम्मू के बीच दिलों की दूरी बढ़ सकती है। बीजेपी जम्मू में अपने वोटबैंक को सहेजने में पूरी ताकत लगा देगी। nbt
अहमदाबाद गुजरात हाई कोर्ट 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले में दायर अपीलों पर आज अपना फैसला सुना सकता है। जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस ए. एस. सुपेहिया की पीठ ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल अगस्त में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अगस्त 2012 में एसआईटी मामलों के लिए विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी समेत 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोडनानी को 28 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। एक अन्य बहुचर्चित आरोपी बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को जीवनपर्यन्त आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 7 अन्य को 21 साल के आजीवन कारावास और शेष अन्य को 14 साल के साधारण आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था, जहां दोषियों ने निचली अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, वहीं विशेष जांच दल ने 29 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
मुंबई मुंबई में कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता ने पार्टी कार्यालय में शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि रविवार को कैंडल मार्च के दौरान एक पुरुष साथी द्वारा उनके साथ छेड़छाड़ की गई। बता दें कि रविवार को यहां पर कठुआ और उन्नाव रेप केस के मामले में विरोध करते हुए मार्च निकाला गया था। महिला ने पार्टी की मुंबई यूनिट के मुखिया संजय निरुपम से शिकायत की, जिन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी आरोपी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि पार्टी ने जुहू में मार्च का आयोजन किया था। मीडिया से बातचीत में निरुपम ने बताया, 'आरोप लगाने वाली महिला जिला स्तर की पार्टी कार्यकर्ता हैं, उन्होंने घटना पर लिखित रूप से शिकायत की है।' जानिए, महिला ने क्या की शिकायत अपने संदेश में महिला ने कहा है, 'युवा कांग्रेस और एनएसयूआई (पार्टी की छात्र इकाई) ने नीच हरकत दिखाई है। उन्होंने महिलाओं को अनुचित ढंग से छुआ, धक्का-मुक्की की, जिसकी वजह से हमें असुरक्षित महसूस हुआ। दुखद है कि कुछ पुरुष कार्यकर्ताओं द्वारा हमारे साथ ऐसा किया गया, उनके चेहरे मीडिया के कैमरों में भी कैद हो गए होंगे। मैं जानना चाहती हूं कि भविष्य में होने वाले इस तरह के आयोजनों में क्या महिला कार्यकर्ता सुरक्षित रहेंगी।' संजय निरुपम ने दिया कार्रवाई का आश्वासन इस पूरी घटना पर निरुपम ने कहा, 'यह मामला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं इसके लिए बहुत शर्मिंदा हूं। मैंने महिला को बताया कि यदि वह उन लोगों को पहचान लेती हैं तो आरोपियों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाएगा। मैंने उनसे यह भी कहा है कि यदि वह चाहें तो वह पुलिस की मदद लेकर आरोपी के खिलाफ शिकायत भी कर सकती हैं। हालांकि, उन्होंने मुझसे बताया कि मार्च के दौरान बहुत भीड़ थी, जिसकी वजह से आरोपियों को पहचानना संभव नहीं है।' 'दर्जनों महिलाएं हुई थीं कार्यक्रम में शामिल' संजय निरुपम ने बताया कि धरना एवं मोर्चों में महिलाओं की भी सहभागिता होती है। उन्होंने कहा, 'वह अकेली इस मार्च में नहीं थीं बल्कि उनके साथ दर्जनों महिला सदस्य शामिल हुई थीं। मैं महिला के साथ हुई घटना के बाद शर्मिंदा हूं। पुरुष कार्यकर्ता मोर्चों में आगे रहते हैं, हो सकता है कि उनके चेहरे टीवी कैमरों में कैद हो गए हों।'
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लंदन में 'भारत की बात सबके साथ' कार्यक्रम के जरिए दुनिया को संबोधित किया. इस दौरान कवि और लेखन प्रसून जोशी के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कई मुद्दों पर बात की. बातचीत के दौरान ही प्रधानमंत्री ने अपनी एक कविता 'रमता राम अकेला' भी सुनाई. अब प्रधानमंत्री ने अपनी इस कविता को सोशल मीडिया पर डाला है. गुरुवार को प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर इस कविता को शेयर किया. प्रधानमंत्री की ये कविता गुजराती में लिखी हुई है. बता दें कि कार्यक्रम के दौरान ही प्रधानमंत्री ने कहा था कि अभी उन्हें ये कविता याद नहीं है, लेकिन वह सोशल मीडिया पर इसे शेयर करेंगे. दरअसल, प्रसून जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके फकीरीपन के मुद्दे पर सवाल पूछा था. जिसपर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने अपने बिताए हुए समय के बारे में वर्णन किया था. पीएम मोदी ने उस दौरान कहा था कि फकीर जैसे शब्द का इस्तेमाल करना बड़ी बात है, लेकिन मैं तो औलिया हूं. मैं ऐसे हालात में पला बढ़ा हूं कि मुझपर किसी चीज का असर नहीं होता है. आपको बता दें कि प्रसून जोशी ने भी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के लिए कविताएं पढ़ीं. पीएम मोदी ने भी प्रसून जोशी को कविराज बताया. जो लोग मुझ पर पत्थर फेंकते हैं. मैं उसी पत्थरों से पत्थी बना देता हूं और उस पर चलकर आगे बढ़ता हूं आपको बता दें कि प्रसून जोशी ने शुरुआत में ही पीएम मोदी से कहा कि आपने रेलवे स्टेशन से रॉयल पैलेस तक का सफर किया है. इस पर पीएम मोदी ने कहा कि ये तुकबंदी आपके लिए सरल है, लेकिन जिंदगी का रास्ता कठिन है. पीएम मोदी ने कहा कि रेलवे स्टेशन का सफर मेरी जिंदगी की व्यक्तिगत बात है. वह दौर मेरी जिंदगी का स्वर्णिम पन्ना है.
चंडीगढ़, वैशाखी के मौके पर ननकाना साहिब में दर्शनों के लिए गई होशियारपुर की किरण बाला ने अचानक आमना बीवी बन कर सबको चौंका दिया है. किरण बाला के ससुर तरसेम सिंह ने आजतक को बताया कि वह अक्सर अपने मोबाइल फोन पर फेसबुक और व्हाट्सऐप में व्यस्त रहती थी. वह अक्सर अनजाने लोगों से फोन पर बात करती रहती थी. परिवार के सदस्य जब उसे पूछते थे वह कह कर टाल देती थी कि वह रिश्तेदार से बात कर रही है. किरण बाला के ससुर तरसेम सिंह को शक है कि वह पाकिस्तान की कुख्यात जासूसी एजेंसी आईएसआई का शिकार हो गई है और हो सकता है वह पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रही हो. 32 साल की किरण बाला 10 अप्रैल 2018 को पाकिस्तान के लिए निकली थी. किरण बाला बच्चों को यह कहकर गई थी कि वह दर्शन करके घर वापस आ जाएगी. वह एक विधवा है और अपने पीछे तीन बच्चे इंद्रजीत कौर (13) अर्जुन सिंह (8) और गुरमीत सिंह (7) को छोड़ गई है. तरसेम सिंह ने अपनी बहू को एसजीपीसी के अधिकारियों के सुपुर्द किया था. उन्होंने भरोसा दिलाया था कि वह उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेते हैं. वापिस घर लाएंगे. किरण बाला के पति नरेंद्र सिंह की नवंबर 2013 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. पति की मौत के बाद वह हिमाचल प्रदेश में एक बिस्कुट फैक्टरी में काम करने लगी. लेकिन उसे भी कुछ टाइम बाद छोड़ दिया. इसके बाद घर से ही सिलाई कढ़ाई का काम करके गुजर बसर कर रही थी. अचानक वह गुमसुम रहने लगी. उसकी दुनिया मोबाइल तक सिमट गई. तरसेम सिंह ने बताया, 'मुझे फेसबुक और व्हाट्सऐप चलाना नहीं आता है. परिजन बताते रहते थे कि किरण इंटरनेट पर व्यस्त रहती थी. उसने हमें अपनी शादी के बारे में कभी नहीं बताया. वह कैसे और कब एक पाकिस्तानी के संपर्क में आई. हमें कोई जानकारी नहीं है. लेकिन हो सकता है कि वह फेसबुक के जरिए उससे मिली हो.' ननकाना साहब में गायब होने वाली किरण बाला पंजाब की पहली श्रद्धालु नहीं है. इससे पहले अप्रैल 2015 में सुनील सिंह अपनी पत्नी और बच्चों से दो बच्चों सहित ननकाना साहिब में अचानक गायब हो गया था. वह फरीदकोट का रहने वाला था और आज तक वापस नहीं लौटा. सूत्रों के मुताबिक वह पाकिस्तान का जासूस था. इस वक्त वहीं पर है. बताते चलें कि कि पाकिस्तान की आईएसआई न केवल खूबसूरत महिलाओं के जरिए बल्कि खूबसूरत मर्दों के जरिए भी अपना जाल फैला रही है. किरण बाला आईएसआई की इसी नई स्ट्रेटेजी का शिकार हो गई लगती है. पिछले साल अक्टूबर 12 अक्टूबर 2017 को जालंधर पुलिस ने 57 साल के एहसानुल हक नामक के पाकिस्तान जासूस को गिरफ्तार किया था. उसने बाकायदा जालंधर में एक सिख महिला से शादी कर के वहां पर एक जमीन भी खरीद लिया था. पंजाब पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने हाल ही मोगा में पाकिस्तान के एक जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. बीते रविवार को रोहतक पुलिस ने भी गौरव शर्मा नाम के एक व्यक्ति को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक आईएसआई सोशल मीडिया के जरिए बेरोजगार युवाओं को बरगला रही है. उन्हें पैसों का लालच देकर उनसे जासूसी करवा रही है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस किरण बाला के फेसबुक अकाउंट और मोबाइल फोन की डिटेल्स को खंगाल रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि वह कब से आईएसआई के लिए काम कर रही थी.

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