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नई दिल्ली दिल्ली के आईटीओ स्काईवॉक प्रॉजेक्ट पर राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। स्काईवॉक के उद्‌घाटन समारोह में दिल्ली सरकार के किसी प्रतिनिधि को न बुलाए जाने से नाराज आम आदमी पार्टी ने रविवार को इस मुद्दे पर केंद्र की बीजेपी सरकार को फिर से घेरा, तो वहीं केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने रविवार को एक बयान जारी कर दिल्ली की जनता को स्काईवॉक की ओपनिंग के मौके पर बधाई देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के पीडब्लूडी मिनिस्टर सत्येंद्र जैन के नेतृत्व में दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के इंजिनियरों ने बेहद प्रफेशनल तरीके से इस प्रॉजेक्ट को पूरा किया है। उन्होंने स्काईवॉक की अवधारणा को साकार करने, इसकी यूनीक डिजाइन बनाने और उसे मूर्त रूप देने का श्रेय भी पीडब्लूडी को देते हुए कहा कि पीडब्लूडी ने इसके लिए तमाम जरूरी अप्रूवल भी लिए और इतने व्यस्त इलाके में ट्रैफिक को डिस्टर्ब किए बिना इसे बनाकर तैयार किया। सौरभ ने इस स्काईवॉक के उद्घाटन के अवसर पर दिल्ली सरकार के किसी भी प्रतिनिधि को न बुलाए जाने पर चुटकी लेते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से यह सुनने में आया है कि स्काईवॉक का उद्घाटन केंद्र की बीजेपी सरकार के द्वारा तैनात किए गए दो रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और एक लापता सांसद करने वाले हैं। वे इस बात की स्टडी करेंगे कि आखिरकर दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग ने इतना यूनीक स्काईवॉक कैसे बनाया और फिर दिल्ली की अन्य जगहों पर भी वे ऐसे ही स्काईवॉक बनवाएंगे, क्योंकि केंद्र सरकार के पास ऐसे यूनीक प्रॉजेक्ट्स को बनाने के लिए प्रफेशनल विशेषज्ञता का अभाव है। उधर पुरी ने सोशल मीडिया के जरिए तमाम आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जिस स्काईवॉक का पिछले साल 9 नवंबर को शिलान्यास किया गया था, वह उन 5 मोबिलिटी प्रॉजेक्ट्स में से एक है, जिन्हें उनके मंत्रालय द्वारा अर्बन डिवेलपमेंट फंड के जरिए बनाया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि स्टेट पीडब्लूडी ने केवल मंत्रालय द्वारा इन प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने के लिए नियुक्त की गई एजेंसी के तौर पर काम किया है। स्काईवॉक प्रॉजेक्ट की प्लानिंग और फंडिंग से लेकर दूसरे तमाम काम उनके मंत्रायल ने ही किए हैं। ऐसे में उन्हें यह देखकर हैरानी हो रही है कि इसके बावजूद कुछ लोग उद्घाटन समारोह में न बुलाए जाने से निराश हैं। पुरी ने बताया कि प्रॉजेक्ट मंजूर होने के बावजूद अप्रैल 2016 में जब दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के असहयोग की वजह से प्रॉजेक्ट में देरी हुई, तो अक्टूबर 2017 में तय किया गया कि दिल्ली के इन सारे मोबिलिटी प्रॉजेक्ट्स की पूरी फंडिंग उनका मंत्रालय, डीडीए और आईटीपीओ करेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार पर मेट्रो के फेज-4 और दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल प्रॉजेक्ट में अड़ंगा लगाने का आरोप भी लगाया।
नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को घोषणा की कि बृजेश गोयल और राजपाल सोलंकी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारी होंगे। इस घोषणा से उन अटकलों पर विराम लग गया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और बीजेपी के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा इन दो सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार होंगे। दिल्ली आप के संयोजक गोपाल राय ने यह घोषणा करते हुए कहा कि नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा से बात की गई लेकिन उन्होंने देशभर में मोदी सरकार के खिलाफ प्रचार करने की इच्छा जताई है। शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी उम्मीदवार बनाए जाने के बारे में बात नहीं हुई है। पार्टी ने दिल्ली की सभी सातों लोकसभा सीटों के लिए अपने प्रभारियों की घोषणा कर दी है। राय ने कहा कि पांच सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। । इस बीच पार्टी सूत्रों ने बताया कि लोकसभा क्षेत्रों के प्रभारी ही अंतत: 2019 के चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे।
नई दिल्ली दिल्ली के छावला इलाके में हुई बैंक लूट की सनसनीखेज वारदात के मामले में द्वारका पुलिस को दो सुराग ऐसे मिले, जिनके सहारे वह बदमाशों तक पहुंच गई। पहला, बैंक के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों से दो डकैतों की पहचान हो गई। दूसरा, बदमाशों द्वारा इस्तेमाल की गई तीन बाइक में से एक पीले रंग की थी। इसे बदमाशों ने वारदात के बाद उजवा गांव के जंगलों में छोड़ दिया था। बिना नंबर प्लेट की इस बाइक के चेसिस और इंजन नंबर की जांच की गई तो यह सोनीपत के खेवड़ा गांव की निकली। इसके बाद पुलिस रातों-रात खेवड़ा गांव जा पहुंची। बाइक जिसकी थी पुलिस ने उसे उठा लिया। उसने बताया कि उसके दोस्त सचिन ने दो दिन पहले उससे बाइक मांगी थी। इसके बाद सचिन के बारे में कुछ और जानकारी मिली और उसे मुरथल के पास से पकड़ लिया गया। ऐसे रची गई साजिश इस मामले में आउटर जिले के डीसीपी राजेंद्र सागर की भी अहम भूमिका रही। जांच में पता लगा कि सचिन को पैसों की सख्त जरूरत थी। उसने अपने गांव के ही 19 साल के प्रवेश और एक और दोस्त के साथ मिलकर कुछ बड़ा करने की योजना बनाई। इसमें उन्हें नजफगढ़ के एक पुराने फरार खिलाड़ी ने मदद की। वारदात से पांच दिन पहले बैंक को लूटने की योजना बनाई गई थी। नजफगढ़ वाले बदमाश ने हथियार का इंतजाम किया। लूट से पहले बैंक की दो बार रेकी की गई। पहले 11 बजे और फिर वारदात को अंजाम देने से ठीक 15 मिनट पहले। दो से तीन बदमाश बैंक के अंदर आए और उन्होंने यहां की सुरक्षा, स्टाफ और ग्राहकों की भीड़ का जायजा लिया। सबसे पहले सिक्यॉरिटी गार्ड को काबू करने की बात हुई। वारदात को अंजाम देने का वक्त आते ही बैंक में घुसे बदमाशों ने सबसे पहले गार्ड को काबू में किया और लूट को अंजाम दिया। गलती से चली थी गोली जांच में पता चला कि बदमाशों का इरादा कैशियर संतोष की हत्या करने का नहीं था। शायद स्टाफ को काबू करते वक्त गलती से पिस्टल का ट्रिगर दब गया। उस वक्त बैंक में 6 स्टाफ और चार कस्टमर थे। बदमाशों को शायद यह भी पता लगा था कि आठ लाख रुपये मेन ब्रांच से लाए गए हैं। कुछ पैसा बैंक की चेस्ट में रखा था लेकिन कैशियर को गोली लगने के बाद बदमाश भाग गए। लूट के लिए देखी थी फिल्म पुलिस ने करीब 50 सीसीटीवी कैमरे चेक किए। तीन बाइक पर भागते बदमाशों की पहचान करने में वे बेहद कारगर साबित हुए। तीन बाइक में से दो पर तीन-तीन और एक पर एक बदमाश बैठा था। लूट की वारदात को अंजाम देने से पहले बदमाशों ने इसका रिहर्सल भी किया था। बैंक लूट पर आधारित फिल्म भी देखी थी। बैंक के बाहर से उखाड़ा था एटीएम इसी बैंक के बाहर लगे एटीएम को पिछले साल 12 अक्टूबर की रात बदमाश उखाड़कर ले गए थे। एटीएम में 31 लाख रुपये थे। उसका अब तक कुछ पता नहीं लग सका है। बैंक लूट के बाद एक जगह सारे बदमाश मिले और पैसों का बंटवारा किया गया। बैंक के अंदर दाखिल 6 बदमाशों में से दो के चेहरों पर लगे गमछे बार-बार हट रहे थे। इससे उनकी पहचान करने में आसानी हुई। दो बदमाशों ने हेलमेट और 4 ने गमछे लपेटे हुए थे।
नई दिल्ली दिल्ली के कैबिनेट मिनिस्टर कैलाश गहलोत के घर छापेमारी करने वाले आईटी डिपार्टमेंट को तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो यह दिखाते हैं कि उन्होंने 120 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की है। आईटी डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया, 'हमें 120 करोड़ रुपये के टैक्स चोरी के सबूत मिले हैं। अधिकारी ने कहा कि गहलोत द्वारा टैक्स की चोरी की राशि में बदलाव हो सकता है। गहलोत के पास ट्रांसपॉर्ट, कानून, राजस्व, सूचना प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक सुधार मंत्रालय है। अधिकारी ने कहा कि मंत्री के घर से ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिससे पता चलता है कि ऑफिस बॉय, चपरासी और अन्य कर्मचारियों के नाम पर कर्ज लिए गए हैं और विभिन्न फर्जी कंपनियों की 70 करोड़ के शेयर इनके नाम से थे। उन्होंने आगे बताया, 'हमें कर्मचारियों के नाम से बेनामी संपत्तियों और ड्राइवर के नाम पर एक जमीन का पता चला है।' अधिकारी ने यह भी कहा कि जांच में गहलोत की दुबई की प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करने का भी पता चला है। इससे पहले आयकर विभाग की प्रवक्ता शुभी आहलुवालिया ने बुधवार को बताया था कि गहलोत और उनका परिवार ब्रिस्क इंफ्रास्ट्रक्चर ऐंड डिवेलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और कॉर्पोरेट इंटरनैशनल फाइनैंसल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हुआ है। उधर, छापेमारी की खबर सामने आने के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी से मांग की थी कि वह दिल्ली की जनता से माफी मांगें। उन्होंने कहा, 'नीरव मोदी, विजय माल्या से दोस्ती और हमपर छापेमारी? मोदीजी आपने मुझपर, सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया पर भी छापेमारी करवाई। उसका क्या हुआ? क्या आपको कुछ मिला? चुनी हुई सरकार पर और कोई छापेमारी करने से पहले दिल्ली से माफी मांगिए।'
नई दिल्‍ली अगर आप लोगों ने अभी तक अपनी गाड़ी की नंबर प्‍लेट को अभी तक हाई सिक्‍यॉरिटी नंबर प्‍लेट में तब्‍दील नहीं किया है तो आपको दिल्‍ली की सड़कों पर कार चलाने में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है। दिल्‍ली में कल से सभी गाड़ियों के लिए हाई सिक्‍यॉरिटी नंबर प्‍लेट को अनिवार्य का दिया गया है। दिल्‍ली के रजिस्‍ट्रेशन वाली जिन कारों पर हाई सिक्‍यॉरिटी नंबर प्‍लेट नहीं मिलेगी, उन कार के मालिकों पर 500 रुपये का जुर्माना लग सकता है और उन्‍हें कम से कम 3 महीने के लिए जेल भी जाना पड़ सकता है। वैसे नई गाड़ियों में सभी में हाई सिक्‍यॉरिटी नंबर प्‍लेट ही लगाई जा रही है। सरकार के इस कदम से पुरानी गाड़‍ियों के मालिकों को काफी परेशानी हो सकता है जो लगातार पुरानी नंबर प्‍लेट के साथ ही गाड़ियां चला रहे हैं। दिल्‍ली परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 40 लाख दोपहिया और चार वहिया वाहन हैं जो पुरानी नंबर प्‍लेट के साथ चल रहे हैं। इससे पहले सरकार ने सूचना जारी करके सभी कार और बाइक वालों को अपनी नंबर प्‍लेट बदलवाने को कहा था। यह प्रक्रिया 2 अक्‍टूबर से शुरू की गई थी। माना जा रहा है वाहनों की चोरी को रोकने और गलत काम के लिए इस्‍तेमाल होने से रोकने के लिए यह प्रक्रिया शुरू की गई थी। हाई सिक्‍यॉरिटी नंबर प्‍लेट एल्‍यूमिनियम की बनी और चमकीले टेप के साथ आ रही हैं। इसके साथ ही इन्‍हें टेंपर प्रूफ बनाया गया है। इसके अलावा नंबर प्‍लेट पर वीकल के इंजन के बारे में जानकारी के साथ ही चेसिस नंबर और लेजर ब्रांडिंग के साथ 10 अंकों का परमानेंट पहचान संख्‍या भी दर्ज है। बताया गया है कि टू वीलर्स के लिए हाई सिक्‍यॉरिटी नंबर प्‍लेट के 67 रुपये और फोर वीलर के लिए 213 रुपये देने होंगे। वाहन मालिकों की सुविधा के लिए दिल्‍ली में नंबर प्‍लेट बदलवाने के लिए 13 सेंटर बनाए गए थे।
नई दिल्‍ली, जीटीबी अस्पताल में सिर्फ दिल्लीवासियों को इलाज देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी किए गए सर्कुलर को सीधे- सीधे जीने के अधिकार (आर्टिकल 21) और समानता के अधिकार (आर्टिकल 14) का उल्लंघन बताया है. क्‍या कहा हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप मेडिकल सेवाओं के लिए मरीजों में पक्षपात नहीं कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि ये गरीब लोग हैं. इनको इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों से ही मिल पाती है. अगर सरकार उन्हें सुविधा देने से इंकार कर देगी तो वैसे लोग कहां जाएंगे. एक आंकड़े के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले गरीब लोगों की तादाद 70 फ़ीसदी के आसपास है. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीज गरीब तबके से ही हैं. दिल्ली सरकार ने रखा अपना पक्ष हालांकि सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके पास फंड की कमी है. इसीलिए वह दिल्ली के लोगों को ही इलाज में वरीयता देना चाहते हैं. सरकार का मानना था कि उनके सर्कुलर की वजह से दिल्ली के अस्पतालों में बड़ी भीड़ को भी कम करने में आसानी होगी. अपने पक्ष में दिल्ली सरकार ने कहा कि बंगाल सरकार भी ऐसा कर रही है. वहीं इस दलील पर याचिकाकर्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही बंगाल सरकार पर ऐसा करने के लिए जुर्माना लगा चुका है और फिलहाल इस तरह का नियम बंगाल में नहीं है. सर्कुलर का नुकसान मरीजों को याचिका दायर करने वाले वकील अशोक अग्रवाल का कहना था कि यह सर्कुलर राजनीति से प्रेरित है. इसका सीधा नुकसान मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. देश में कोई भी सरकार, किसी भी सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए मरीज को मना नहीं कर सकती है. यह संविधान के खिलाफ है. हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है. दिल्ली हाईकोर्ट से आने वाले फैसले से ये तय होगा कि राज्य सरकार का यह सर्कुलर अब आगे मान्य रहेगा या फिर हाईकोर्ट इसे रद्द करेगी.
नई दिल्‍ली, सैलरी और बकाए की मांग को लेकर दिल्ली नगर निगम (MCD) के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए तो दूसरी ओर MCD में फंड को लेकर सियासत तेज हो गई है. दरअसल, दक्षिणी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने पिछले कई वर्षों के आंकड़े जारी किए हैं. इसके मुताबिक केजरीवाल सरकार ने फंड के नाम पर निगम के हिस्से का पैसा भी नहीं दिया है. साउथ एमसीडी ने दिल्ली सरकार से फंड मांगा इसके मुताबिक 2018-19 में साउथ एमसीडी ने दिल्ली सरकार से फंड मांगा. शहरी विकास विभाग के लिए 904 करोड़ रुपये मांगे जबकि सरकार ने एक भी रुपये जारी नहीं किए. वहीं एजुकेशन सेक्टर के लिए 255 करोड़ रुपये मांगे जबकि सरकार ने 90 करोड़ जारी किए. ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए 904 करोड़ रुपये मांगे लेकिन सरकार ने अब तक एक भी पैसा नहीं दिया. इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निगम ने 340 करोड़ मांगे जबकि 48 करोड़ रुपये मिले. यानि साफ है कि 1,579 करोड़ रुपये की मांग की गई लेकिन सिर्फ 138 करोड़ रुपये मिले. वहीं पिछले साल 1,454 करोड़ रुपये मांगे तो केवल 560 करोड़ रुपये दिए गए. उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इस साल ट्रांसपोर्ट और अर्बन डेवेलपमेंट के लिए एक पैसा भी दिल्ली सरकार ने नहीं दिया. उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इस साल कुल 1,579 करोड़ की मांग की थी जबकि केवल 137 करोड़ जारी किए गए. जबकि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली सरकार से इस वर्ष 1454 करोड़ रुपये मांगे थे जबकि सरकार ने केवल 560 करोड़ रुपये ही दिए हैं, यानि 894 करोड़ रुपये अभी बाकी हैं. इन सबके बीच MCD में विपक्ष के नेता अनिल डबास मेयर के इन दावों को पूरी तरह से झूठा बता रहे हैं. अनिल ने कहा कि दिल्ली में फिर से हड़ताल शुरू हो गई है और निगम अनाप- शनाप मांगे कर रहा है. बता दें कि बीते 27 अगस्त को तीनों ही निगम के मेयर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और उस वक्‍त ये दावा किया गया था कि दस दिन के अंदर पूरा फंड रिलीज कर दिया जाएगा.
नई दिल्‍ली, दिल्ली कांग्रेस ने प्रेस काॅन्‍फ्रेंस कर सीएम अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि अपने लड़े हर चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद भी नए चुनाव लड़ने के लिए आम आदमी पार्टी के पास फंड कहां से आता है? पार्टी ने पंजाब चुनाव के नतीजों में आप के बेहद खराब प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं. सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली कांग्रेस की प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सीएम केजरीवाल से पूछा है कि हर राज्य के चुनावों में बुरी हार होने के बावजूद आप चुनाव कैसे लड़ रहे हैं? आप ने 2015 के बाद दिल्ली में केवल एक ही चुनाव जीता है. दिल्ली कांग्रेस ने पूछा है कि कर्नाटक, गुजरात, गोवा में आम आदमी पार्टी की सभी सीटों पर जमानत जब्त हो गई है तो आखिर चुनाव लड़ने के लिए इतना पैसा कहां से आ रहा है? दिल्ली कांग्रेस ने आंकड़े जारी करते हुए कहा कि पंजाब में 2899 पंचायत की सीटों पर कांग्रेस को 2350 सीटें. दूसरे नंबर पर रहे अकाली दल को 353 सीटें और तीसरे नंबर पर रही बीजेपी को 65 सीटें मिली. जबकि, अन्य को 111 सीटें मिली है. इन सबके बीच आप को महज 20 सीटें मिलीं. वहीं, जिला पंचायत में आप को एक भी सीट नहीं मिल सकी. ऐसे में सवाल उठता है फंडिंग का, क्योंकि चुनाव आयोग ने भी पार्टी के खिलाफ फंड में गड़बड़ी को लेकर नोटिस भेजा है.
नई दिल्ली सीएम आवास पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से कथित मारपीट के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया और 11 अन्य विधायकों को आरोपी के तौर पर समन जारी किया है। सभी को 25 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। यह पूरा मामला 19 फरवरी का है जब सीएम आवास पर आधी रात को दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित मारपीट व बदसलूकी की गई थी। इस मामले में 13 अगस्त को चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ-साथ 11 अन्य विधायकों के नाम शामिल हैं। पटियाला हाउस कोर्ट में सील कवर में 1533 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस केस में केजरीवाल के तत्कालीन अडवाइजर वीके जैन को मुख्य गवाह बनाया गया है। उनके बयान के मुताबिक, जब अंशु प्रकाश की पिटाई शुरू हुई थी तब उनका चश्मा जमीन पर गिर गया था। सीएम आवास पर आधी रात को बुलाए जाने और कथित मारपीट के मामले की जांच में वहां लगे सीसीटीवी कैमरे भी काफी पीछे पाए गए थे। घटना के दो दिन बाद सिविल लाइन्स पुलिस ने वीके जैन से पूछताछ की थी। शुरुआत में वह कुछ साफ नहीं बता रहे थे लेकिन बाद में मैजिस्ट्रेट के सामने बंद कमरे में पूछताछ के बाद पूरी घटना सामने आई। पुलिस ने इसके बाद उन्हें गवाह बनाने का फैसला कर लिया था।
नई दिल्ली जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव, 2018 के नतीजे आ चुके हैं। इन नतीजों के मुताबिक, सभी सीटों पर लेफ्ट यूनिटी को जीत हासिल हुई है। इस बार के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) सभी सीटों पर दूसरे नंबर पर रहा है। बता दें कि जेएनयू में शुक्रवार को छात्रसंघ के चार पदों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव) के लिए मतदान हुआ था। जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष पद पर लेफ्ट के उम्मीदवार एन. साई बालाजी की जीत हुई है। उपाध्यक्ष पद पर लेफ्ट की सारिका चौधरी, महासचिव पद पर लेफ्ट के एजाज अहमद राथेर और संयुक्त सचिव पद पर भी लेफ्ट उम्मीदवार अमुथा जयजीप की जीत हुई है। बता दें कि वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रैटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) ने इस बार 'लेफ्ट यूनिटी' गठबंधन के तहत एक साथ चुनाव लड़ा था। वामपंथी छात्र संगठनों के अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और बिरसा-आंबेडकर-फूले स्‍टूडेंट असोसिएशन (बापसा) के उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में थे। सभी सीटों पर लेफ्ट यूनिटी और एबीवीपी को मिले वोटों की स्थिति: अध्यक्ष एन साई बालाजी (लेफ्ट यूनिटी)- 2161 ललित पांडेय (एबीवीपी)- 982 उपाध्यक्ष सारिका चौधरी (लेफ्ट यूनिटी)- 2692 गीताश्री बरुआ (एबीवीपी)- 1012 महासचिव एजाज़ अहमद (लेफ्ट यूनिटी)- 2423 गणेश गुर्जर (एबीवीपी)- 1123 संयुक्त सचिव अमूथा जयदीप (लेफ्ट यूनिटी)- 2047 वैंकट चौबे (एबीवीपी)- 1290

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