taaja khabar....भारत ने पाकिस्तान को दिखाया 'ठेंगा', नहीं भेजा सीमा शुल्क मीटिंग का न्यौता...यूपीः 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा 6 जनवरी को....पंजाब: कैप्टन बयान पर नवजोत सिंह सिद्धू की बढ़ीं मुश्किलें, 18 मंत्रियों ने खोला मोर्चा...साबुन-मेवे की दुकान में मिले सीक्रेट लॉकर, 25 करोड़ कैश बरामद....J-K: शोपियां में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों को घेरा, मुठभेड़ जारी...
नई दिल्ली दिल्ली के संस्कार आश्रम फॉर गर्ल्स (SAG) से नौ लड़कियों के गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी आश्रम से बच्चियों के गायब होने की जानकारी होने पर दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बताया। उपमुख्यमंत्री ने नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के महिला और बाल विकास विभाग के अफसर और आश्रम के सुपरिंटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया। जीटीबी एनक्लेव पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जय हिंद ने इस घटना पर रोष जताते हुए मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराने की मांग की है। मामला एक दिसंबर की रात का है। दिलशाद गार्डन स्थित संस्कार आश्रम से 9 लड़कियां गायब हो गईं। आश्रम के अधिकारियों को बच्चियों के गायब होने की जानकारी तक नहीं लगी। दो दिसंबर की सुबह इस बारे में पता चला। इस मामले में जीटीबी एनक्लेव पुलिस थाने में 2 दिसंबर को एक एफआईआर दर्ज की गई। स्वाति जय हिंद ने कहा कि दिल्ली की एक सरकारी शेल्टर होम से 9 लड़कियों के गायब होने की घटना चौंकाने वाली है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि इसमें से कई लड़कियां वे हैं जिन्हें महिला आयोग ने अलग-अलग मानव तस्करों के गिरोह से छुड़ाया था। स्वाति ने कहा कि जो भी लोग इसमें शामिल हैं, उन्हें पकड़ा जाए, लड़कियों को खोजा जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने कहा कि बहुत दुख की बात है कि महिला आयोग जान पर खेलकर बच्चियों को मानव तस्करों के गिरोह से छुड़ाता है और कुछ अधिकारी और लोग इन्हें वापस मानव तस्करी के दलदल में धकेल देते हैं। दिल्ली महिला आयोग का कहना है कि इन नौ लड़कियों को बाल कल्याण समिति-VII के आदेश पर 4 मई 2018 को द्वारका के एक शेल्टर होम से संस्कार आश्रम फॉर गर्ल्स में लाया गया था। ये सभी मानव तस्करी और देह व्यापार की शिकार थीं। इससे पहले भी आयोग में बाल कल्याण समिति-V की पूर्व सदस्य ने संस्कार आश्रम फॉर गर्ल्स, दिलशाद गार्डन में व्याप्त अव्यवस्थाओं के बारे में एक शिकायत दर्ज करवाई थी। न्होंने बताया था कि एक लड़की के साथ आश्रम के अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया है। इसमें कहा गया कि बच्ची के साथ गलत बर्ताव होता था। उसे मारा-पीटा जाता था। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और सदस्य को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने होम के अधीक्षक के खिलाफ बच्ची को मारने के मामले में एक लिखित शिकायत की थी। दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी किया था और मामले में जुवेनाइल जस्टिस रूल्स, 2016 के नियम 54(2) के तहत एफआईआर दर्ज न होने का कारण बताने को कहा था।
नई दिल्ली, 03 दिसंबर 2018, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने राम मंदिर पर चल रहे विवाद के बीच कहा है कि उस स्थान पर एक यूनिवर्सिटी बनवा देना चाहिए. सिसोदिया ने कहा कि सही मायनों में राम राज्य शिक्षा से आएगा, न कि वहां भव्य मंदिर बनाकर. एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में सिसोदिया ने कहा कि दोनों पक्ष अगर राजी हो जाएं तो वहां एक विश्वविद्यालय बनना चाहिए. राम मंदिर पर आम आदमी पार्टी के स्टैंड के सवाल पर सिसोदिया ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और फॉरेन स्टूडेंट्स भी यहां शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं. अपने बच्चों को पढ़ाकर हम राम राज्य ला सकते हैं. इस समय जाति पर हो रही राजनीति के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति को सिर्फ शिक्षा से ही रोका जा सकता है. सिसोदिया ने कहा कि अभी हाल ही में मैं जापान गया था. वहां जिस दिन हाइड्रोजन से कार चलाने के नए सिस्टम पर चर्चा की जा रही थी, उसी दिन हमारे देश में ट्विटर पर हनुमान की जाति पर बहस हो रही थी. ये बेहद निराश करने वाला है. इसे सिर्फ शिक्षा से ही बदला जा सकता है. लोकसभा चुनाव के सवाल पर सिसोदिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी. सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के अलावा उनकी पार्टी पंजाब और हरियाणा में भी पूरा ध्यान दे रही है.
नई दिल्ली इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में छापे मारकर हवाला कारोबार से जुड़े बड़े रैकेट के खुलासे का दावा किया है। विभाग के मुताबिक, नया बाजार इलाके में साबुन और मेवे की छोटी दुकान में पड़े छापे में 100 से ज्यादा सीक्रेट लॉकर मिले हैं, जिनमें 25 करोड़ रुपये कैश बरामद हुआ है। अपुष्ट सूत्रों ने इन लॉकरों की तादाद 300 बताई है। बताते हैं कि इन लॉकरों से बरामद कैश की काउंटिंग के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अफसरों को कई रातें इन्हीं दुकानों में गुजारनी पड़ीं। ये अफसर दुकान में ही सोते, रहते, खाते रहे, जिससे कि जल्द से जल्द लॉकर से मिले कैश को गिना जा सके। सूत्रों की मानें तो अब भी इस कैश की गिनती जारी है, क्योंकि सभी लॉकरों को खोला नहीं जा सका है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दुकान के बेसमेंट में करोड़ों रुपये कैश से भरे सीक्रेट लॉकर की जानकारी आयकर विभाग को दिवाली की रात मिली थी, तभी अफसरों ने इन लॉकरों को सील कर दिया था। तब स्थानीय कारोबारियों ने इसका विरोध किया था। इनका कहना था कि जिन लॉकरों पर शक हो, उन्हीं पर ऐक्शन होना चाहिए, सभी पर नहीं। विभाग ने इन लॉकरों में अब गिनती शुरू की तो ये कैश बरामद हुआ है। विभाग ने एकसाथ दिल्ली के 8 ठिकानों में ऐसे छापे मारे हैं। NCR के बड़े कारोबारियों से जुड़े लॉकर शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हवाला कारोबारियों ने अपने पैसे को रखने के लिए ये लॉकर लिए थे। बताते हैं कि ये लॉकर एनसीआर के तंबाकू, केमिकल और मेवों के कारोबार से जुड़े हाई प्रोफाइल लोगों के हैं। इनका नाता दुबई के हवाला कारोबारी पंकज कपूर से जुड़ रहा है। सीक्रेट लॉकर पर तीसरी बड़ी कार्रवाई लॉकर ऑपरेशन से जुड़ी यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। सितंबर में दुबई से जुड़े 700 करोड़ के हवाला रैकेट में ईडी ने 29 लाख कैश और दस्तावेज बरामद किए थे। इससे पहले जनवरी 2018 में साउथ एक्स के एक प्राइवेट लॉकर से 40 करोड़ से ज्यादा की नगदी मिली थी। कारोबारियों ने कहा, हिसाब देने को तैयार हैं, लेकिन परेशान न करें स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि बिक्री के बाद ज्यादातर लोग अपना कैश इन्हीं प्राइवेट लॉकर (सरकार से मान्यता प्राप्त) में रखते थे। एक महीने पहले IT ने रेड कर 140 लॉकर सील किए थे। इस बीच नोटिस देकर पूछताछ करते रहे लेकिन शनिवार शाम से लॉकर खुल रहे हैं। उनमें 300 से ज्यादा कारोबारियों के पैसे हैं, ज्यादातर हिसाब देने को तैयार हैं। जिसकी ब्लैकमनी हो, उसी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
दिल्ली गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ सीबीआई द्वारा पंजीकृत मामले में मुकदमा चलाए जाने के लिए अभियोजन पक्ष को मंजूरी दे दी है। जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने 24 अगस्त, 2017 को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ असंगत स्रोतों से संपत्ति अर्जित करने के मामले में शिकायत दर्ज की थी। अब इस मामले में मुकदमा चलाए जाने को लेकर अभियोजन पक्ष को गृह मंत्रालय की हरी झंडी मिली है।
नई दिल्ली, 25 नवंबर 2018,आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं. सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि जिस अफसर की देखरेख में इतने बड़े स्तर पर मतदाताओं का नाम हटाया गया, उनको एक साल जूनियर होने के बावजूद किन परिस्थितियों में दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया. मुख्य सचिव पर दबाव बना रही है केंद्र सरकार! AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने 'आजतक' से खास बातचीत में कहा कि मुख्य सचिव कौन है इससे फर्क नहीं पड़ता बल्कि फर्क इस बात का पड़ता है कि क्या केंद्र सरकार मुख्य सचिव पर दबाव बना रही है. अंशु प्रकाश, एमएम कुट्टी, केके शर्मा व्यक्तिगत अच्छे आदमी होंगे लेकिन केंद्र सरकार का मकसद सिर्फ दिल्ली की केजरीवाल सरकार के काम मे अड़ंगा डालना है. उम्मीद है जो जनता दिल्ली को लेकर मोदी सरकार के इस रवैये को देख रही है वो जनता अपनी नीति बदले. जूनियर अफसर को मुख्य सचिव बनाने के पीछे साज़िश सौरभ भारद्वाज ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि मुख्य सचिव की नियुक्ति पर संदेह होता है. जिस अफसर की देखरेख में इतने बड़े स्तर पर मतदाताओं का नाम हटाया गया, उनको एक साल जूनियर होने के बावजूद किन परिस्थितियों में दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया, जबकि 86 के बैच वाले अफसरों की नियुक्ति की चर्चा चल रही थी. मनोज और नरेश कुमार को दरकिनार करके, एक तय प्रक्रिया से हटकर एक साल जूनियर को मुख्य सचिव बनाने के पीछे केंद्र सरकार की विशेष साज़िश रही होगी. केंद्र सरकार को बताना चाहिए जूनियर अफसर को मुख्य सचिव बनाने के पीछे क्या विशेष साज़िश है? AAP से अफसरों की नियुक्ति पर सलाह नहीं लेती केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी के मुताबिक शीला दीक्षित सरकार और आम आदमी पार्टी की 49 दिन की सरकार के दौरान अफसरों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार मशवरा करती थी, लेकिन 2015 में आम आदमी पार्टी सरकार आने के बाद चुनी हुई सरकार से किसी भी नियुक्ति में सलाह नहीं ली जाती है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि दिल्ली सरकार में ऐसे व्यक्ति को केंद्र सरकार नियुक्त करना चाहती है जो कानून और संविधान को ताक पर रखकर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के कामकाज में रुकावट लाए. दिल्ली सरकार को बदलना चाहती है बीजेपी आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने 'आजतक' से खास बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसी आला अधिकारी की नियुक्ति पर उस राज्य की सरकार को जानकारी दी जाती है. लेकिन दुर्भाग्यवश दिल्ली में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जहां किसी भी विभाग में अधिकारी या बड़े अफसर की नियुक्ति से पहले चुनी हुई सरकार से सलाह मशवरा नहीं किया जाता है. बीजेपी की सरकार हमेशा दिल्ली सरकार को बदलने की भावना से देखती है. मुख्यमंत्री से लेकर विधायकों पर झूठे केस राघव चड्ढा को उम्मीद है कि जब नए मुख्य सचिव सरकार में शामिल हों और लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार कोई फैसला ले, तो अफसर उन फैसलों पर अड़ंगा न लगाएं. राघव चड्ढा ने कहा कि हमारी उम्मीद हमेशा ये रहती है कि दिल्ली की जनता के हक़ के काम करने वालों के साथ हम खड़े हैं. सारी अफसरशाही खराब नहीं हैं लेकिन कुछ अफसर बीजेपी के दवाब में आकर सरकार को रोकने का काम करते हैं. पुराने मुख्य सचिव ने हमारे मुख्यमंत्री से लेकर विधायकों पर झूठे केस दर्ज कराए. इस तरह के रवैये पर सवाल उठते हैं. आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) विजय कुमार देव को अब दिल्ली सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है. विजय कुमार देव एजीएमयूटी कैडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वे दिल्ली में परिवहन निगम के चेयरमैन, दिल्ली के मंडलायुक्त के साथ अन्य भी अहम पदों पर रह चुके हैं. इससे पहले अंशु प्रकाश मुख्य सचिव थे, उनके साथ हुई कथित मारपीट के मामले के बाद से ही आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से उनकी अनबन चल रही थी. हाल ही में उनका ट्रांसफर टेलिकॉम डिपार्टमेंट में कर दिया गया था. हालांकि, क्या मुख्य सचिव बदल जाने से दिल्ली सरकार के साथ चल रही अनबन खत्म हो जाएगी अभी भी ये बड़ा सवाल बना हुआ है. क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पिछले दिनों फर्जी वोटिंग लिस्ट का मुद्दा उठाया था और चुनाव आयोग के साथ तू-तू मैं-मैं की थी. इस दौरान दिल्ली के चुनाव आयोग की जिम्मेदारी विजय कुमार देव के पास ही थी. यानी ऐसे में एक बार फिर मुख्य सचिव के पद पर वही व्यक्ति आया है, जिससे दिल्ली सरकार की पुरानी रार चल रही है. सोमवार को दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बता दें कि दिल्ली सरकार ने सोमवार को 2 खास मुद्दों पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर मिर्ची अटैक के मामले में दिल्ली पुलिस को घेरने के अलावा वोटर लिस्ट से नाम काटने का मुद्दा, आम आदमी पार्टी के विधायक सदन में उठाएंगे. दोनों ही मुद्दों को लेकर सदन के सामने प्रस्ताव भी रखा जाएगा.
अंबाला कैंट अनाथ बच्चों के लिए बनाए गए मर्सी होम अंबाला से 25 बच्चों का रेस्क्यू किया गया। आरोप है कि बच्चों का धर्म परिवर्तन कराकर नाम के साथ मसीह जोड़ दिया गया था। ऐसी ही कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी बलजीत कौर के नेतृत्व में टीम ने 25 बच्चों को रेसक्यू किया। कलरहेड़ी स्थित मर्सी होम में पुलिस, डीसीपीओ और सीडब्ल्यूसी की संयुक्त टीम ने यहां से बच्चों को रेसक्यू कराया। मर्सी होम के संचालकों ने इसका विरोध जताया, मगर पुलिस के आगे उनकी नहीं चली। इसी बीच अधिकारी बलजीत कौर ने बताया कि जांच के दौरान कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिनसे पता चला है कि बच्चों का धर्म परिवर्तन किया गया है। आरोप है कि बच्चों के नाम के आगे ‘मसीह’ शब्द जोड़ा गया। इतना ही नहीं उन्होंने संचालकों पर बच्चों का ब्रेन वॉश करने के भी आरोप लगाए, क्योंकि बच्चे टीम का विरोध जता रहे थे और एक छोटी बच्ची ने तो चाकू से एक पुलिस कर्मी पर वार करने की भी कोशिश की। बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था मर्सी होम कैंट सिविल अस्पताल में शाम को तीन से 16 आयु वर्ग की 13 बच्चियां व चार से 17 आयु वर्ग के 12 लड़कों का मेडिकल कराकर उन्हें पंचकूला और यमुनानगर के शेल्टर होम में भेजा गया है। उधर, मर्सी होम संचालक डॉ. फिलीप लाल मसीह ने टीम की इस कार्रवाई का विरोध जताया और आरोप लगाया कि उन्होंने सीडब्ल्यूसी और डीसीपीओ को एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन रिन्यू करने के लिए आवेदन किया है और सभी दस्तावेज विभाग को दिए हैं, मगर जानबूझकर उनकी फाइल को लटकाया गया है। उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से मर्सी होम का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में भी सीडब्ल्यूसी टीम मर्सी होम से 9 बच्चों को रेसक्यू करके ले गई थी, इसके बारे में ज्ञापन गत दिनों डीसी को दिया गया और इसी के विरोध में अब यह कार्रवाई उनके खिलाफ की गई है। जेजे एक्ट की उल्लंघना का आरोप जिला महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी बलजीत कौर ने कहा कि मर्सी होम में जेजे एक्ट की उल्लंघना की जा रही थी। यह बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था और यहां लड़के व लड़कियों को एक साथ रखा जा रहा था। नये आने वाले किसी भी बच्चे की जानकारी सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) को नहीं दी जा रही थी। 18 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को भी रखा जा रहा था, बच्चों का ब्रेन वॉश किया जा रहा था, उन्हें अलग-अलग स्थानों पर अधिकारियों को ज्ञापन देने तक ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि कई बच्चे यहां ऐसे रखे गए हैं जिनके माता-पिता हैं। टीम ने भी उड़ाई नियमों की धज्जियां कार्रवाई के लिए मौके पर गई टीम ने भी नियमों की धज्जियां उड़ाईं। मर्सी होम से बच्चों को रेसक्यू करने के लिए वर्दी में पुलिस टीम गई और बच्चों को कैदियों की तरह पुलिस वैन में लाया गया। इससे बच्चे घबरा गए और जोर-जोर से रोने लगे। कई बच्चे मर्सी होम छोड़ना नहीं चाहते थे और वहीं रहने की जिद कर रहे थे। मामले में डीसी ने एडीसी के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया था, जिसमें विभिन्न विभाग शामिल थे। जांच में मर्सी होम में कई अनियमितताएं मिली हैं। यहां पर बच्चों का धर्म परिवर्तन करने संबंधी रिकॉर्ड भी मिला है, जोकि कब्जे में लिया गया है। सभी बच्चों के नाम के आगे ‘मसीह’ शब्द लगाया गया है। अनियमितताओं के चलते मर्सी होम का रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं किया गया है और यहां से बच्चों को रेसक्यू कर पंचकूला व यमुनानगर स्थित शेल्टर होम में ले जाया जा रहा है।
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में सीलिंग तोड़ने के मामले को बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ कोई भी ऐक्शन लेने से इनकार किया है। कोर्ट का कहना है कि मनोज तिवारी द्वारा कोर्ट की अवमानना को कोई सबूत नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने सब कुछ बीजेपी पर छोड़ दिया है कि मनोज तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं है कि तिवारी ने कानून अपने हाथ में लिया है। हम तिवारी के बर्ताव से आहत हैं। एक चुने हुए प्रतिनिधि होने के नाते उन्हें कानून अपने हाथ में लेने की जगह जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए।' सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 30 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले अतिक्रमण और सीलिंग मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सील तोड़ने के मामले में पेश हुए बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को आड़े हाथों लिया था। अदालत ने कहा था कि आप सांसद हैं इसका मतलब ये नहीं है कि कानून को अपने हाथ में लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि आप (मनोज तिवारी) कहते हैं कि एक हजार अवैध कंस्ट्रक्शन हैं, जहां सीलिंग नहीं हुई है तो आप ऐसा करें कि उन प्रॉपर्टी की लिस्ट पेश करें हम आपको सीलिंग ऑफिसर बनाते हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में मनोज तिवारी ने अपना पक्ष रखा था। मनोज तिवारी की ओर से दलील दी गई थी कि मॉनिटरिंग कमिटी लोगों में भय पैदा कर रही है। मौजूदा मामले में मौके पर डेढ़ हजार लोग थे और वहां कुछ भी हो सकता था। इसी कारण उन्होंने सांकेतिक तौर पर सील तोड़ी थी। अदालत के आदेश से वहां सीलिंग नहीं की गई थी, इसलिए अवमानना का मामला नहीं बनता। मॉनिटरिंग कमिटी ने कहा था कि तिवारी मामले में राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में मनोज तिवारी को जेल न भेजकर उन पर भारी जुर्माना किया जाना चाहिए। मनोज तिवारी के वकील विकास सिंह ने कहा था कि असलियत ये है कि मॉनिटरिंग कमिटी लोगों को डराने की कोशिश कर रही है। कमिटी सुप्रीम कोर्ट के नाम पर ये सब कर रही है। चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई की जा रही है।
नई दिल्ली दिल्ली सचिवालय में घुसकर सीएम अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर मिर्ची पाउडर फेंकने के आरोपी अनिल शर्मा का इतिहास उसके जीवन के खुशहाल न होने की ओर इशारा करता है। अनिल अपनी पत्नी से अलग हो चुका है और अपने गुस्सैल मिजाज की वजह से कई बार नौकरी भी छूट गई। फिलहाल अनिल न्यायिक हिरासत में है। 40 वर्षीय अनिल बचपन से ही दिल्ली के नारायणा इलाके में रहता है। उसके पड़ोसी और उनके मकान मालिक बताते हैं कि अनिल छोटी-छोटी बातों को लेकर अकसर अपनी पत्नी और बेटी को मारता-पीटता था और कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहता था। बाद में उसकी पत्नी हरिद्वार में रहने लगी हैं और अनिल अपनी आंटी कुसुम के घर ग्रेटर नोएडा के जहांगीरपुर इलाके में रहता है। अनिल मेरठ यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में ग्रैजुएट है और कई एमएनसी में काम कर चुका है। अपने गुस्सैल मिजाज और खराब व्यवहार की वजह से उसे बार-बार नौकरी छोड़नी पड़ती। बाद में वह गुड़गांव की एक कंपनी में 14,000 रुपये की सैलरी पर बतौर डाटा एंट्री ऑपरेटर काम करने लगा। साल 2016 में अनिल ने सीएम से मुलाकात की कोशिश की थी, लेकिन मुलाकात न हो पाने पर गुस्से में उसने रिसेप्शन के शीशे की खिड़की तोड़ दी थी। अनि ल के मकान मालिक ब्रह्म सिंह बताते हैं, 'मैं अनिल से 6 साल पहले मिला था, जब वह अपनी आंटी के साथ यहां रहता था। वह अंग्रेजी में कविताएं सुनाने में बहुत अच्छा था, पड़ोस के बच्चों को पढ़ाता था। वह अच्छी आदतें डालने की शिक्षा देतेा था।' माता-पिता की मौत के बाद अनिल की परवरिश उसकी आंटी ने की थी। बचपन में वह अपनी आंटी को मां कहकर पुकारता था, वह भी अनिल के व्यवहार से परेशान रहती थीं। वह नारायणा के पास एक सरकारी फैक्टरी में काम करती थीं। मकान मालिक ब्रह्म सिंह ने आगे बताया, 'हमें लगता था कि शादी के बाद अनिल के बर्ताव में बदलाव आएगा, इसलिए हमने हरिद्वार की एक लड़की के साथ शादी फिक्स करा दी। हालांकि, शादी के कुछ साल बाद ही अनिल ने पत्नी के साथ मारपीट शुरू कर दी। बेटी के साथ भी मारपीट करता था।' आंटी कुसुम अनिल को साईं आश्रम लेकर गई थीं, ताकि बर्ताव में सुधार लाया जा सके। इसके बाद वह बार-बार वहां जाने भी लगा और घंटों अपने आप से बातें करता रहता। मंगलवार सुबह भी आश्रम से अपना नाश्ता पैक करवाकर अनिल यह कहकर निकला था कि वह अपनी समस्याएं बताने के लिए सीएम से मिलने जा रहा है। जांच में पुलिस ने पाया कि वह कॉलेज के दिनों से ही गांजा पीने लगा था।
नई दिल्ली दक्षिण दिल्ली से होकर गुजर रही एक क्लस्टर बस में 26 वर्षीय महिला पत्रकार ने उसके सामने कथित तौर पर हस्तमैथुन करने वाले नशे में धुत एक व्यक्ति की पिटाई कर दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार शाम को हुई जब महिला काम के बाद संगम विहार में अपने घर लौट रही थी। गौरतलब है कि इसी वर्ष 7 फरवरी को एक अन्य शख्स + ने रूट नंबर 774 की चलती क्लस्टर बस में महिला सीट पर बैठकर हस्तमैथुन किया था। बाद में उसकी पहचान शहादरा निवासी विपिन के रूप में हुई थी। बहरहाल, पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) विजय कुमार ने बताया कि मामला दर्ज किया गया है और आरोपी की पहचान मुकेश रंजन कुमार (39) के रूप में की गई है। व्यक्ति पर निजी अंग दिखाने की अश्लील हरकत और महिला का शील भंग करने के इरादे से आपराधिक ढंग से बल का प्रयोग करने का मामला दर्ज किया गया। महिला ने कहा कि वह काम के बाद रात करीब साढ़े आठ बजे कापसहेड़ा से वसंत कुंज जाने के लिए बस में चढ़ी और महिपालपुर से चढ़ा व्यक्ति करीब सवा नौ बजे उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। महिला ने बताया, 'मैं महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर बैठी थी। मैंने देखा कि एक व्यक्ति जो महिपालपुर से बस में चढ़ा, मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने मुझे घूरा और अपना निजी अंग छूना शुरू कर दिया। मैंने भी उसे घूरा। इसके बावजूद, वह यह हरकत करता रहा और अपना निजी अंग बाहर निकाल लिया। उसने मेरा हाथ पकड़ने और मुझे खींचने की भी कोशिश की।' महिला ने आरोप लगाया कि इतना सब होने के बाजवूद किसी ने उसकी मदद नहीं की और इसके बजाय तमाशबीन बने रहे। महिला ने कहा, 'जब व्यक्ति ने भागने की कोशिश की तो मैंने उसका कॉलर पकड़ा और उसे धकेलकर अपनी सीट पर बैठा दिया। मैंने उसे सबक सिखाने के लिए उसे चप्पल से मारा। उसने सार्वजनिक वाहन में ऐसा करने की हिमाकत की। मैं आमतौर पर इस बस से आती-जाती हूं लेकिन मैंने ऐसा पहली बार देखा।' महिला ने 100 नंबर पर फोन किया और पुलिस को घटना के बारे सूचना दी जिसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने बताया कि उन्हें छत्तरपुर बस स्टैंड पर झगड़े के बारे में महिला से सूचना मिली जिसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे। आरोपी को चिकित्सा जांच के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि बदरपुर निवासी कुमार रंगपुरी में एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करता है और घटना के समय नशे में था।
नई दिल्ली, 21 नवंबर 2018,दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बीच की तनातनी फिर से देखने को मिली है. ताजा मामला दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर हुए मिर्च अटैक से जुड़ा है. दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के कई विधायकों को लगता है कि केंद्र सरकार के अधीन आने वाली दिल्ली पुलिस उसके नेताओं से संबंधित मामलों में न्यायपरक और तटस्थ जांच नहीं करती है. इसलिए अब दिल्ली सरकार के 21 विधायकों ने अपने मुखिया को इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है. आम आदमी पार्टी के विधायकों की इस चिट्ठी में मांग की गई है कि दिल्ली सरकार कार्य के दौरान शहीद होने पर जवानों और अधिकारियों के परिवार को जो 1 करोड़ रुपए का मुआवजा देती है, वो दिल्ली पुलिस को न दिया जाए. इस चिट्ठी पर आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं. मंगलवार को अरविंद केजरीवाल पर मिर्च पाउडर हमले के बाद दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया था और कहा था कि 'अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि सीएम पर चिली पाउडर नहीं फेंका गया, बल्कि कोशिश की गई. पाउडर नीचे गिरा है. सीएम ऑफिस की ओर से ही पास बना था. आरोपी सुशील की मां बीमार है, वह सहायता के लिए सीएम से मिला था.' दिल्ली पुलिस की इस टिप्पणी के बाद आम आदमी पार्टी के नेता नाराज हो गए और उन्होंने आरोपी को बचाने की दिल्ली पुलिस की साजिश बताई. इसी नाराजगी में पार्टी के 21 विधायकों ने केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर सहायता राशि रोकने की मांग उठाई है. पत्र में लिखा गया है कि 'पिछले चार सालों में जब से दिल्ली में आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार बनी है, ऐसे बहुत सारे हादसे देखने में आए हैं जो वास्तव में हादसे नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश के तहत किए गए षड्यंत्र साबित हुए हैं. पार्टी के नेताओं समेत आप पर भी कई हमले हुए हैं. कुछ हमलों को अगर नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो पिछले चार साल में चार ऐसे बड़े हमले आप पर हुए हैं जो कि नजरअंदाज करने के काबिल नहीं हैं. इसमें पहला हमला सचिवालय के मीडिया सेंटर का है. दूसरा हमला छत्रसाल स्टेडियम में एक प्रोग्राम के दौरान हुआ. तीसरा हमला सिग्नेचर ब्रिज पर बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी और उनके लाए गए गुंडों ने किया गया और चौथा हमला मंगलवार को सचिवालय में आपकी आंखों में मिर्ची पाउडर डालने और आपको शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाने के मकसद से किया गया.' पत्र में विधायकों ने लिखा, 'इन सभी हमलों में एक बात बराबर देखी जा सकती है कि दिल्ली पुलिस का रवैया उसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है. छत्रसाल स्टेडियम हमला मामले दिल्ली पुलिस ने आज तक चार्जशीट दायर नहीं की. दिल्ली सचिवालय में मंत्री इमरान हुसैन पर हुए हमले में दिल्ली पुलिस ने कोई शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया. उसी तरह सिग्नेचर ब्रिज पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और उनके गुंडों के हमले में दिल्ली पुलिस ने हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि उलटा आपके ऊपर ही एफआईआर दर्ज कर ली गई.' पत्र में आगे लिखा गया है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद एक बड़ा ऐलान किया गया था कि अगर दिल्ली के किसी भी सरकारी कर्मचारी की ऑन ड्यूटी, किसी कारणवश निधन हो जाता है, तो दिल्ली सरकार उस व्यक्ति के परिवार को 1 करोड़ रुपए सम्मान राशि देगी लेकिन दिल्ली पुलिस निष्पक्षता से अपना काम नहीं कर रही है. एक पार्टी विशेष के इशारों पर काम कर रही है इसलिए दिल्ली प्रदेश के सभी विधायकों का मानना है कि एक करोड़ की सम्मान राशि का लाभ दिल्ली पुलिस को न दिया जाए. सिसोदिया का आरोप आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता के हित में काम करने से रोकने के लिए बीजेपी उनकी हत्या कराना चाहती है. सिसोदिया ने मंगलवार को केजरीवाल पर मिर्च पाउडर फेंककर किए गए हमले का हवाला देते हुए कहा कि हमलावर बीजेपी का कार्यकर्ता है. उन्होंने कहा, 'केजरीवाल को काम करने से रोकने के सभी हथकंडे नाकाम रहने के बाद बीजेपी मुख्यमंत्री की हत्या कराना चाहती है. कल की घटना इसी साज़िश का नतीजा है.' कांग्रेस की तीखी टिप्पणी आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों की चिट्ठी पर कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली ने कहा, यह चिट्ठी खुद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लिखवाई है. आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली में गवर्नेंस का स्तर लगातार गिरा रही है. यह बजट (एक करोड़ की सहायता राशि) कोई इनका व्यक्तिगत बजट नहीं है, यह दिल्ली की जनता का बजट है.

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