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जयपुर देश में विभिन्न धार्मिक नेताओं के खिलाफ लग रहे आरोपों और बयान से परेशान एक 40 वर्षीय महंत ने कथित तौर पर अपना लिंग काट लिया। इस घटना के बाद महंत को इलाज के लिए तत्काल स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां हालत गंभीर होने पर उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया। उधर, इस घटना के बाद पुलिस ने अब केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। जयपुर के अस्पताल में भर्ती महंत की हालत स्थिर बताई जा रही है। मंधान थाने के प्रभारी राम किशन ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि सेवावाली सेवागिरि धाम के महंत अनिल पुरोहित कथित तौर पर विभिन्न धार्मिक नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों और बयानों से कथित तौर पर परेशान थे। पुलिस ने दर्ज किया बयान पुलिस के मुताबिक इन्हीं आरोपों से आहत होने के कारण उन्होंने अपने कमरे में शुक्रवार देर रात अपना लिंग काट दिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद महंत के अनुयायी उन्हें एक स्थानीय अस्पताल ले गये जहां से उन्हें इलाज के लिये जयपुर रेफर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि महंत का जयपुर में उपचार चल रहा है और उनका बयान दर्ज किया गया है।
नई दिल्ली, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत राजस्थान के सभी बड़े नेताओं के साथ बुधवार को मीटिंग की. जानकारी के मुताबिक, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियां को लेकर राजस्थान बीजेपी के कोर ग्रूप की बैठक बुलाई थी. राजस्थान कोर ग्रूप की बैठक में अमित शाह के अलावा केंद्रीय नेतृत्व से भूपेन्द्र यादव, बीजेपी महासचिव संगठन रामलाल, सहसंगठन महासचिव वी सतीश थे. बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, बीजेपी प्रभारी अविनाश राय खन्ना, बीजेपी उपाध्यक्ष ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, सीआर चौधरी, बीजेपी संगठन महामंत्री रामलाल और प्रदेश संगठन मंत्री चंद्रशेखर मौजूद थे. सूत्रों के मुताबिक कल की बैठक में आगामी विधानसभा की तैयारियों पर चर्चा की गई. इसमें तय किया गया कि अगले महीने एक यात्रा निकाली जाएगी. इसमें केंद्र और राज्य सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं के बारे जनता को बताया जाएगा. इसके साथ जनता को कनेक्ट करने के डोर टू डोर कैम्पेन भी जल्दी ही शुरू किया जाएगा. बैठक में सांसदों और विधायकों की परफॉर्मेंस पर भी चर्चा हुई. ये भी तय किया गया कि सभी सांसदों और विधायकों के कामों का फीडबैक तैयार किया जाएगा. बैठक में इस बात को लेकर भी चर्चा हुई कि एक कमेटी बनाई जाए जो ये देखे कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के राजस्थान से सम्बंधित कितने प्रोजेक्ट और परियोजनाएं रुकी हुई हैं. उन्हें कैसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए. सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में ये भी तय हुआ कि एक हफ्ते में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर चर्चा कर एक नाम पर सहमति बनाई जाएगी. नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह राजस्थान के दौरे पर जाएंगे.
नई दिल्ली,राजस्थान में पिछले 2 महीने से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही खींचतान के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत राजस्थान के सभी बड़े नेताओं को मिलने के लिए बुलाया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में कल यानी मंगलवार को राजस्थान बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक होगी. ये बैठक कल शाम 3 बजे दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में होगी. बैठक में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, बीजेपी प्रभारी अविनाश राय खन्ना, उपाध्यक्ष ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सीआर चौधरी, बीजेपी संगठन महामंत्री रामलाल और प्रदेश संगठन मंत्री चंद्रशेखर शामिल होंगे. सूत्रों के मुताबिक बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक सहमति बनने पर प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा बैठक से पहले ही हो सकती है, लेकिन अगर सहमति नहीं बनी तो बैठक में प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनाई जाएगी और घोषणा भी की जाएगी. बता दें कि 16 अप्रैल को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के इस्तीफा के बाद से राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष पद की कुर्सी खाली है. केंद्रीय नेताओं की तरफ से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम तय हुआ था लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोध के बाद उनके नाम की घोषणा अटकी हुई है. तब से लेकर अभी तक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पर पद पर कोई नेता नहीं है, जबकि इस साल नवंबर में चुनाव होने हैं. अमित शाह से मिलने जाने से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी कोर टीम के साथ सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर मीटिंग कर रणनीति तय की है. उसी के अनुसार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बातचीत की जाएगी. हालांकि इस बैठक के बारे में कोई भी पार्टी नेता खुलकर नहीं बोल रहा है.
जयपुर, चुनावी साल में राजस्थान सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए एक के बाद एक नए फैसले ले रही है. राज्य की बीजेपी सरकार ने फैसला लिया है कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब साधु-महात्मा भी अपना प्रवचन दे सकेंगे. राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने कैलेंडर जारी किया है जिसमें शनिवार के अंतिम पीरियड में किसी भी क्षेत्र से आने वाले लोगों को बुलाकर स्कूल में बच्चों को महापुरुषों की जीवनियां या प्रेरणादायक कहानियां सुनाने को कहा जाएगा. इसी दौरान कैलेंडर में यह भी तय किया गया है इस कार्यक्रम में स्कूल कमेटी साधु-महात्मा को बुलाकर भी उनका प्रवचन करा सकती है. राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी वैसे तो हमेशा से विवादों में रहे हैं, लेकिन अब बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए उन्होंने नया तरीका अपनाया है. राजस्थान के सभी सरकारी स्कूलों में एक जुलाई से शनिवार को अंतिम पीरियड 'संस्कार पीरियड' होगा, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट पहचान रहने वाले लोग क्लास में आकर महापुरुषों के और जीवन के प्रेरणादायक कहानियां सुनाएंगे. इसी दौरान बच्चों के दादा-दादी और नाना-नानी को भी बुलाने का प्रावधान है जो क्लास में आकर दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियां सुनाएंगे. इनके अलावा स्कूल कमेटी को यह भी छूट दी गई है कि वह साधु-संतों को बुलाकर भी बच्चों को संस्कारित करने का प्रवचन सुनवा सकती है. शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी बताया कि हमने एक स्कूल कमेटी बनाई है जो हर स्कूल के लिए अलग-अलग होगी वो तय करेगी कि किसको बुलाना है. कलेक्टर भी आकर किसी महापुरुष की जीवनी सुना सकते हैं और बच्चों के दादा-दादी, नाना-नानी भी आ सकते हैं. कमेटी साधु-संतों को भी स्कूल में बच्चों को संस्कारित करने के लिए बुला सकती है. विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा मंत्री शुरू से ही भगवा एजेंडे पर काम करते रहे हैं ऐसे में इस तरह के संस्कार पीरियड की आड़ में वह शिक्षा के भगवाकरण करने की कोशिश कर रहे हैं. साधु-संतों को स्कूल से दूर रखना चाहिए क्योंकि सरकारी स्कूलों में सभी धर्म और संप्रदाय के बच्चे बिना भेदभाव के पढ़ते हैं. कांग्रेस की प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने कहा कि अच्छे कामों में भी इनकी भावना गलत होती है इसलिए हमें इनकी मंशा पर संदेह होती है. खास बात यह है कि साल के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले वसुंधरा सरकार ऐसे कई लोकलुभावने फैसले ले रही है. राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कभी सिलेबस से अकबर और नेहरू को हटाने के लेकर तो कभी माता-पिता दिवस के रूप में वैलेंटाइन डे को मनाने को लेकर शिक्षा मंत्री विवादों में रहे हैं. साइकिल के रंग से लेकर ड्रेस तक को भगवा करने के लिए राज्य के शिक्षा मंत्री विवादों में बने रहे.
बीकानेर। हाल ही में अमिताभ बच्चन के साथ स्वच्छ भारत अभियान के विज्ञापन में काम करके सुर्खियों में आए बीकानेर के रंगकर्मी नवल किशोर व्यास का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अभिनन्दन किया। सोमवार को स्वास्थ्य भवन सभागार में सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने उन्हें साफा पहनाकर अभिनन्दन पत्र भेंट किया। डॉ. चैधरी ने व्यास के बीकानेर आईईसी समन्वयक रहने के समय के अनुभव साझा किए और उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की। इस अवसर पर जयपुर से आए कार्यक्रम अधिकारी उत्पल दूबे, आरसीएचओ डॉ. रमेश गुप्ता, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर, लेखाधिकारी विजयशंकर गहलोत, डीपीएम सुशील कुमार, महेंद्र सिंह चारण, दाऊलाल ओझा व मालकोश आचार्य ने भी अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की। इस अवसर पर प्रोजेक्टर के माध्यम से नवल व्यास द्वारा अभिनीत विज्ञापनों को प्रदर्शित किया गया। व्यास ने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय के संस्मरण व चिकित्सा विभाग में अपने कार्यकाल के किस्से साझा किए। गौरतलब है कि नवल व्यास चिकित्सा विभाग में 2009 से 2016 तक जिला आईईसी समन्वयक तथा 2016 से 2018 तक एनएचएम में राज्य आईईसी सलाहकार के पद पर कार्यरत रहे हैं। व्यास ने हाल ही में 2 विज्ञापन व 2 फीचर फिल्मो में काम किया हैं।
जयपुर. पंचायतीराज और निकाय चुनावों में दिव्यांगों को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार में फाइल चल गई है। इस संबंध में सरकार जल्द ही कोई निर्णय ले सकती है। राज्यपाल कल्याण सिंह को पिछले दिनों एक प्रजेंटेशन मिला था। जिसे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास परीक्षण के लिए भेजा गया। सीएम के निर्देश पर सीएस ने इस दिशा में निर्देश दिए हैं। दिव्यांग होने का क्राइटेरिया 7 से बढ़ाकर 21 किया गया - उधर इसी मामले में निशक्तजन आयोग भी सीएस को पत्र लिखकर कह चुका है कि दिव्यांगों को पंचायतीराज और निकाय चुनावों में आरक्षण देने पर विचार करें। विकलांग अधिकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत भाई गोयल के प्रजेंटेशन पर ही राज्य सरकार में ये फाइल चली है। - उनका कहना है कि दिव्यांगों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण मांगा गया है। हमारी मांग है कि सरकारी नौकरियों की तर्ज पर ही 50 प्रतिशत के अंदर दिव्यांगाें को पांच प्रतिशत तक आरक्षण मिले। दरअसल दिव्यांग होने का क्राइटेरिया 7 से बढ़ाकर 21 किया गया है। प्रदेश में 16 लाख दिव्यांग हैं। ऐसे में प्रत्येक दिव्यांग सहित परिवार में अगर चार लोग भी जुड़े हुए हैं तो इन सबकी संख्या 60 लाख से ज्यादा होती है।
अजमेर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की वर्ष 2018 की सैकंडरी परीक्षा के परिणाम का इंतजार खत्म होने वाला है. बोर्ड सोमवार को परीक्षा का परिणाम घोषित करेगा. इसके साथ ही बोर्ड प्रवेशिका और माध्यमिक व्यवसायिक परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जाएगा. इस परिणाम का विद्यार्थियों को बेसब्री से इंतजार है. बोर्ड की ओर से जारी सूचना के अनुसार शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी सोमवार को दोपहर 3.15 बजे अजमेर स्थित बोर्ड कार्यालय में परीक्षा परिणाम घोषित करेंगे. इस बार इस परीक्षा में कुल 10 लाख 82 हजार 972 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए हैं. इस परिणाम के साथ ही बोर्ड प्रवेशिका और माध्यमिक व्यवसायिक परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जाएगा. प्रवेशिका परीक्षा में 7042 और व्यवसायिक परीक्षा के लिए 31 हजार 592 विद्यार्थी पंजीकृत हुए हैं. परीक्षा परिणाम बोर्ड की वेबसाइट www.rajeduboard.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध रहेगा. उल्लेखनीय है कि बोर्ड ने हाल ही में आठवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम भी घोषित कर दिया था. उससे पहले 12वीं कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय समेत वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया चुका है. बोर्ड ने गत वर्ष से इन परीक्षाओं की मैरिट सूची जारी करना बंद कर किया दिया था. अब मैरिट सूची पुर्नमूल्यांकन के बाद जारी की जाती है
बीकानेर। चिकित्सा विभाग ने शनिवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष एएनसी जांच शिविर लगाए गए। तेज गर्मी और उमस के बावजूद चिकित्सक और नर्सिंगकर्मी डटे रहे और आशा सहयोगिनियों ने घर-घर से गर्भवतियों को बुलाने में सक्रिय भूमिका अदा की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चैधरी ने बताया कि जिले भर में पीएचसी, सीएचसी, यूपीएचसी, शहरी डिस्पेंसरी व जिला अस्पताल को मिलाकर कुल 81 संस्थानों पर पीएमएसएमए के तहत 2,115 प्रसवपूर्व जांचे हुई। गर्भवतियों को खून की जांच, हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, शुगर, पेशाब की जांच, सोनोग्राफी, वजन की जांच, ऊंचाई, पेट की जांच इत्यादि जांचों सहित आवश्यक औषधियांे की निशुल्क सेवाएं उपलब्ध करायी गई। मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी लाने विशेषकर एनीमिया की जांच कर एनेमिक महिलाओं को आवश्यकतानुसार आयरन की गोलियां, आयरन सुक्रोज इंजेक्शन व ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सलाह दी गई। पीएमओ डॉ. बी.एल. हटीला ने बताया कि जिला अस्पताल में डॉ. विजयलक्ष्मी व्यास द्वारा 61 गर्भवतियों की एएनसी की गई 35 गर्भवतियों की सोनोग्राफी, 27 की एचआईवी और वीडीआरएल जांचें हुई। निजी गायनेकोलोजिस्ट ने दी निःशुल्क सेवाएं डीपीएम सुशील कुमार ने बताया कि बीकानेर जिले के निजी गायनेकोलोजिस्ट भी पीएमएसएमए अभियान के तहत स्वेच्छा से निःशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। शनिवार को डॉ. मधु आर्य ने सीएचसी नापासर में, डॉ. दीप्ति वहल ने सीएचसी गजनेर में, डॉ. रूपम कालरा ने रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र डिस्पेंसरी न 7 में, डॉ. नीता कपूर ने यूपीएचसी न. 1 (अणचाबाई डिस्पेंसरी) में, डॉ वीणा श्रीवास्तव ने यूपीएचसी सर्वोदय बस्ती में, डॉ. जुगल किशोर छाबड़ा यूपीएचसी न. 6, नत्थूसर गेट में, डाॅ. इति माथुर ने यूपीएचसी नं. 2 भुजिया बाजार में व डॉ. सूरत चलाना ने यूपीएचसी तिलकनगर में गर्भवतियों की निःशुल्क एएनसी जांचें कर आवश्यक सलाह दी।
जयपुर बीजेपी के लिए राजस्थान में इस बार टिकटों का बंटवारा बहुत आसान नहीं रहने वाला है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और आलाकमान के बीच अध्यक्ष पद को लेकर मची खींचतान से हालात बिगड़े हुए हैं। राजस्थान में पिछले डेढ़ माह से कोई अध्यक्ष नहीं है, जबकि वहां पर पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस खींचतान का सीधा असर टिकट बंटवारे पर पड़ेगा। राजे बांटेंगी टिकट? यह लगभग तय हो चुका है कि वसुंधरा राजे ही सीएम पद की उम्मीदवार रहेंगी। महासचिव भूपेंद्र यादव पिछली बार की तरह ही अहम भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही केंद्र में रखकर पार्टी अपना अभियान चलाएगी। लेकिन दो सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब नहीं मिल रहे हैं। एक तो यह कि राज्य अध्यक्ष कौन होगा? दूसरा मुख्यमंत्री राजे के पास टिकट बांटने का कितना अधिकार होगा या नहीं? बीच का रास्ता क्या है? राज्य में वसुंधरा राजे अपने हिसाब से सक्रिय हो गई हैं। पार्टी की बैठकों में वह इस्तीफा दे चुके अशोक परनामी को ही अध्यक्ष के रूप में पेश कर रही हैं। कुछ विधायकों को उन्होंने टिकट काटे जाने के संकेत भी दे दिए हैं। अब अगर गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान का अध्यक्ष बनाया जाता है तो टकराव बढ़ना तय है। शेखावत के अध्यक्ष न बनने पर आलाकमान को लेकर सवाल उठेंगे। हालांकि इस बीच राजस्थान बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओम माथुर राज्य के कुछ नेताओं के साथ बैठक कर बीच का रास्ता तलाशने में जुटे हुए हैं। लेकिन राह आसान नहीं लग रही। स्थिति यह है कि सीएम और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच भी कर्नाटक चुनाव से पहले ही एक दौर की बैठक हुई थी। उसके बाद अभी तक बैठक टल रही है। मोदी-शाह की सीधी दखल से राजे असहज आलाकमान की रणनीति है कि टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री की भूमिका को सीमित कर दिया जाए। पिछली बार इसमें वसुंधरा राजे की ही चली थी क्योंकि उस समय उनके मामले में कोई बोलने वाला नहीं था लेकिन अब हालात बदले हुए हैं। अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी टिकट बंटवारे से लेकर हर मामले में सीधी दखल रखते है। ऐसे में राजे का असहज होना स्वाभाविक है।
उपचुनावों में मिली करारी हार के बाद बीजेपी को फिर से सत्ता में लाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने कंधों पर ले ली है. सीएम राजे पिछले चार महीनों में 20 से अधिक जिलों के 50 विधानसभा क्षेत्रों में ताबड़तोड़ दौरे कर चुकी है. फिर चाहे बात जनसंवाद के जरिए आम लोगों और कार्यकर्ताओं से सीधे रू-ब-रू होने की हो या फिर प्रदेश अध्यक्ष की अब तक नियुक्ति नहीं होने पर पार्टी की कमान संभालने की. सीएम राजे 2018 के विधानसभा चुनावों को जीतने के मकसद से आगे बढ़ रही हैं. पांच महीनों बाद राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चुनावों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों कड़ी मेहनत में जुटी हुई हैं. बीजेपी सत्ता वापसी को बैचेन है तो कांग्रेस उपचुनावों में मिली जीत से उत्साहित. लेकिन इस साल एक फरवरी को तीन सीटों पर उपचुनावों के आए परिणामों के बाद सीएम राजे ने बीजेपी को सत्ता में फिर से लाने का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया. पिछले चार महीनों में सीएम राजे ने झुंझुनूं, श्रीगंगानगर, सीकर, पाली, चित्तौडगढ़, झालावाड़, कोटा, बांसवाड़ा और सवाईमाधोपुर जिले की तीन से लेकर चार विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद किया है. इन नौ जिलों की अलग अलग 32 विधानसभा क्षेत्रों में राजे ने प्रबुद्धजनों से सीधा संवाद कायम करने की कोशिश की है. ज्यादातर समय आम जनता के बीच बिताया वहीं नागौर, करौली, धौलपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और बांसवाड़ा जिले में भी सीएम राजे के कार्यक्रम हुए हैं. यानि पिछले 130 दिनों में से ज्यादातर समय सीएम राजे ने राजधानी के बजाय आम जनता के बीच ज्यादा गुजारे हैं. अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति के मामले में भी सीएम राजे ने भाजपा आलाकमान को ये साफ संदेश दे दिया है कि राजस्थान में बीजेपी का मतलब सिर्फ वसुंधरा राजे है. उनकी मर्जी के बगैर पार्टी को चला पाना मुश्किल है. यही कारण है कि इतने दिनों बात भी बीजेपी अब तक प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पाई है. इसके बावजूद पार्टी के कार्यक्रमों, बैठकों और अन्य गतिविधियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा है. सीएम के और भी होने हैं दौरे आने वाले समय में सीएम राजे के प्रदेश में और दौरे होने हैं. इन दौरों में अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद के अलावा शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा. News18

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