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राजस्थान मेंलोकसभा की दो और विधानसभा की एक सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की करारी हार से सिर्फमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की छवि ही धुंधली नहीं हुई है, बल्कि राज्य मेंविधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहलेआये ये नतीजे भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के लिए भी गहरी चिंता का विषय है। थोड़े दिनों पहले गुजरात में भाजपा को सौ सीटों केअंदर समेट देने वाली कांग्रेस के लिए निश्चित ही राजस्थान के ये नतीजे बेहद उत्साहवर्धक हैं। ये पार्टी के लिए संजीवनी की तरह हैं। कांग्रेस को मिली इस सफलता का श्रेय निश्चिततौर पर युवा नेता सचिन पायलट को जाता है जिन्होंने खुद चुनाव न लड़ राज्य में संगठन को मजबूत करने का काम किया। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के योगदान को कम आंकना भी बड़ी गलती होगी। कांग्रेस के लिए इस जीत का संदेश यह है कि अगर राज्य में युवा नेताओं को आगे बढऩे का मौका दिया जाए और उम्मीदवारों के चयन से लेकर मुद्दों तक के चयन में सावधानी बरती जाए तो पस्त पड़ी कांग्रेस को संजीवनी मिल सकती है। लेकिन राजस्थान के उलट पश्चिम बंगाल में लोकसथा और विधानसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में हालांकि सतारूढ़ तूणमूल कांग्रेस विजयी रही है, लेकिन भाजपा के लिए अच्छी खबर यह है कि वहां की दोनों सीटों पर वह तूणमूल के बाद दूसरे स्थान पर रही है। जबकि कांग्रेस अपनी जमानत तक बचाने में भी विफल रही है। पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में भाजपा अगर वाम मोर्चा और कांग्रेस को पीछे छोड़आगेबढ़ रही है तो यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। भाजपा के इसी उभार केचलते ममता को अपनी रणनीति बार बार बदलनी पड़ रही है। साथ ही यह कांग्रेस के लोकसभा चुनाव में सता पाने में बड़ा झटका है। इसके बावजूद अलवर,अजमेर और मांडलगढ़ में हुई हार भाजपा के लिए बड़ा झटका है। क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में राजस्थान में वह दो तिहाई बहुमत के साथ सता में लौटी थी और लोकसभा चुनाव में सभी पच्चीस सीटेंउसकी झोली आई थी । लेकिन नतीजा बताता है कि वसुंधरा सरकार की बढ़ती अलोकप्रियता और पद्मावती आनंदपालसिंह एनकाउंटर विवाद पर पार्टी का ढुलमुल रवैया भाजपा के लिए भारी पड़ा है। पिछले दो साल में रतलाम,गुरदासपुर और अब अलवर और अजमेर लोकसभा सीटों का उसके हाथ से निकलना बताता हैकि उतर भारत के जिस हिन्दी पट्टी वाले इलाकेने 2014 में भाजपा की शानदार जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी , वहां अब तस्वीर बदल रही हैऔर मतदाताओं पर अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए उसेनई रणनीति बनानी होगी । बेशक इन नतीजों के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता ,पर भाजपा के लिए यह पिछले रिकार्ड को दोहराने में बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कहा जाता है कि वे चुनाव नतीजों को पलटने में माहिर हैं। चुनाव के आते आते वे ऐसा मास्टर स्ट्रोक चलते हैं जिसकी काट विपक्ष के पास नहीं होती। मदन अरोड़ा,स्वतंत्र पत्रकार
हनुमानगढ़। 71वें स्वतंत्रता दिवस पर राजकीय नेहरू मैमोरियल पीजी महाविद्यालय में आयोजित जिला स्तरीय मुख्य परेड कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप, जिला कलक्टर श्रीप्रकाश राजपुरोहित व जिला पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल ने स्वास्थ्य निरीक्षक संत कुमार बिश्नोई को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय में गत 21 वर्षों से कार्यरत संत कुमार बिश्नोई के निर्देशन में परिवार कल्याण कार्यक्रम में हनुमानगढ़ 2001 से अव्वल आ रहा है। परिवार कल्याण कार्यक्रम में इस वर्ष जिला तीसरे स्थान पर रहा। जिला प्रशासन द्वारा श्री बिश्नोई को सम्मानित करने पर उन्हें बधाइयां मिल रही है।
स्वयंभू ईमानदार अरविंद केजरीवाल के एक के बाद एक सामने आ रहे घोटाले उनके प्रधानमंत्री बनने के सपनों को खाक करने वाले साबित होने वाले हैं। जिस तरह गोवा के बुद्धिमान मतदाताओं ने केजरीवाल की काली करतूतों और मंशाओं को समझ उन्हें धूल चटाई। अगली बारी अब राजस्थान की है। केजरीवाल एंड कम्पनी को लग रहा है कि राजस्थान उन्हें हाथों हाथ लेगा। सता नहीं तो विपक्ष का नेता तो अवश्य बना देगा। लेकिन राजस्थान में आप की भी वही हालत होगी जो बसपा की रही है। आप के दो चार दमदार उम्मीदवार अपने दम पर भले ही चुनाव जीत जायें बाकि सबकी जमानत जब्त होना तय है। आप का विज्ञापन घोटाला चर्चा में रहा हैलेकिन अब इसकी जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट सामने आने और राज्यपाल द्वारा विज्ञापनों पर दिल्ली की जनता की खून पसीने की कमाई के खर्च किये गये करीब 97 करोड़ रूपयें की राशि आप से वसूलने के आदेश दिये जाने के बाद साफ हो गया है कि केजरीवाल एंड कंपनी किसी तरह से भ्रष्टाचार करने में अन्य राजनीतिक दलों से पीछे नहीं है। आप ने दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में सरकारी खजाने से केजरीवाल को प्रोजक्ट करने और पार्टी के प्रचार और प्रसार के लिए विज्ञापन प्रकाशित करवाये । इनमें राजस्थान में भी करीब 12 पेज के रंगीन विज्ञापन शामिल हैं। इन विज्ञापनों में तीन पेज के विज्ञापन ऐसे थे जिन पर मनीष सिसोदिया की फोटो के साथ कहा गया था कि प्रधानमंत्री ने काफी रोकने का प्रयास किया लेकिन आप ने फिर भी कर दिखाया। शेष 9 पेज के विज्ञापन बिना किसी एजेंसी का हवाला दिये समाचारों के रूप में प्रकाशित करवाये गये। जिनमें केजरीवाल सरकार की कथित उपलब्धियों का बखान किया गया था। जांच कमेटी ने इन विज्ञापनों को उच्चतम न्यायालय की गाइड लाईन का स्पष्ट उल्लघंन पाया और पाया कि केजरीवाल सरकार नें सरकारी खजाने का दुरूपयोग देश के विभिन्न राज्यों में पार्टी के प्रचार और प्रसार पर किया जबकि ऐसा पार्टीफंड से किया जाना चाहिये था। केजरीवाल भ्रष्टाचार रोकनें की बड़ी बड़ी डींगें हांकतें रहे हैं लेकिन खुद भ्रष्टाचार करने में बेशर्मी की हद तक जा इसके लिए कुतर्क देते रहे हैं। विज्ञापन घोटाले पर केजरीवाल एंड कंपनी दलील दे रही है कि मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ सहित कई अन्य सरकारें अपने प्रदेश से बाहर विज्ञापन प्रकाशित करवाती हैं । अगर वो गलत नहीं तो हमारा विज्ञापन प्रकाशित करवाना कैसे गलत हो सकता है। केजरीवाल भूल जाते हैं कि भाजपा शासित राज्यों के विज्ञापनों में न तो प्रधानमंत्री अथवा किसी अन्य पर निशाना साधा जाता है और न ही उपलब्धियों का बखान किया जाता है। उनके विज्ञापन वहां किसी बडेआयोजन में लोगों को आमंत्रित करने के लिए होते हैं जिससे सरकार के राजस्व में पैसा आये न कि पार्टी प्रचार प्रसार के लिए प्रकाशित करवाये जाते हैं। राज्यपाल ने मुख्य सचिव को 97 लाख रूपये आप पार्टी से एक महिने में वसूलने के निर्देश दिये हैं। निश्चित रूप से केजरीवाल इस आदेश के खिलाफ कोर्ट जाएंगें और तय है कि हमेशा की तरह वहां से फटकार खाएंगे। मदन अरोड़ा

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