taaja khabar....अपग्रेड होगा PM मोदी का विमान, लगेगा मिसाइल से बचने का सिस्टम.....पाकिस्तान में चुनाव नजदीक, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फायरिंग 400% बढ़ी....भारत, पाकिस्‍तान और चीन ने बढ़ाया परमाणु हथियारों का जखीरा....अगले चीफ जस्टिस कौन? कानून मंत्री बोले, सरकार की नीयत पर संदेह न करें....बातचीत को तैयार आप सरकार और आईएएस अफसर, अब उप राज्यपाल के पाले में गेंद....लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास बने होटेल में भीषण आग, 5 लोगों की मौत, कई गंभीर....बिहार: रोहतास में डीजे में बजाया- हम पाकिस्तानी, 8 गिरफ्तार....प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को जन्मदिन पर दी बधाई.....भीमा कोरेगांव हिंसा: हथियार के लिए नेपाली माओवादियों के संपर्क में थे नक्सली....केजरीवाल के धरने का नौंवा दिन, क्या अफसरों-LG से बनेगी बात?....
नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर राजनीतिक हालात उफान पर हैं. भारतीय जनता पार्टी ने महबूबा मुफ्ती सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, इसी के साथ राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया. कश्मीर में पीडीपी का साथ भारतीय जनता पार्टी के लिए लगातार गले की फांस बनता जा रहा था. कश्मीर के हालातों को लेकर लगातार बीजेपी निशाने पर आ रही थी, ऐसे में बीजेपी के सामने इसके अलावा कोई चारा नहीं बचता था. जानिए आखिर ऐसी वो क्या मजबूरियां थी जिसकी वजह से बीजेपी को पीडीपी से अपना नाता तोड़ना पड़ा. # सरकार बनने के बाद से ही पीडीपी ने अलगाववादियों और पत्थरबाजों की तरफ नरम रुख अपनाया, जिसने कई बार बीजेपी को बैकफुट पर धकेला. # रमजान में पीडीपी के कारण ही सीजफायर लागू किया गया, लेकिन सीजफायर में हालात बद से बदतर हुए. महबूबा मुफ्ती सीजफायर को आगे बढ़ाना चाहती थीं लेकिन बीजेपी के लिए ये बिल्कुल संभव नहीं लग रहा था. # महबूबा ने अपना अधिकतर फोकस घाटी पर ही रखा, ऐसे में जम्मू-लद्दाख के साथ लगातार भेदभाव हो रहा था. महबूबा अपना किला तो मजबूत कर रही थीं, लेकिन बीजेपी लगातार अपने इलाके में पिछड़ती जा रही थी. # महबूबा मुफ्ती ने बीते तीन साल में सैकड़ों पत्थरबाजों को माफ किया, उन्होंने कई पत्थरबाजों से एफआईआर वापस भी ली. इससे उलट सेना के जवानों पर कई बार एफआईआर हुई जिससे देश में बीजेपी के लिए गलत मैसेज गया. # कठुआ कांड के बाद जब सरकार पर सवाल उठे तो बीजेपी कोटे के मंत्रियों को सरकार छोड़कर जाना पड़ा. # महबूबा चाहती थीं कि कश्मीर में शांति के लिए पाकिस्तान और अलगाववादियों से बातचीत हो. लेकिन बीजेपी ऐसा संदेश नहीं देना चाहती थी कि वह अलगाववादियों के आगे झुक रही है. # 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर ये संदेश देना चाहती है कि वह अभी भी आतंकवादियों के खिलाफ सख्त है. इसके लिए पीडीपी का साथ छोड़ना जरूरी था. आपको बता दें कि मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर बीजेपी नेताओं के साथ बैठक की थी, जिसके बाद बीजेपी ने अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया था. किसने क्या कहा? मंगलवार को बीजेपी नेता राममाधव ने पीडीपी से समर्थन वापस लेने का ऐलान करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति काफी बिगड़ी है, जिसके कारण हमें ये फैसला लेना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, अमित शाह, राज्य नेतृत्व सभी से बात की है. सरकार गिरने के बाद बीजेपी ने जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाए जाने की मांग की थी. 'हमारा एजेंडा पूरा हुआ' मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में डर की नीति नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां अलग-अलग विचारधारा को मानती हैं, लेकिन फिर भी सत्ता के लिए नहीं बल्कि बड़े विजन को साथ लेकर हमने BJP के साथ गठबंधन किया था. महबूबा ने कहा कि सरकार के जरिये वह कश्मीर में अपना एजेंडा लागू करवाने में सफल रही हैं. महबूबा का कहना है कि कश्मीर के लोगों से बातचीत होनी चाहिए, पाकिस्तान से बातचीत होनी चाहिए, ये उनकी हमेशा से कोशिश रही है.
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में रमजान सीजफायर खत्म करने और गठबंधन राजनीति की बाध्यता खत्म होने के बाद राज्यपाल शासन लागू होने से सुरक्षा बलों के पास आतंकियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की पूरी छूट होगी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस पर भी स्थानीय नेताओं के दबाव में अलगाववादियों के प्रति नरम रवैया अपनाने का दबाव होता है, ऐसे में स्थानीय पुलिस भी स्वतंत्रता के साथ काम कर सकती है। साथ ही सुरक्षा बल और पुलिस इंटेलिजेंस इनपुट्स साझा कर बेहतर ढंग से काम करेंगे। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया को केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारी ने दी है। CASO, SADO फिर से लागू सेना को उम्मीद है कि स्थानीय नेताओं का दबाव खत्म होने से स्थानीय पुलिस ज्यादा सक्रियता के साथ आतंक विरोधी गतिविधि में सेना का साथ दे सकती है। सेना ने अपने अति सक्रिया CASO (कार्डन ऐंड सर्च) और SADO (सीक ऐंड डेस्ट्रॉय) ऑपरेशन को जम्मू कश्मीर में फिर से लागू कर दिया है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि अब इंटेलिजेंस इनपुट्स बेहतर तरीके से साझा हो सकेंगे। इसके अलावा घनी आबादी वाली जगहों पर सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। अक्रामक ऑफिसर आएंगे आगे एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'कुछ राजनेताओं की तरफ से पत्थरबाजों, अलगाववादियों और कट्टरपंथियों को समर्थन मिलता है। कोई राजनीतिक दबाव न होने से सुरक्षा बल ज्यादा अक्रामकता से काम करेंगे।' माना जा रहा है कि अति संवेदनशील वाली जगहों पर 'समर्थ' ब्यूरोक्रेट्स और सुप्रींटेंडेंट्स ऑफ पुलिस की तैनाती की जाएगी, ताकि वे बगैर दबाव में आए आतंक विरोधी गतिविधियों का नेतृत्व कर सकें। अधिकारी ने बताया, 'फिलहाल कई ऐसे काबिल ऑफिसर हैं, जो साइड लाइन कर दिए गए हैं। आतंकी बुराहन वानी की मौत के बाद घाटी में स्थिति और खराब हो गई थी। ऐसे में अब उन ऑफिसरों को आगे लाकर आतंकियों को काउंटर करने की रणनीति पर काम हो सकता है।' अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा होगी केंद्र बिंदु केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारी ने बताया, 'इस तरह के इनपुट्स हैं कि आतंकी अमरनाथ यात्रियों को निशाना बना सकते हैं। आशंका है कि आतंकी आईईडी अटैक कर सकते हैं। यदि ऐसा कुछ होता है तो बीजेपी को सरकार में की वजह से काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है। राज्यपाल शासन में केंद्र सरकार मजबूत सुरक्षा प्रबंध कर सकती है, साथ ही गठबंधन की राजनीति भी इसके आड़े नहीं आएगी।' लंबे समय से कश्मीर में रहने वाले गवर्नर एनएन वोहरा का कार्यकाल अगले महीने के अंत में खत्म हो रहा है, इसके बावजूद वे अपने पद पर बने रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि गवर्नर श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड के चेयरमैन भी हैं, उनसे यात्रा खत्म होने तक पद पर बने रहने के लिए कहा गया है। पत्थरबाजों पर और सख्ती सेना के इन ऑपरेशंस के अलावा दक्षिण कश्मीर में पत्थरबाजों पर बड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। अगर अतीत पर गौर करें तो यह देखने को मिलता है कि 2016 की हिंसा के दौरान कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी सरकार के दौरान 9 हजार से अधिक पत्थरबाजों पर केस दर्ज हुए थे। गिरफ्तारी के कुछ महीनों बाद महबूबा सरकार ने सैकड़ों पत्थरबाजों पर से मुकदमे वापस ले लिए थे। सरकार का कहना था कि युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं, जबकि विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि महबूबा ने श्रीनगर और अनंतनाग सीटों पर होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर लोगों के समर्थन के लिए ऐसा किया था। इस फैसले के बाद बीजेपी सरकार को कई मोर्चों पर विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अब यदि राज्यपाल शासन की स्थितियां बनती हैं तो फिलहाल 2019 के चुनाव तक पत्थरबाजों पर कार्रवाई पर कोई सियासी दखलंदाजी नहीं होगी। इसके साथ-साथ ऐसे फैसले की स्थिति में देशभर में बीजेपी को इससे फायदा भी मिल सकेगा।
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में रमजान सीजफायर खत्म करने और गठबंधन राजनीति की बाध्यता खत्म होने के बाद राज्यपाल शासन लागू होने से सुरक्षा बलों के पास आतंकियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की पूरी छूट होगी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस पर भी स्थानीय नेताओं के दबाव में अलगाववादियों के प्रति नरम रवैया अपनाने का दबाव होता है, ऐसे में स्थानीय पुलिस भी स्वतंत्रता के साथ काम कर सकती है। साथ ही सुरक्षा बल और पुलिस इंटेलिजेंस इनपुट्स साझा कर बेहतर ढंग से काम करेंगे। यह जानकारीटाइम्स ऑफ इंडिया को केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारी ने दी है। CASO, SADO फिर से लागू सेना को उम्मीद है कि स्थानीय नेताओं का दबाव खत्म होने से स्थानीय पुलिस ज्यादा सक्रियता के साथ आतंक विरोधी गतिविधि में सेना का साथ दे सकती है। सेना ने अपने अति सक्रिया CASO (कार्डन ऐंड सर्च) और SADO (सीक ऐंड डेस्ट्रॉय) ऑपरेशन को जम्मू कश्मीर में फिर से लागू कर दिया है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि अब इंटेलिजेंस इनपुट्स बेहतर तरीके से साझा हो सकेंगे। इसके अलावा घनी आबादी वाली जगहों पर सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। अक्रामक ऑफिसर आएंगे आगे एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'कुछ राजनेताओं की तरफ से पत्थरबाजों, अलगाववादियों और कट्टरपंथियों को समर्थन मिलता है। कोई राजनीतिक दबाव न होने से सुरक्षा बल ज्यादा अक्रामकता से काम करेंगे।' माना जा रहा है कि अति संवेदनशील वाली जगहों पर 'समर्थ' ब्यूरोक्रेट्स और सुप्रींटेंडेंट्स ऑफ पुलिस की तैनाती की जाएगी, ताकि वे बगैर दबाव में आए आतंक विरोधी गतिविधियों का नेतृत्व कर सकें। अधिकारी ने बताया, 'फिलहाल कई ऐसे काबिल ऑफिसर हैं, जो साइड लाइन कर दिए गए हैं। आतंकी बुराहन वानी की मौत के बाद घाटी में स्थिति और खराब हो गई थी। ऐसे में अब उन ऑफिसरों को आगे लाकर आतंकियों को काउंटर करने की रणनीति पर काम हो सकता है।' अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा होगी केंद्र बिंदु केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। केंद्र सरकार के सीनियर अधिकारी ने बताया, 'इस तरह के इनपुट्स हैं कि आतंकी अमरनाथ यात्रियों को निशाना बना सकते हैं। आशंका है कि आतंकी आईईडी अटैक कर सकते हैं। यदि ऐसा कुछ होता है तो बीजेपी को सरकार में की वजह से काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है। राज्यपाल शासन में केंद्र सरकार मजबूत सुरक्षा प्रबंध कर सकती है, साथ ही गठबंधन की राजनीति भी इसके आड़े नहीं आएगी।' लंबे समय से कश्मीर में रहने वाले गवर्नर एनएन वोहरा का कार्यकाल अगले महीने के अंत में खत्म हो रहा है, इसके बावजूद वे अपने पद पर बने रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि गवर्नर श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड के चेयरमैन भी हैं, उनसे यात्रा खत्म होने तक पद पर बने रहने के लिए कहा गया है। पत्थरबाजों पर और सख्ती सेना के इन ऑपरेशंस के अलावा दक्षिण कश्मीर में पत्थरबाजों पर बड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। अगर अतीत पर गौर करें तो यह देखने को मिलता है कि 2016 की हिंसा के दौरान कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी सरकार के दौरान 9 हजार से अधिक पत्थरबाजों पर केस दर्ज हुए थे। गिरफ्तारी के कुछ महीनों बाद महबूबा सरकार ने सैकड़ों पत्थरबाजों पर से मुकदमे वापस ले लिए थे। सरकार का कहना था कि युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं, जबकि विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि महबूबा ने श्रीनगर और अनंतनाग सीटों पर होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर लोगों के समर्थन के लिए ऐसा किया था। इस फैसले के बाद बीजेपी सरकार को कई मोर्चों पर विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अब यदि राज्यपाल शासन की स्थितियां बनती हैं तो फिलहाल 2019 के चुनाव तक पत्थरबाजों पर कार्रवाई पर कोई सियासी दखलंदाजी नहीं होगी। इसके साथ-साथ ऐसे फैसले की स्थिति में देशभर में बीजेपी को इससे फायदा भी मिल सकेगा।
नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में पीडीपी (पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी) और बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) की गठबंधन सरकार गिरने के 24 घंटे के अंदर राज्यपाल शासन लग गया है। केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुहर लगाते हुए राज्य में राज्यपाल शासन की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में अगले छह महीने की अवधि के लिए राज्यपाल शासन लागू हो गया है। इस बीच राज्यपाल एनएन वोहरा का कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी देने के बजाए उन्हीं को अगला कार्यकाल मिल सकता है। इससे पहले मंगलवार दोपहर सवा दो बजे के करीब दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान करते हुए महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। बीजेपी महासचिव राम माधव ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और जम्मू-कश्मीर बीजेपी के नेताओं के साथ बैठक के बाद यह घोषणा की। राम माधव ने कहा कि महबूबा मुफ्ती राज्य के हालात संभालने में नाकाम रहीं और देशहित में बीजेपी ने सरकार से अलग होने का फैसला लिया है। बीजेपी ने तोड़ी दोस्ती, महबूबा का इस्तीफा राम माधव, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जम्मू बीजेपी के दूसरे नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समर्थन वापसी के फैसले का ठीकरा महबूबा मुफ्ती पर फोड़ा। बीजेपी नेताओं ने महबूबा पर आतंकवाद रोक पाने में असफल होने का आरोप लगाया। बीजेपी ने कहा कि उनकी तरफ से राज्य के तीनों क्षेत्र के विकास के लिए कोशिश की गई। जम्मू, लद्दाख और कश्मीर क्षेत्र के समान विकास के लिए केंद्र ने पूरा सहयोग दिया पर राज्य सरकार द्वारा जम्मू क्षेत्र के साथ भेदभाव किया गया। बीजेपी के समर्थन वापसी के ऐलान के ठीक बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपना इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पीडीपी किसी के साथ गठबंधन सरकार नहीं बनाना चाहती। श्रीनगर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुफ्ती साहब ने बड़े विजन के लिए बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने कहा, 'मैं बीजेपी के इस फैसले से अचंभित नहीं हूं। हमने पावर के लिए गठबंधन नहीं किया था। इस गठबंधन के कई बड़े मकसद थे। सीजफायर, पीएम का पाकिस्तान दौरा, 11 हजार युवाओं के खिलाफ केस वापस हुए।' इस दौरान मुफ्ती ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें बताया है कि हम किसी गठबंधन की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं। महबूबा ने साथ ही यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर सख्त नीति नहीं कामयाब हो सकती। उन्होंने इस दौरान कहा, 'एक बात तो साफ है कि जम्मू-कश्मीर में सख्ती की नीति नहीं चल सकती है। यह समझना होगा कि जम्मू-कश्मीर दुश्मनों का क्षेत्र नहीं है। हमने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को साथ रखने की कोशिश की।'
श्रीनगर, जम्मू कश्मीर के पुलवामा के त्राल में सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया. त्राल के हयाना में हुए इस एनकाउंटर में एक जवान और एक स्थानीय नागरिक घायल भी हो गया. सुरक्षाबलों ने आतंकियों के छुपे होने की खुफिया जानकारी के बाद ऑपरेशन शुरू किया था. मुठभेड़ में 42 राष्ट्रीय राइफल का एक जवान गोली लगने से जख्मी हो गया जिसे बेस अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. वहीं जावेद अहमद नाम का एक स्थानीय युवक भी गोलीबारी की चपेट में आ गया. सूत्रों के मुताबिक आतंकी आकिब हीनास के घर में छुपे हुए थे. आकिब को कुछ साल पहले ही एनकाउंटर में मार दिया गया था. सुरक्षाबलों का ऑपरेशन अब खत्म हो चुका है लेकिन इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. राज्य के डीजीपी ने सुरक्षाबलों को 2 आंतकियों के मारे जाने की पुष्टि की और सुरक्षाबलों को ट्वीट कर बधाई भी दी. उन्होंने बताया कि 2 आतंकी मारे गए हैं और तीसरे को घेर लिया गया है. इलाके में अन्य आतंकियों के छुपे होने की आशंका है. रमजान के दौरान लागू सीजफायर को बीते सप्ताह खत्म कर दिया गया था. इसके बाद से घाटी में सुरक्षाबल फिर से सक्रिय हो गए हैं. आतंकियों के खिलाफ चलाए गए 'ऑपरेशन ऑलआउट' से बड़े पैमाने पर आतंकियों का सफाया हुआ है, बावजूद इसके घाटी में सीजफायर और पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार जारी हैं. ईद के दिन में घाटी में जमकर पत्थरबाजी हुई और इसी दिन पाकिस्तान की ओर से की गई फायरिंग में एक जवान शहीद भी हो गया था.
मुंबई, फेमिना मिस इंडिया 2018 कॉन्टेस्ट का परिणाम आ गया और इसकी विजेता बनी हैं अनुकृति वास. तमिलनाडु की रहने वाली अनुकृति ने 29 प्रतियोगियों को हराकर यह क्राउन अपने नाम किया है. मुंबई में हुए इस कॉन्टेस्ट में हरियाणा की रहने वाली मीनाक्षी चौधरी फर्स्ट रनर-अप रही हैं तो सेंकड रनर- अप रहीं आंध्र प्रदेश की रहने वाली श्रेया राव. वहीं टाप 5 में पहुंचने वाली कंटेस्टेंट में दिल्ली की रहने वाली गायत्री भारद्वाज और झारखंड की रहने वाली स्टेफी पटेल शामिल थीं. इस इवेंट के जज पैनल में बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा, अभिनेता बॉबी देओल, कुनाल कपूर, क्रिकेटर इरफान पठान और के.एल राहुल शामिल थे. इनके अलावा साल 2017 में मिस वर्ल्ड रहीं मानुषी छिल्लर भी यहां मौजूद थीं. मानुषी ने ही अनुकृति को ताज पहनाया.इस इवेंट को करन जौहर और आयुष्मान खुराना ने होस्ट किया. बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, करीना कपूर खान और जैकलीन फर्नांडीस ने अपनी धमाकेदार डांस परफॉर्मेंस से समां बांध दिया. अनुकृति वास अब मिस वर्ल्ड 2018 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी.
नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी की ओर से जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन वाली सरकार से अप्रत्याशित रूप से हटने का फैसले का ऐलान किए जाने के साथ ही देश की राजनीति अचानक गरमा गई है. अगले लोकसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम का समय रह गया है और माना जा रहा है कि आधुनिक राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह अभी से चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. हालिया उपचुनाव के परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिहाज से अच्छे नहीं रहे और उसे कई जगहों पर हार का सामना करना पड़ा है. नई रणनीति बनाने को मजबूर ऐसे में अगले आम चुनाव की वैतरणी पार करने के लिए शाह एंड टीम को नए सिरे से रणनीति बनाने को मजबूर होना पड़ा है. अब तक एनडीए में बीजेपी बेहद मजबूत स्थिति में थी, लेकिन कई उपचुनावों में हार के बाद गठबंधन में घटक दल बीजेपी के साथ मुखर होने लगे हैं. जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में बढ़ी आतंकी घटनाओं और खराब हालात को देखते हुए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने सरकार से हटने का अप्रत्याशित फैसला लेकर सारा दोष स्थानीय पार्टी पीडीपी पर मढ़ भी दिया. गठबंधन तोड़ने का ऐलान करते हुए बीजेपी नेता राम माधव ने पीडीपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमने गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर के तीन साल के कामकाज, सभी एजेंसियों से राय लेकर यह फैसला किया है. बीजेपी अपना समर्थन वापस ले रही है. उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर सरकार बनी थी, उन सभी बातों पर चर्चा हुई. पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति काफी बिगड़ी है, जिसके कारण हमें यह फैसला लेना पड़ रहा है. इस संबंध में प्रधानमंत्री, अमित शाह, राज्य नेतृत्व सभी से बात की है. अगला नंबर बिहार का? अब कहा जा रहा है कि मोदी-शाह की जोड़ी जम्मू-कश्मीर वाला फैसला बिहार में भी ले सकती है. बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पिछले साल जुलाई में एनडीए में शामिल हुई थी. हालांकि जब से जेडीयू ने एनडीए में वापसी की है, बीजेपी के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा. 20 नवंबर, 2015 से 26 जुलाई, 2017 तक नीतीश कुमार बिहार में महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे, लेकिन भ्रष्टाचार और घोटाले के नाम पर नीतीश महागठबंधन से बाहर हो गए और इसके एक दिन बाद उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में फिर से नई सरकार बना ली. लेकिन शायद नीतीश के साथ बीजेपी का जाना फायदेमंद साबित नहीं हुआ और पिछले महीने बिहार में हुए उपचुनाव में इस गठबंधन को करारी हार मिली. जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव में हार जेडीयू के लिए बड़ा झटका था क्योंकि यह सीट नीतीश के लिए बेहद खास थी और पिछले 2 दशक से उनकी पार्टी का इस सीट पर कब्जा था, लेकिन इस बार उन्हें हार मिली. इससे पहले भी उपचुनाव में उन्हें हार मिली थी. उपचुनाव में हार के अलावा हाल में राज्य में घटी रेप (गया, जहानाबाद, नालंदा, मुजफ्फरपुर) की कई घटनाओं और सांप्रदायिक हिंसा (भागलपुर, औरंगाबाद, समस्तीपुर) के कारण नीतीश सरकार को काफी शर्मसार होना पड़ा, बीजेपी यहां पर नंबर दो की हैसियत में है और वह चुपचाप देखने को मजबूर है. सीटों को लेकर हो सकती है तनातनी दूसरी ओर, 2019 लोकसभा चुनाव में माना जा रहा है कि एनडीए के घटक दलों और बीजेपी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर तनातनी दिख सकती है. बिहार पर नजर डालें तो एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान अभी से शुरू हो गई है. बीजेपी के प्रदेश महासचिव राजेंद्र सिंह ने दावा किया था कि पार्टी उन सभी 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी जिन पर पिछले लोकसभा चुनावों में उसे जीत हासिल हुई थी. जवाब में जेडीयू की ओर से बीजेपी को चुनौती दी गई कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वसनीय और स्वीकार्य चेहरे के बगैर ही वह सभी 40 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़कर दिखाए. 2014 में एनडीए को मिली जीत बिहार में राजनीतिक हालात ऐसे हैं कि नीतीश एक ओर बीजेपी के साथ गठबंधन कर खुश नहीं बताए जा रहे हैं तो बीजेपी भी उनके साथ राज्य में नंबर टू की हैसियत से नहीं रहना चाहती. लंबी चुप्पी के बाद नीतीश अब केंद्र में बीजेपी सरकार की नीतियों पर खुलकर अपनी राय रखने लगे हैं. साथ ही सोमवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से कोई समझौता नहीं करेंगे. वहीं बीजेपी को भी लग रहा है कि जेडीयू के साथ रहने पर उसे राज्य में खासा नुकसान हो सकता है. जेडीयू को 2014 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 2 सीटें ही मिली थीं, जबकि 40 लोकसभा सीटों वाले राज्य में एनडीए को 31 सीटें मिली थी, जिसमें बीजेपी ने अकेले 22 सीट अपने नाम कर ली थी.
नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मंगलवार को कहा कि 45 लाख से कम की लगात वाले घरों पर 35 लाख तक के होम लोन को प्रायॉरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) माना जाएगा, जिससे कि कम लागत वाले निर्माण को बल मिले। RBI ने अपने नए नोटिफिकेशन में कहा, 'कम लागत के घरों के निर्माण को बल देने, कम आय वाले लोगों के घर का सपना पूरा करने और PSL के नियमों को आसान करने के लिए यह कदम उठाया गया है। महानगरों में यह सीमा 35 लाख होगी जबकि अन्य जगहों पर 25 लाख होगी।' इसमें शर्त यह है कि 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में निर्माण लागत 45 लाख और अन्य जगहों पर 30 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वर्तमान में यह लोन बड़े शहरों में 28 लाख और अन्य क्षेत्रों में 20 लाख तक के आवेदन पर दिया जाता है। RBI के नोटिफिकेशन में आगे कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को हाउसिंग प्रॉजेक्ट का लाभ देने के लिए वार्षिक आय की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर तीन लाख की जाएगी। साथ ही लो इनकम ग्रुप्स (LIG)के लिए आय की सीमा 3 लाख सालाना से बढ़ाकर 6 लाख की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए बनाए गए नियमों में भी इसे शामिल किया जाएगा।
पुलवामा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल में एक एनकाउंटर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। इससे पहले सुरक्षाबलों को मिली सूचना के आधार पर कई घंटों तक इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। दोनों आतंकियों के ढेर होने के बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी है। इस एनकाउंटर में एक सीआरपीएफ जवान को भी चोट लगी है। जानकारी के मुताबिक, एनकाउंटर में घायल हुए सीआरपीएफ के जवान को तुरंत वहां से निकालकर 92 बेस हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। गौरतलब है कि मंगलवार को बीजेपी ने राज्य की पीडीपी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके अलावा सेना ने बीते दिनों संबूरा गांव में एक सर्च ऑपरेशन चलाया था। सूत्रों के मुताबिक, सेना के सर्च ऑपरेशन के दौरान कुछ पत्थरबाज जवानों पर पथराव कर इसमें खलल डालने का प्रयास करने लगे। इस दौरान आतंकियों को भागने का मौका ना देने के लिए सेना ने कुछ पत्थरबाजों को पकड़कर एक वाहन के सामने बैठा दिया था।
श्रीनगर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मंगलवार को श्रीनगर में पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुफ्ती साहब ने बड़े विजन के लिए बीजेपी के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने कहा, 'मैं बीजेपी के इस फैसले से अचंभित नहीं हूं। हमने पावर के लिए गठबंधन नहीं किया था। इस गठबंधन के कई बड़े मकसद थे। सीजफायर, पीएम का पाकिस्तान दौरा, 11 हजार युवाओं के खिलाफ केस वापस हुए।' इस दौरान मुफ्ती ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें बताया है कि हम किसी गठबंधन की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं। मुफ्ती ने कहा कि दोनों पार्टियों को एकसाथ काम करने के लिए माहौल बनाने में काफी समय लगा। इस गठबंधन को बड़े मकसद के साथ किया गया था। पीएम को देश भर में भारी समर्थन मिला था, ऐसे में यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए भी फायदेमंद हो सकता था। उन्होंने कहा, 'एक बात तो साफ है कि जम्मू-कश्मीर में सख्ती की नीति नहीं चल सकती है। यह समझना होगा कि जम्मू-कश्मीर दुश्मनों का क्षेत्र नहीं है। हमने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को साथ रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'मुफ्ती साहब ने जिस मकसद के साथ गठबंधन किया था, वह पूरा हुआ। हमारी सरकारी ने सीजफायर रुकवाया, पीएम का पाकिस्तान जाना, धारा 370 के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देना, पत्थरबाजी के आरोप वाले 11 हजार युवाओं के केस वापस कराए गए। हमने सत्ता के लिए सरकार नहीं बनाई थी। हमने अपना अजेंडा को पूरा किया है।' उन्होंने कहा कि बीजेपी के आने से जम्मू इलाके में रहने वाले मुसलमान असहज हुए हैं। बता दें कि राजधानी दिल्ली में बीजेपी की कोर कमिटी की बैठक में पीडीपी सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया। बीजेपी चीफ अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के सभी बीजेपी नेताओं की राय जानी और फिर पार्टी ने सरकार से अलग होने का फैसला किया। बीजेपी महासचिव राम माधव, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जम्मू बीजेपी के दूसरे नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समर्थन वापसी के फैसले का ठीकरा महबूबा मुफ्ती पर फोड़ा। बीजेपी नेताओं ने महबूबा पर आतंकवाद रोक पाने में असफल होने का आरोप लगाया। बीजेपी ने राज्य के तीनों क्षेत्र के विकास के लिए कोशिश की। जम्मू, लद्दाख और कश्मीर क्षेत्र के समान विकास के लिए केंद्र ने पूरा सहयोग दिया पर राज्य सरकार द्वारा जम्मू क्षेत्र के साथ भेदभाव किया गया।

Top News

http://www.hitwebcounter.com/