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नई दिल्ली, दिल्ली में पिछले लगभग 10 दिनों से चल रहा सियासी ड्रामा मंगलवार को खत्म हुआ. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गवर्नर हाउस में पिछले नौ दिनों से चल रहे अपने धरने को खत्म किया और एक बार फिर काम पर लौटने की बात कही. लेकिन इसी के साथ अरविंद केजरीवाल पर विपक्षी दलों का वार भी शुरू हो गया. केजरीवाल के ही पुराने साथी योगेंद्र यादव ने भी उनपर निशाना साधा. योगेंद्र यादव ने ट्वीट किया कि खेल खत्म, फुटेज हजम. दस दिन के इस ड्रामे से आखिर दिल्ली की जनता को क्या मिला. मुख्यमंत्री ने अफसरों से अपील की, अफसरों और मंत्रियों की मीटिंग तय हो गई. क्या एलजी ने बैठक बुलाई, हड़ताल तुड़वाई? आखिर राशन डिलीवरी की मांग कहां गई, हां पब्लिसिटी खूब हुई. और क्या चाहिए. आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल के आवास पर पिछले 9 दिनों से चल रहा अपना धरना खत्म कर दिया. उनकी ओर से धरना खत्म किए जाने के बाद मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे के बीजेपी नेताओं और आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने भी अपना धरना समाप्त कर दिया है. धरना खत्म करने से पहले राज्य के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने उन्हें हालात की जानकारी दी थी. इसके बाद केजरीवाल के धरना खत्म करने की जानकारी सामने आ गई. केजरीवाल दिल्ली के एलजी से मिलने को लेकर धरने पर बैठे थे, वह और उनके साथ मौजूद गोपाल राय एलजी से बिना मिले ही लौट आए. इसी दौरान दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. उन्होंने कहा कि ज्यादातर अधिकारी काम पर लौट आए हैं. अधिकारियों ने मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया. मनीष सिसोदिया ने दूसरे मंत्रियों के साथ मंगलवार को कामकाज संभाला था. हालांकि, मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमने एलजी हाउस पर धरना नहीं दिया था, हम LG साहब से मिलने के लिए इंतज़ार कर रहे थे. राशन की बात अब हम जनता के बीच में जाकर ही करेंगे. मनीष सिसोदिया ने कहा कि सभी मंत्रियों की तरफ से कुछ रिव्यू बैठक बुलाई गई है. दलाई लामा को एक कार्यक्रम में दिल्ली आना है, उस आयोजन के लिए कल एक बैठक बुलाई गई है.
नई दिल्ली दिल्ली में आईएएस अधिकारियों द्वारा सरकारी बैठकों में शामिल होने का फैसला करने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को एलजी हाउस पर नौ दिनों से जारी धरने को समाप्त करने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘मंत्रियों द्वारा आज (मंगलवार) बुलाई गई बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे।’’ केजरीवाल अपने मंत्रिमंडलीय साथी गोपाल राय के साथ राज निवास में नौ दिन रुकने के बाद मंगलवार को राजनिवास छोड़ दिया। कथित रूप से हड़ताल पर चल रहे आईएएस अधिकारियों को उनकी सरकार की बैठक में शामिल होने की मांग को लेकर केजरीवाल, सिसोदिया, मंत्रियों सत्येंद्र जैन और गोपाल राय के साथ 11 जून से राजनिवास में धरना दे रहे थे। धरने के बाद मुख्यमंत्री से पहली बातचीत में एलजी अनिल बैजल ने केजरीवाल को पत्र लिखकर उनसे अधिकारियों से तत्काल मिलकर बातचीत के जरिये दोनों पक्षों की परेशानियां दूर करने को कहा। बैजल ने केजरीवाल को पत्र उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के उस पत्र के जवाब में लिखा, जिसमें सिसोदिया ने गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार और नौकरशाहों के बीच बैठक की वकालत की थी। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री के धरने को लेकर आईएएस असोसिएशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान अधिकारियों ने कहा था कि वह किसी हड़ताल पर नहीं हैं और मौजूदा स्थिति को लेकर डरे हुए हैं। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए अधिकारियों से कहा था कि वह उनके परिवार के सदस्य की तरह हैं और साथ ही सुरक्षा का आश्वासन भी दिया था। बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आईएएस अधिकारियों की कथित हड़ताल के विरोध में अपना धरना दे रहे थे। केजरीवाल का कहना था कि आईएएस अधिकारी पीएम मोदी के आदेश पर धरना दे रहे हैं। उन्होंने पीएम और एलजी को पत्र लिखकर आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने की मांग की थी। इसके बाद चार राज्यों के मुख्यमंत्री केजरीवाल के समर्थन में आए थे। नीति आयोग की बैठक में भी चारों मुख्यमंत्रियों ने यह मुद्दा उठाया था।
ई दिल्ली दिल्ली में जारी 'सोफा धरना पॉलिटिक्स' अभी जारी है। सीएम अरविंद केजरीवाल लगातार नौवें दिन एलजी ऑफिस में अनशन पर बैठे हुए हैं। इस बीच, दिल्ली की AAP सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा की गारंटी पर आईएएस अफसरों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं और सीधे सीएम से बातचीत के इच्छुक हैं। उधर, AAP ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गेंद को एलजी के पाले में डाल दिया है। पार्टी ने कहा कि जब सीएम और अधिकारी बात करने को तैयार हैं तो एलजी जल्द ही इस मसले पर बैठक बुलाएं और गतिरोध खत्म करें। AAP का फिर एलजी पर हमला AAP ने एक बार फिर केंद्र सरकार और एलजी पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र बातचीत और संवाद से चलता है लेकिन एलजी बात करने को तैयार नहीं हैं। AAP नेता संजय सिंह ने पीसी ने कहा, 'अभी भी देर नहीं हुई है। दिल्ली की सरकार, सीएम और अधिकारी सब बात को तैयार हैं तो एलजी दोनों पक्षों की बैठक बुलाएं। चार महीने से जो गतिरोध चल रहा है उसे खत्म करवाएं।' सिसोदिया को अस्पताल से मिली छुट्टी, काम पर लौटेंगे इधर, दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन दोनों को मंगलवार को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई है। सिसोदिया ने जल्द ही काम पर लौटने की बात भी कही है। डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर खुद के सेहत में तेजी से सुधार होने की जानकारी देते हुए कहा कि अगर डॉक्टर उन्हें इजाजत देंगे तो वह आज से काम पर लौटेंगे। धरने पर अब केवल केजरीवाल और गोपाल राय अब एलजी हाउस पर धरना देनेवालों में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय ही बचे हैं। IAS असोसिएशन ने एक चिट्ठी लिख सीधे सीएम केजरीवाल से बात करने की बात कही है। गौरतलब है कि सिसोदिया और जैन दोनों सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ एलजी हाउस में धरने पर बैठे हुए थे, वहीं पर इनकी तबीयत बिगड़ गई। आपको बता दें कि यह धरना आईएएस अफसरों की कथित हड़ताल खत्म करवाने और एलजी से कुछ फाइलों पर साइन करवाने के लिए पिछले नौ दिनों से जारी है। सोमवार को तबीयत बिगड़ने के बाद मनीष सिसोदिया को एलएनजेपी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। एलजी के घर सिसोदिया का चेकअप करने पहुंची टीम ने पाया था कि उनका कीटोन लेवल 7.4 तक पहुंच गया था। सिसोदिया से पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की तबीयत बिगड़ गई थी। उनका भी कीटोन लेवल बढ़ गया था। बता दें कि AAP सरकार ने अपनी तरफ से अफसरों को सुरक्षा की गारंटी दी है, जिसका आईएएस अफसरों ने स्वागत किया है। अब गेंद उपराज्यपाल अनिल बैजल के पाले में है, क्योंकि दिल्ली सरकार चाहती है कि आईएएस अफसरों के साथ उनकी मीटिंग उपराज्यपाल के सामने हो जिससे दोनों पक्ष (सरकार और उपराज्यपाल) जिम्मेदारी को लेकर आश्वासन दें सकें। इसके लिए मनीष सिसोदिया ने सोमवार को एलजी के नाम पत्र भी लिखा था। खबरों के मुताबिक, मुख्य सचिव ने भी एलजी से मौजूदा विवाद खत्म करने के लिए कदम उठाने को कहा है। ऐसे दिल्ली की सियासत में पिछले कई दिनों से बढ़ी सरगर्मी मंगलवार को खत्म होने के आसार बढ़ गए हैं।
नई दिल्ली दिल्ली सरकार और आईएएस अफसरों के बीच लंबे वक्त से चल रहा गतिरोध जल्द खत्म होने के आसार दिख रहे हैं। आप सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा की गारंटी पर आईएएस अफसरों ने सकारात्मक रुख दिखाया, जिसके बाद अब गेंद उप राज्यपाल अनिल बैजल के पाले में है। दरअसल, डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने सोमवार को इससे जुड़ा एक पत्र उपराज्यपाल को भेजा था। जिसमें लिखा था कि दिल्ली सरकार चाहती है कि आईएएस अफसरों के साथ उनकी मीटिंग उपराज्यपाल के सामने हो। जिससे दोनों पक्ष (सरकार और उपराज्यपाल) अपने-अपने दायरों की जिम्मेदारी लेकर आश्वासन दें। ऐसे में अब मीटिंग का वक्त और जगह दोनों उप राज्यपाल को तय करने हैं। आईएएस अफसरों के एक ग्रुप ने सोमवार शाम को एक मीटिंग भी की थी। उसमें सीएम द्वारा आईएएस अफसरों से कथित हड़ताल खत्म करने की जो अपील की गई थी, उसपर बातचीत हुई थी। मीटिंग के बाद एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेशों) के अधिकारियों की असोसिएशन ने ट्वीट कर कहा, 'दिल्ली काम पर, हड़ताल पर नहीं। जीएनसीटीडी के अधिकारी माननीय मुख्यमंत्री की अपील का स्वागत करते हैं। हम दोहराते हैं कि हम पूर्ण समर्पण और उत्साह के साथ काम करना जारी रखेंगे। हम अपनी सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए ठोस हस्तक्षेप की आशा में हैं। हम इस मुद्दे पर माननीय मुख्यमंत्री के साथ औपचारिक चर्चा करने को तैयार हैं।' फिलहाल मीटिंग का वक्त तय नहीं है, लेकिन अगर मीटिंग हुई और उसमें पुराने मुद्दे उठे तो हंगामा होना तय है। उप राज्यपाल पर दबाव बनाने के लिए केजरीवाल ने मंगलवार को भी एक ट्वीट किया। केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यपाल 8 दिनों में दिल्ली के लिए 8 मिनट भी नहीं निकाल पाए हैं। केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा, 'गुड मॉर्निंग दिल्ली, माननीय उपराज्यपाल से मिलने के वक्त मांगते हुए हमें आठ दिन हो गए। डेप्युटी सीएम और स्वास्थय मंत्री तबीयत बिगड़ने की वजह से हॉस्पिटल शिफ्ट हो चुके हैं। माननीय उप राज्यपाल आठ दिनों में दिल्लीवालों के लिए सिर्फ आठ मिनट नहीं निकाल पाए हैं।' बता दें कि केजरीवाल आईएएस अफसरों की कथित हड़ताल और डोर स्टेप राशन डिलिवरी की फाइल पर उप राज्यपाल के साइन लेने के लिए एलजी हाउस में धरने पर हैं। देखना होगा कि मीटिंग के बाद इनका समाधान होता है या नहीं।
नई दिल्ली,आईएएस अफसरों में चल रही तनातनी के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले आठ दिनों से उपराज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में धरने पर बैठे हैं. केजरीवाल सरकार की मांग है कि एलजी दिल्ली के IAS अफसरों को हड़ताल वापस लेने का आदेश दें. लेकिन अभी तक केजरीवाल की मांग पर एलजी ने कोई आश्वासन नहीं दिया है. माना जा रहा है कि आज इस मामले में कोई बड़ा फैसला किया जा सकता है. भूख-हड़ताल पर बैठे स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की रविवार को अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और गोपाल राय अभी भी उपराज्यपाल के दफ्तर पर जमे हुए हैं. दोनों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए रविवार को कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, केरल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने पीएम नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की. इन चारों राज्यों के मुख्यमंत्री ने अपना समर्थन केजरीवाल को दिया और कहा कि एक चुनी हुई सरकार के खिलाफ दिल्ली में जो कुछ हो रहा है, वो गलत है. दूसरी ओर केंद्र सरकार या फिर एलजी की तरफ से इस मामले में पहल का कोई संकेत नहीं दिया गया है. ऐसे में आम आदमी पार्टी के पास अब खुद इस धरने को खत्म करने का ही विकल्प बचा है. सत्येंद्र जैन अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं और गोपाल राय की सेहत में लगातार गिरावट देखी जा रही है. अगर इसी तरह के हालात बने रहे तो केजरीवाल और सिसोदिया की सेहत पर भी असर पड़ सकता है. यही वजह है कि पार्टी कोई ऐसा रास्ता निकालने में जुटी हुई है जिससे ये धरना भी खत्म हो जाए और उसके नेता जीत का दावा भी कर सकें. आम आदमी पार्टी के आला नेताओं को लगता है कि जिस उद्देश्य वो धरने पर बैठे थे, वो भले पूरा न हुआ हो लेकिन जिस तरह से बाकी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल का समर्थन किया और केंद्र को इस गतिरोध के लिए जिम्मेदार ठहराया, उससे दिल्ली सरकार की मांगों को बल मिला और जनता में धरने का सही मैसेज गया. यही नहीं, रविवार को प्रधानमंत्री आवास के घेराव के लिए दिल्ली की सड़कों पर जो भीड़ दिखी, उससे भी पार्टी के हौसले बुलंद हैं. देश की कई राजनीतिक पार्टियों ने इस मामले में आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को समर्थन दिया है. इन सबके बीच इस समय केजरीवाल के आवास पर पार्टी की बैठक हो रही है. जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. सूत्रों की मानें तो पार्टी इस बैठक में धरने को लेकर बड़ा फैसला कर सकती है. अगर बिना आईएएस की हड़ताल टूटे केजरीवाल धरने को खत्म करने का ऐलान करते हैं तो फिर पार्टी के लिए यह एक तरह से पीछे जाना होगा. ऐसे में केजरीवाल सरकार की अब कोशिश होगी कि धरने को खत्म करने के लिए ऐसा रास्ता अपनाया जाए, जिससे भूख-हड़ताल भी खत्म हो जाए और दिल्ली की जनता में केजरीवाल और उनके मंत्रियों की छवि भी गलत न बने. यही वजह है कि कल जब आईएएस अफसरों ने प्रेसवार्ता कर ऐलान किया कि वे तब तक दिल्ली सरकार के मंत्रियों की रुटीन बैठकों में नहीं जाएंगे जब तक उन्हें सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिलता है तो केजरीवाल ने तुरंत वीडियो मैसेज जारी कर साफ कहा कि अफसर उनके परिवार के सदस्यों की तरह हैं और वे उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी देते हैं. केजरीवाल की इस अपील पर अभी तक आईएएस एसोसिएशन की प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन अगर अफसर दिल्ली के मुख्यमंत्री पर भरोसा कर अपनी कथित हड़ताल तोड़ देते हैं तो ये केजरीवाल के लिए जीत की तरह होगा. दूसरी ओर ये मामला अब हाईकोर्ट चला गया है और कोर्ट की शुरुआती टिप्पणी केजरीवाल के समर्थन में नहीं कही जा सकतीं. बीजेपी और कांग्रेस भी कम से कम दिल्ली में ये माहौल बनाने में जुटी हैं कि केजरीवाल के धरने से दिल्ली का विकास रुक गया है और काम ठप पड़ गए हैं. ऐसे में पार्टी अगर इस धरने को जारी रखती है तो उसके लिए जनता को जवाब देना मुश्किल हो सकता है. ये भी वजह है कि अब केजरीवाल के सामने इस धरने को जल्द से जल्द खत्म करने के अलावा विकल्प नहीं बचा है.
नई दिल्ली,दिल्ली में चार महीने से भी ज्यादा समय से चल रही दिल्ली सरकार और IAS अफसरों में चल रही तनातनी सोमवार को खत्म हो सकती है. दोनों ही पक्षों ने अब नरमी के संकेत दिए हैं. रविवार शाम को ‘आप’ के मंडी हाउस से संसद मार्ग तक के मार्च के बाद केजरीवाल ने IAS अफसरों से एक बार फिर काम पर लौट आने की अपील की. सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल की अपील पर IAS अधिकारी सोमवार को इस पर फैसला ले सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक सोमवार को सभी IAS अफसर आपस में राय बात कर कोई फैसला ले सकते हैं. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार को दोनों पक्षों में सुलह हो सकती है. रविवार दोपहर में IAS अफसरों की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता पर केजरीवाल ने कहा कि आपकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि IAS अफसर हमारे परिवार का हिस्सा हैं. अफसर काम पर लौट आएं. उनकी पूरी सुरक्षा की जाएगी. इससे पहले IAS एसोसिएशन ने केजरीवाल के धरने के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. साथ ही केजरीवाल के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि दिल्ली में आईएएस अधिकारी हड़ताल पर नहीं हैं. वो रोज़ाना नियमित रूप से दफ्तर आ रहे हैं और अपना काम कर रहे हैं. एसोसिएशन ने कहा कि अधिकारी जिन मीटिंग में सेफ फील नहीं करते हैं, वहां नहीं जाते हैं. सुरक्षा और आत्मसम्मान सबसे पहले आता है और नियम-कायदे बाद में. हाल ही में चीफ सेक्रेटरी के साथ जो बर्ताव हुआ, उससे अधिकारियों का मनोबल गिरा है. IAS एसोसिएशन की मनीषा सक्सेना ने कहा कि दिल्ली में आईएएस अधिकारियों के हड़ताल की खबर बिल्कुल झूठी और निराधार है. हम सरकार की बैठक में शामिल हो रहे हैं. सभी विभाग अपना काम कर रहे हैं. हममें से कुछ अधिकारी तो छुट्टियों में भी काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'चीफ सेक्रेटरी के साथ जो हुआ, उसके बाद हम सब भयभीत हैं. डर सिर्फ IAS में ही नहीं बल्कि हर सरकारी अफसर में है. सभी अधिकारी-कर्मचारी लंच के समय पांच मिनट का मौन रखते हैं. हमारा विरोध प्रदर्शन बस इतना ही है और हम इसे जारी रखेंगे.' उन्होंने बताया कि दिल्ली में राशन की डोर टू डोर डिलीवरी की फाइल आईएएस का पास लंबित नहीं हैं. आईएएस एसोसिएशन ने यह भी स्वीकार किया कि अधिकारी रुटीन मीटिंग में नहीं जाते हैं. एसोसिएशन की ओर से कहा गया, हम जिन मीटिंग में सेफ फील नहीं करते वहां नहीं जाते हैं. सुरक्षा और आत्मसम्मान सबसे पहले आता है, नियम-कायदे बाद में. एसोसिएशन के मुताबिक मीटिंग में जाने के लिए महिला आईएएस अफसर सुरक्षा मांगती हैं. लेकिन हम मीटिंग की गोपनीयता को देखते हुए सुरक्षागार्ड के साथ नहीं जा सकते हैं. आईएएस असोसिएशन ने कहा कि मीटिंग में कैमरा लगा होने से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल सकती, सोच और व्यवहार बदलने की जरूरत है. चीफ सेक्रेटरी के साथ जो हुआ उसके बाद सरकार की ओर से कोई हमतक नहीं पहुंचा. मुख्यमंत्री हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करें, ये हमारी प्रार्थना है. आईएएस अधिकारी वर्षा जोशी ने कहा, 'हम डरे हुए हैं और पीड़ित महसूस कर रहे हैं. हमें राजनीतिक कारणों से इस्तेमाल किया जा रहा. हमें हमारा काम करने दें. अब केजरीवाल की अपील के बाद उम्मीद जताई जा रही कि सोमवार को इस पर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
नई दिल्ली, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर आईएएस अफसरों से काम पर लौटने की अपील की है. केजरीवाल ने कहा कि आईएएस अफसर हमारे परिवार का हिस्सा हैं. उन्हें सुरक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार का विरोध आईएएस अफसर बंद कर दें. इससे पहले आप ने पीएम आवास तक मार्च करने की कोशिश की. उन्हें संसद मार्ग पर ही रोक दिया गया. दिल्ली में पिछले 7 दिन से केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रहे गतिरोध के बीच आज शाम आप नेता प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग का घेराव करने इकट्ठे हो गए. प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने पांच स्टेशनों को बंद कर दिया. जुलूस मंडी हाउस से पीएम हाउस तक जाना था. डीएमआरसी ने एहतियातन पहले लोक कल्याण मार्ग स्टेशन पर दोपहर 12 बजे से प्रवेश व निकासी बंद की. इसके बाद केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन, पटेल चौक व जनपथ स्टेशन भी दोपहर बाद दो बजे से बंद हो गए. लाइव अपडेट्स 07:10 PM- आप नेता संजय सिंह ने कहा- अब हम डोर डू डोर जाकर लोगों के हस्ताक्षर लेंगे. 06:30 PM- दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग पर आप के कार्यकर्ताओं को रोका. 06:03 PM- दिल्ली पुलिस ने कहा- प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग से आगे नहीं जाने दिया जाएगा. 05:47 PM- पीएम हाउस की ओर बढ़ते आप कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे- तानाशाही नहीं चलेगी, LG शाही नहीं चलेगी. 05:30 PM- पीएम मोदी के आवास की ओर बढ़े आप के सैकड़ों कार्यकर्ता. 05:02 PM- शाम साढ़े पांच बजे पीएम आवास 7 लोक कल्याण मार्ग की ओर कूच करेंगे आप कार्यकर्ता. 04:45 PM- दिल्ली शिक्षक संघ भी पहुंचा सीएम अरविंद केजरीवाल के समर्थन में मंडी हाउस, आप के प्रदर्शन में आए साथ.
नई दिल्ली दिल्ली में आईएएस अधिकारियों की कथित हड़ताल खत्म कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे अरविंद केजरीवाल रविवार को हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं हुए। मीटिंग के बीच केजरीवाल को एक गलतफहमी हो गई थी, जिसपर नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने तुरंत सफाई दी। दरअसल, नीति आयोग की इस बैठक में गैरबीजेपी राज्यों के मुख्यमंत्री भी पहुंचे थे, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री वहां नहीं गए। लेकिन मीटिंग ने बीच में खबर आई कि दिल्ली सरकार की तरफ से उपराज्यपाल अनिल बैजल बैठक में पहुंचे हैं। यह सुनकर केजरीवाल भड़क गए। उन्होंने ट्वीट किया, 'संविधान का कौन सा प्रावधान उपराज्यपाल अनिल बैजल को मुख्यमंत्री की ताकतों पर कब्जा करने का हक देता है? मैंने उन्हें अपनी जगह पर मीटिंग में जाने की इजाजत नहीं दी थी।' इसपर अमिताभ कांत ने तुरंत सफाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, 'यह बिल्कुल गलत है। नीति आयोग की चौथी मीटिंग में दिल्ली ने उपराज्यपाल शामिल नहीं हुए थे।' सुब्रमण्यन स्वामी ने केजरीवाल को कहा 'नक्सली' धरने पर बैठे केजरीवाल को बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने नक्सली कहा। उन्होंने यह भी पूछा कि ममता बनर्जी, एचडी कुमारस्वामी, चंद्रबाबू नायडू और पिनराई विजयन उन्हें सपॉर्ट क्यों करते हैं? बता दें कि आईएएस की कथित हड़ताल के मुद्दे पर चारों ने केजरीवाल का समर्थन किया था। बता दें कि खास बातचीत में जब केजरीवाल से पूछा गया था कि वह नीति आयोग की बैठक में जाकर पीएम के सामने अपनी बात क्यों नहीं रखते? इसपर उन्होंने कहा था, 'मैं ऐसी कई मीटिंग में जाता हूं, जहां पीएम आते हैं लेकिन वह मुझसे बात ही नहीं करते, मेरी तरफ देखते तक नहीं। ऐसी अधिकतर बैठकों में दिल्ली के प्रतिनिधि को बोलने तक का मौका नहीं दिया जाता।' इससे पहले केजरीवाल आईएएस अधिकारियों की कथित हड़ताल खत्म कराने के लिए पीएम मोदी तक से गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी चाहें तो एक मिनट में सब ठीक हो सकती है।
नई दिल्ली दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री एलजी आवास पर धरने पर हैं। वे आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म करने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अधिकारी मीटिंग में आने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें बदतमीजी और मारपीट का डर है। अधिकारियों की ओर से बार-बार चीफ सेक्रटरी के साथ हुई कथित मारपीट की बात भी कही जा रही है। हालांकि, अरविंद केजरीवाल ने एनबीटी को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि कोई मारपीट नहीं हुई थी। बातचीत के मुख्य अंश धरने को एक हफ्ता हो गया है। कोई हल होता नजर नहीं आ रहा। अगर एलजी और केंद्र सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हुई तो क्या सोचा है आगे? आईएएस अफसरों की हड़ताल ने दिल्ली में कई काम रोक दिए हैं। अफसर किसी मीटिंग में नहीं जा रहे। किसी मंत्री का फोन नहीं उठा रहे। यह बेहद अजीब स्थिति है। जब दिल्ली में हमारी सरकार बनी थी तब मोदी सरकार ने आदेश पारित करके अफसरों पर से दिल्ली सरकार की सारी पावर छीन ली थी। आज दिल्ली सरकार अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। केंद्र के इशारे पर दिल्ली सरकार का काम ठप करने के लिए ये हड़ताल करवाई जा रही है। दिल्ली के लोग किसी भी हालत में केंद्र सरकार को ये हड़ताल जारी नहीं रखने देंगे। दिल्लीवाले लड़ेंगे और जीतेंगे। अधिकारी कह रहे हैं कि वह हड़ताल पर नहीं हैं, काम कर रहे हैं। आप कह रहे हैं कि वह हड़ताल पर हैं। किस पर भरोसा किया जाए? अभी शुक्रवार को ही शाम 5 बजे हमारे पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने दिल्ली में पर्यावरण पर मीटिंग बुलाई। उसमें पर्यावरण सचिव और प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष को आना था। दोनों में से कोई नहीं आया। इनकी हड़ताल की वजह से कच्ची कॉलोनियों में चल रहे गली-नाली के सारे काम या तो ठप हो गए हैं या धीमे हो गए हैं। दिल्ली में प्रदूषण बड़ी समस्या है। पहले हर 15 दिनों में प्रदूषण की समीक्षा और प्लानिंग बैठक होती थी। अफसरों की हड़ताल से पिछले 3 महीनों से ये मीटिंग नहीं हो पाई। आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा गया कि अधिकारी मीटिंग पर नहीं आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी बार-बार उस घटना का जिक्र कर रहे हैं, जिसमें कथित तौर पर चीफ सेक्रटरी के साथ बदतमीजी की गई। ऐसे में मसला कैसे सुलझेगा? चीफ सेक्रटरी पर कभी कोई हमला नहीं हुआ था। आम आदमी पार्टी कुछ भी कर सकती है, कभी हिंसा नहीं कर सकती। मेरी सरकार को अस्थिर करने और मुझे जान बूझकर फंसाने के मकसद से हमले की घटना की एक मनगढ़ंत कहानी बनाई गई थी। क्योंकि मामला कोर्ट में है, मैं चाहूंगा कि सभी पक्षों को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। आपके कहे अनुसार अधिकारी फरवरी से काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप अचानक जून में क्यों इतना ऐक्टिव हुए। कहीं चुनाव की वजह से तो नहीं? ये कहना गलत है। हम इस मसले को बातचीत से सुलझाना चाहते थे। पिछले तीन महीनों में एलजी को काफी समझाने की कोशिश की। मैंने उनसे 4 बार मुलाकात की। मनीष ने 4 बार मुलाकात की। गोपाल राय 3 बार और सत्येंद्र ने 3 बार मुलाकात की। मैंने एलजी को चिट्ठी लिखी, मनीष जी ने 2 चिट्ठी लिखी। हर बार एलजी साहब एक ही बात कहते थे, मुझे एक हफ्ते का टाइम दो। मैं इसको ठीक करता हूं। आखिर तक आते-आते हमें यकीन हो गया कि ये हमें टरका रहे हैं। ये चाहते ही नहीं की हड़ताल खत्म हो। केंद्र सरकार ने ही एलजी के जरिए ये हड़ताल करवाई है। तब हमें साफ हो गया कि इनका मकसद है कि हमारा बचा हुआ कार्यकाल इसी तरह से हमारी सरकार को पंगु बना कर निकाल दें। तब हमें लगा कि कुछ करना पड़ेगा। कल नीति आयोग की बैठक है। क्या दिल्ली से कोई प्रतिनिधि जाएगा? मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दिल्ली के लोगों की तरफ से गुहार की है कि नीति आयोग की मीटिंग से पहले दिल्ली के आईएएस अफसरों की हड़ताल खत्म करवाएं। पीएम चाहें तो हड़ताल एक मिनट में खत्म कर सकते हैं। आप कल नीति आयोग की बैठक में जाकर सीधे पीएम से बात क्यों नहीं करते? मैं ऐसी कई मीटिंग में जाता हूं, जहां पीएम आते हैं लेकिन वह मुझसे बात ही नहीं करते, मेरी तरफ देखते तक नहीं। ऐसी अधिकतर बैठकों में दिल्ली के प्रतिनिधि को बोलने तक का मौका नहीं दिया जाता। पुडुचेरी के कांग्रेस CM आपके सपोर्ट में हैं। लेकिन दिल्ली में कांग्रेस नेता धरने को गलत बता रहे हैं। क्या किसी कांग्रेस नेता से आपकी बात हुई। कांग्रेस के इस कदम को आप किस तरह देखते हैं? जिस तरह से इस मुद्दे पर खुलकर कांग्रेस बीजेपी का समर्थन कर रही है, उसे लेकर लोगों में काफी चर्चा और गुस्सा है। बीजेपी नेता सीएम आवास पर धरने पर हैं। कुछ भूख हड़ताल पर भी। उनकी मांग को आप किस तरह देखते हैं। अगर आप सही कर रहे हैं तो क्या उनका कदम भी आपकी नजर में जायज है? वह धरने पर क्यों हैं, मेरी समझ के बाहर है। एक तरफ वो कह रहे हैं कि अफसरों की हड़ताल नहीं है। सभी अफसर अच्छा काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ ये लोग कह रहे हैं कि बिजली और पानी की समस्या है। अगर हड़ताल नहीं है और अफसर अच्छा काम कर रहे हैं तो ये लोग अफसरों से काम क्यों नहीं करवा लेते? मैं तो खुद ही मान रहा हूं कि पानी की समस्या है। पर जब भी मैं इसके लिए अफसरों को फोन करता हूं, वो नहीं उठाते। उसके लिए ही तो मैं यहां आया हूं ताकि अफसरों की हड़ताल खत्म हो और हम इन समस्याओं का समाधान कर सकें। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भूख हड़ताल के दौरान सत्येंद्र जैन का वजन बढ़ा है क्या है हकीकत? यह सरासर गलत है। अगर रास्ता नहीं निकला तो? आखिर कब तक बैठे रहेंगे? भूख हड़ताल भी चल रही है, कैसे खत्म होगी यह? पहले हमें समझना होगा कि ये हड़ताल क्यों करवाई जा रही है। ढेरों अड़चनें लगाने के बावजूद दिल्ली सरकार ने 3 साल में शानदार काम किया है। हमारे विरोधी भी मानते हैं कि सरकार ने 3 साल में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी पर शानदार काम किया है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर आम आदमी पार्टी की सरकार 3 साल में दिल्ली के सरकारी स्कूलों को ठीक कर सकती है, प्राइवेट स्कूलों की फीस नहीं बढ़ने देती, सरकारी अस्पतालों में दवाई टेस्ट और इलाज मुफ्त कर दिया, तो मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकारें ये क्यों नहीं कर पाईं? अगर हमने दिल्ली में बिजली सस्ती कर दी, तो मोदी जी 4 साल में पूरे देश में बिजली सस्ती क्यों नहीं कर पाए। बीजेपी सरकारें केंद्र और राज्यों में विफल रही हैं। उन्होंने ये तरीका निकाला है कि केजरीवाल को काम ही न करने दो। इसीलिए इन्होंने आईएएस अफसरों की हड़ताल करवाई है। पर मैं दिल्ली की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि एक तरफ मैं जनता के लिए सरकार में खूब काम करता रहूंगा और जब जरूरत पड़ेगी, मैं आपके हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ूंगा। जब तक ये लोग आईएएस अफसरों की हड़ताल नहीं खत्म करते, हम नहीं हटेंगे। ये लोग दिल्ली की जनता का अपमान कर रहे हैं। दिल्ली की जनता को ब्लैकमेल कर रहे हैं। हम ये कतई नहीं होने देंगे। आप केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं तो यह आरोप पीएम पर ही हुए? हम दिल्ली की जनता अपने पीएम से हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि इस हड़ताल को तुरंत खत्म करवाएं। हड़ताल से दिल्ली के लोगों को परेशानी हो रही है, दुनिया में भी नाम खराब हो रहा है। दुनिया देख रही है कि किस तरह से दिल्ली के अफसर काम नहीं कर रहे। दिल्ली के मुख्यमंत्री उनकी हड़ताल खत्म करने के लिए 6 दिन से बैठे हैं। पीएम चाहें तो एक मिनट में इन अफसरों की हड़ताल खत्म हो सकती है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारे काम की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व सेक्रेटरी जनरल कोफी अनान मोहल्ला क्लीनिक देखने आ रहे हैं। ये देश के लिए गर्व की बात है। राशन की डोर स्टेप डिलिवरी की फाइल को लेकर काफी हल्ला हुआ। एलजी पास नहीं कर रहे पर एलजी ने कहा कि फाइल तो मंत्री के पास है। क्या है माजरा? हम दिल्ली में राशन की एक नई व्यवस्था लागू करना चाहते हैं। अभी लोगों को हर महीने राशन की दुकान पर जाना पड़ता है। दुकान वाला दुकान नहीं खोलता, कम तौलता है। ज्यादा पैसे लेता है। मिलावट करता है। लोगों को बहुत दिक्कत होती है। अब हम ऐसी व्यवस्था लागू करेंगे कि हर महीने राशन सीधे आपके घर पहुंचा देंगे। इससे समस्या ठीक हो जाएगी। हमने 2 बार एलजी को फाइल भेजी। उन्होंने मना कर दिया। सोमवार को जब हम एलजी से मिले तो उन्होंने साफ कहा कि वो इसको मंजूरी नहीं देंगे। तो फिर फाइल क्यों भेजें। एक बार एलजी साहब मान जाएं तो हम फाइल तुरंत भेज देंगे।
नई दिल्ली आप के नेता और कार्यकर्ता उपराज्यपाल के आवास पर धरने पर बैठे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल + और उनके मंत्रियों को तवज्जो नहीं देने के खिलाफ रविवार को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालेंगे। आप के प्रवक्ता पंकज गुप्ता ने शनिवार को कहा कि दिल्ली एक ऐसा विशाल प्रदर्शन करने की तैयारी में है, जैसा हमने पहले किया था, जिसने इसके राजनीतिक परिदृश्य को बदलकर रख दिया था। उन्होंने कहा कि हमने पूरी कोशिश की, लेकिन वे सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। गुप्ता ने कहा कि न केवल पार्टी कार्यकर्ता, बल्कि आम जनता भी इस मार्च में हिस्सा लेगी। यह मार्च रविवार को मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि आज ईद मनाया जा रहा है, जिसमें सब एक दूसरे से गले मिलते हैं, लेकिन एलजी को ईद के मौके पर भी समय नहीं मिला कि वो सीएम केजरीवाल या अनशन पर बैठे मंत्रियों से मिल सकें। हर राजनैतिक दलों ने अपना समर्थन हमें दिया है। सबका मानना है कि चुनी हुई सरकार को अपने ढंग से काम करने देना चाहिए। छह साल पहले एक आंदोलन आया और उस आंदोलन ने तख्तापलट कर दिया। आप नेता ने आगे कहा कि कांग्रेस दिल्ली की जनता के साथ न खड़ी होकर बीजेपी + की टीम हो गई है। जहां एक तरफ सारी राजनीतिक पार्टियां साथ दे रही हैं, वहीं कांग्रेस साथ नहीं दे रही है। रविवार को पीएम आवास का घेराव कर रहे हैं। शाम चार बजे मंडी हाउस पर जमा होंगे और फिर पीएम आवास तक जाएंगे। पीएम के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे। इस बीच अरविंद केजरीवाल को समर्थन देने के लिए 4 राज्यों के सीएम भी दिल्ली पहुंच गए हैं। ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, पी. विजयन और एचडी कुमारस्वामी ने दिल्ली सरकार को समर्थन दिया है। चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली के सीएम के आवास पर जाकर उनकी पत्नी से मुलाकात की और समर्थन का भरोसा दिया।

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