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जयपुर, राजस्थान के स्कूलों में अब वैलेंटाईन-डे को माता-पिता दिवस के रूप में नहीं मनाया जाएगा. राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने यह ऐलान किया कि पिछली वसुंधरा सरकार के इस फैसले को वापस ले लिया गया है. राज्य में वैलेंटाइन-डे के दिन स्कूल में किसी भी तरह का कोई दिन नहीं मनाया जाएगा और पहले की तरह सामान्य दिवस के रूप में पढ़ाई होगी. विधानसभा के बाहर बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री डोटासरा ने कहा कि भारत में माता-पिता के लिए कोई दिन निर्धारित नहीं है. हर दिन माता-पिता के लिए सम्मान का दिन है. ऐसे में वैलेंटाइन डे जैसे दिन को माता-पिता के दिन के रूप में मनाना उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाना होगा. वसुंधरा सरकार के मंत्री ने जारी किया था आदेश गौरतलब है कि राजस्थान की बीजेपी सरकार के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने यह आदेश निकाल कर सभी सरकारी स्कूलों को भिजवाया था कि वैलेंटाइन डे के दिन माता-पिता को स्कूल में बुलाकर उनसे बच्चे आशीर्वाद लेंगे और एक समारोह के रूप में वैलेंटाइन डे के दिन मातृ पितृ दिवस मनाया जाएगा. पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा, कांग्रेस की वैलेंटाइन डे संस्कृति राजस्थान के कांग्रेस सरकार के शिक्षा मंत्री के वसुंधरा सरकार के फैसले को पलटने को लेकर बीजेपी सरकार में शिक्षा मंत्री रहे वासुदेव देवनानी ने कहा कि कांग्रेस की संस्कृति वैलेंटाइन डे मनाने की संस्कृति है. उन्होंने मातृ पितृ दिवस को बंद किया है, वरना हमने तो बच्चों में अच्छे संस्कार के लिए स्कूलों में मातृ पितृ दिवस मनाने की पहल की थी.
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन चौथे दिन भी जारी है। गुर्जर समुदाय के लोग रेल पटरियों पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं। सवाई माधोपुर के मलारना रेलवे स्टेशन के पास मकसूदनपुरा गांव से शुरू हुआ गुर्जर आंदोलन राजस्थान के कई जिलों में फैल चुका है। अब ये आंदोलन हिंसक भी होता जा रहा है जिसके चलते धारा 144 लगा दी गई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला लगातार बयान दे रहे हैं। अपनी बात पर अड़े बैंसला गुर्जर नेता विजय बैंसला ने सोमवार को एक बार फिर दोहराया कि सरकार को वार्ता के लिए मलारना डूंगर में रेल पटरी पर ही आना होगा और आंदोलनकारी वार्ता के लिए कहीं नहीं जाएंगे। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला व पूरी टीम बैठकर फैसला करेंगे। बैंसला ने कहा कि बातचीत क्या करनी है? सरकार पांच प्रतिशत आरक्षण की हमारी मांग पूरी करे और हम घर चले जाएंगे। यह मेरा व्यक्तिगत अनुरोध है, राजस्थान के लोगों को भड़काने के लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए, लोग मेरे निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। इसे पहले जितना शांतिपूर्ण तरीके से हल करें उतना बेहतर होगा। कई ट्रेनें रद्द राजस्थान में गुर्जर नेता मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर पटरियों पर बैठे हैं जिसके चलते कई प्रमुख ट्रेन रद्द कर दी गयी हैं या उनके मार्ग में बदलाव किया गया है। राज्य में कई सड़क मार्ग भी बंद हैं। चार ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है, एक को आज गुर्जर आरक्षण आंदोलन के कारण रद्द कर दिया गया है। 12 फरवरी की भी एक ट्रेन को रद्द किया गया है। वहीं पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एम एल लाठर ने बताया कि आंदोलन के दौरान कहीं से अप्रिय घटना का कोई समाचार नहीं है। रविवार को कुछ हुड़दंगियों ने धौलपुर में पुलिस के तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया था और हवा में गोलियां चलाईं थीं। लाठर ने बताया कि आंदोलनकारियों ने दौसा जिले में सिकंदरा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 को अवरूद्ध कर दिया है। इसके साथ ही नैनवा (बूंदी), बुंडला (करौली) व मलारना में भी सड़क मार्ग अवरूद्ध है। 5 फीसदी आरक्षण की मांग उल्लेखनीय है कि गुर्जर नेता राज्य में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार शाम को सवाईमाधोपुर के मलारना डूंगर में रेल पटरी पर बैठ गए। गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला व उनके समर्थक यहीं जमे हैं। आंदोलनकारियों और सरकारी प्रतिमंडल में शनिवार को हुई बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद रविवार को दोनों पक्षों में कोई बातचीत नहीं हुई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कहा कि सरकार के स्तर पर वार्ता के द्वार खुले हैं और आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए। गुर्जर समाज सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए गुर्जर, रायका रेबारी, गडिया, लुहार, बंजारा और गड़रिया समाज के लोगों को पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है। वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के अतिरिक्त 50 प्रतिशत की कानूनी सीमा में गुर्जरों को अति पिछड़ा श्रेणी के तहत एक प्रतिशत आरक्षण अलग से मिल रहा है।
जयपुर गुर्जर नेता किरौड़ी सिंह बैंसला अपने समर्थकों के साथ शुक्रवार से राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में ट्रेन की पटरियों पर बैठे हैं। एक बार फिर गुर्जर समुदाय आरक्षण की मांग लेकर प्रदर्शन करने के लिए उतरा है। उन्होंने शनिवार को कहा कि गुर्जर समुदाय की मांग को पूरा करना प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) और मुख्यमंत्री (अशोक गहलोत) के लिए बड़ा काम नहीं होना चाहिए। बैंसला ने इस बार के आंदोलन को आर-पार की लड़ाई बताया है। वहीं, ट्रैक पर जारी प्रदर्शन के कारण कई रेल यातायात पर काफी असर पड़ा है। अब तक 14 ट्रेनें कैंसल की जा चुकी हैं और 20 रेलगाड़ियों के मार्ग बदले गए हैं। बैंसला ने कहा, 'हमारे पास अच्छे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हैं। हम चाहते हैं कि वे गुर्जर समुदाय की मांगें सुनें। उनके लिए आरक्षण देना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है।' उन्होंने शुक्रवार को कहा था, 'राज्य सरकार (अशोक गहलोत सरकार) को अपने वादे पर खरा उतरना चाहिए। हालात बदल गए हैं, इस बार हम चूकेंगे नहीं।’ रेल यातायात प्रभावित, हेल्पलाइन नंबर जारी प्रदर्शन के कारण अब तक 14 से ज्यादा ट्रेनें कैंसल कर दी गई हैं और करीब 20 रेलगाड़ियों के मार्ग बदले गए हैं। कुछ ट्रेनों को गंतव्य स्टेशन से पहले ही रोक दिया गया है। इस बारे में जानकारी उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अभय शर्मा ने दी। कोटा डीआरएम ने ट्वीट कर हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी है। राजस्थान के कोटा मंडल में गुर्जर आंदोलन के कारण आंशिक रद्द गाड़ियों और गाड़ियों के रूट मे बदलाव की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर- 0744-2467153 और 0744-2467149 पर संपर्क किया जा सकता है। पुलिसबल तैनात बैंसला का कहना है कि चीजें जल्दी बदल रही हैं। वह खुद नहीं आए हैं बल्कि लोग उन्हें रेलवे ट्रैक तक लेकर आए हैं। विरोध शांतिपूर्वक किया जाएगा। कानून-व्यवस्था बनी रहे इसके लिए भरतपुर पुलिस रेंज में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है जिसके तहत सवाईमाधोपुर आता है। भरतपुर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल भूपेंद्र साहू ने बताया, 'राजस्थान आर्मी कॉन्स्टेबलरी' (RAC) की 17 कंपनियों, जिसमें एक स्पेशल टास्क फोर्स भी शामिल है, उन्हें रेंज में तैनात कर दिया गया है। बात करने को तैयार सरकार वहीं, गहलोत सरकार का कहना है कि वह बात करने के लिए तैयार है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा, पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह, सामाजिक न्याय मंत्री मस्टर भंवर लाल और सीनियर सरकारी अधिकारियों की एक समिति प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए बनाई गई है। बता दें कि बुधवार को उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा था, 'पांच प्रतिशत के गुर्जर आरक्षण में जो कानूनी अड़चनें आई हैं। केंद्र को उनका समाधान निकालने के लिए काम करना चाहिए।' उन्होंने दावा किया था कि राज्य सरकार और पार्टी गुर्जर आरक्षण के मुद्दे पर प्रतिबद्ध है और न्याय दिलाकर मानेगी। क्या है मांग? गौरतलब है कि राज्य में गुर्जरों के आंदोलन का मुद्दा 14 साल से चल रहा है और शुक्रवार से एक बार फिर प्रदर्शन ने तेजी पकड़ी है। गुर्जर समाज सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए गुर्जर, रायका-रेबारी, गडिया लुहार, बंजारा और गड़रिया समाज के लोगों को पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है। वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के अतिरिक्त 50 प्रतिशत की कानूनी सीमा में गुर्जर को अति पिछड़ा श्रेणी के तहत एक प्रतिशत अलग से आरक्षण मिल रहा है। बैसंला ने मंगलवार को कहा था कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस बारे में वादा किया था और अब वे कांग्रेस सरकार से सरकारी दस्तावेज बन चुके घोषणा पत्र के वादे को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
जयपुर, 01 फरवरी 2019,लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है. जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ उद्घाटन के कार्यक्रम में अशोक गहलोत ने कहा कि घोषणापत्र में बेरोजगारों से किया हुआ वादा कांग्रेस पूरा करेगी और राज्य के सभी बेरोजगारों को 2 साल तक 3500 रुपए बेरोजगारी भत्ते के रूप में दिया जाएगा. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर सभी बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है तो इसके लिए इतना पैसा कहां से आएगा . 2011 के जनगणना के अनुसार राजस्थान में 6.85 करोड़ की आबादी है जिसमें से 33 लाख लोग बेरोजगार हैं. इनमें से 55 परसेंट 25 साल के कम के आयु के हैं. ऐसे में अगर जनगणना के आधार पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है तो हर महीने राज्य सरकार को करीब 150 करोड़ रुपए की जरूरत होगी. हालांकि कहा जा रहा है कि फिलहाल राजस्थान सरकार उन बेरोजगारों को ही बेरोजगारी भत्ता देगी जिन्होंने रोजगार दफ्तर में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. राजस्थान के रोजगार विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो फिलहाल राज्य में 10.64 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं. अगर इनको बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है तो राजस्थान सरकार को हर महीने 372 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी. फिलहाल रोजगार विभाग के पास बेरोजगारी भत्ता बांटने के लिए केवल 25 करोड़ रुपए का बजट है. ऐसे में सरकार हर महीने 372 करोड़ रुपए कहां से लेकर आएगी. यह बड़ा सवाल बना हुआ है. रोजगार विभाग के आंकड़ों पर ध्यान दें तो 2016 तक राज्य में 5 लाख 66 हजार 644 बेरोजगार थे. साल 2017 में इनकी संख्या में 4 लाख 88 हजार 530 का इजाफा हो गया और उसके बाद इनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. अब इनकी संख्या 10 लाख 64 हजार 744 हो गई है. इसकी एक बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि राजनीतिक पार्टियों ने बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान किया था. बीजेपी ने तो कांग्रेस से पहले ही सभी बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद लोगों ने रोजगार दफ्तर में रजिस्ट्रेशन करा लिए. 1064 744 बेरोजगारों को हर महीने 3 अरब 72 करोड़ 66 लाख 4 हजार की जरूरत पड़ेगी. इतने ज्यादा पैसे का इंतजाम करना आसान नहीं है. राज्य में फिलहाल 600 रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है जिसमें से भत्ता स्नातक बेरोजगारों को 2 साल तक दिया जाता है. पिछले सालों में केवल 89 हजार 978 बेरोजगारों ने ही इसका लाभ उठाया था. राजस्थान सरकार के पिछले बजट पर ध्यान दें तो 2016 -17 में 28.75 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था जिसमें से 18. 6 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए. 2017-18 में 24.6 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था लेकिन 24.9 करोड़ रुपए खर्च हुए. 2018-19 में 25 करोड़ रुपए का बजट मांगा था जिसका हिसाब अभी तक नहीं आ पाया है. कहा जाता है कि बेरोजगारी को कम करने के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद जरूरी है लेकिन अगर राजस्थान सरकार के आंकड़ों को देखें तो 2014 से 17 तक 189.81 करोड़ खर्च करके 3 लाख 56 हजार लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन केवल 1 लाख 74 हजार 200 लोगों को ही प्रशिक्षण मिला. इनमें भी 93 हजार 533 लोगों के रोजगार का लक्ष्य रखा गया था लेकिन 5 महीने पहले पेश हुई कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राजस्थान सरकार ने 62 हजार 544 हजार लोगों को रोजगार देना बताया है मगर जमीनी हकीकत यह है कि 26000 लोग ही रोजगार पाए सामने आए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि कि राजस्थान सरकार अगर बेरोजगारी भत्ता देना शुरू करती है तो इस तरह के प्रावधान रखे जा सकते हैं जिसमें 18 से 35 साल के परिवार के एक सदस्य को 2 साल तक 3500 रुपए दिए जाएं. लेकिन ऐसे परिवार की आय ढाई लाख रुपए सलाना से कम हो. नेहरू युवा केंद्र या एनएसएस में स्वैच्छिक सेवा करे. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन शुल्क माफ हो, यात्रा शुल्क माफ हो और इनके बदले बेरोजगारी भत्ता के पैसों का समायोजन हो.
जयपुर , 01 फरवरी 2019,जयपुर के सांगानेर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार दोपहर दयोदय एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतर गए. बताया जा रहा है कि ट्रेन जबलपुर से अजमेर जा रही थी तभी यह हादसा हुआ. कुछ लोगों के घायल होने की खबर भी है. जिन्हें महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती किया गया है. मौके पर रेलवे के अधिकारी पहुंच गए हैं. बचाव कार्य तेजी से चल रहा है. गौरतलब है कि यह हादसा सांगानेर स्टेशन के पास शिवदासपुरा में हुआ. गनीमत रही कि ट्रेन की गति ज्यादा नहीं थी वरना और भी डिब्बे पटरी से उतर जाते और कई लोगों की जान जा सकती थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रेन सांगानेर स्टेशन से कुछ दूर ही चली थी कि इंजन सहित डिब्बे पटरी से उतर गए. मौके पर मौजूद लोगों ने घायल पैसेंजर्स को अस्पताल रवाना किया. सभी यात्री सुरक्षित है. अब तक इस घटना की वजह का पता नहीं लग सका है. मौके पर रेलवे के आला अधिकारी मौजूद हैं. जांच की जा रही है. मौके पर चारों तरफ से पुलिस ने घेराबंदी कर दी है. क्योंकि डीजल इंजन से डीजल लगातार बाहर निकल रहा था. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी बुला ली गई है. मौके पर पहुंची उत्तर पश्चिम रेलवे के डीआरएम सौम्या गुप्ता ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रेलवे ट्रैक पर कुछ आ जाने की वजह से इस तरह के हादसे हुए हैं लेकिन पूरा मामला जांच के बाद ही सामने आ पाएगा. रेलवे ने जांच के आदेश दे दिए हैं. बता दें कि दयोदय एक्सप्रेस मध्य प्रदेश के जबलपुर से अजमेर के बीच चलती है.यह हर रोज की तरह सांगानेर रेलवे स्टेशन से निकली थी. तभी हादसा हो गया. हादसे के कारण का अब तक पता नहीं लग सका है.
नई दिल्ली, 13 जनवरी 2019,भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजेंद्र राठौड़ उपनेता होंगे. बीजेपी विधायक दल की रविवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया. बैठक में कटारिया को बीजेपी विधायक दल के नेता के रूप में चुनने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रस्ताव पेश किया जिसका पार्टी विधायकों ने समर्थन किया और कटारिया को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना. वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी होंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि बीजेपी मुख्यालय में आयोजित विधायक दल की बैठक में गुलाबचंद कटारिया ने राजेंद्र राठौड़ को दल का उपनेता चुना. मंगलवार से शुरू होने वाले नवगठित 15वीं विधानसभा के सत्र के लिए, आठ बार विधायक रहे और पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार में गृहमंत्री रहे गुलाब चंद कटारिया को प्रोटेम स्पीकर भी बनाया गया है. उन्हें सोमवार को राज्यपाल कल्याण सिंह द्वारा प्रोटेम स्पीकर की शपथ दिलाई जाएगी. 74 वर्षीय गुलाबचंद कटारिया 1977 में पहली बार विधायक चुने गए थे. उसके बाद 1980 में और 1993 के बाद लगातार विधानसभा के सदस्य बने हुए है. शनिवार को प्रोटेम स्पीकर चुने गए कटारिया चुनाव के बाद 15वीं विधानसभा की मंगलवार को पहली बैठक का संचालन करेंगे. विधायक दल की बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह सहित केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री और राजस्थान के प्रभारी प्रकाश जावडे़कर, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधाशूं त्रिवेदी और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी भी मौजूद थे.
अलवर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के बेटे और बीएसपी नेता जगत सिंह अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं। जगत सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी, राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर यह विवादित बयान दिया है। रामगढ़ विधानसभा सीट से बीएसपी के प्रत्याशी सिंह ने कहा कि वह पत्थर का जवाब एके-47 से देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी, गहलोत और राजे का नाम लेते हुए कहा कि आ जाओ सबको पेटी पैक करके भेजूंगा। जगत सिंह के विवादित बयान का विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। बता दें कि रामगढ़ विधानसभा सीट पर पूर्व में बीएसपी उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह की मौत के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया था। यहां 28 जनवरी को मतदान और 31 जनवरी को मतगणना की तारीख निर्धारित है। जगत सिंह ने 9 जनवरी को यहां बीएसपी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया। बताया जा रहा है कि यह विडियो नामांकन के बाद का ही है। वायरल विडियो में सिंह कहते हुए दिखते हैं, 'मैं पीछे नहीं हटूंगा। गोली चलेगी तो पहली गोली मेरे सीने में लगेगी। पत्थर का जवाब एके-47 के साथ करता हूं मैं। तो आ जाओ अशोक जी, आ जाओ मोदी जी, आ जाओ वसुंधरा जी...सबको पेटी पैक करके भेजूंगा।' 'सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं' इस विडियो सामने आने के बाद सियासी हलकों में इस पर घमासान मचना तय है। हालांकि अभी किसी पार्टी की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। उधर, सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
10 जनवरी 2019,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के किसानों के लिये कई बडी घोषणाएं बुधवार को की. इन घोषणाओं में अगले पांच साल तक बिजली की दरें नहीं बढ़ाना और अगले छह माह में बिजली के एक लाख कृषि कनेक्शन देना शामिल है. गहलोत ने यहां किसान रैली को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार लघु एवं सीमांत किसानों को पेंशन देने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि लघु व सीमांत किसानों को खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने के लिए दस हेक्टेयर तक की अपनी जमीन का परिवर्तन कराने जरूरत नहीं होगी. किसान भूमि रूपांतरण के बगैर अपनी इकाई लगा पायेगा. एक लाख कनेक्शन बकाया पड़े हैं. किसानों की मांग देखते हुए आगामी जून महीने तक एक लाख कृषि कनेक्शन दिये जायेंगे और इसकी तैयारी कर हो चुकी है. गहलोत ने कहा कि किसानों के बिजली के पांच साल तक कोई दाम नहीं बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों का भुगतान बकाया है और केन्द्र सरकार धनराशि जारी नहीं कर रही है. इसके बारे में हमने तय किया है कि जब तक पैसा नहीं आता है. राज्य सरकार राजफैड को एक हजार करोड रूपये देकर किसानों का बकाया अविलम्ब चुकाया जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा इसी प्रकार आने वाले वक्त में चने और सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीददारी की जायेगी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सपना है कि फूड प्रोसेंसिग के माध्यम से किसान के उत्पाद का मूल्य वर्धन हो, उसके उत्पाद का निर्यात हो, इसके लिये हमने पहल की है और तय करेंगे कि लघु और सीमांत किसानों के लिये अलग से योजना बने. उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत किसान गांवों में रहते है. उनकी समस्या अलग तरह की होती है. उनकी तरफ ध्यान देना हमारा कर्तव्य बनता है. सरकार गांवों पर ज्यादा फोकस कर रही है इसलिये किसानों का कर्जा माफ किया है. किसानों को फोकस करके कैसे हम आगे बढे यह देश और प्रदेश की जरूरत है. लोकसभा चुनाव के बारे में उन्होंने कहा कि हमने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी हैं. हम राजस्थान में सभी 25 लोकसभा सीटे कैसे जीते और भाजपा को कैसे सबक सिखाये यह हमारा संकल्प होना चाहिए.
नई दिल्ली,राजस्थान में कांग्रेस के एक विधायक के विवादित बोल पर विवाद हो गया है. विधायक रामलाल मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे के खिलाफ टिप्पणी की है, जिसका वीडियो वायरल हो गया है. इस वीडियो में कांग्रेस कह रहे हैं कि सीएम वसुंधरा राजे अपने कार्यकाल में विकास कार्य नहीं कर पाईं, क्योंकि वह किसी और काम में व्यस्त रहीं. प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से पहली बार कांग्रेस विधायक बने रामलाल मीणा ने रविवार को वीरावली में जनसमस्या की सुनवाई के दौरान कथित रूप से कहा था कि वसुंधरा राजे शराब की बोतले खोलने में व्यस्त रही जबकि विकास कार्य बाधित रहा. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में मीणा ने कहा, 'मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा किए जा रहे कार्यों के लिए तालियां बजाई जानी चाहिएं. उन्होंने (गहलोत ने) सत्ता संभालते ही सही दिशा में काम करना शुरू कर दिया. वसुंधरा राजे शराब की बोतल खोलने में व्यस्त रहीं और काम नहीं किया.' कांग्रेस विधायक की इस टिप्पणी को अमर्यादित माना जा रहा है और राज्य की सियासत में उनके इस बयान पर बवाल मच गया है. अभी कांग्रेस सरकार को बने एक महीना भी नहीं हुआ है, ऐसे में सत्ताधारी दल के विधायक की ऐसी बयानबाजी विवाद का हिस्सा बन गई है. बता दें कि दिसंबर 2018 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में प्रतापगढ विधानसभा सीट पर रामलाल मीणा ने भाजपा के हेमंत मीणा को 16680 मतों से हराकर जीत दर्ज की थी.
जयपुर, 08 जनवरी 2019, निवेश में रुचि नहीं दिखाने पर राजस्थान सरकार रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट के 200 से ज्यादा एमओयू निरस्त करने वाली है. इनमें अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस समूह ओर गौतम अडानी का अडानी ग्रुप जैसी कंपनियों के एमओयू भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि वसुंधरा राजे सरकार ने नवंबर 2015 में इनवेस्टर समिट का आयोजन किया था. इसके तहत तत्कालीन सरकार ने 3.37 लाख करोड़ रुपये के 470 एमओयू किए थे. उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा के अनुसार, इन्वेस्टर मीट के बाद तीन साल में केवल 124 एमओयू ही ऐसे रहे जिन पर काम हुआ. इससे राजस्थान को 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश मिला. लेकिन बड़ी कंपनियों ने काम शुरू तक नहीं किया. इस कारण उन्हें नोटिस दिए जाएंगे. नोटिस के बावजूद यदि काम नहीं शुरू हुआ तो एमओयू रद्द होंगे. गौरतलब है कि जिन कंपनियों ने एमओयू साइन किए थे उन्हें सरकार जमीन और टैक्स आदि में रियायत देने वाली थी. इनमें पर्यटन, खनन और मेडिकल जैसे क्षेत्र शामिल थे. ढाई लाख करोड़ रु. से ज्यादा के करीब 240 एमओयू फेल.... बता दें कि रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट में 240 एमओयू ऐसे थे जिनमें ढाई लाख करोड़ रु. से ज्यादा का निवेश होने वाला था. इसमें पर्यटन, खनन और मेडिकल जैसे क्षेत्र शामिल थे. लेकिन किसी भी कंपनी ने राजस्थान में रूचि नहीं दिखाई. जानिए आखिर किस क्षेत्र में कितना हुआ था निवेश... रिसर्जेंट राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट में टूरिज्म में 10,442 करोड़ के 221 एमओयू हुए थे. जबकि मेडिकल में करीब 2700 करोड़ रु. के 14 एमओयू हुए. लेकिन इनमें कोई भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ. वहीं, माइंस में 76 हजार करोड़ के 25 एमओयू हुए और इसमें निवेश केवल 1500 करोड़ रुपये का आया

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