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जयपुर/कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी में गुटबाजी पर लगाम लगाने के लिए मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को टिकट नहीं देने का फैसला लिया. पार्टी का यह फैसला दूरगामी सोच वाला माना जा रहा है. चुनावों के दौरान टिकट को लेकर आपसी खींचतान का अंदेशा होने के कारण पार्टी ने यह कठोर फैसला लिया है. अगर मुख्यमंत्री के दावेदार ज्योतिराजे सिंघियां, कमलनाथ और दूसरों को टिकट नहीं मिलता है तो यह साफ है कि इस बार के चुनाव खासा रोचक रहना वाला है. गुटबाजी में फंसी कांग्रेस ने इसकी शुरूआत भले ही मध्यप्रदेश से की है. लेकिन सूत्रों की मानें तो यह रणनीति दूसरे प्रदेशों में भी देखी जा सकती है. क्या राजस्थान में भी पार्टी अपनाएगी समान नीति बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस राजस्थान में भी मध्यप्रदेश वाला फार्मूला अपनाने जा रही है. क्या राजस्थान में भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे नेताओं के साथ साथ सी पी जोशी और भंवर जितेन्द्र सिंह जैसे बडे नेताओं को टिकट ना दे कर पार्टी को जीताने का जिम्मा ही सौंपा जाएगा. ऐसा सम्भव नहीं है कि किसी एक नेता को टिकट दे दिया जाए और बाकियों को मना कर दिया जाए. इसलिए पार्टी के नेता मान रहे है कि या तो राजस्थान में यह फार्मूला लागू नहीं होगा और अगर लागू हुआ तो तमाम बडे नेताओं के टिकट इसकी जद में आ जाएंगे. क्या है राजस्थान मे पार्टी की स्थिति राजस्थान की बात करें तो यहां की स्थिति भी पार्टी के लिए बहुत अच्छी नहीं है. हालाकिं प्रदेश में बीजेपी के लिए विरोधी लहरों के कारण कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं लेकिन गुटबाजी के चलते कांग्रेस की राह आसान नहीं है. खुद राहुल गांधी कई बार मंच से स्वीकार चुके है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच तारतम्य नहीं है. राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव के किस्से पीसीसी कार्यालय में गूंजते रहते है, और ऐसे में नेता चानवी माहौल में गुटबाजी में फंसे दिखते है कार्यकर्ताओं के लिए भ्रम की स्थिति राजस्थान में कांग्रेस के कार्यकर्ता इस दुविधा में है कि बीजेपी से तो जीत जाएंगे, लेकिन अपने ही नेताओं के बीच हो रहे घमासान से किस तरह पार पाई जाएं. हालाकि गहलोत और पायलट 'एकता' दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है. लेकिन सूत्रों की मानें तो दोनो की खींचतान के किस्से खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे है. चुनाव के मुहाने पर भी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच इस बात की चर्चा आम है कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो पायलट और गहलोत में से मुख्यमंत्री कौन होगा? हाल ही में प्रदेश में राहुल गांधी के दौरो के बीच पार्टी नेताओं के बीच की खींचतान साफ देखने को मिली. पार्टी के कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने भी संयम नहीं रख पाएं और गुटबाजी खुल कर सामने आ गई. बयाना में गहलोत के भाषण के दौरान जम कर पायलट समर्थन में नारे लगे तो बीकानेर में डूडी के समर्थकों ने भाषण के दौरान नारेबाजी खुद डूडी के आग्रह के बाद भी बंद नहीं की. इसमें कोई दोराय नहीं है कि कांग्रेस फिलहाल तक अपनी अंदुर्नी कलह का शिकार है और आने वाले चुनाव में उसका असर साफ देखने को मिल सकता है. वहीं रणनीतिकारों का मानना है कि आलाकमान के लिए अच्छा यह है कि कलह पर ध्यान दे, नेताओं को समझाने की कोशिश करें और मध्यप्रदेश की तर्ज पर इन नेताओं को चुनाव लडने से दूर रखे. पार्टी का यह फार्मूला शायद कांग्रेस की सफलता की कूंजी साबित हो
पाली: पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का दावा करती रही बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की मजबूती दिखाने की कोशिश की है. बीजेपी अब से पहले पार्टी के आम कार्यकर्ता, नेता और सरकार के मंत्रियों तक को एक समान बताती आई है, लेकिन इस बार चुनावो के लिए रायशुमारी के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हो या फिर पार्टी का कोई सामान्य पदाधिकारी या कार्यकर्ता सभी की राय को एक वोट की अहमियत दी गई है. जिससे बीजेपी ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र के पहलू को महत्वपूर्ण होने का संदेश दिया है. पार्टी विद द डिफरेंस का नारा देने वाली बीजेपी में अब तक कई बार डिफरेंसेज भी देखे गए हैं, लेकिन बीजेपी अब चुनाव से पहले सभी तरह के मतभेदों को पाटने की तरफ बढ़ चुकी है. पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन में प्रधानमंत्री भी कार्यकर्ता के रूप में है और मुख्यमंत्री भी कार्यकर्ता ही है. बीजेपी कोर कमेटी के सदस्य यूनुस खान इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि बीजेपी के दूसरी पार्टियों के मुकाबले अलग होने का एहसास इस बात से भी हो जाता है कि उनकी पार्टी में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और दूसरे वरिष्ठ नेताओं का भी रायशुमारी के दौरान एक ही वोट गिना जा रहा है. हालांकि मुख्यमंत्री प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर टिकट तय करने में अहम भूमिका निभाती दिख रही हैं लेकिन जब कोटा संभाग की रायशुमारी बैठकें होंगी तो उस दौरान झालावाड़ की झालरापाटन सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का और बारां झालावाड़ संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों पर उनके पुत्र दुष्यंत सिंह का भी एक ही वोट गिना जाएगा. दरअसल बीजेपी में चल रही रायशुमारी के दौरान पार्टी ने मंडल स्तर के मौजूदा पदाधिकारियों से लेकर पूर्व मंडल अध्यक्ष, जिले की मौजूदा टीम के साथ पूर्व जिला अध्यक्ष, मौजूदा और पूर्व विधायक और सांसद के साथ ही नगर निगम के पार्षदों तक से रायशुमारी की जा रही है. ऐसी सूरत में जब मंगलवार को कोटा संभाग की रायशुमारी के दौरान भी एक व्यक्ति एक वोट का सिद्धांत लागू होता दिखेगा तो पार्टी के आम कार्यकर्ता में भी यही मैसेज जाएगा कि बीजेपी सभी कार्यकर्ताओं को एक समान मानती है. बीजेपी नेता शंभू सिंह खेतासर कहते हैं कि पार्टी की ऐसी अवधारणा और संगठन के ऐसे नियम बीजेपी को और ज्यादा मजबूत बनाते हैं. पार्टी में शीर्ष नेतृत्व से लेकर साधारण कार्यकर्ता को बराबर बताने की इस कवायद से बीजेपी के ज्यादातर नेता खुश दिख रहे हैं और वह इसके समर्थन में भी खड़े होते दिखाई दे रहे हैं. लेकिन इसी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के मन में यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सारी कवायद असली है या सिर्फ आभासी जिससे कार्यकर्ता को यह लग सके की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी है और एकरूपता भी.
जयपुर: आज से टिकट बंटवारे के लिए शुरू हुए कांग्रेस कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक के दौरान काफी हंगामे की खबर आ रही है. बैठक में कांग्रेस संगठन महासचिव अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ सचिन पायलट , कांग्रेस राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के अलावा राजस्थान कांग्रेस के सह प्रभारी विवेक बंसल के अलावा काजी निजामुद्दीन और सीपी जोशी की मौजूदगी मे वर्त्तमान विधायकों और उनके समर्थक बैठक स्थल के बाहर जमकर नारेबाजी और विरोध भी कर रहे हैं. बैठक के दौरान हीं वर्तमान विधायकों ने टिकट कटने की आशंका पर पार्टी के शीर्ष नेताओ के सामने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिया है. समन्वय समिती के बैठक की शुरुआत के बाद टोडाभीम विधायक घनश्याम मेहर के खिलाफ नारेबाजी की खबर आ रही है.. सचिन पायलट अन्य नेताओं की मौजूदगी में घनश्याम मेहर का विरोध जारी है. आपको बता दें कि आज बीजेपी और कांग्रेस दोनो दलों की चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के लिए बैठकों का दौर चल रहा है. कांग्रेस भी आज अपने कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक कर रही है. माना जा रहा है कि यह बैठक शाम 5 बजे तक लगातार चलेगी.. इस बैठक के दौरान चुनाव के समन्वय के लिए बनाये गए 8 कमिटियों के साथ कांग्रेस के शीर्ष नेता चुनावी तैयारी के बाबत विमर्श करने जा रहे हैं.
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2018,राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद तमाम दलों में टिकट की दावेदारी और चुनावी रणनीति को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है. एक दिन पहले कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के बाद रविवार को चुनाव संचालन की समीतियों की बैठकों का दौर चलेगा. वहीं सत्ताधारी बीजेपी में भी रविवार से टिकटों को लेकर रायशुमारी का दौर शुरू हो गया है. बीजेपी ने शुरू की रायशुमारी बीजेपी में टिकट को लेकर रविवार से रायशुमारी शुरू हो रही है. यह रायशुमारी विधानसभावार होगी. जिसमें टिकट के दावेदार कोर कमेटी के सदस्यों के समक्ष अपनी राय रखेंगे. बता दें कि कोर कमेटी में जोधपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और सतीश पुनिया शामिल नहीं है. हालांकि जोधपुर संभाग की रायशुमारी में गजेंद्र सिंह शेखावत बतौर सांसद जरूर शामिल हो सकते हैं. जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर संभाग की रायशुमारी पाली जिले के राणकपुर में होगी. जबकि जयपुर, अजमेर, भरतपुर संभाग की रायशुमारी जयपुर में होना तय हुआ है. रविवार को पाली जिले के रणकपुर में जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू की 32 सीटों को लेकर रायशुमारी होगी. वहीं 15 अक्टूबर को जोधपुर संभाग की फलौदी, पाली, जालौर, जैसलमेर, बाड़मेंर, सिरोही जिले की 26 सीटों पर रायशुमारी होगी. 16 अक्टूबर को कोटा, उदयपुर, बाड़मेर, बूंदी, बारां, झालावाड़ की 25 सीटों के लिए रायशुमारी होगी. जबकि 17 अक्टूबर को राजसमंद, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ जिले की 20 सीटों के लिए रायशुमारी होगी. जबकि 20 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक यपुर, अजमेर, भरतपुर संभाग की सीटों के लिए जयपुर में रायशुमारी होगी. 23 अक्टूबर तक टिकटों को लेकर चलने वाली रायशुमारी के बाद दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के होगी. जिसमें टिकटों पर अंत मुहर लगेगी. कांग्रेस की मैराथन बैठक कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक कर कर कमेटी की अध्यक्ष कुमारी शैलजा दिल्ली लौट चुकी हैं. पिछले दिनों कांग्रेस की तरफ से विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव प्रबंधन की 9 कमेटियों की घोषणा की गई थी. जिसमें प्रदेश चुनाव समिति की पहली बैठक में टिकटों को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया. लिहाजा रविवार को 8 चुनाव समितियों की बैठक होगी. माना जा रहा है कि टिकट दावेदारों के लिए यह आखिरी मौका होगा जब वे पार्टी मुख्यालय पर अपनी दावेदारी के साथ उमड़ेंगे. चुनाव समन्वय समिति, कैंपेन कमेटी, पब्लिसिट एवं पब्लिकेशन समिति, मीडिया एवं कम्युनिकेशन कमेटी, ट्रांसपोर्ट, प्रोटोकॉल और अनुशासन समिति की मैराथन बैठकों का दौर रविवार दिन भार जारी रहेगा. कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में समन्वय समिति के अध्यक्ष अशोक गहलोत, सचिन पायलट, सीपी जोशी, सांसद रघु शर्मा, विवेक बंसल और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य शामिल होंगे. माना जा रहा है कि दशहरे के बाद कांग्रेस के टिकट की पहली सूची जारी होगी.
जयपुर, राजस्थान सरकार ने चुनाव आचार संहिता लगने से एक दिन पहले पाकिस्तान से आए हिन्दू विस्थापित परिवारों को रियायती दर पर आवासीय भूमि आवंटन करने की योजना में संशोधन करके उसमें ढिलाई दी है. नई योजना के तहत पाकिस्तान से आए हिन्दू विस्थापित परिवार अब प्रदेश में कहीं भी रियायती दर पर आवासीय जमीन खरीद सकेगा. राजस्थान के शहरी आवास एवं विकास मंत्री श्री चंद कृपलानी ने बताया कि राज्य सरकार हिन्दू पाक विस्थापित परिवारों को आवासीय भूमि आवंटन लाटरी के जरिए करेगी. इससे 200-250 विस्थापित पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों को फायदा होगा. इन परिवारों को भूमि आरक्षित दर से 25 प्रतिशत रियायती दर पर आंवटित की जाएगी. शहरी आवास एवं विकास विभाग ने इस वर्ष मई में विस्थापित पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों को भूमि आवंटन के लिये एक नीति बनाई थी, जिसमें हाल ही में 5 अक्टूबर को एक सर्कुलर के जरिए संशोधन किया गया है. नीति में बदलाव करने के लिए विभिन्न संगठनों की ओर से विभाग को दिए गए ज्ञापनों के बाद नीति में संशोधन किया गया है. शहरी आवास एवं विकास विभाग के संयुक्त सचिव राजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि इससे पूर्व नीति के अनुसार विस्थापित पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों को जिस जिले में नागरिकता दी गई थी वहीं आवासीय भूमि आवंटन का प्रावधान था. इसमें संशोधन करके अब ढिलाई दी गई है. संशोधन में राजस्थान में कम से कम दो साल से भारतीय नागरिकता के साथ रह रहे हिन्दू पाक विस्थापितों को आवासीय भूमि आवंटन के लिए योग्य माना गया है. पाकिस्तानी विस्थापितों के लिये काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था सीमांत लोक संगठन के हिन्दू सिंह सोढा ने कहा कि राजस्थान में लगभग पांच लाख हिन्दू पाक विस्थापित है और लगभग एक लाख लोग रियायती दर पर भूमि खरीदने के लिये आवेदन करेंगे.
जयपुर, 12 अक्टूबर 2018, कांग्रेस अपने नेताओं को फिजूलखर्ची रोकने का निर्देश जारी कर रही है और राजस्थान में कांग्रेस के नेता टीन-डब्बे लेकर लोगों से चंदा मांग रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेसी अपनी हर बैठक पांच सितारा होटलों में कर रहे हैं. जयपुर में पिछले तीन दिनों में तीन बैठक कांग्रेस ने फाइव स्टार होटल में की. कांग्रेस की इस कथनी और करनी की पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनता के बीच खूब चर्चा हो रही है. पांच सितारा होटलों में आने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर फाइव स्टार होटल में बैठकें होंगी, तो पैसे कैसे बचेंगे? राजस्थान कांग्रेस की उपाध्यक्ष और प्रवक्ता अर्चना शर्मा हाथ में पात्र लेकर घर-घर जा रही हैं और लोगों से डोनेशन मांगकर पैसा इकट्ठा कर रही हैं. ये अकेली कांग्रेस नेता नहीं है, जो ऐसा कर रही हैं. इन दिनों हर गली में कांग्रेस के नेता चंदा मांगते हुए दिख जाएंगे. पैसे नहीं होने का राग अलाप रही कांग्रेस एक ओर कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं होने का राग अलाप रही है. कांग्रेस का कहना है कि उसके पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं. लिहाजा जनता उसको वोट के साथ ही नोट भी दे. राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने तो ट्विटर पर लोगों से डोनेशन मांगा है. रही सही कसर कांग्रेस मुख्यालय ने पूरी कर दी. कांग्रेस हेड क्वार्टर से जारी आदेश में कहा गया कि पार्टी में खर्च कम करने पर ध्यान दिया जाए और दिल्ली से जयपुर तक का सफर भी प्लेन की बजाय ट्रेन से किया जाए. फाइव स्टार होटल में कांग्रेस की बैठकें इसके अलावा कांग्रेस की एक दूसरी तस्वीर भी है. राजस्थान में टिकट के बंटवारे को लेकर रायशुमारी करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष कुमारी सैलजा जयपुर पहुंचीं और फाइव स्टार होटल क्लार्क आमेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया. होटल के बाहर कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम भी देखने को मिला.कांग्रेस के कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ये तरीका ठीक नहीं है. दुदू विधानसभा क्षेत्र से आए बाबूलाल राणा कहते हैं कि वो कांग्रेस के घुमंतू घुमंतू प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता गरीबों की सुनते नहीं है. इसलिए ढोल बजाने वालों को साथ लेकर आए हैं, ताकि इनकी कान में आवाज आए. अगर ये फाइव स्टार होटल में मीटिंग करेंगे, तो भला आम कार्यकर्ता इनसे कैसे मिल पाएंगे. नागौर जिले के जायल ब्लॉक के अध्यक्ष त्रिलोकी राम का भी कहना है कि फाइव स्टार होटल में मीटिंग ठीक नहीं है. कांग्रेस की करनी और कथनी में फर्क हैः बीजेपी इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी ने खुद यूथ कांग्रेस के नेताओं को पांच सितारा होटल में संबोधित किया था. कांग्रेस अध्यक्ष का दूसरा कार्यक्रम भी पांच सितारा होटल राजपूताना शेरेटन में हुआ था. बीजेपी इसे कांग्रेस की करनी और कथनी में फर्क बता रही है. बीजेपी प्रवक्ता और जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी ने कहा कि कांग्रेस की करनी और कथनी में हमेशा से फर्क रहा है. चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं होने की बात कांग्रेस नेताओं का दिखावा है, जबकि इनकी आदतें हाईवे स्टार वाली हैं. कांग्रेस के नेता एक तरफ बाजारों और घरों में चंदा मांगेगें और दूसरी तरफ मीटिंग फाइव स्टार होटलों में करेंगे, तो सवाल उठेंगे ही. कांग्रेस के खुद के कार्यकर्ता भी कह रहे हैं कि अभी सरकार बनी नहीं है और नेता कार्यकर्ताओं से दूरी बनाने लगे हैं.
जयपुरः राजस्थान में चुनावी घोषणा के बाद जीत का एजेंडा दो अहम कदमों पर निर्भर हैं. पहला चुनावी घोषणा पत्र और दूसरा उम्मीदवारों की घोषणा. राज्य की दोनों राजनीतिक पार्टियों में इन पर मंथन जारी हैं. प्रदेश भाजपा ने बुधवार को घोषणा पत्र समिति की पहली बैठक में स्पष्ट किया की जो भी वादे होंगे वो पूरे किए जाएगें. भाजपा का मानना हैं कि पुराने घोषणा पत्र में से दस प्रतिशत वादे पूरे नहीं हुए. इन वादों को ना केवल नए चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा साथ ही अगर सत्ता में आते हैं तो पूरा किया जाएगा. राजस्थान भाजपा ने बुधवार को घोषणा पत्र समिति की पहली बैठक में भावी जीत के संकल्पों पर मंथन किया. हालांकि खुद समिति अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि पिछली दस फीसदी घोषणाएं अधूरी हैं उनको पूरा करने का संकल्प भी नए घोषणा पत्र में होगा. इनमें पेयजल, इंफ्रास्टक्चर, शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार के साथ महिलाओं और युवाओं से जुड़े सुझावों को भी प्रमुखता दी गई. वहीं दशहरे से पहले घोषणापत्र को अंतिम रूप दिया जा सकता हैं. भाजपा का घोषणा पत्र केंद्र और राज्य के बड़े नेताओं की मौजूदगी में होगा. समिति उन सुझावों पर भी काम कर रही हैं जो यात्राओं के दौरान मिले हैं. घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि घोषणा पत्र में गुड गवर्नेंस और डवलपमेन्ट पर फोकस रहेगा. अन्य राज्यों की अच्छी घोषणाएं भी होंगी शामिल भाजपा शासित राज्यों की ओर से जारी घोषणापत्रों का भी समिति सदस्य अध्ययन कर रहे हैं. राजस्थान के लिहाज से उपयोगी अन्य राज्यों की घोषणाओं को भी शामिल किया जाएगा. भाजपा घोषणा पत्र समिति की बैठक में सदस्य राव राजेंद्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, अरुण चतुर्वेदी, वीरू सिंह राठौड, औंकार सिंह लखावत मौजूद रहे. आगामी चुनावों में भाजपा का चुनावी केम्पेन और मतदाताओं का रूझान काफी हद तक घोषणा पत्र पर निर्भर करेगा करोड़ों मतदाताओं की मुहर भी घोषणा पत्र में किए गए वादों ओर नीयत के इंतजार में रहेगी.
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2018, राजस्थान विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के दौरे पर हैं. वो बुधवार को अपने दौरे के दूसरे दिन दलितों के मजबूत गढ़ बीकानेर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. जबकि राहुल से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को बीकानेर में दलित सम्मेलन के जरिए जातीय गणित साधने की कोशिश कर चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को बीकानेर की संकल्प रैली से पहले राजधानी जयपुर में यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बैठक में शिकरत शामिल हुए. इस दौरान राहुल ने इस बैठक में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यूथ कांग्रेस की अहम भूमिका बताई. बीकानेर की संकल्प रैली के जरिए राहुल ने राज्य की राजनीतिक समीकरण को साधने की योजना बनाई है. बीकानेर दलित बहुल इलाका माना जाता है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीकानेर रैली कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. बता दें कि राजस्थान में करीब 17.8 दलित फीसदी मतदाता हैं. इनमें 3.9 फीसदी हिस्सा गांवों में और 3.9 फीसदी हिस्सा शहरों में है. राज्य में कुल 200 सीटें हैं. इनमें 142 सीट सामान्य, 33 सीट अनुसूचित जाति और 25 सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. राजस्थान में दलित मतदाता बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है, लेकिन उपचुनाव में पार्टी से उसका मोहभंग हुआ है. इसी का नतीजा था कि कांग्रेस को जीत और बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था. ऐसे में बीजेपी राजस्थान में अपने परंपरागत वोट बैंक दलित, राजपूत और ब्राह्मण के खिसकने से परेशान है. बीते एक दशक में दलित वोटबैंक कांग्रेस को छोड़ बीजेपी के साथ जुड़ गया है. लेकिन इस बार दलित बीजेपी का मोह छोड़ फिर से अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस की तरफ लौट सकते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने ऐसे में जातीय समीकरण साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. दलित समुदाय का सबसे ज्यादा वोट इसी बीकानेर संभाग में है. इसके अलावा कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में है. बीकानेर संभाग में दो लोकसभा क्षेत्र बीकानेर और श्रीगंगानगर दलित समुदाय के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा 5 विधानसभा सीटें भी दलित समुदाय के आरक्षित हैं. दलित सीटों से ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि बीकानेर संभाग में 19 विधानसभा सीटों पर दलितों का साथ आना या छिटकना हार-जीत तय करने में अहम भूमिका अदा करता है. SC/ST एक्ट को लेकर हुए आंदोलन में जिस तरह से दलितों पर कार्रवाई हुई है, उससे वे खासा नाराज हैं. ऐसे में कांग्रेस लगातार दलितों को साधने की कोशिश में है. राहुल इसी नाराजगी को कैश कराने की जुगत में हैं.
जयपुर राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक मतदान केंद्र की कमान पूरी तरह महिलाओं के हवाले होगी। इस तरह के मतदान केंद्र में चुनावी प्रक्रिया से लेकर सुरक्षा तक, सारा काम महिलाएं ही संभालेंगी। महिलाओं को आगे लाने की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने चुनावों में आयोग की नई पहल के बारे में कहा, ‘इस बार हर विधानसभा में एक मतदान केंद्र पूरी तरह महिलाकर्मियों के हवाले होगा। यानी उसमें हर काम महिलाकर्मी करेंगी, इस मतदान केंद्र में पुलिसकर्मी भी महिलाएं ही होंगी।’ उन्होंने कहा कि यह नया व अनूठा प्रयोग है और हमने जिला कलेक्टर से भी कहा है कि जिन कस्बों में ज्यादा महिलाकर्मी उपलब्ध हैं, वहां इस तरह के ज्यादा बूथ बनाए जाएं। राज्य में 200 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को मतदान होगा। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की एक नई पहल ‘सी-विजिल’ ऐप है। इसके जरिए अब आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की किसी भी शिकायत का समाधान सौ मिनट की अवधि में सुनिश्चित किया जाएगा। इस ऐप ने अब राज्य में भी कार्य करना शुरू कर दिया है।
जयपुर, 09 अक्टूबर 2018, विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी में टिकट बंटवारे को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है. दोनों दलों में जंग ज्यादा से ज्यादा टिकट अपने-अपने खेमे के लोगों को दिलाने की है. राहुल लगाएंगे टिकट पर आखिरी मुहर मंगलवार को जयपुर में कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति की मीटिंग हुई जिसमें हिस्सा लेने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट, स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख कुमारी शैलजा और कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत पहुंचे. बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साफ किया कि टिकट योग्य लोगों को मिलेगा और जरूरत पड़ेगी तो व्यक्तिगत रूप से टिकटार्थी को बुलाकर उनसे बात की जाएगी. उसके बाद ही टिकट तय होगा. मुख्यमंत्री के सवाल पर गहलोत ने कहा कि विधायक तय करेंगे कि सीएम कौन बनेगा और इसपर अंतिम आलाकमान का होगा. बैठक के बाद प्रेस वार्ता करते हुए स्क्रीनिंग कमेटी के प्रमुख कुमारी शैलजा ने कहा कि इलेक्शन कमेटी की मीटिंग में टिकट बंटवारा पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी तय करेंगे. वसुंधरा तय करना चाहती हैं टिकट कमोबेश यही हालत बीजेपी के अंदर भी है बीजेपी के अंदर यह घमासान चल रहा है कि टिकट बंटवारा इस बार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हाथ में होगा या फिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उम्मीदवार तय करेंगे. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कैंपेन कमेटी के मीटिंग में इशारों-इशारों में कह दिया टिकट तो वही बांटेंगी, वरना बीजेपी राजस्थान में चुनाव हार सकती है. जबकि अमित शाह का खेमा ये समझाने में लगा है कि इस बार टिकट का बंटवारा केंद्रीय स्तर पर होना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा विधायकों का टिकट काटा जा सके. मौजूदा विधायकों की टिकट कटने पर जनता की नाराजगी कम होगी.

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